Wednesday, 31 December 2025

बृहन्नला को उत्तर का सारथि क्यों बनना था Mahabharat (महाभारत) Scene B R Chopra Pen Bhakti

[संगीत] महा [संगीत] भारत हेरी आप अंदर नहीं जा सकते युवराज से कहो कि एक सैनिक अशुभ समाचार लेकर आया है तुम विजय का शुभ समाचार लाए हो सैनिक यात्रा ने तुम्हें थका भी दिया होगा परंतु तुम पिता श के पास जाओ और उनसे कहो कि कुछ दिन वहीं विश्राम करें क्योंकि यह नगर अवश्य यह चाहेगा कि जब वे विजय यात्रा से लौटे तो यह नगर उनके स्वागत के लिए नगर के द्वार की थाली में आरती के दियों की भाति लहराता मिले जाओ जो आ [संगीत] युगराज यदि मैं पिता श के साथ गया होता तो हमारे इतने सैनिक ना मारे गए होते और स्वयं पिता श भी घायल ना हुए होते प्रणाम माता श्री युद्ध के विषय में कोई समाचार आया पुत्र जी माता श्री पिता श्री घायल तो हो गए परंतु चिंता की कोई बात नहीं और हमारी विजय तो होनी ही थी मैं अभी इन दसियों से यही कह रहा था कि यदि पिताश्री मुझे अपने संग ले गए होते तो कदाचित उनके घायल हुए बिना ही विजय श्री हमें प्रणाम कर लेती परंतु वह तो अश्व पालो चरवाहों और रस को अपने संग ले गए थे इसलिए घायल तो उन्हें होना ही [संगीत] था क्या समाचार आया प्रिय अनुज विजय के अतिरिक्त और क्या समाचार हो सकता है दीदी पिता शी के स्वागत की तैयारियां करो बहला तो कह ही रही थी कि जिस सेना के साथ बल्लभ जाएगा उसकी कभी पराजय हो ही नहीं सकती तुम और तुम्हारी बृहण लला युवराज की जय हो तुम क्या शुभ समाचार लाए हो मैं अशुभ समाचार लेकर आया हूं युवराज अशुभ समाचार हां युवराज अशुभ समाचार यह है कि गंगापुत्र भीष्म द्रोणाचार्य कुल गुरु कृपाचार्य युवराज दुर्योधन कुमार दुशासन कुमार विकर्ण अंगराज कर्ण और महारथी अश्वथामा जैसे योद्धाओं के रथों की गड़गड़ाहट से मत से देश की सीमाएं कांप रही हैं परंतु कुरु से तो हमारी पुरानी मित्रता है राजनीति में शत्रुता और मित्रता को भिन्न करने वाली रेखा बहुत पतली होती है युवराज तुम ठीक कहती हो तुम अशुभ समाचार नहीं लाए बहुत शुभ समाचार लाए हो [संगीत] तुम इस समाचार को शुभ समाचार कहते हो पुत्र जी माता श्री नामों से भयभीत हो जाना किसी क्षत्रिय को शोभा नहीं देता गंगापुत्र भीष्म द्रोणाचार्य और कृपाचार्य तो बूढ़े हो चुके हैं और धिरा पुत्रों तथा अंगराज इत्यादि तो भला मेरे सामने कितनी देर टिक सकेंगे हां यदि उस युद्ध में भीम और अर्जुन जैसे योद्धा होते तब युद्ध का रंग कुछ और ही जमता क्या स्वयं पिता श्री ने बार-बार भरी सभा में यह घोषित नहीं किया कि उनका पुत्र उत्तर योद्धाओं का भी योद्धा है तो उनके वाक्य को सत्य सिद्ध करने का यह अवसर भला मैं अपने हाथों से कैसे निकल जाने दूं आप पिता शी के स्वागत की तैयारी कीजिए मैं यह गया और उन्हें हराकर यह आया परंतु यह तो सोचो के गंगापुत्र भीष्म द्रोणाचार्य कृपाचार्य दुर्योधन दुशासन कर्ण अश्वथामा [संगीत] यह सब साधारण योद्धा नहीं है पुत्र साधारण योद्धाओं से युद्ध करना तो आपके पुत्र का भी अपमान है माता श्री युवराज ठीक कह रहे हैं महारानी जी तनिक सोचिए यदि ये हारे तो किनसे हारेंगे और यदि ये जीते तो किन्हे हरा कर गंगापुत्र भीष्म द्रोणाचार्य कृपाचार्य और यह वो योद्धा है जो पराजय का स्वाद नहीं जानते मेरी पराजय का तो प्रश्न ही नहीं उठता बनला तुम इतना सोचो कि उन्हें हराकर मैं तुम्हारे पांडवों और तुम्हारी महारानी द्रौपदी के अपमान का बदला लूंगा युवराज से एक निवेदन है यदि राजकुमार बृह नला को अपना सारथी बना ले तो विजय में कोई संदेह ना रह जाए बृह नला मैं कोई संगीत शाला में नहीं जा रहा हूं सरेंद्र मैं तो रण भूमि की ओर जा रहा हूं इसीलिए तो मैं निवेदन करती हूं राजकुमार स्वयं महारथी अर्जुन भी कई युद्धों में इन्हें अपना सारथी बना चुके हैं महारथी अर्जुन इस क्लीव को अपना सारथी बनाते थे यह सुनकर तो ऐसे लगता है कि तुम महारथी अर्जुन को जानती ही नहीं क्षमा करना युवराज मैं जो जानती थी वो मैंने कह दिया सरंद झूठ नहीं कहती पुत्र कीचक के विषय में इसने जो कहा था वही हुआ ठीक है बहन नला तुम सारथी बनो जो आज्ञा युवराज बृह नला हां राजकुमारी ना जाने क्यों मेरा हृदय कहता है अब जीत मेरी भ्राता श्री की होगी हां और मैंने सुना है गुरु योद्धा बड़े ही अच्छे वस्त्र पहनते हैं लौटते समय मेरी गुड़ियों के लिए उनके वस्त्र लाना जो आ गया राजकुमारी और फिर युवराज की विजय के उपरांत उन शमो के वस्त्र उतारने में भला कितना समय लगेगा परंतु परंतु गंगापुत्र भीष्म द्रोणाचार्य वे तो श्वेत वस्त्र पहनते हैं राजकुमारी अच्छा तो ठीक है उनके वस्त्र नहीं लाना जो आया राजकुमारी जो आ महाभारत महाभारत महाभारत महाभारत हो महाभारत

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