Wednesday, 31 December 2025

भीष्म पितामह ने विदुर से अपनी चिंता व्यक्त की Mahabharat Scene B R Chopra Pen Bhakti

महाभारत ता श्री आप अभी तक सोई नहीं क्या तुम सो रहे हो पुत्र क्या हस्तिनापुर के भविष्य का सपना देखने वाली कोई आंख सो रही होगी आज की रात क्या यह साधारण बात है कि धृतराष्ट्र के पास युधिष्ठिर ने दूत भेजा है यह बात सा धरण नहीं है पुत्र साधारण नहीं है कान लगाकर सुनो पुत्र और मेरे इन बूढ़े कानों को बताओ कि इस दूत के पीछे तुम्हें आने वाले प्रलय की आहट तो नहीं सुनाई दे रही यह मेरे कान बज रहे हैं या सचमुच ये आहट है मुझे ऐसा क्यों लग रहा है कि मैं कटे हुए शवों के खेत में अकेला खड़ा हुआ हूं क्यों लग रहा है मुझे कि मैं मैं अकेला इन कटे हुए शवों के खेत में हूं [संगीत] क्यों आप अकेले नहीं है ता श्री हम सब अकेले हैं पुत्र विदर मैं तुम आचार्य द्रोण कृपाचार्य सब के सब अकेले हैं बिल्कुल अकेले और मैं यही सोच रहा था कि जो समाज अपने चिंतकों को अकेला छोड़ दे उस समाज की अब आयु कितनी होगी यह प्रश्न अत्यंत प्रासंगिक है विदुर अत्यंत प्रासंगिक यदि ऐसा नहीं है तो मैं क्यों जाग रहा हूं तुम क्यों जाग रहे हो तुम अपने निवास स्थान पर क्यों नहीं हो मैं तो भी अपने निवास स्थान पर पहुंचा ही नहीं ता श्री के बीच में ही महाराज ने बुलवा लिया बीच में ही बुलवा लिया पर क्यों यह बतला के लिए कि यदि यस्टर स्वयं यहां आया होता तो वह उन्हें अवश्य इंद्र प्रस्थ लौटा देते परंतु उसने अपना दूत भेजा हुआ है इसलिए उन्हें यह सोचना पड़ेगा कि वे को क्या उत्तर दे सोचना पड़ेगा सोचना पड़ेगा पर इसमें सोचने का है क्या कदाचित व यह सोच रहे होंगे कि आचार्य द्रोण जो 13 वर्षों से इंद्रप्रस्थ राज को संभाल रहे हैं उनकी क्या प्रतिक्रिया होगी इंद्र प्रस्थ बहुत विशाल राज्य है तात श्री बहुत विशाल राज्य क्या तुम यह कह रहे हो कि मैं कुछ नहीं कह रहा हूं ताज श्री मैं कुछ नहीं कह रहा हूं और फिर मैं कह भी क सकता हूं कुछ कहे या ना कहे आप कि आप तो जेष्ठ गुरु है मैं जेष्ठ गुरु अवश्य हूं पुत्र विदुर पर मुझे यहां जेष्ठ मानता कौन है ना कोई मुझसे कुछ पूछता है ना कोई मेरा कहा मानता है मैं अरण्य में गूंजती हुई एक ध्वनि बनकर रह गया हूं पुत्र विदुर केवल ध्वनि हे भगवन मेरे हस्तिनापुर की रक्षा कर भगवन रक्षा कर [संगीत] भारत महाभारत महाभारत [संगीत]

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