महाभारत क्या हमारी बाह में इतना बल है आचार्य कि वर्ण भूमि और हस्तिनापुर के बीच के अंतर को घटने से रोकते य अंतर प्रतिदिन ही नहीं प्रतिक्षण घटता चला जा रहा है घटता चला जा रहा [संगीत] है वर्षों की तपस्या एं हाथ बढ़ाकर कर्म फल तो चाहती सारे वचनों सारी प्रतिज्ञा के हाथ में धनुष है कोई अभिमान के रथ पर सवार है तो कोई आत्मविश्वास के रथ पर व चाहे यह गंगापुत्र भीष्म हो चाहे द्रुपद पुत्र शिखंडी हे आचार्य व चाहे आप हो चाहे दृष्ट द वो चाहे दुर्योधन हो चाहे भीम वो चाहे कर्ण हो चाहे प्रिय अर्जुन नींद किसी को नहीं आ रही किसी को नींद नहीं आ रही विराट युद्ध की बात और थी आचार व युद्ध कौरवों और पांडवों के बीच नहीं था किंतु अबके जो युद्ध होने वाला है ना आचार्य वह हृदय के दुर्ग की ईट से ईट बजाकर रख देगा क्या हमारी बूढ़ी छातिया कण और अर्जुन के बा को रोक पाएंगी आचार्य क्या हमारे बुढ़ापे का कवच भीम और दुर्योधन की गदा हों की चोट से हस्तिनापुर को बचा पाएगा कदाचित नहीं गंगापुत्र कदाचित नहीं किंतु हम अपने शवों से हस्तिनापुर की दीवारों की रक्षा करने का प्रयत्न अवश्य कर सकते हैं जब तक युद्ध का शंख ना बजे गंगापुत्र तब तक आशा करते रहिए कि वासुदेव कृष्ण युद्ध का कोई ना कोई विकल्प अवश्य निकाल लेंगे अवश्य निकाल [संगीत] लेंगे प्रणाम ता श्री आयुष्मान भव शरद ऋतु में खुली खिड़की के पास क्यों खड़े हैं आप क्या तुम नहीं जानते विदुर कि मैंने इच्छा मृत्यु की प्राधन ड़ रखी है ऋतु मेरा क्या बिगाड़ लेगी अकेला था विदुर यहां खड़ा माता श्री के दर्शन कर रहा था मेरी प्रतिज्ञा और मेरे अंतःकरण में महायुद्ध चल रहा है विदुर और स्वयं मैं रण भूमि हूं देख रहा हूं इस युद्ध को देखे चला जा रहा हूं किंतु हस्तक्षेप नहीं कर सकता मेरी प्रतिज्ञा मुझे दुर्योधन की ओर खींच रही है और मेरा अंतःकरण मुझसे कह रहा है कि गंगापुत्र भीष्म तुम कहां खड़े हो मैं वो अभागा व्यक्ति हूं विदुर जीवित रहना नहीं चाहता किंतु जीवित रहने के लिए विवश है मुझे बताओ विदुर इस वृद्ध भीष्म के विषय में तुम्हारी नीति क्या कहती है यह प्रश् नीति का नहीं है ता श्री इसलिए यह खिड़की बंद कर लीजिए आपकी आत्मा भी आपके वस्त्र ही की बनती चिन्हित नहीं है स्वेत है आप दुखी ना हो आप तो इतने महान है ता श्री कि कीचड़ की कोई छींट उड़कर आपके श्वेत वस्त्रों तक आ ही नहीं सकती यह भारतवर्ष सदैव इस बात पर गर्व करता रहेगा कि इसकी भूमि पर मर्यादा का आप जैसा छतनाग और यदि भविष्य में कभी इस देश में बानों की भीड़ लगी तो अकेले दु केले साधारण आकार के व्यक्तियों को आपका दृष्टांत उनकी धरस बंधा जाएगा और वह आपका नाम लेकर भारतवर्ष को उन वामन से बचाने का प्रयत्न करेंगे हे ता श्री मैं अपनी ओर से और इस देश के भविष्य की ओर से आपको प्रणाम करता हूं जो भार उठाए आप जीवित है यदि उसका आधा भार भी आपके इस शिष्य विदुर को उठाना पड़ता तो कदाचित उसके उदरा के साथ साथ उसकी नीति की कमर भी टूट चुकी होती हा ता श्री अरे यह क्या पुत्र नहीं ता यहां बैठो यह मेरा सौभाग्य है ता श्री मैं जब चाहूं इन चरणों में बैठ सकता हूं मुझसे मेरा यह सौभाग्य ना छी [संगीत] निए मेरे पास यूं भी कर्तव्य तो बहुत है किंतु अधिकार बहुत कम है ता श्री बहुत कम यदि मैं यह जानता ना होता कि तुम तो इन परिस्थितियों में सुखी रह नहीं सकते अन्यथा इस समय तुम्हें सुखी रहने का आशीर्वाद देने को बहुत जीत जा रहा है पुत्र नहीं ता श्री यह आशीर्वाद आप उस हसनापुर के लिए रखिए जो हमारे अस्त हो जाने के पश्चात सूर्योदय देखने के लिए जीवित रहने वाला है ऐसा कौन सा समाचार ले आए हो पुत्र विदुर यह सूचना मिली है ता श्री के वासुदेव कृष्ण शांति की अब भी नहीं छोड़े हुए हैं और वह स्वयं शांति दूत बनकर आ रहे हैं वासुदेव श्री कृष्ण तो आशा और निराशा दोनों ही से परे हैं पुत्र विदुर दोनों ही से परे यह तो संभव ही नहीं कि श्री कृष्ण कुछ चाहे और वह ना हो व यदि आ रहे हैं तो मुझसे और तुमसे द्रोणाचार्य और कृपाचार्य से यह कह रहे हैं युद्ध का कोई विकल्प नहीं रह गया है व हमसे यह कहने आ रहे हैं विदुर कि आप लोग देखिए पांडव तो शांति का द्वार खुला रखना चाहते हैं व हम वृद्ध लोगों से युद्ध की आज्ञा लेने आ रहे हैं पुत्र विदुर आज्ञा क्योंकि तुम देख लेना दुर्योधन उठेगा और उन पर सारे शांति के मार्ग बंद कर देगा महाराज को समझाइए ता श्री महाराज को समझाइए तुम्हारा महाराज समझने और समझाने की सीमाए कब का पार कर चुका है व वय सीमाए कब का पार कर चुका है उसकी महत्वाकांक्षा उसे हस्तिनापुर के हितों से उड़ाकर बहुत दूर ले जा चुकी है विदुर बहुत दूर जानता हूं फिर भी आप उनसे कह के तो दे ता मेरी तो व सुनते ही नहीं उनसे कहिए ता श्री कि हस्तिनापुर की सुरक्षा के लिए वह उत्तरदाई है इतिहास दुर्योधन पर आरोप नहीं लगाएगा वह तो उन्ही को दोषी ठहराए इसलिए नापुर के साथ यदि न्याय नहीं कर सकते तो ना करे किंतु उस पर दया तो करें उनसे कहिए कि वासुदेव जो शांति प्रस्ताव लेकर आ रहे हैं वे इसे स्वीकार करें कि इसके अतिरिक्त हसनापुर की सुरक्षा के सारे मार्ग स्वयं वही बंद कर चुके हैं स्वयं वही बंद कर चुके हैं [संगीत] आप हसनापुर की सुरक्षा के लिए वचन बद्ध है ता श्री वचन बध है आभार मभ महाभारत महाभारत हो महा भार [संगीत]
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