[संगीत] महाभारत प्रणाम छोटी मां मैं आपसे आशीर्वाद लेने आया हूं आयुष्यमान भवा यह क्या छोटी मां मैं आपसे विजय का आशीर्वाद लेने आया हूं क्या दीदी से य आशीर्वाद ले चुके हो वस नहीं छोटी मां वे आपके आशीर्वाद देने से पहले यह आशीर्वाद कभी नहीं देंगी तो क्या अपने पिता मह से यह आशीर्वाद ले लिया पुत्र वे तो मेरी सेना के प्रधान सेनापति हैं छोटी मां मैं इसी को उनका आशीर्वाद समझता हूं और आचार्य द्रोण और कुलगुरु वे दोनों भी मेरी सेना के सेनापतियों में से ही है और विदुर से पुत्र वे मुझे यह आशीर्वाद कभी नहीं देंगे छोटी मां क्योंकि वे मेरी विजय चाहते ही नहीं महामंत्री विदुर मे तशी नहीं है किंतु वो हस्तिनापुर के तशी हैं और तुम्हारे भी तशी हैं तुम्हारे शुभ चिंतक भी हैं पुत्र बड़े यदि किसी भूल पर टोके तो उनकी ओर से मन मैला नहीं करना चाहिए उनके शुभ चिंतन पर संदेह भी नहीं करना चाहिए हां यदि तुम हस्तिनापुर के विरोधी हो तो विदुर कभी तुम्हारे तशी नहीं हो सकते तो क्या तुम हस्तिनापुर के विरोधी हो दुर्योधन हस्तिनापुर तो हमारे राज्य की राजधानी है छोटी मां तो मैं भला उसका विरोधी कैसे हो सकता हूं हस्तिनापुर केवल राजधानी नहीं है वत्स हस्तिनापुर भरत वंश के अस्तित्व का केंद्र बिंदु है भरत वंश के इतिहास का मेरुदंड है यह नगरी तुम्हारी ज्येष्ठ माता है दुर्योधन उसे केवल राजधानी समझने की भूल ना करो यह नगरी कुरुवंश के माथे पर लगा हुआ तिलक है यदि यह तिलक मिट गया तो कुरु वंश के पास कुछ भी नहीं बचेगा यह नगरी तुम्हारी पहचान है दुर्योधन यह नगरी तुम्हारी पहचान है अपनी इस पहचान की केवल रक्षा ही ना करो इसका आदर करो इस नगर के द्वार पर माथा टेककर विजय श्री का आशीर्वाद मांगो दुर्य तुम्हारी छोटी मां के पास तुम्हारे लिए यह आशीर्वाद नहीं है तो क्या इसका तात्पर्य में यह निकालू कि आप मेरी विजय नहीं चाहती मैं तो विजय और पराजय के बीच में खड़ी हुई हूं अपनी आंखों में आंसुओं को रोके हुए पराजय चाहे जिस भी हो पुत्र मुझे तो रोना ही है मैं तुमसे प्रसन्न नहीं हूं किंतु मैं तुम्हारा शव भी तो नहीं देखना चाहती इसीलिए लंबी आयु का आशीर्वाद दिया था दुर्योधन यदि युद्ध करने की ठान ही ली है तो इस आशीर्वाद के कवच को पहन लेना परंतु मैं यह नहीं जानती वत्स कि मेरे इस आशीर्वाद का कवच अर्जुन के वान और भीम की गदा को रोक पाएगा या नहीं रोक पाएगा बड़ा धर्म संकट [संगीत] खड़ा कुंती का मन रोक किसे विजय आशीष [प्रशंसा] दे किसे मौत का शोक दोनों अपने बाह है दोनों अपनी शाख किसे बिठा पाऊ हृदय में किस पर डालू राम महाभारत महा भारत महाभारत महाभारत हो महा भार [संगीत]
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti
[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...
-
[संगीत] महाभारत प्रता श्री आपने सु शर्मा को ऐसा वचन क्यों दिया मेरे वचन पालन करने का तो प्रश्न ही नहीं उठता अनुज तुम क्या समझते हो कि स...
-
[संगीत] यहां पूजा हो रही है किंतु प्रसाद कहां [संगीत] है रुक रुक [संगीत] रुक हरि हरि तो लिखा है यहां किंतु हरि भोजन तक कहां पहुंचा रहे...
-
महाभारत इच्छा है तुम्हारी बस इसने तो एक ही रट लगा रखी है केशव इसे तो आपको गुरु बनाना है वस इस देश में गुरुजनों की क्या कमी है तुम हमें ह...
No comments:
Post a Comment