[संगीत] महाभारत हे चंद्रदेव आपके वंश में पांडवों जैसे कायरो ने जन्म कैसे लिया आपके वंश के माथे पर ये धब्बा अब तो सदैव रहेगा और यह धब्बा ना तो मेरे लहू से लेगा और ना ही उन पांडवों के [संगीत] रोते क्यों हो गुरु पुत्र यह घाव घाव से पहता हुआ लहू और यह पीड़ा यही तो वीरों की संपत्ति है मित्र [संगीत] मुझे बधाई दो मित्र तुम्हारा मित्र दुर्योधन भी कपट और अनैतिकता के उसी शस्त्र से मारा गया जिससे गुरुदेव मारे गए थे अर्जुन अवश्य ही उनका प्रिय शिष्य था किंतु उनकी मृत्यु का उत्तराधिकारी निकला मेरे लिए पीड़ा के य क्षण गर्व के क्षण है मित्र इसलिए रो मत मित्र मुझे बधाई दो मि बधाई दो मुझे मित्र युद्ध में चाहे विजय हो मित्र चाहे पराजय मैं विजय में भी तुम्हारे साथ था और पराजय में मैं तुम्हारे साथ हूं और तुम यह ना समझो मित्र कि तुम्हारे पास अभी सेना नहीं है तुम्हारी सेना में अभी तीन मारती है मामा श्री कृपाचार्य महारज कृत वर्मा और मैं वे दोनों कहां है हम दोनों यही है राज अब तो वो राज्य नहीं रह गया कुलगुरु जिसका मैं युगराज था किंतु जब तक मैं जीवित हूं यह युद्ध समाप्त नहीं हो सकता मैं गुरु पुत्र अश्वथामा को प्रधान सेनापति नियुक्त करता हूं क्या आदेश राजन मुझे पांडवों के कटे हुए शीष दिखला दे अश्वथामा मैं तब तक किसी ना किसी तरह अपनी जीवन की टोरी को पकड़े [संगीत] रखूंगा किंतु अब मेरी बाहों में उतना पल नहीं रह गया जितना हुआ करता था अत मैं जीवन को देर तक पकड़ कर नहीं रह सकता चिंता ना करो राजन मैं इसी समय आक्रमण करूंगा इस समय ये तुम क्या कह रहे हो तुम य मर्यादा का उल्लंघन नहीं कर सकते जब वे युद्ध की मर्यादा का उल्लंघन कर सकते हैं तो मैं क्यों नहीं कर सकता क्या आप भूल गए कि उन्होंने किस प्रकार छल द्वारा मेरे पिता श्री को महता करके मारा था और क्या आप उनकी कप्ति रणनीति के इस प्रतीक को नहीं देख रहे इस युद्ध में हम सभी मर्यादाओं को बहुत पीछे छोड़ आए हैं पांडव मेरे ऋणी है और उन्हें अपने शवों से मेरा रण चुकाना [संगीत] पड़ेगा मुझे आप क्या दो मित्र विजय भव [संगीत] पश [संगीत] दुर्योधन के रूप [संगीत] में आज मरा [संगीत] अन्याय पाप शाप संताप का हुआ अंत अध्याय [संगीत] महाभारत महाभारत महाभारत महाभारत हो महाभारत [संगीत]
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti
[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...
-
[संगीत] महाभारत प्रता श्री आपने सु शर्मा को ऐसा वचन क्यों दिया मेरे वचन पालन करने का तो प्रश्न ही नहीं उठता अनुज तुम क्या समझते हो कि स...
-
[संगीत] यहां पूजा हो रही है किंतु प्रसाद कहां [संगीत] है रुक रुक [संगीत] रुक हरि हरि तो लिखा है यहां किंतु हरि भोजन तक कहां पहुंचा रहे...
-
महाभारत इच्छा है तुम्हारी बस इसने तो एक ही रट लगा रखी है केशव इसे तो आपको गुरु बनाना है वस इस देश में गुरुजनों की क्या कमी है तुम हमें ह...
No comments:
Post a Comment