[संगीत] महाभारत युवराज की जय हो तुम क्या शुभ समाचार लाए हो मैं अशुभ समाचार लेकर आया हूं युवराज अशुभ समाचार हां युवराज अशुभ समाचार यह है कि गंगापुत्र भीष्म द्रोणाचार्य कुल गुरु कृपाचार्य युवराज दुर्योधन कुमार दुशासन कुमार विकर्ण अंगराज कर्ण और महारथी अश्वथामा जैसे योद्धाओं के रथों की गड़गड़ाहट से मत से देश की सीमाएं कांप रही हैं परंतु कुरु से तो हमारी पुरानी मित्रता है राजनीति में शत्रुता और मित्रता को भिन्न करने वाली रेखा बहुत पतली होती है युवराज तुम ठीक कहती हो तुम अशुभ समाचार नहीं लाए बहुत शुभ समाचार लाए हो [संगीत] तुम इस समाचार को शुभ समाचार कहते हो पुत्र जी माता श्री नामों से भयभीत हो जाना किसी क्षत्रिय को शोभा नहीं देता गंगापुत्र भीष्म द्रोणाचार्य और कृपाचार्य तो बूढ़े हो चुके हैं और तराज पुत्रों तथा अंगराज इत्यादि तो भला मेरे सामने कितनी देर टिक सकेंगे हां यदि उस युद्ध में भीम और अर्जुन जैसे योद्धा होते तब युद्ध का रंग कुछ और ही जमता क्या स्वयं पिता श्री ने बार-बार भरी सभा में यह घोषित नहीं किया कि उनका पुत्र उत्तर योद्धाओं का भी योद्धा है तो उनके वाक्य को सत्य सिद्ध करने का यह अवसर भला मैं अपने हाथों से कैसे निकल जाने दूं आप पिता श्री के स्वागत की तैयारी कीजिए मैं यह गया और उन्हें हराकर यह आया परंतु यह तो सोचो पुत्र कि गंगापुत्र भीष्म द्रोणाचार्य कृपाचार्य दुर्योधन दुशासन कर्ण अश्वथामा यह सब साधारण योद्धा नहीं है पुत्र साधारण योद्धाओं से युद्ध करना तो आपके पुत्र का भी अपमान है माता श्री युवराज ठीक कह रहे हैं महारानी जी तनिक सोचिए यदि य हारे तो किनसे हारेंगे और यदि यह जीते तो किन्हे हराकर गंगापुत्र भीष्म द्रोणाचार्य कृपाचार्य और यह वो योद्धा है जो पराजय का स्वाद ही नहीं जानते मेरी पराजय का तो प्रश्न ही नहीं उठता बनला तुम इतना सोचो कि उन्हें हराकर मैं तुम्हारे पांडवों और तुम्हारी महारानी द्रौपदी के अपमान का बदला लूंगा युवराज से एक निवेदन है यदि राजकुमार बृह नला को अपना सारथी बना ले तो विजय में कोई संदेह ना रह जाए बृह नला मैं कोई संगीत शाला में नहीं जा रहा हूं सरेंद्र मैं तो रण भूमि की ओर जा रहा हूं इसीलिए तो मैं निवेदन करती हूं राजकुमार स्वयं महारथी अर्जुन भी कई युद्धों में इन्हें अपना सारथी बना चुके हैं महारथी अर्जुन इस क्लीफ को अपना सारथी बनाते थे यह सुनकर तो ऐसे लगता है कि तुम महारथी अर्जुन को जानती ही नहीं क्षमा करना युवराज मैं जो जानती थी वो मैंने कह दिया सररी झूट नहीं क्या थी पुत्र कीचक के विषय में इसने जो कहा था वही हुआ ठीक है लला तुम सारथी बनो जो आया युवराज बनला हां राजकुमारी ना जाने क्यों मेरा हृदय कहता है अब जीत मेरी भ्राता श्री की होगी हां और मैंने सुना है गुरु योद्धा बड़े ही अच्छे वस्त्र पहनते हैं लौटते समय मेरी गुड़ियों के लिए उनके वस्त्र लाना जो आ गया राजकुमारी फिर युवराज की विजय के उपरांत उन शवों के वस्त्र उतारने में भला कितना समय लगेगा परंतु परंतु गंगापुत्र भीष्म द्रोणाचार्य वे तो श्वेत वस्त्र पहनते हैं राजकुमारी अच्छा तो ठीक है उनके वस्त्र नहीं लाना जो आया राजकुमारी जो आ तुम देख लेना बनला मैं गुरुओ को ऐसे काट के गिरा दूंगा जैसे किसान खेत काटता है और हम पिता श के आने से पहले ही विराटनगर में होंगे और जब पिता श को यह पता चलेगा कि उनके पुत्र ने इस बीच कुरु शक्ति की पीठ को धूल चटा दी है तो वह कितने प्रसन्न होंगे [संगीत] युवराज यह गंगापुत्र भीष्म का है यह आचार्य द्रोण का है वो नीला ध्वज कुल गुरु कृपाचार्य का है और वो जो ध्वज बीच में लरा रहा है वह दुर्योधन का [संगीत] है वो तो शासन है वो सूत पुत्र कण और वो द्रोण पुत्र अश्वत थामा है य यह सेना है या सागर नला इस सेना से तो देवताओं की सेना भी नहीं जूट सकती इस सेना सागर का तो दूसरा त तक नहीं दिखाई दे रहा मेरा धनुष मेरा धनुष कंधों से सरका जा रहा है मेरे वण मेरे वाण मेरे तुनीर में छिपने का स्थान खोज रहे हैं गंगापुत्र भीष्म आचार्य द्रोण कृपाचार्य महारा दुर्योधन करण विकरण दुशासन अश्वथामा अरे बनला इनसे तो युद्ध की स्वयं इंद्र तक नहीं सोच सकते और मैं तो फिर भी केवल एक बालक हूं पिता श तो पिता श तो स्वयं सारी सेना लेकर एक सु शर्मा से जुड़ने चले गए और मुझे मुझे मुझे इन महारथियों के वन को काटने के लिए अकेला छोड़ गए नहीं बनला नहीं मुझे तो युद्ध का अनुभव ही नहीं बनला चलो लौट चलते हैं बनला लौट चलते हैं नगर वाले इसे लौटना नहीं भागना कहेंगे युवराज आप एक क्षत्रिय हैं और युद्ध के आरंभ से पहले ही पराजय स्वीकार किए ले रहे हैं राजकुमारी अपनी गुड़ियों के लिए मुझसे कपड़े मांगेगी तो मैं क्या करूंगा हां मुझे अपने प्राणों की पड़ी है और तुम और तुम गुड़ियों के लिए वस्त्र की बात कर रहे हो आप गुरु सेना को हराने का वचन देकर चले थे युवराज और मैं गुड़ियों के लिए वस्त्र लाने का वचन देकर वहां नारियों के सामने तो बड़ी ंगे मार रहे थे आप युद्ध करें या ना करें मैं युद्ध अवश्य करूंगा मैं विराटनगर की नारियों के व्यंग के वाण खाने को तैयार नहीं हूं युवराज नारिया व्यंग करती है तो करें किंतु मैं मैं इन मोतियों के साथ युद्ध नहीं कर सकता नहीं कर सकता नहीं कर सकता मैं युद्ध नहीं कर स [संगीत] ता मुझे भाग जाने दो बनला मैं तुम्हें मैं तुम्हें 100 स्न मुद्रा दूंगा एक सोने का रथ भी दूंगा मता ही नहीं एक 10 हाथी भी ले लो मुझे भाग जाने दो मुझे नहीं मुझे भाग जाने दो मुझे भाग जाने दो मुझे भाग जाने दो नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं [संगीत] यदि युद्ध करने का साहस नहीं तो मेरे स्थान पर बैठ जाइए क्योंकि मैं रणभूमि से भाग नहीं सकता इसलिए युद्ध तो अवश्य होगा आपके स्थान पर मैं युद्ध करूंगा त्रे तो वही है जो अपने भय को अपनी शक्ति बना ले डरना लज्जा की बात नहीं परंतु डर कर भागना किसी शत्र को शोभा नहीं देता युवराज नहीं लीजिए नहीं अब उस वृक्ष की ओर चलिए [संगीत] चलिए रोको युवराज युवराज इस वृक्ष पर चढ़ जाओ इस वृक्ष पर चढ़ जाऊ क्यों क्योंकि तुम्हारा यह धनुष एक खिलौना है इस वृक्ष पर चढ़ जाओ वहा एक पोटली है उसे नीचे ले आओ जाओ जाओ युवराज [संगीत] [संगीत] [संगीत] प्रह नला यह किन महावीर के अस्त्र शस्त्र है जिन्ह देखने से भी डर लगता है यह अर्जुन का प्रसिद्ध धनुष कांडी है य कुंती पुत्र भीम का धनुष है और यह गदा भी उन्हीं की है यह खांडा सम्राट युधिष्ठिर का है और य तलवार नकुल और सदेव की नकुल और सदेव की परंतु बनला उन महारथियों के अस्त्र शस्त्र इस शमशान में क्या कर रहे हैं और यदि उनके अ शस्त्र है तो स्वयं वे कहां है कुंती पुत्र अर्जुन तो स्वयं मैं हूं युवराज स्वयं मैं क्या तुम सर्वश्रेष्ठ धनुर्धारी अर्जुन हो तुम हां मैं द्रोण शिष्य अर्जुन हूं और व जो कं है ना युवराज व सम्राट युधिष्ठिर है तुम्हारे गौशाला को संभाल रहा है सदेव और गुडसाल में तुम्हारे घोड़ों की सेवा कर रहा है मेरा नकुल रसोया बल्लव सर्वश्रेष्ट गदाधारी भीम है और तुम्हारी माता श्री की सरेंद्र री पांचाली मैं नहीं मानता यदि तुम अर्जुन हो तो अर्जुन के दसों नाम बताओ धनंजय विजय श्वेत वाहन फालगुनी किटी विभु सव्य साची अर्जुन जिष्णु और कृष्ण हे कुंती पुत्र हे द्रोण शिश हे अ मुझे क्षमा करो मेरे लिए तो तुम्हारा दास होना भी गौरव की बात है नहीं युवराज कभी भूल कर भी दास की बात ना करना मैं जानता हूं यह बात तुमने नम्रता से कही है परंतु यह बात कभी नम्रता से भी नहीं कहना मैं दासत का स्वाद जानता हूं युवराज मैं उसका स्वाद जानता हूं नम्रता का अर्थ यह नहीं कि सिह घास की और देखने लगे आश्चर्य ना करो युवराज यह मेरा रथ है अब हम इस रत पर चलेंगे युवराज यह शस्त्र अपने रथ में रख लो [संगीत] जाओ भारत महाभारत महाभारत [संगीत]
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