Monday, 29 December 2025

नागलोक में अर्जुन को सम्मान क्यों मिला था Mahabharat (महाभारत) Scene B R Chopra Pen Bhakti

महाभारत प्रिय नागवंश हों आज हम एक ऐसे वीर का सम्मान करने जा रहे हैं जो संसार में एक महान धनुर्धर माना जाता है वास्तव में ऐसे वीर को सम्मान देकर हम स्वयं को और समस्त नागलोक को सम्मान दे रहे हैं ध्यान रहे कि कुछ दिनों पहले हम उसके वध का आदेश भी दे चुके थे परंतु उसने अपनी वीरता और उदारता का ऐसा प्रदर्शन किया कि हम उसका आदर करने पर विवश हो गए हम चाहते हैं कि अर्जुन के राज सभा में प्रवेश करने पर सभी उपस्थित जन खड़े होकर उनका अभिनंदन करें और उन्हें विश्वास दिलाए कि हम नागवंशी वीरता का आदर करना जानते हैं पांडु पुत्र कुंती नंदन सव्य साची महाबाहु अर्जुन राज सभा पधार रहे [संगीत] हैं प्रणाम [संगीत] महाराज कुंती नंदन तुम्हारे आगमन से आज नागलोक में चारों र मित्रता की सुगंध फैली हुई है तुमने यहां आकर इस और शत्रुता को हमारे हृदय से धो दिया जिसने दोनों नागलोक और इंद्र प्रस्थ में जीवन को दुविधा जनक बना दिया था हमें विश्वास हो गया कि तुमने आत्म रक्षा के लिए हमसे युद्ध किया था खांडव द में तुम्हारा योगदान एक अपना भ्रम था जो पांडवों को शत्रु मान लेने के कारण नागवंश के मन में बैठ गया था अब समय उन बातों को भुला देने का है हम आज य घष णा करते हैं कि नागलोक और इंद्र प्रस्थ में जो आज मित्रता बनी है वो आज के पश्चात कदापि नहीं [संगीत] टूटेगी हमारी मित्रता के शुभारंभ की स्मृति के रूप में हमारी ओर से एक छोटी सी भेंट स्वीकार कीजिए महाबा धन्यवाद महाराज इस सज्जनता और प्रेम के लिए मैं आपका और सारे नागलो का आभारी हूं जिनके सहयोग से मेरा सपना साकार हुआ है इंद्र प्रस्त और नाग लोक की मित्रता का सपना मैं तो यहां केवल यही कहने आया हूं य शत्रुता अभिशाप है मित्रता वरदान है युद्ध सर्वनाश का बुलावा है और शांति शांति निर्माण का संदेश वो हाथ महान होता है जो मित्रता की ओर बढ़े परंतु उससे भी कहीं अधिक महान वो हाथ होता है जो उस पड़े हुए हाथ को थाम लेता है मैं आप सबकी मानता के समक्ष अपना शीष नवाता हूं महाराज आपने कहा था कि मैंने यहां आकर मित्रता की सुगंध फैला दी है परंतु सुगंध को फैलाने के लिए आवश्यकता होती वायु के उस छोके की जो उसे टिका से निकालकर मार्ग में बिरते मेरी सुगंध के लिए वायु का झोका सिद्ध हुई राजकुमारी महाराज वह मेरा वध करने आई थी किंतु जब धैर्य से मेरी बात सुनी तो उन्होंने मुझ पर विश्वास किया और तभी तो आज मैं आप सबके सामने अपना संदेश रखने के योग्य हुआ उन्होंने मुझे शरण दिया महाराज और आज ये उनकी ही दया दन का फल है जो मैं आपके सामने जीवित खड़ा हूं यदि मैंने उनका आभार नहीं प्रकट किया तो ये मेरे लिए महापाप [संगीत] होगा राजकुमारी उलूपी मैं आपका आभारी हूं आपका सौजन्य आपका सहयोग ही मेरे जीवन की उपलब्धि [संगीत] होगी महाराज आज मेरा उद्देश्य पूरा हो गया है मेरा अभियान सफल हो गया है महाराज अब मुझे इंदर जाने की अनुमति दीजिए अर्जुन आपकी सज्जनता और उदारता के प्रति आपका आभार प्रकट करने के लिए सेनापति चांडक स्वयं आपको नागलोक की सीमा तक पहुंचाने जाएंगे मैं आपका आभारी हूं राजमाता भारत महाभारत महाभारत महाभारत महाभारत हे

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