[संगीत] महाभारत आज्ञा पिता श्री पुत्र यह यंत्र मैंने अर्जुन को ध्यान में रखकर बनवाया था मुझे तो डर है कि द्रौपदी की वरमाला उसके हाथ में ना रह जाए आप ऐसा क्यों सोचते हैं पिता श्री आज इस मंडप में भारत के सभी योद्धाओं का जमघट है और फिर स्वयं गुरु द्रोणाचार्य के दूसरे शिष्य भी तो यहां उपस्थित है तो जाओ द्रौपदी को ले आओ जो पिता श्री युवराज कुमार के जाने का अर्थ यह है भाई कि महाराज कुमारी आने वाली हैं देख लो भाई अब अपना अपना मुकुट सब ठीक करने लगे हैं गुरु पुत्र क्या आप इस प्रतियोगिता में े मैं कैसे इस प्रतियोगिता में भाग ले सकता हूं क्यों द्रोपदी तो मेरी गुरु बहन है तब तो हम सभी की गुरु बहन हुई केवल मेरी क्योंकि काम पिल नरेश पिता श्री के गुरु भाई हैं मैं तो घराती हूं और यदि तुमने यह स्वयंवर जीता तो मैं तुम्हारा स्वागत करूंगा मेरे स्वयंवर जीतने के मार्ग में यदि जैसा कोई शब्द तो आ ही नहीं सकता गुरु पुत्र स्वयंवर तो मैं ही जीतूंगा सावधान महाराज कुमारी द्रौपदी पधार रही है [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] आभार महाभारत महाभारत महाभारत हो महाभारत
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