महाभारत क्या बात है अनुज आप भली भाति जानते हैं बड़े भैया की क्या बात है मेरा तो जी चाहता है कि उस गंधा नरेश चकनी की खोपड़ी में ऐसा मुक्का मारूं कि उसका सर उसकी छाती में उतार दूं तुम जैसे महावीर को क्रोध शोभा नहीं देता प्रिय भीम [संगीत] तो क्या इन जैसे महावीर को रातो रात लाख अग्रह से भाग निकल जाना शोभा देता है बड़े भैया हम भागे नहीं अर्जुन हम भागे नहीं यह मत भूलो कि श्री राम के वनवास ही से लंकापति रावण के विनाश का मार्ग निकला था क्या पता जिस मार्ग पर हम निकल पड़े हैं यह मार्ग हमें किसी अनमोल रत्न की ओर ले [संगीत] जाए परंतु हम हस्तिनापुर को नहीं त्याग सकते बड़े भैया वह नगरी हमारी मां है नहीं वह नगरी हमारी मां नहीं हमारी मां तो यह है परंतु हस्तिनापुर तो जाना ही पड़ेगा माता श्री क्यों क्यों जाना पड़ेगा हसनापुर ने हमारी आंखों में आंसु के अतिरिक्त आज तक क्या दिया है क्या क्या तुम लोग यह भी नहीं देख सकते कि हस्तिनापुर के राज भवन में हदय के दौर हमारे लिए बंद हो चुके हैं ता श्री भीष्म उन्होंने तो अपनी आंखों पर अपनी प्रतिज्ञा की पट्टी बांध रखी है और विदुर विदुर बेचारा विवश है इन दोनों के अतिरिक्त तमाम लोग दुर्योधन का मुह ताकते रहते हैं पुत्रों सही अर्थों में य भी हमारी मां की भाती है कड़ी धूप हो तो हमें छाया देते हैं भोजन पकाने के लिए लकड़ी देते हैं भोजन ना हो तो भोजन के लिए अपने फल देते हैं मैं तो इन्हीं वनों में तुम्हारे पिता श्री के साथ भी सुखी रही थी पुत्रों और अब अब तुम लोगों के साथ भी सुखी रहूंगी नहीं चाहिए मुझे अपने पुत्रों के लिए ऐसा राज्य जो अपने युवराज को रहने के लिए लाक्षा ग्रह देता हो माता श्री यदि आपको यह वन अच्छा लगता है तो हमें आपकी सेवा करने के लिए इन वनों में रहना स्वीकार है परंतु एक बार एक बार हमारा हस्तिनापुर जाना आवश्यक है माता श्री क्यों क्योंकि उन्हें यह जताने कि हम इन वनों में भाग कर नहीं आए बल्कि अपनी माता का आदेश मानते हुए उनकी इच्छा का मान रखने के लिए हमें इन वनों में रहना स्वीकार है माता श्री मन छोटा ना करो अनुज हम हस्तिनापुर जाएंगे अवश्य जाएंगे परंतु अभी नहीं अभी क्यों नहीं बड़े भैया अभी क्यों नहीं आचार्य द्रोण के शिष्य को यह प्रश्न शोभा नहीं देता मैं जानता हूं कि तुम अकेले ही दुर्योधन और उसकी सेना के लिए बहुत हो परंतु यह ना भूलो कि दुर्योधन के साथ-साथ अपने अपने रथ पर पिता में भी होंगे गुरु द्रोणाचार्य भी होंगे और कुल गुरु कृपाचार्य भी होंगे इसलिए लड़ाई जब तक टाली जा सके इसे टालते रहना चाहिए क्या तुम पितामह के सामने गधा तानकर खड़े हो सकते हो क्या अर्जुन द्रोणाचार्य के सामने अपने बानों का मुंह कर सकता है और क्या तुम पत की भाति अपने जेष्ठ पिता श धृतराष्ट्र के रस पर चढ़कर उन्ह बंदी बना सकते हो और क्या तुम अनुज दुर्योधन और दुशासन को युद्ध में मारकर अपनी जेष्ठ माता श्री गांधारी के सामने जा सकते हो नहीं इसलिए प्रतीक्षा करो तुम्हारा हृदय दुर्योधन से बहुत बड़ा है भीम इसलिए यदि वोह आघात कर रहा है तो उसे करने दो भ्राता होने के नाते तुम्हारा यह कर्तव्य है कि उसके आघा से बचाओ तो किए जाओ परंतु स्वयं उस पर आघात ना करो उसे यह समझाए जाओ कि दुर्योधन को आपस में भाइयों से लड़ना नहीं चाहिए क्योंकि भाइयों की आपस की लड़ाई से घराने की मर्यादा भंग होती है मैं आपसे सहमत नहीं हूं बड़े भैया परंतु आपका आदेश यही है कि हम का की भाति वन वन भट ते फिरे और वो कायर उस राज भवन में चयन करें जो हमारा भी है तो यही सही मभ महाभारत महाभारत महाभारत महाभारत [संगीत]
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