[संगीत] महाभारत पुत्र दुर्योधन पहला आक्रमण तुम करोगे गंगा पुत्र भीष्म पर यदि उन्हें चित कर लिया तो ना रहेगा बांस और ना बजेगी बांसुरी और यह आक्रमण तुम्हें अभी करना पड़ेगा इसी समय इसी समय पुत्र दुर्योधन आक्रमण हां भांजे जाओ पुत्र इसी समय गंगापुत्र भीष्म आप युधिष्ठिर से मिले किस मुंह से जाऊ उनके पास जाकर क्या कहूं उनसे वे सब बड़े सभ्य हैं दूत क्रीड़ा की बात नहीं निकालेंगे पर उनकी आंखों में प्रतिवाद का रंग तो होगा ही युवराज दर्शन के अभिलाषी हैं इस समय आने दो [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] प्रणाम पितामह प्रणाम गुरुदेव आओ व और यह बताओ कि इतनी रात गए अपने पितामह की याद कैसे आ गई मेरे पास केवल दो विकल्प है पिता मा मैं आपसे यह पूछने आया हूं कि कौन सा विकल्प उचित रहेगा कैसे प्रिय दुर्योधन दूत क्रीड़ा भवन में जो कुछ हुआ मैं उसके लिए लज्जित नहीं हूं गुरुवर द्रौपदी मेरी दासी हो चुकी थी और उसके स्वामी होने के नाते उस पर मेरे अधिकारों की कोई सीमा नहीं है यदि लज्जित हो तो स्वयं भ्राता युधिष्ठिर जिन्होंने अपनी पत्नी को दाफ पर लगाया था और इस विषय में आप लोगों से मेरा मतभेद है यह मैं अच्छी तरह जानता हूं विकल्पों की बात करो दुर्योधन विकल्पों की बात के लिए यह भूमिका आवश्यक थी गुरुवर ठीक है यदि भूमिका समाप्त हो गई हो तो विकल्प की बात आरंभ करो जो आज्ञा पितामह जैसे एक वन में दो बाग नहीं रह सकते उसी तरह एक हीे में कुरु और पांडव नहीं रह सकते दत के उपरांत तो बिल्कुल ही नहीं रह सकते ऐसी स्थिति में केवल दो विकल्प रह जाते हैं पहला विकल्प यह पिता मा कि आप मुझे आज्ञा दीजिए कि मैं इंद्र प्रस्थ पर आक्रमण करूं और यह निर्णय रण भूमि में हो इस क्षेत्र में मैं रहूंगा या वे रहेंगे दूसरा विकल्प यह पितामह कि एक बार और दूत हो जाने दीजिए यदि मैं जीतूं तो वे 12 वर्ष का बनवास और 13 वर्ष का ज्ञात वास स्वीकार करें और यदि वे जीते तो 12 बरस का बनवास और 13 बरस का अज्ञातवास मेरे लिए द्यूत द्यूत कोई विकल्प नहीं है दुर्योधन हां और यह समस्या इतनी सरल और साधारण नहीं है पुत्र क्षमा चाहता हूं पितामह मैं आप पर या गुरुवर पर पक्ष पाद का आरोप नहीं लगाना चाहता जबक स्वयं आप दोनों जानते हैं कि आप सब उन्हीं के पक्ष में है मैं केवल यह जानना चाहता हूं उन दोनों विकल्पों में से कौन सा विकल्प उचित रहेगा युद्ध या द्युत [संगीत] इस प्रश्न का उत्तर तो केवल महाराज ही दे सकते हैं [संगीत] दुर्योधन जो आजा पितामह चलिए मेरे साथ भारत महाभारत महाभारत महाभारत महाभारत हे
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