Wednesday, 31 December 2025

भीम की मुलाकात घटोत्कच से हुई Mahabharat Best Scene B R Chopra Pen Bhakti

[संगीत] महाभारत और फिर मैं क्या कह रहा [प्रशंसा] था तुम में से एक को मेरे साथ चलना पड़ेगा कहां मेरी माता श्री शक्ति माता की पूजा कर रही है बली के लिए एक मानव की आवश्यकता है बोलो तुम में से किसे ले जाऊं मुझे ले चलो नहीं नहीं मैं तुम्ह नहीं जाने दूंगी तुम तो मेरे मुक्ति मार्ग हो डरो मत देवी मैं इन्हे ले भी नहीं जाऊंगा बली को उत्तम होना चाहिए तो मुझे ले चलो ना ना पुत्र मैं मैं तेरे बिना जी नहीं सकता पुत्र नहीं नहीं नहीं नहीं इसे तो मैं नहीं जाने दूंगी नहीं मैं नहीं जाने दूंगी बली के लिए मुझे ले चलो श्रीमान क्योंकि बड़े भैया पिता को प्रिय है और छोटा मां को तो यह मझला ही बचा जिस पर ना पिता के स्नेह की पूरी धूप पड़ती है और ना मां के ममता की पूरी चांदनी मुझे ले चलो मुझे ले चलो तुम इस मंजिले को ले चलो राक्षस [संगीत] ब्राह्मण पुत्र माता-पिता के स्नेह पर संदेह करना पाप है उनसे जो भी मिले जितना भी मिले आशीर्वाद समझ के स्वीकार करना चाहिए मैं भी मजला पुत्र हूं मुझे आंख भर के देखो और मेरे प्रति मेरी माता के स्नेह का अनुमान लगाओ यदि तुम्हें अपना जीवन अपने माता-पिता और भाइयों के जीवन से अधिक प्रिय है तब तो तुम बलि के योग्य नहीं क्योंकि कायर और रोगी की बलि तो चढ़ाने भी नहीं चाहिए किसी पुत्र को केवल इसलिए तो कम स्नेह का दंड नहीं दिया जाना चाहिए कि वह केवल मजला है आपने ऐसा करके परमपिता परमेश्वर का अपमान किया है प्रात कर ना भूलिए और अपना दोष मानकर अपने पुत्र से क्षमा मांगने में कोई आपत्ति नहीं नहीं नहीं मैं अपने पिताश्री को क्षमा मांगने नहीं दूंगा यदि यह दोषी है तो भी मैं इनसे क्षमा मांगूंगा मुझे ले चलो [संगीत] माता बलि ले आए पुत्र बलि भी ऐसी लाया हूं माता कि शक्ति मा भी प्रसन्न हुए बिना नहीं रह सकती आर्य पुत्र आश्चर्य ना करो पुत्र यह तुम्हारे पिताश्री हैं कुंती पुत्र भीम नहीं मैं केवल एक बली हूं पहले मेरी बलि चढ़ा लो फिर अपने पुत्र से मेरा परिचय करवाना आर्य पुत्र तुमको बली चढ़ाने थी तो अपने पति की चढ़ाती अपने पुत्र की चढ़ाती तुम्हें यह अधिकार किसने दिया था कि तुम किसी और के पुत्र भाई या पति की बलि दो तुमने यह सोच कैसे लिया कि माता तुम्हारी बलि स्वीकार भी कर लेगी क्या मैं तुम्हारा पति होने के कारण बलि के योग्य नहीं रहा तुम्हारा पुत्र मुझे बलि के लिए लाया है और उसके श्रम को व्यर्थ ना होने दो बली की यही प्रथा चली आ रही है आर्य पुत्र कैसी प्रथा क्या माता ने कभी मांग की थी धर्म जीवन को आदरणीय सुंदर और खराब बनाने का मार्ग है प्रिय धर्म से जीवन के इस अपमान का नाता नाना जोड़ो मैं क्षमा चाहती हूं आर्य पुत्र मैं कौन होता हूं क्षमा करने वाला क्षमा मांगो इन माता से जिनका तुम अपमान करने जा रही [संगीत] थी मुझे क्षमा कर दो मां मैं क्षमा चाहती हूं मां जब तक तुम्हारी माता श्री देवी माता से क्षमा मांग रही है मेरे गले लग जा पुत्र गले नहीं लगूंगा चरण स्पर्श करूंगा पिता की आज्ञा का पालन नहीं करोगे मुझे क्षमा कीजिएगा पिता श्री परंतु यदि यह केवल मेरी माता रही होती तो भी ईश्वर की आज्ञा के पालन के पश्चात इन्हीं की आज्ञा पालन मेरा धर्म है और यह मेरी माता ही नहीं मेरी गुरु भी है इसलिए पहले चरण स्पर्श की आज्ञा [संगीत] दीजिए आयुष्मान [संगीत] भव किंतु मैं तुझे गले कैसे लगाऊं पुत्र जो आज्ञा पिता श्री अब तो तू गोद में लेने योग्य हो गया पुत्र परंतु मैं तुझे गले लगाना चाहता हूं जो आज्ञा पिता श्री [संगीत] मेरे पुत्र का शरीर तो वज्र का है नहीं पिता श्री आपके पुत्र का शरीर उसकी माता के आशीर्वाद का [संगीत] है आपका पुत्र कहीं भागा नहीं जा रहा पहले कुछ खा लीजिए नहीं खाऊंगा नहीं खाएंगे नहीं मैं कुटीर से भोजन करके निकला था कुटीर कुटीर में आप क्या कर रहे थे मैं अकेला थोड़ा हूं हम पांचों भाई हैं पांचाली है यह एक लंबी कथा है प्रिय और इसका निचोड़ यह है कि हमें 12 बरस वनवास और एक बरस अज्ञात वास में बताना है वनवास के लगभग पाच वर्ष तो बीत ही चुके हैं तो वनवास शेष दिन आप सब यहां क्यों नहीं बिताते आर्य पुत्र मुझे रानी द्रौपदी और आप पाच भाइयों की सेवा करने का अवसर भी मिल जाएगा और आप सबको यहां कोई खोज भी नहीं पाएगा यह संभव नहीं क्यों पिता श्री क्या आप यह सोचते हैं कि आपका यह पुत्र आप लोगों की रक्षा नहीं कर पाएगा तुम तो त्रिलोक की रक्षा कर सकते हो पुत्र और कदाचित करो भी परंतु यहां रहने को वनवास तो नहीं कह सकते ना और हमें तो 12 बरस वनवास में रहना है थोड़ा समय तुम लोगों के साथ बिताने के पश्चात चला जाऊंगा मैं भी चलूंगा वहां जेष्ठ पिता श्री धर्मराज युधिष्ठिर से आशीर्वाद लूंगा और काका श्री अर्जुन से धनुर्विद्या सीखू तुम्हारे काका श्री अर्जुन तो दिव्यास्त्र की प्राप्ति के लिए इंद्र लोक गए हुए हैं दिव्यास्त्र क्या कोई युद्ध होने वाला है हां महायुद्ध होने वाला है पुत्र यदि कोई साधारण युद्ध होता तो अर्जुन को दिव्या अस्त्रों की खोज में वहां जाने की क्या आवश्यकता थी महाभारत महाभारत महाभारत [संगीत] महाभारत महाभारत [संगीत]

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