भीतर का क्रोध इतना प्रभावशाली हो सकता है तो भीतर की भक्ति तो और भी प्रभावी होगी पुत्र यह क्या कह रहे हो तुम आपको अनेकों धन्यवाद माता मुझे समझाने के लिए कि भक्त चंद्रधर की सहायता किसने की मुझे आज्ञा दीजिए किंतु पुत्र महादेव पु गणेश आज तुम महादेव पुत्री मनसा को उनसे प्रश्न पूछने से नहीं रोक सकते पिता श्री से प्रश्न करना चाहती है आप दीदी किस बारे में अनुज गणेश तुम बुद्धि की देवता हो सर्व ज्ञाता हो और तुम मुझे से प्रश्न पूछ रहे हो चंद्रधर सुरक्षित है इसका यही एक मात्र अर्थ है पिता श्री ने अपने ही पुत्री को दिया चन भंग किया है उन्होंने चंद्रधर की सहायता की है पिता श्री ने अपना वचन भंग नहीं किया इस बार उन्होंने चंद्रधर की रक्षा नहीं की पिताश्री ने चंद्रधर की सहायता नहीं की है यह तुम क्या कह रहे हो अनुज गणेश यही दीदी कि इस बार पिता श्री चंद्रधर के सहायक नहीं बने तो कौन है कौन है जो मुझे देवी पद पर नहीं देखना चाहता बताओ अनुज गणेश ऐसे मौन ना रहो नहीं दीदी इस समस्त ब्रह्मांड में किसी ने उनकी सहायता नहीं की ना पिताश्री ने ना त्रिदेव ने ना त्रिदेवियां ने तो फिर ऐसी कौन सी शक्ति है ऐसी कौन सी शक्ति है जो मुझे रोकने का प्रयास कर रही है चंद्रधर के पुण्य ने चंद्रधर के पुण्य ने देखिए ना दीदी आपके क्रोध से वातावरण जिस प्रकार प्रभावित हुआ है उसी प्रकार चंद्रधर के पुण्य के प्रभाव से उन्होंने आपकी बनाई बाधा पार की [संगीत] है [संगीत] [संगीत] तपस्वी की रक्षा उसकी तपो शक्ति करती है तो भक्त की रक्षा भक्ति से अर्जित पुण्य करता है तब तो मैं उसे कभी अपना भक्त नहीं बना पाऊंगी उसने इतने लंबे समय [संगीत] से पिता श्री की भक्ति की है अनुज उसकी भक्ति पर दोष आने पर भी उसके पुण्य कभी नहीं चुक तो फि पिताश्री की शर्त निरर्थक है अनुज क्योंकि मैं कुछ भी कर लू उसके पुण्य उसकी सदा रक्षा करेंगे नहीं दीदी अपने अच्छे कर्मों से बार-बार अर्जित करना पड़ता है इसलिए जब तक चंद्रधर अच्छे कर्म कर रहे हैं तब तक ही उन्हें पुण्य का फल मिलेगा परंतु कभी ना कभी उनके पुण्य अवश्य चुक जाएंगे आपको बस यह जानना है कि अभी उनके कितने पुण्य का प्रभाव शेष है जब उनके पुण्य शेष नहीं रहेंगे तब वो आपके प्रभाव से भी सुरक्षित नहीं रहेंगे किंतु अनुज गणेश ये मुझे कैसे ज्ञात होगा कि उसके कितने पुण्य शेष है इसका लेखा जोखा रखने वाले तो एक ही है दीदी कौन गणेश किसके पास है यह कर्मों का लेखा जोखा वही जो गुप्त रूप से सभी के पाप पुण्य का लेखा जोखा रखते हैं ब्रह्मदेव की काया से ज में यमपुरी में निवास करने वाले धर्मराज जी के मुख्य सहायक श्री चित्रगुप्त [संगीत] दिखाओ इनके कर्मों का बहीखाता तो यह है इनके पुण स्वर्ण मक्ष और यह है इनके पाप काले रंग [संगीत] में [संगीत] यह तीनों भिन्न नर कों के योग्य है नरक क प्रभु मैंने तो कोई पाप ही नहीं किया है अभी तो सदैव दान धर्म किया है हा प्रभु मैं भी नर्क योग्य नहीं मैं भी नहीं मैं तो वैद्य था अनेकों जीवन बचाया मैंने मैं तो पुजारन थी मेरा साथ सारा जीवन पूजा पाठ में ही बीता है इस चक्र का काला धागा रात्रि का प्रतीक है और इस चक्र का उजला धागा दिन का प्रतीक है और यह चक्र निरंतर चलते रहते हैं जिससे जीवन के हर प्रहर का कर्म मेरी वही में अंकित हो जाता है मनुष्य का पुण्य या पाप इस जन्म का हो या पूर्व जन्म का मुझे सभी कुछ ज्ञात है इस जीवन में तुमने कुछ दान धर्म करके कुछ पुण्य अर्जित किए परंतु अपने आनंद के लिए तुमने निर्दोष पक्षियों का आखेट भी किया है तो यह पाप कैसे पुण्य को मिटा सकता है इसीलिए तुम्हे गरुड़ पुराण के अनुसार कुंभ पाकम नर्क में जाना होगा जहां तुम्ह खोलते हुए तेल की कढ़ाई में तले जाने का कष्ट सहन करना [संगीत] होगा तुम तुमने उपचार अवश्य किए हैं परंतु तुम्हारे आचरण में सदाचार नहीं था परस्त्री पर तुम्हारी कुदृष्टि थी इसीलिए तुम्हें गरुड़ पुराण के अनुसार सलम नर्क में जाना होगा जहां तुम्ह तपती हुई गदा के वार को सहन करना होगा मैं तो भक्त आत्मा हूं श्री चित्रगुप्त जी महाराज सदा प्रभु की सेवा में ही रही अवश्य प्रभु की सेवा से बढ़कर है माता पिता की सेवा और सास ससुर वह भी तो माता-पिता के समान होते हैं तुमने तो उन्हें सेवा से दूर बल्कि भोजन से भी वंचित रखा उनका तिरस्कार किया उन्हें तड़पाया इसीलिए तुम जैसी पापी जातक के लिए एक ही स्थान निश्चित है और वह है काल सूत्रम नर जहां का ताप तुम्ह तड़पने के लिए विवश करेगा और मैं च महाराज मेरे लिए क्या निर्धारित किया है आपने मैं किस योग्य [संगीत] हूं रुक जाइए देवी मंसा मेरे सभी कर्मों का वही खाता तो आपके पास है चित्रगुप्त जी रुक जाओ तो बताइए मुझे मैं किसके योग्य हूं प्रणाम देवी यमपुरी में आपका स्वागत है स्वागत के योग्य है आप जगत कल्याण के लिए इतने त्याग किए हैं आपने इतने महान कार्य किए हैं आपने आपका तो हर स्थान पर स्वागत होना चाहिए देवी मंसा विनती है आपसे चित्रगुप्त जी उपासना करें मैं केवल शिव पुत्री मनसा हूं कोई देवी नहीं और यह उपाधि मुझे कभी भी प्राप्त होगी भी या नहीं यह भी मुझे ज्ञात नहीं है महान त्याग धर्म निभाने के बाद देवी तो क्या आप पूजने के योग्य है फिर भी ऐसा नहीं हुआ क्योंकि चंद्रधर की भक्ति अहंकार और कट्टरता से दूषित अवश्य हुई है परंतु पूर्व भक्ति के कारण उसके पास बहुत सारे पुण्य संचित [संगीत] है [प्रशंसा] [संगीत] चंद्रधर के पुण्य तो बहुत अधिक है दे केवल शिव भक्ति ही नहीं बल्कि बड़े बूढ़ों के साथ आपके आशीर्वाद का पुण्य भी उसे मिला है मेरे आशीर्वाद का पुण्य हां दे किसी की अच्छाई को देखकर उसकी प्रशंसा करने पर हम अपने आशीर्वाद के साथ ही उसे अपना पुण्य भी देते हैं हर हर [संगीत] महादेव अर्थात चित्रगुप्त जी चंद्रधर के कर्मों का पेड़ असंख्य पुण्य फलों से लदा हुआ है हां देवी परंतु अब वह अपने कर्म के वृक्ष पर नए सुकर्म के फलों को जोड़े बिना ही अपने भलो का उपयोग कर रहा है और अगर ऐसा ही रहा तो एक दिन उसका सारा वृक्ष फल हीन हो जाएगा और झूल सेगा किंतु मुझे कैसे ज्ञात होगा उसके कितने पुण्य चुके हैं और कितने शेष है चंद्रधर ने अपने घर के आंगन में एक बेल वृक्ष लगाया है और उन्हीं बेल पत्रों से वह शिव की आराधना करता [संगीत] है जो वृक्ष उसकी भक्ति का प्रतीक है वही उसके शेष पुण्य का प्रतीक भी बनेगा और जिस दिन वह वृक्ष अपने सभी पत्रों को खोकर सूखने की स्थिति में आ जाएगा उसी दिन उसके भी सारे पुण्य चुक जाएंगे किसी भक्त के पुण्य समाप्त हो जाए उसकी भक्ति में दोष आ जाए ये मैं नहीं चाहती किंतु मेरे जीवन का उद्देश्य चंद्रधर को अपना भक्त बनाना है तो मेरे साथ इस भक्त को भी इस परीक्षा को पार करना [संगीत] [संगीत] होगा प्रभु के प्रिय वृक्ष की सेवा मैं निरंतर करूंगी इसे सूखने नहीं [संगीत] दूंगी कितना अच्छा होता कि मैं अपने पवित्र बेल के पेड़ को जल चढ़ा कर आता पिताजी आप भूल गए थे परंतु मुझे स्मरण था मैं पानी दे आया हूं और फिर हमारे पीछे मां भी तो है वो उसका ध्यान रखेंगी उसे सूखने नहीं [संगीत] देंगी तीव्र गति से आगे बढ़ेंगे हम जी पिताजी ओम नमः शिवाय ओ नम शिवाय अब उसकी पुण्य समाप्त होने तक चंद्रधर को संकेत मिलेंगे जिसके लिए उसने मुझे विवश कर दिया [संगीत] [संगीत] है मां और संतान का हृदय एक दूसरे से जुड़ा होता है पुत्र किंतु मैं अपनी पुत्री की विवशता समझती हूं त्याग ही उसकी नियति है त्याग माता हां पुत्र यह तो तुम जानते ही हो भक्त की कठिन परीक्षा लेना भगवान के लिए बड़ा त्याग होता है और उसका परिणाम संसार की भलाई ही है पिताजी यह कैसी भयानक लहर है राता जी संभालो अन्यथा हमारी नाव चट्टान से टकरा जाएगी किंतु यह नौका तो मुड़ ही नहीं रही है भ्राता सीधे चट्टान की ओर ही बढ़ रही है आइए प्रभु मेरे पुत्रों की रक्षा कीजिए उनके जीवन उनके प्राणों को लौटाने की कृपा कीजिए महान भक्त हूं मैं मेरा कुछ बुरा हो ही नहीं सकता महान भक्त हूं मैं मेरा कुछ बुरा होही नहीं स नौका चट्टान से टकराने वाली है स्वयं को सुरक्षित करने का प्रयास कीजिए ये क्या हो रहा है पिताजी क्या हम डूबने वाले हैं ने शांत हो जाओ सब शांत मेरी भक्ति और मेरे प्रभु महादेव में विश्वास रखो कुछ नहीं होगा हमें हर हर महादेव भता हम सब सुरक्षित है हा हम सब सुरक्षित है हर हर महादेवर हर हरदे हर हर महादेव अद्भुत असंभव पिताजी की भक्ति भी अनुपम है चमत्कारिक है सही कहा [संगीत] बराता [संगीत] इतने पत्ते कहीं कुछ अशुभ तो नहीं हो रहा इस वृक्ष से इतनी पत्नी क्यों झड़ रहे [संगीत] है मेरा कुछ भी अशुभ हो ही नहीं सकता पूरा विश्वास है मुझे मेरी भक्ति और मेरे प्रभु महादेव पर तुम थक गए हो तो मुझे दो मैं खेता हूं नहीं पिताजी हमारे रहते हुए आप नौका चलाएंगे तो हमें पाप लगेगा नहीं नहीं इसमें कोई पाप नहीं श्रम का अभ्यास तो मुझे भी होना चाहिए ना नहीं पिता श्री श्रम तो अब हमें करना चाहिए आपकी सेवा में होने वाली थकान भी हमारे लिए पुरस्कार के समान है पुरस्कार तो मुझे मिला है अपनी भक्ति का मेरे प्रति निष्ठावान मेरे पुत्र पुण्य का ही तो फल [संगीत] है लगता है मौसम फिर से रंग बदल रहा है यहां तो दूर दूर तक तक नहीं है अब क्या करें पिताजी देव राजेंद्र वर्षा और आंधी के देवता है उनसे प्रार्थना कीजिए व हमारी रक्षा अवश्य करेंगे नहीं नाही देव राजेंद्र ही कोई और प्रार्थना और पूजा होगी तो केवल महादेव की प्राथना और पूजा होगी तो केवल महादेव की चंद्रधर जितना भक्ति के अहंकार में डूबता जाएगा उतना ही उसके पुण्य का घड़ा रिक्त होता जाएगा यह झड़ते हुए बेलपत्र इसी का प्रमाण है यह विद्युत तरंग यदि हमारे नौका पर भी गिरी हमें कुछ नहीं होगा सुना नहीं क्या कहा था मैंने मेरी भक्ति और मेरे प्रभु महादेव में विश्वास रखो पिता श्री उसे क्या भ संकट और काल का जो भक्त हो स्वयं महाकाल का ओम नमः शिवाय मैं जितना भी प्रयास कर रही ह उसका कोई लाभ नहीं हो रहा ये वृक्ष तो सूखता ही जा रहा है और मेरा हदय बहता जा रहा है [संगीत] शीघ्र गति से समाप्त होते जा रहे हैं चंद्रधर के [संगीत] पुण्य इतनी करीब ार इसमें नौका स्थिर कैसे रहेगी प्रयास करते रहिए भैया पिताजी आप निश्चित रहिए हम आपको सुरक्षित रूप से इस नदी को पार करा देंगे र्फ है मुझे तुम पर उतरो सौभाग्य है मेरा मैं तुम्हारा पिता हूं तुम मेरे पुण्य के ही तो फल [संगीत] हो बवंडर हमारी नौका सीधे उसी में प्रवेश कर रही है हम अपनी नौका की रक्षा कैसे करें कैसे समझाऊ तुम्ह महादेव हमारी रक्षा करेंगे क्योंकि मेरे जैसा भक्त वो खोना नहीं चाहते बढ़ता जा रहा है चंद्रधर का अहंकार जहां पहले वह कहते थे उन्हें प्रभु महादेव की आवश्यकता है वही अब उनके शब्दों से लगता है जैसे स्वयं महादेव को चंद्रधर की आवश्यकता हो कदाचित मुझे कठोर बनना ही होगा मैं इस ब्रज को बचाने के लिए जो कर सकती थी वो सब कर चुकी इसे प्रतिदिन सीच रही हू उर्वरक दे रही हूं परंतु परंतु इसे नहीं बचा पा रही जो शुभता का प्रतीक है वो क्यों सूख रहा है क्या होने वाला [संगीत] [संगीत] है [संगीत] [संगीत] ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय देखा उतरो ये है मेरी महान भक्ति का प्रतीक मैंने कहा था ना प्रभु महादेव मुझे नहीं खोना चाहते यह है मेरी भक्ति की शक्ति चंद्रधर यह नहीं समझ पा रहे हैं कि अपनी भक्ति के अहंकार में वह सारे पुण्य होकर पाप की ओर बढ़ रहे हैं और अपने आराध्य से भी दूर जा रहे हैं किंतु हम मार्ग भटक गए हैं अपने लक्ष्य के मार्ग से दिशा भटक गए हैं मेरी भक्ति की शक्ति को पहचानो वो हमें उचित दिशा में भी ले जाएगी किंतु पिताजी हमारे पास जो भी भोजन है वो समाप्त हो रहा है अधिक खाने के लिए कुछ भी नहीं है उसे क्या भय संकट और काल का जो भक्त है स्वयं महाकाल का हर हर महादेव हर हर [संगीत] [संगीत] महादेव तो एक ही फल बचा है लीजिए भ्राता ये फल खाइए लीजिए पिता श्री परिश्रम तो तुम लोग कर रहे हो पुत्रों तुम लोग खा किंतु हम तो युवा है हमें कुछ नहीं होगा किंतु आप तो जिनका बवंडर कुछ बिगड़ नहीं सका विद्युत प्रवाह से कोई हानि नहीं हुई उनका यह भूख क्या बिगाड़ सकेगी इसलिए यह फल तो आप ही खाएंगे सत्य है तुम लोग ही मेरे पुण्य का वास्तविक [संगीत] फल [संगीत] यह क्या हुआ य ब तो झुलस गया उचित नहीं हुआ ये अशुभ संकेत [संगीत] हैय हे प्रभु मेरे स्वामी और मेरे पुत्रों की रक्षा करना वो देखो त मैंने कहा था ना मेरी भक्ति की शक्ति हमें उचित मार्ग पर ले जाएगी देख लो परिणाम तुम सबके सामने जी पिताजी जी ना भूख ना प्यास ना तूफान कुछ भी हमारा एक नहीं कर पा यहां तक की देवी मंसा भी हमारा कुछ आयत नहीं कर पाएगी पुण्य खो दिया तो विवेक भी नष्ट हो गया अब तक चंद्रधर पिता श्री प्रभु महादेव को श्रेय दे रहे थे किंतु अब तो बस वह अपनी भक्ति को ही सर्वोपरि मान रहे हैं भक्ति की शक्ति तो भगवान की शक्ति से भी बढ़कर है किंतु यह भी एक सत्य है जब भक्त अपनी नम्रता खो दे और यह मान बैठे कि भक्त अपनी भक्ति से भगवान को विवश कर देगा तो उसकी भक्ति भी अपनी शक्ति खो देती आशा है मंसा दीदी उन्हें इस सत्य का परिचय करा सकेंगी अब वो दिन आ ही गया है [संगीत] चंद्रधर संकट है समझ रही हूं मैं किंतु उसका सामना कैसे [संगीत] कर [संगीत] अपने पति को समझाइए कि वो मुझे देवी मानकर मेरी भी पूजा करे देखा कहा था ना मैंने कोई भी इस भक्त का कुछ नहीं बिगाड़ सकता सुरक्षित रहेंगे हम जी पिताजी जी पिताजी यह क्या हो रहा है सागर के गर्भ में क्या कोई नई विपदा घुमड़ रही है अच्छा तो आप नागो यह बताओ कि आप अकेले आए हैं कि आपकी नाग माता भी आई मेरी भक्ति की शक्ति देखने के बाद भी आपसे रहा नहीं गया लौट आई आप लौट आई हूं और मुझसे रह भी नहीं गया क्योंकि तुम्हें सत्य से अवगत कराना मेरा धर्म है चंद्रधर कैसा सत्य तो सुनो भक्ति की शक्ति तुम्हारी तब तक ही सुरक्षा करेगी जब तक तुम्हारे अर्जित पुण्य शेष है जो तुम तीव्र गति से खोते जा रहे हो तुम्हारे भक्ति के अहंकार ने तुम्हारे दृष्टि पर आवरण डाल दिया है जिसके कारण तुम अपने ही पुत्र अपने ही सेवकों को संकट में डालते जा रहे हो इसीलिए भक्ति के अहंकार का आवरण हटाओ और सत्य को समझने का और देखने का प्रयास करो पुत्र अन्यथा सब नष्ट हो जाएगा वर्षों भक्ति की है मैंने तो क्यों ना अपनी भक्ति पर गर्व करो महादेव स्वयं विवश है मेरी रक्षा करने को फिर चाहे स्थिति कुछ भी हो इसलिए सत्य यही है मैं नहीं कुछ ऊंगा और ना ही मेरा कुछ न हो उसे क्या भय संकट और काल का जो भक्त हो स्वयं महाकाल [संगीत] का मैं तुम्हारी शत्रु नहीं हूं चंद अभी भी समय है स्वीकार कर लो स्वीकार कर लो भगवान के अनेको रूप है प्रत्येक रूप में उनके पूजा से वो प्रसन्न होते हैं जो करना चाहती है देवी ली किंतु मैं मेरे भोलेनाथ के सिवा और किसी की पूजा नहीं करूंगा चाहे वह आप हो चाहे कोई और और ना ही मैं अपने परिजनों को ऐसा करने दूंगा चंद्रधर जो मैं नहीं करना चाहती उसके लिए मुझे विवश मत करो नहीं नहीं आप कीजिए कीजिए जो करना है संकोच मत कीजिए या अभी से असफलता के भय से भय भीत है [संगीत] [संगीत] नहीं नहीं मेरे स्वामी और मेरे पुत्रों पर कोई संकट नहीं आ सकता विनाश का विपरीत [संगीत] बुद्ध अहंकार एक ऐसा विकार है जो मनुष्य को पतन की ओर ले जाता है अतः अपने विकारों का त्याग करना ही श्रेयस्कर है
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