चलाता जग री मास योग की मंसा [संगीत] देवी चला ज [संगीत] सा में हे मां हे मां ओम नमः शिवाय बहुला के प्रण और समर्पण ने उन्हें वैतरणी नदी के त तक पहुंचा दिया अद्भुत [संगीत] स्वामी अब हम इस बेतनी नदी को पार करके यमलोक में प्रवेश करेंगे यमलोक में प्रवेश करेंगे स्वामी स्वामी स्वामी कहां है मेरा पुत्र कहां है मेरा पुत्र स्वामी महादेव ने अवश्य आपकी सहायता की होगी मेरे पुत्र को मुझे लौटा दिया होगा बोलिए ना स्वामी कहां है मेरा पुत्र मेरे महादेव कभी हमें निराश नहीं करेंगे मेरी भक्ति की शक्ति अब भी मेरे साथ है वो हमारे पुत्र को यमलोक से भी छीन लाएगी सबको खोकर भी आपको संतोष नहीं मिला ना स्वामी आपका अहंकार नहीं मिला अ समय स्वामी मान लीजिए देवी मंता का नाम ले लीजिए उनकी पूजा कीजिए स्वामी उनकी पूजा कीजिए जय मा मंसा देवी जय मा मंसा छोटे से छोटे पाप करने वाले का भी हाड मास सब घुल जाता है तनी में किंतु गो दान और गो सेवा करने वा लो को इसकी कोई चिंता नहीं गौ माता में तो सभी देवी देवताओं का वास होता [संगीत] [संगीत] है प्रणाम [प्रशंसा] [संगीत] कमता वंदे वांछित मनो कार्थ चंद्रा भकत शेखरा कमल स्थिता चतुर भूजा सिद्धि दात्र यशस्विनी सिधि दत्र यवनी सि नर्क समान भयंकर संकटों से भरे 16 नगरों और उसके बाद बैतरणी नदी को पार कर यमलोक कैसे पहुंचो गी बेतनी और 16 यमपर पार कर लिए मैंने किंतु अब तक यमलोक के द्वार क्यों नहीं पहुंच पाए कहां हूं [संगीत] मैं लखंदर का शरीर लेकर बिहुला का यह सीढ़ियों पर चढ़ना सरल नहीं होगा प्रायश्चित सच्चा हो तभी यातना शरीर इन सीढ़ियों पर चढ़ पाता है यदि अपनी देवी मां मंसा पर बिहुला का विश्वास सच्चा है और अपने पति के प्राण लौटाने के प्रति उनकी पूरी श्रद्धा और निष्ठा है तो वह इन सीढ़ियों पर अवश्य चढ़ सकेंगी हे वि मुझे दिलाने में मेरी सहायता कीजिए प्रभु मैं यहां तक आपकी शक्ति से पहुंची हूं मां मुझे शक्ति दो मां मुझे बल दो मां जय मां मंसा देव जय मां मंसा देव जय मां मनसा जय मां मनसा देवी हे मां मंसा देवी जय मां मंसा [संगीत] देवी हे मा मंसा देवी किंतु दीदी मंसा के गहन ध्यान से उन्हे कैसे उठाए [संगीत] हम पुत्री मनसा की कृपा से बिहुला यम दवार पर है शीघ्र ही देवलोक भी पहुंच जाएगी किंतु पुत्री मंसा तो अभी भी ध्यान में [संगीत] है [संगीत] धर्मराज से अनुमति लेकर यमलोक पार कर तुम देवलोक में देव सभा की ओर आगे बढ़ सकोगी हे यमदेव हे धर्मराज मुझ पर कृपा करे मुझे लोक में अंदर आने की अनुमति प्रदान करें सहायता कीजिए धर्मराज मुझे मेरे स्वामी के प्राणों के लिए देवलोक में आयोजित देव सभा में आने की अनुमति प्रदान कर दीजिए धर्मराज सदेव यहां आकर बिहुला नहीं यमलोक की मर्यादा भंग की है भूल की है इसने मैं उसे यमलोक में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दे सकता और ना ही उन्हें देवलोक जाने की आज्ञा दे सकता हूं दीदी मंसा देवलोक कैसे जाएंगी उसके लिए उन्हें कैसे मनाऊंगा इसका कोई उपाय ही नहीं सूझ रहा है मुझे और अब यदि यमदेव ने बिहुला को आगे नहीं जाने दिया तो दीदी मंसा का क्रोध कहीं हम लोग को भस्म ही ना कर दे द्वार खोलिए इतने निष्ठुर मत बनिए धर्मराज नहीं उसकी प्रार्थना मैं स्वीकार नहीं कर सकता जाओ कह दो उसे कि लौट जाए यहां से हे पार्वती नंदन पुत्री मंसा का क्रोध मैं पहली बार देख रही हूं यमलोक पर कोई क्रोध बरसे उससे पहले आप ही इसे रोकने का कोई उपाय कीजिए हे धर्मराज मेरी विनती सुन ले शीघ्र शीघ्र मुझे अनुमति दे दे इनकी रक्षा करनी है क देव लोग पहुचने में मुझे देर ना हो जाए धर्मराज मुझे मे स्वामी की रक्षा करनी है उचित है आप यदि अनुमति नहीं देंगे तो मैं जीवन भर इसी द्वार के सामने गुहार लगाती रहूंगी आप सुन रहे हैं धर्मराज मैं यही गुहार लगाती रहूंगी मेरी विनती सुन लीजिए धर्मराज देव सभा आरंभ होने में अधिक समय नहीं है विलंब हो रहा है मुझे जाओ उसे कह दो कि यहां से लौट जाए यमदेव बेहुला की गुहार को नकार नहीं सकते उन्हे यमलोक का द्वार खोलना ही होगा बेहुला की निष्ठा और समर्पण का ये फल इतनी बाधा और कठिनाइयों को पार कर व यहा तक पहुची यद अम बेहुला की गुहार को नहीं सुनेंगे तो संपूर्ण यमलोक को नागों का सं देहना होगा सर्वनाश होगा यमलोक का सनाश होगा का सक्षक नागराज बासुकी यह दोनों क्रोधित क्यों है मेरी ओर क्यों बढ़ रहे हैं हे गणेश जी कुदी मंसा का क्रोध बढ़ता ही जा रहा है कुछ कीजिए अन्यथा एक और पुत्री मंसा का क्रोध होगा और दूसरी ओर स्वयं यमराज उसके भीषण परिणाम की कल्पना भी नहीं कर सकती [संगीत] मैं यमलोक पर नागों का आक्रमण क्यों हो रहा है क्या हुआ धर्मराज चिंता में क्यों है आप प्रभु प्रणाम प्रभु चिंता नहीं दुविधा है पार्वती नंदन जो शक्तिशाली स्त्री यमलोक के द्वार पर भीतर आने के लिए गुहार लगा रही है मैं उसे अंदर आने की अनुमति नहीं दे सकता प्रभु क्यों नहीं दे सकते अनुमति मैं जानता हूं बेहुला है वो जिन्हे स्वयं दीदी मंसा का आशीर्वाद प्राप्त है प्रथम पूज्य आप तो जानते हैं मृत्युलोक के वासियों का सदे यमलोक में प्रवेश करना नियमों के विरुद्ध है नियमों के विरुद्ध है सत्य कहा आपने यमदेव फिर पांडव पुत्र युधिष्ठिर को देवलोक तक जाने के अनुमति कैसे मिल गई थी क्योंकि उन्ह धर्मराज की उपाधि प्राप्त थी हा उचित कहा आपने वो तो धर्मराज थे किंतु देवी सावित्री उनके पति के तो आपने प्राण भी लौटाए थे क्योंकि सावित्री ने परीक्षा दी थी मेरे प्रश्नों के उचित उत्तर देने के बाद ही उन्ह यमलोक में प्रवेश मिला था उचित है तोला की भी परीक्ष ले लीजिए पूछ लीजिए प्रश्न यद व उत्तीर्ण हुई तो ही आप उन्हें अनुमति दीजिएगा परीक्षा तो तब होगी उसकी जब वह मेरे दर्शन पाने के योग्य होगी प्रभु उसके लिए क्या पर्याप्त पुण्य है बहुला के पास अब विलंब ना कीजिए धर्मराज अन्यथा मेरे भी प्राण हार लीजिए द्वार खोलिए धर्मराज द्वार [संगीत] खोलिए [संगीत] [संगीत] जो मेरे दर्शन पाने में ही असमर्थ है वोह मेरे प्रश्नों का उत्तर भला कैसे देगी सूर्य देव के समान तेज चंद्र देव के समान धवल कांति देवराज इंद्र के समान श हे धर्मराज मेरी कल्पना के विपरीत है आपका रूप अर्थात तुम्हें मेरे दर्शन प्राप्त हो रहे हैं बहुला तुम मुझे देख पा रही हो आपकी कृपा है प्रभु जैसा सुना जैसी कल्पना की उससे सर्वथा भिन्न भय ने अभय देने वाला है आपका स्वरूप मेरा भयंकर स्वरूप पापी आत्माओं को दिखाई देता है पुण्य आत्माओं को नहीं अर्थात आपके अनुसार मेरे पास कुछ संचित पुण्य है यदि ऐसा है तो मुझे यमलोक पार कर देवलोक पहुंचने की अनुमति दीजिए प्रभु [संगीत] ठहरो द्वार खुलने का मेरे दर्शन प्राप्त करने का अर्थ यह नहीं कि तुम आगे बढ़ सकती [संगीत] हो [संगीत] यदि आगे बढ़ना है तो उसके लिए तुम्हें परीक्षा देनी होगी पुत्री परीक्षा कैसी परीक्षा प्रभु जिस प्रकार माता सावित्री अपने पति के प्राणों के लिए मेरे पास आई थी वैसे ही तुम भी आई हो तो उनके ही समान मेरे प्रश्नों के उचित उत्तर देकर तुम्हें भी मुझे संतुष्ट करना होगा परीक्षा जो भी हो मैं प्रस्तुत हूं यदि मैं सफल ना हो पाई तो मैं आपको वचन देती हूं बिना कुछ कहे क्या से वापस लौट [संगीत] जाऊंगी [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] मेरे पति मेरे लिए सर्वस्व है उनके लिए मुझे प्राण भी निछावर करने पड़े तो अवश्य करूंगी विघ्न हरता ने मेरे विघ्न हरे मां मंसा ने मुझे बल दिया शक्ति प्रदान की इसलिए मुझे विश्वास है कि मैं उनकी कृपा से आपके प्रश्नों के उत्तर अवश्य दूंगी इसलिए आप जो भी प्रश्न पूछना चाहते हैं अवश्य पूछे धन [संगीत] तो बताओ पुत्री तुम अपने पति को पुनः जीवित क्यों देखना चाहती हो क्योंकि विवाह के फेरों के साथ-साथ वचन भी लिया है हमने जीवन के उतार चढ़ाव में ही नहीं अभी तो कर्म धर्म इन सब में भागीदार बनना है हमें कोई अनुष्ठान हो या मेरा जीवन है इनके बिना तो सब अपूर्ण है हम दोनों एक दूसरे के बिना अधूरे और इन सबसे अधिक मुझे अपने पति से प्रेम है और उन्हे जीवित देखने के लिए इससे से बड़ा कारण और क्या हो सकता है धनराज प्रेम है तुम्हे यह कहा तुमने तो बताओ मुझे सच्चा प्रेम किसे कहते हैं सच्चा प्रेम तो ईश्वर के समान होता है जो दिखाई नहीं देता किंतु अपना आभास अवश्य करा जाता है जो स्वयं से प्रेम करने सक्षम वही ईश्वर से सृष्टि से प्रेम कर सकता है और इसी निस्वार्थ प्रेम से मुक्ति का मार्ग खुलता है अच्छा तो फिर मुक्ति क्या है सारी चिंताओं से मुक्त होकर सभी विकारों को दूर कर ईश्वर में लीन होना ही वास्तविक अर्थ में मुक्ति है तो बताओ ईश्वर क्या है उनका स्वरूप रू क्या है प्रभ तो क्या वह शिव है जिसमें तुम्हारे पति और ससुर की आस्था है या शक्ति है जिनमें तुम्हारे माता-पिता का विश्वास है या फिर देवी मंसा जिनके प्रति तुम्हारी अटूट श्रद्धा है यह प्रश्न तो बहुत जटिल है [संगीत] [संगीत] ईश्वर के प्रति संपूर्ण समर्पण और ज्ञान व्यक्ति को किसी भी कठिनाई से बाहर निकाल सकता है
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