Wednesday, 31 December 2025

मनसा देवी के पुत्र आस्तिक नें नागों को यज्ञ से बचाया Ishita Vighnaharta Ganesh Ep 795 PenBhakti

आज आपकी संपूर्ण सेना भी मेरे मार्ग की बाधा नहीं बन [संगीत] [संगीत] सकती मेरी चेतावनी सफल हुई उसी से भयभीत होकर यह सभी पीछे हट रहे [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] हैं [संगीत] [संगीत] इस रद्र रूप में महादेव और माता गौरी की पुत्री बहन मनसा जसे माता काली की ही अवतार [संगीत] है मैं तुम्हें विश्वास दिलाती हूं कोई भी बाधा कोई भी शक्ति तुम्ह नहीं रोक सकती तुम्हारी माता सदैव तुम्हारे साथ है रक्षक मां मेरे साथ है तो फिर मुझे कौन रोक सकता [संगीत] है धन्यवाद [संगीत] [संगीत] मां कल्याण भव [संगीत] पुत्र इससे पहले कि ये यज्ञ मेरे लिए संकट बने क्या ये बालक उसे रोक पाएगा स्वाहा ये वहां क्यों रुक गया क्योंकि वो यज्ञ स्थल मंत्रों की शक्ति से सुरक्षित अब क्या होगा दे क अगली आ मेरे नाम की हुई [संगीत] तो महाराज जन्म जय बगली आहुति सरप तक्षक के नाम की होगी उचित है तक्षक स्वाहा तक्षक स्वाहा देवराज देवराज मेरे प्राणों की रक्षा कीजिए देवराज अब क्या होगा देवराज मैं निश्चिंत हो जाओ क्योंकि य य सब कुछ मेरे आधीन इतनी भी बड़ी शक्ति क्यों ना वह मेरे समक्ष कदा भी नहीं टिक सकती किंतु देवराज उन्होंने मेरे नाम की आहुति दे दी अबरी देवराज मुझे इस यज्ञ की विनाशक अग्नि में जाने से रोक लीजिए मेरे प्राणों की रक्षा कीजिए देवराज यदि मेरे शब्दों पर विश्वास नहीं तो जाओ जाकर किसी ऐसी वस्तु को जकड़ लो जो पर्वत के समान अचा राडे जिसे कोई ना हिला सके [संगीत] जाओ [संगीत] क्या हुआ मित्र तुम मेरी र ऐसे क्यों देख रहे हो आपने ही कहा था ना पर्वत हिल सकता है परंतु इंद्रदेव का सिंहासन नहीं जब तक यह यज्ञ नहीं रुकता इंद्रदेव मैं आपका सिंहासन नहीं [संगीत] छोडूंगा नहीं छोडूंगा आपके सिंघासन को कदापि नहीं छोडूंगा जब तक यह यज्ञ नहीं रुकता है या समाप्त नहीं [संगीत] होता मित्र तुम यह क्या कर रहे हो तुम्हें इतना भयभीत होने की आवश्यकता नहीं [संगीत] है इस यज्ञ को अभी इसी क्षण रुकना चाहिए मंत्र शक्ति के इस सुरक्षा घेरे को मैं कैसे पार करूं पुत्र अपना कार्य आरंभ करने से पूर्व प्रथम पूज्य गनाधिपति की पूजा अवश्य [संगीत] करना त्वमेव प्रत्यक्ष सवम त्वमेव केवलम करता त्वमेव केवलम भता केन बण बालक य आने के पीछे क्या आशय [संगीत] है नहीं छूंगा क नहीं छोडूंगा देवराज के सिंहासन कोम अवान चानम वशम अवान चानम अवश कल्याण हो पुत्र आ [संगीत] पुत्र एक दंत महा तपत कांचन स लंबोदरम क इस दि बालक का आत्मन हमारे अञ पर संकट की छाया तो नहीं बनेगा [संगीत] अदभुत आपपन होने पहले अपने स्न से नहीं उ सते वंदे हम गणनायकम वंदे हम गणनायक [प्रशंसा] वंदे मेरे यज्ञ स्थल में आपका स्वागत है दिव्य ऋषि [संगीत] बालक कल्याण हो राजन यज्ञ स्थल तक तो मैं पहुंच गया किंतु यज्ञ को कैसे रोकू तुम्हें विश्वास रखना होगा अपने आप पर अपनी तपो शक्ति पर अपनी ज्ञान शक्ति पर यहां तो मुझे अपनी ज्ञान शक्ति का प्रयोग करना होगा हे राजन दीक्षा के गंडा बंधन का संकल्प ले यज्ञ आसन पर बैठने वाले दीक्षित कहलाते हैं और एक दीक्षित तब तक अपने आसन से नहीं उठता जब तक यज्ञ पूर्ण नहीं हो जाता आप तो इस यज्ञ के दीक्षित हैं आप कैसे अपने आसन से उठ गए राजन आपके जैसा दिव्य और ओजस्वी बालक के सामने मैं तो क्या कोई भी आपके आगमन पर स्वागत के लिए उठ खड़ा होगा मैं भी स्वयं को ना रोक सका अतिथि रूप में ब्राह्मण देव के आने पर उनका स्वागत करना निश्चित ही सबसे अधिक महत्वपूर्ण है अद्भुत राजन आज आपने अतिथि देवो भवा का ज्ञान समस्त जगत को दे दिया आप राज काज में निपुण ही नहीं महा ज्ञानी भी है जब ऐसे ज्ञानी राजा समक्ष हो तो उनके ज्ञान के भंडार से कुछ ज्ञान लेने का अवसर नहीं चूकना चाहिए यदि आप मुझे कुछ समय दे तो मैं आपसे कुछ प्रश्न पूछकर अपना ज्ञान बढ़ाना चाहूंगा मेरा संदेह उचित ही था इन ब्राह्मण बालक का यहां आना यज्ञ के लिए उचित नहीं नहीं चिंता मत कीजिए राजन मैं आपका अधिक समय नहीं लूंगा उचित है किंतु शीघ्रता कीजिए मुझे यज्ञ संपन्न करना है अच्छा तो मुझे बताने की कृपा करे राजन क्या व्यक्ति का अपना अनुष्ठान परिवार के अनुष्ठान से अधिक महत्त्वपूर्ण है हां अवश्य है तो क्या व्यक्ति का उद्धार परिवार के उद्धार से अधिक महत्त्वपूर्ण है हां अवश्य और परिवार की भलाई समाज या प्रजा की भलाई से ऊपर है हां अवश्य किंतु क्यों राजन जब तक स्वयं की पूजा स्वयं का अनुष्ठान संपन्न ना हो तो कोई परिवार का अनुष्ठान कैसे पूर्ण कर सकता है तो इसी प्रकार जब तक स्वयं अपनी भलाई का विचार ना किया जाए तो भला समाज और प्रजा की भलाई का विचार कोई कैसे कर सकता है स्वयं कुशल हो तो परिवार कुशल रहेगा तभी मन शांत होगा और मन शांत होगा तभी दूसरों की भलाई संभव होगी ओ समझा स्वयं को कुशल करने के बाद ही दूसरों का भला हो सकता है किंतु यह भी सत्य है परिवार हो या राज्य उसकी भलाई के लिए उचित साधन की आवश्यकता पड़ती है और साधन के लिए धन और धन की प्राप्ति तो एक राजा को कर से ही होती है अधिक कर और अधिक धन नहीं नहीं मैं अधिकता में कुछ नहीं करता मेरे राज्य में उतना ही कर लिया जाता है जो मेरे राज्य के विकास और सुरक्षा के लिए आवश्यक हो फिर तो प्रजा की सुरक्षा के लिए आप आखेट भी करते होंगे हां जाता हूं जब भी कोई वन्य पशु ग्रामवासियों पर आक्रमण करने लगे उनकी पशु संपदा को हानि पहुंचाने लगे तो मैं आखेट भी करता हूं किंतु तभी क्यों समस्या का निवारण उसके मूल से ही क्यों नहीं करते एक साथ सभी वन्य पशु को क्यों नहीं नष्ट कर देते दिव्य बालक आप तो स्वयं ज्ञानी है भी कहता हूं मैं यह कैसे कर सकता हूं वो तो अन्याय होगा सृष्टि में सभी पशु पक्षियों का स्थान है सृष्टि को चलने के लिए उसमें प्रत्येक जीव का होना आवश्यक है और सर जिन्ह आप इस यज्ञ से समूल नष्ट करना चाहते हैं क्या वो जीव नहीं सर्पों के राजा तक्षक ने मेरे पिता का वध किया वो तो निमित मात्र थे आपके पिता की मृत्यु का कारण ऋषि श्रृंगी का श्राप था मृत सर्प को उन पर उछाल करर आपने तप प बैठे ऋषि का नहीं उनके तप का भी अपमान किया है मैं आपको श्राप देता हूं कि एक सर्त ही आपकी मृत्यु का कारण होगा आपके पिता की भूल थी उसमें भला सर्प राज तक्षक का क्या दोष था प्रतिशोध की भावना स्वयं को ही दुर्बल बनाती है और व्यक्ति स्वयं ही अपने सत्कर्म के फल को नष्ट कर देता है क्या आप भी अपने प्रतिशोध की भावना को ऐसा हिंसक रूप देकर भूल तो नहीं कर रहे क्या आपको नहीं लगता यह यज्ञ अभी रुक जाना चाहिए दंड के भागी है तक्षक और उनके सर बहुत बड़ा अपराध किया है उन्होंने गुरु दक्षिणा देने के पावन संकल्प को रोकने का एक ब्राह्मण बालक से गुरु के लिए ले जाने वाले वस्तु को छल से छीनने का मानता हूं यह अपराध है किंतु क्या यह ऐसा अपराध है जिसका दंड इतना भयंकर होना चाहिए जबकि आपने वह वस्तु अपनी शक्ति के बल पर पुनः प्राप्त कर ली और अपने गुरु को गुरु दक्षिणा देने का वचन नि दिया दंड तो मिलना चाहिए अवश्य मिलना चाहिए तर्को को जीवित रहने का कोई अधिकार नहीं यदि यह जीवित रहेंगे तो फिर ऐसे ही अपराध करेंगे नहीं ब्राह्मण देवता यह आप नहीं आपकी बुद्धि नहीं आपका ज्ञान नहीं आपके गुण नहीं बल्कि आपका क्रोध बोल रहा है जिसे आप अपने भीतर बढ़ने दे रहे हैं एक पवित्र ब्राह्मण का क्रोध तो क्षण भंगुर होना चाहिए ठीक उसी तरह जैसे सूखे घास के प क्षण भर में भस्म हो जाते हैं किंतु दुर्भाग्य वर्ष आपने ऐसा नहीं किया अपने भीतर दुर्भावना करर प्रतिक्षण उसे लेकर विचार करते रहे नहीं ऐसा ओ ऐसा नहीं है तब तो आप नियमित रूप से उचित समय पर विधि विधान से अनुष्ठान और संध्या वंदन करते [संगीत] होंगे [संगीत] जाओ सर जाओ सर सत्य है मेरे मन में तो बहुत समय से एक दुर्भावना ही पनप रही है दुर्भावना धर्म कर्म भी भूल जाते हैं और तो और अपने गुरु के यज्ञ में उनकी सहायता के स्थान पर पर सर्पों के विनाश के लिए सर्प मेद यज्ञ करने के लिए यहां आ गए क्या आपको यह शोभा देता है क्या आपका धर्म इसकी अनुमति देता है क्या आपके गुरु यह सब जानकर प्रसन्न होंगे भूल हुई है मुझसे बहुत बड़ी भूल हुई है रक्षक के प्रति मेरा क्रोध मुझे भटकाने में सफल हुआ और मैंने महाराज जन्म जय को भी प्रतिशोध के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया और इस यज्ञ के लिए उत्साहित किया किंतु अब और नहीं आप जो भी है मेरी आंखें खोलने के लिए अनेकों धन्यवाद हम अपनी भूल समझ गए हम अपना यह यज्ञ अभी रोक देंगे इसे आगे नहीं बढ़ाएंगे [संगीत] [संगीत] आपसे मार्गदर्शन पाकर हमने यज्ञ तो रोक दिया किंतु जो हो चुका है उसे कैसे सुधारे और जो हो रहा है उसे कैसे रोके काल नाग श्वेत नाग ू मुखी नाग जल सर मरु सर इन सबके नाम की आहुति हम यज्ञ में डाल चुके हैं तो अब इस को कैसे रोके हम तो स्वयं सरप्राइज तक्षक का भी नाम ले चुके हैं अब जिन सभी नागों का सर्पों का नाम हम ले चुके हैं और जब तक स्वयं तक्षक भी इस यज्ञ में आकर भस्म नहीं होते तब तक यह यज्ञ कैसे रुकेगा ये हो क्या रहा है मेरा सिंहासन डिगने कैसे लगा देवराज ये क्या हो रहा है आपने कहा था कि आपकी इच्छा के विरुद्ध य कुछ नहीं हिल सकता तो आपका सिंहासन कैसे अस्थिर होने लगा य नहीं हो [संगीत] सकता उमित मित्र तुमय क्या कर रहे हो तुम मुझसे क्यों लिपट रहे हो छोड़ो मुझे रक ये अपने साथ मुझे क्यों खींच रहे हो छोड़ो मुझे जाने दो मुझे रक्षक छोड़ो मुझे जब तक यह यज्ञ नहीं रुकता इंद्रदेव मैं आपका सिंहासन नहीं छोडूंगा मैंने तुम्हे सिंहासन को जड़ने के लिए कहा था मुझे नहीं छोड़ो मुझे छोड़ो नहीं नहीं मित्र आप ही मेरी रक्षा कर सकते हो नहीं छोडूंगा आपको कदापि नहीं छोडूंगा अब आस्ती के यज्ञ को कैसे रोकेंगे सहायता कीजिए मेरी सहायता कीजिए राजन मुझे जाने दीजिए राजन क्षमा कीजिए क्या करूं मैं इस यज्ञ को कैसे रोकू मां मेरा मार्ग दर्शन कीजिए सहायता कीजिए मेरी पुत्र अपनी तपो शक्ति में विश्वास रखो तुम स्वयं अपनी सहायता करने में सक्षम हो पुत्र [संगीत] हे प्रभु महा गणाद पति जी आपका नाम उच्चारण कर मैंने जो कार्य आरंभ किया उसके विघ्न दूर करने की कृपा कीजिए जिससे मैं इस कार्य को समाप्त कर सकूं हे मां मंसा मुझे शक्ति दीजिए जिससे मैं आपके आशीष का मान रख सकूं कल्याण हो [संगीत] पुत्र हे यज्ञ पुरुष इस यज्ञ को और विनाश करने से रोकने में मेरी सहायता कीजिए सहायता कीजिए सहायता कीजिए रुको रुको रुको रुको मेरी रक्षा करने के लिए आपको अनेकों धन्यवाद य तक्षक तो अपने साथ मुझे भी भस्म करवा देता अब सुरक्षित हूं तो यहां से निकल जाने में ही भलाई है धन्यवाद करने के लिए आपको मुझे वचन देने होंगे और अपने जीवन उनका पालन करना होगा हे दिव्य बालक आप जो कहेंगे मैं अवश्य करूंगा तो वचन दीजिए आज के बाद आप किसी से ना कुछ छीने गे ना ही चुराएंगे मैं वचन देता हूं वचन दीजिए आज के बाद आप और आपके सर किसी भी निर्दोष को हानि नहीं पहुंचाएंगे जब तक उनके प्राणों पर ही संकट ना छा जाए अथवा कोई उन्हें हानि पहुंचाने के लिए ना आए वो किसी पर वार नहीं करेंगे मैं वचन देता तब आप और आपके सर्प और नाग सब सुरक्षित है बाला कृष आ की बाल आस्तिक की जय बाल आस्क की जय मैंने नहीं मेरी मां के आशीर्वाद ने ही सभी बाधाओं को हटाकर आपकी रक्षा की प्रथम पूज्य प्रभु महा गणाधीश क्ति से पन सुरक्षा घेरे को भेदने का उपाय सुझाया मां ने ही मुझे प्रभु गणेश जी की स्तुति का ज्ञान कराया उन्होंने ही मुझे सबल सशक्त रहने का साहस दिया और कब ज्ञान शक्ति का प्रयोग करना है और कब तपो शक्ति का इनका मार्गदर्शन भी उन्होंने ही किया हे बालक ऋषि आपकी महान माता कौन है माता मंसा है मेरी मां माता मनसा है मेरी मां माता मनसा है मेरी मां है पुत्र [संगीत] मां आपके आशीर्वाद और मार्गदर्शन से मैं अपना कर्तव्य निभा [संगीत] सका माता मंसा की जय माता मंसा की जय माता मंसा की [प्रशंसा] जय बहन मंसा अपने पुत्र को इतने भयंकर कार्य के लिए भेजकर इस यज्ञ को रोकने के लिए नागवंश की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए आपका अनेको अनेक धन्यवाद पुत्री नागों की रक्षा कर तुमने नाग माता होने का कर्तव्य निभाया है आज से तुम्हें नाग माता कहा जाएगा माता कहा जाएगा कहा जाएगा नाग माता मंसा की जय नाग माता मंसा की [संगीत] जयरी [संगीत] माता मंसा की माता मंसा की [संगीत] ज इस प्रकार तुम्हारी बहन मंसा नाग माता तो बन गई किंतु अभी भी उसे देवी की उपाधि प्राप्त नहीं ई माता दीदी ने इतने त्याग किए हलाहल विष का पान किया कैलाश का त्याग किया नागों की रक्षा के लिए अपने पुत्र को भी भेज दिया फिर भी देवी की उपाधि नहीं मिली उन्हें क्यों माता आज कैलाश में क्या हुआ पुत्री कैलाश ने आपको आमंत्रित क्यों नहीं किया सब कुशल तो है तुम निराश क्यों हो वहां कुछ अनुचित तो नहीं हुआ उचित अनुचित का ज्ञान नहीं है मुझे माता कद्र किंतु कैलाश जाकर मुझे यह अवश्य ज्ञात हो गया मुझे इसीलिए आमंत्रित नहीं किया गया क्योंकि मुझे अभी तक देवी की उपाधि नहीं मिली है पिता श्री महादेव ने मुझे स्वयं कहा किसी का जन्म उसका देवी देवता बनना निर्धारित नहीं करता मंसा भक्तों का अटूट विश्वास उनका समर्पण उनकी श्रद्धा उनकी निष्ठा उनकी सच्ची भक्ति ही हमें देवी देवता के पद पर आसीन करती है भक्त ही हमें भगवान बनाते हैं उनकी इस पुत्री को देवी बनने के लिए एक समर्पित भक्त की आवश्यकता है यदि मैं उनकी परम भक्त चंद्रधर को अपना भक्त बना सकी तभी मैं देवी कहला उन्होंने कभी किसी भी कठिनाई को अस्वीकार नहीं किया ऋषि जरत का की सभी शर्तों को सहज स्वीकार कर एक और बहुत बड़ा त्याग किया माता-पिता के प्रेम खोकर भी पति के प्रेम से वंचित होना भी स्वीकार किया मैंने और फिर जब उन्हें संतान की प्राप्ति हुई तो उन्होंने उसे भी नागों की रक्षा का कर्तव्य निभाने भेज दिया मेरे पुत्र को कैसी कठिनाइयों का किस संकट का सामना करना होगा यह ना जानते हुए भी मैंने उसे भेजने का त्याग किया निरंतर इतने त्याग किए दीदी ने फिर तो उन्हें देवी का स्थान और प्रतिष्ठा प्राप्त होने ही चाहिए इतने त्याग करने पर भी मुझे देवी बनने के लिए पिता श्री के भक्त को अपना भक्त बनाना होगा मैं बनूंगा उनका स चंद्रधर को उनका भक्त बनाने में स्वयं मैं उनका साथ दूंगा यदि इतने त्याग के पश्चात भी मुझे तेरी पद नहीं मिला तो मुझे भी किसी को अपना भक्त नहीं बनाना अब इस प्रयोजन को सिद्ध करने में दीदी अकेली नहीं रहेगी माता और ना ही बनना है मुझे ते [संगीत] देवी रूप में दीदी को मैं प्रतिष्ठित करवा कर ही रहूंगा उन्हें उनका मान सम्मान दिलवा कर रहूंगा वह सम्मान जिसके वह योग्य भी है और अधिकारी [संगीत] भी नहीं पाना मुझे कोई देवी पथ नहीं बनना मुझे देवी पुत्री जिसके पिता स्वयं देवाधि देव महादेव हो जिसकी माता स्वयं देवी पार्वती हो जिसके प्रथम भ्राता देव सेनापति कुमार कार्तिक और जिसके दूसरे भ्राता देवों में प्रथम पूज्य गणेश जी हो उसके मुख से ऐसी बातें शोभा नहीं देती तुम्हारे भीतर वह सभी गुण है जो तुम्हें देवी योग्य बनाते हैं फिर तुम इस बात को कैसे अस्वीकार कर सकती हो तुम भी उनके समान सम्मान की अधिकारी हो क्या तुम यह नहीं चाहती किसी के चाहने से क्या होता है माता कदू ना वह मुझे अपने समान समझते हैं ना ही मुझे सम्मान के अधिकारी समझते हैं था वो मुझे सत्यनारायण पूजा में अवश्य बुलाते अति उत्साह में आकर लिया गया निर्णय सदैव उस मेघ के भाती होता है जो गरजता तो है किंतु बरसता नहीं इसलिए पिता श्री के परम भक्त चंद्रधर को अपना भक्त बनाने की चुनौती को मैं वापस लेती हूं मैं वापस ले मैं वापस लेती अब मेरा देवी बनना देवी कहलाना और देवी के समान पूचा जाना महत्त्वपूर्ण नहीं नहीं महत्त्वपूर्ण है अत्यंत महत्त्वपूर्ण है आपका देवी बनना हां दीदी आपका देवी बनना ही नहीं देवी रूप में आपकी पूजा होना भी महत्त्वपूर्ण है विश्वास [संगीत] कीजिए अब ऐसे ही क्रोधित रहेगी मुझसे या अपने अनुज को अपने आश्रम में भी आने देंगी एक बहन अपने भ्राता पर कभी क्रोधित हो सकती है और वो भी आप जैसे भ्राता [संगीत] पर आपका स्वागत है [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] भ्राता [संगीत] [संगीत] प्रतिशोध की भावना सर्वथा अनुचित है क्योंकि यह व्यक्ति को दुर्बल बनाती है और उसके सत्कर्म को नष्ट करती है

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