चंद अंतिम चेतावनी दे रही हूं मैं तुम्ह क्योंकि इस बार ना तुम्ह वो दोष युग भक्ति बचा पाएगी और ना ही व पुण्य का भंडार जो रि हो चुका है चेतावनी कितनी भी दीजिए मुझे कोई चिंता नहीं मुझे अपनी भक्ति की शक्ति में विश्वास है आप में नहीं अहंकार में इतने डूब गए हैं चंद्रधर अब अपनी भक्ति के बखान के आगे उन्हें कुछ सूझ ही नहीं रहा है अपने प्रभु महादेव का नाम तक लेना भूल गए क्यों मेरा और अपना समय व्यर्थ कर रही है आप जो भी प्रयास करना चाहती है कर लीजिए मुझे कोई अंतर नहीं पड़ता मेरी भक्ति की शक्ति तो देख ही चुकी है आप इसलिए अच्छा होगा कि आप यहां से लौट जाए अन्यथा फिर से निराशा और अपमान का ही सामना करना पड़ेगा तुम्हारी सफलता में मेरा सुख है इसलिए अब पीछे मत हटना पुत्री क्योंकि यही तुम्हारा अंतिम उद्देश्य है अहंकार में डूबे व्यक्ति को ना कभी अपनी गलती दिखाई देती है और ना दूसरों की अच्छाई अब तुम्हारे भाग्य में ना भक्ति और ना पुण्य और ना ही पुण्य का फल पिताजी जो भी होना है हो जाने दीजिए देवी मेरे महादेव को छोड़कर किसी की पूजा नहीं [संगीत] करूंगा नहीं मैं नहीं कर सकता किसी भी अन्य को भगवान के रूप में स्वीकार नहीं कर सकता यह तुम्हारा कैसा हट है जादर क्यों मुझे इतना कठोर बनने पर विवश कर रहे हो क्यों इतना कष्ट सह रहे हो ना ही कुछ सुन ना ना ही कुछ समझना है मुझे चाहे आप मेरे बाकी दोनों पुत्रों को क्यों ना छीन ले वह अपने सभी पुत्रों को अपने अहंकार की बलि चढ़ाने को भी तैयार है यदि आप उन्हें मुझसे छीन भी लेंगी ना तो मेरे महादेव उन्हें मुझे वापस लौटा देंगे मैं अपनी भक्ति से विवश कर दूंगा अब ऐसा कुछ भी नहीं होगा होगा अवश्य होगा मुझे अपनी भक्ति की शक्ति पर पूर्ण विश्वास है मैं आपकी पूजा कभी नहीं [संगीत] करूंगा सोच लो चंद्रधर अब तुम्हारे पास केवल अंतिम दो पुत्र शेष [संगीत] है [संगीत] लीजिए पिताश्री किंतु हम तो युवा है हमें कुछ नहीं होगा इसलिए यह फल तो आप ही खाएंगे चंद्रधर तुम्हारे पुत्र यदि तुम्हें वापस चाहिए तो मैं उन्हें लौटा सकती हूं किंतु उसे प तुम्हें अपना यह हड त्यागना होगा वो तो लौटेंगे ही मेरे पास मेरे प्रभु शिव स्वयं लौटा आएंगे मेरे पुत्रों को मुझे और मैं अपने विश्वास में अटक रहूंगा मेरे प्रभु महादेव ही एक मात्र भगवान है और किसी भी भगवान को मैं अस्वीकार करता हूं अस्वीकार करता उनकी पूजा करना क्योंकि मैं ही प्रभु महादेव का महान भक्त हूं मुझसे बड़ा कोई भक्त नहीं है मेरे प्रभु [प्रशंसा] महादेव नहीं चंद्र यह एक भक्त की शब्द हो ही नहीं सकते यह तुम्हारे अहंकार के विकार के शब्द है तुम्हारे अहंकार ने तुम्हारे भक्ति को क्षीण कर दिया है वो भक्ति जिससे तुम नौका की अभी तक रक्षा हो रही थी अहंकार है मेरा दुबई सही पर मैं उस पर ही अड़क हूं अहंकार है मेरा दुबई सही पर मैं उस पर ही अड़ [संगीत] हू हटी है चंद्रधर किंतु मैं मैं हटी नहीं हो सकती मुझे उसे बचाना ही होगा [संगीत] मुझे ज्ञात था मेरी भक्ति मुझे उसका सुफल अवश्य देगी ये आपने भेजा है देवी आप की सहायता नहीं चाहिए मुझे मेरी भक्ति की शक्ति मेरी रक्षा के लिए बहुत है [संगीत] नाग माता की आंखों में अश्रु क्या हुआ पुत्री तुम इतनी दुखी क्यों हो भक्त में यदि विनय ना हो केवल अहंकार हो तो वो भक्ति नहीं हट बन जाता है जिसका दुष्परिणाम होता है हट का परिणाम कभी भी अच्छा नहीं होता ओ नम शिवाय पिता श्री ध्यान में लीन है अर्थात वह अभी भी कुछ नहीं करेंगे उनके भक्त चंद्रधर डूब गए तो दीदी मनसा स्वयं को क्षमा नहीं कर सकेंगी ना ही उनके आराधी उनकी सहायता करेंगे ना ही वह दीदी मनसा को सहायता के लिए पुकारेंगे जिसका परिणाम भयंकर ही होने वाला है ओम नमः [संगीत] शिवाय नहीं पुत्री वो एक बार तुम्हारा अपमान कर चुका है इसीलिए उसकी सहायता करने का प्रयास करना अपने और अपमान को आमंत्रित करना होगा मैं किसी को भी इस प्रकार मृत्यु के मुख पर जाते हुए नहीं देख सकती और वो भी महादेव का परम भक्त नहीं माता नहीं ओम नम शिवाय [संगीत] [संगीत] [संगीत] है [संगीत] अद्भुत दीदी मंसा ने ना केवल में डूबे चंद्रधर के प्राणों की रक्षा की वरन उन्हें उनके प्रभु महादेव की नगरी उज्जैन भी पहुंचा दिया संभवत उज्जैन में महाकाल के दर्शन से उन्हें सद्बुद्धि मिल [संगीत] जाए [संगीत] उसे क्या भ है संकट और काल का जो भक्त हो स्वयं महाकाल का अब तो विश्वास हो गया ना आपको मेरे महादेव मेरा अंत नहीं देख सकते विवश हो गए मेरी सहायता करने के लिए मेरी [संगीत] सहायता भ्रम में रहने वाले को कितने भी प्रमाण मिल जाए किंतु उनका भ्रम भंग नहीं होता आना ही पड़ा ना मेरे महादेव को मेरी सहायता के लिए आना ही [संगीत] पड़ा मेरे [संगीत] पुत्र किंतु मेरे पुत्र उनकी रक्षा क्यों नहीं की प्रभुने मेरे पुत्रों का अंत कैसे सेलिया [संगीत] प्रभु चंद्रधर की यह दशा उसकी ये पीड़ा मुझसे देखी नहीं जा रही ये कैसी चुनौती है कैसी दुविधा है ये कठोर बनकर उसका अहंकार भंग करो देवी पद प्राप्त करने के लिए उसे अपनी पूजा करने के लिए विवश करू या फिर उस पर दया करो उसका कष्ट दूर करो क्या करूं मैं माता चंद्रधर से अधिक दुख तो दीदी मंसा को उन्हें दुखी देखकर हो रहा है कभी-कभी परीक्षा देने से अधिक कठिन परीक्षा लेना हो जाता है पुत्री स्वयं को इतना कष्ट देना उचित नहीं चंद्रधर के साथ जो हुआ उसके लिए वह स्वयं उत्तरदाई है आप निश्चिंत रहिए पिताजी आपके आशीर्वाद से आपके पुत्र नौका खने में सक्षम पिताश्री भीग रहे हैं भ्राता हमें उन्हें इस बौछार से सुरक्षित रखना होगा लीजिए पिताश्री आप य दुशाला उड़ लीजिए य कैसा किया मेरा य जीवन तो बच गया कि तु जिन पुत्र में मेरे प्राण बसते उन्ह ो कर झे स प्राण विहीन हो [संगीत] [संगीत] गया मेरा सब कुछ छीन कर अब क्या लेने आई [प्रशंसा] है मैं सब बस हो चुका नहीं चंद्रधर इस बार मैं तुमसे कुछ लेने नहीं अभी तो अपनी ममता तुम्हें देने आई हू पुत्र इसे स्वीकार करलो यदि तुम्हें सब कुछ खोने का दुख है तो मुझे भी तुमसे सब कुछ छीनने का दुख है [संगीत] पुत्र मैंने क्या खोया है ये आप कहां समझ सकती हैं समझ सकती हूं मैं क्योंकि मैं भी एक मां हूं संसार के कल्याण के लिए अपने हृदय को कठोर कर संकट का सामना करने के लिए अपने पुत्र को भेजा था पुत्र वियोग का दुख पीड़ा मैं समझती हूं आपने अपने पुत्र को सु इच्छा से भेजा थाना पर मेरे पुत्र मेरे पुत्र मुझसे छीन लिए गए मेरा दुख आपके दुख से भिन है और रही बात ममता की तो आपके मुख से शोभा नहीं देती पुत्र विहीन हो गया हूं मैं आपके [संगीत] कारण ठोकर खाकर तो कोई भी व्यक्ति कोई भी व्यक्ति समझ जाता है चंद्रधर तो तुम क्यों नहीं समझ रहे हो विनती है तुमसे चंद्रधर ये जो तुम कर रहे हो ये भक्ति नहीं ये तुम्हारा अहंकार और हट है और तुम्हारे हट और अहंकार के भेद चढ़े हैं तुम्हारे पुत्र मैंने तुम्हें ऐसा कभी नहीं कहा था कि तुम प्रभु देवाधि देव महादेव की भक्ति छोड़ दो जिस प्रकार हमारे घर पर आए सभी अतिथियों का हम समान रूप से आदर सत्कार करते हैं उसी प्रकार मैं तो बस इतना ही चाहती हूं कि तुम मेरे अस्तित्व को स्वीकार कर मेरी भी पूजा कर लो लगता है आप इतना तो समझ गई होंगी कि मुझे भय भीत कर मुझे कष्ट देकर आप मेरी मेरी भक्ति नहीं पा सकती अर्थात मेरी महान भक्ति को आप पराजित नहीं कर सकी मैं समझ ग मेरे पुत्र मेरे पुत्र फिर से प्राप्त होंगे मुझे मेरे महादेव मुझे अवश्य लौट आएंगे अवश्य लौटाए उन्हें मेरे प्रभु की नगरी उ जैन पहुंच चुका हूं मैं आज नहीं तो कल मेरी इच्छा पूर्ण होगी मैं यहां से खाली हाथ नहीं जाऊंगा मैं य से क नहीं जा ओम नम शिवाय विश्वास नहीं होता यह मेरा अब भी तिरस्कार करके चला [संगीत] गया पुत्री स्वर्ण को अग्नि में डालने वाला सुनार कभी दुखी नहीं होता क्योंकि तपक और निखरता है यही तुम्हें इस भक्त चंद्रधर के साथ करना है यह भी कदाचित अपने कष्ट रूपी अग्नि में तपक अपने हट और अहंकार जैसे विकारों से मुक्त होकर और निखरे इसीलिए इसके साथ कठोर होकर तुम उस पर उपकार करोगी और यही तुम्हारी उस पर दया भी [संगीत] होगी आ जाइए ताजे ताजे फल लीजिए आइए आइए आइए ओ भाई साहब आइए आइए ताजे ताजे फल ले लीजिए आइए आइए आइए आइए सब्जी लीजिए ताजी ताजी सब्जिया है आइए आइए आ जाइए आ जाइए आ जाइए व भाई साहब आइए ताजे ताजे फल ले लीजिए आइए आ जाइए फल फल वाले भाई साहब मैं एक भूखा प्यासा शिव भक्त कृपया करके मुझे एक फल दे [संगीत] दीजिए चले जा यहां से दुष्ट जाओ यहां से दूर हो जाओ चले जाओ अचानक क्या हुआ इस फल वाले को मुझे दुष्ट क्यों बकारा इसने आ जाओ आ जाओ ताजे फल ले लो आ जाओ आ जाओ आ जाओ भैया आ [संगीत] जाओ [संगीत] [संगीत] [संगीत] ज साब साब साब साब [संगीत] साब नाग माता देवी मंसा मुझे ज्ञात है कि आप ही है जो यह सब कर रही हैं इसलिए कोई मेरी सहायता नहीं कर रहा है कोई कोई मेरे निकट नहीं आ रहा है ये क्यों कर रही है आप ये सा सामने आइए उत्तर दीजिए सामने आइए देवी मंसा सामने आइए देवी [संगीत] मंसा पर आप मुझे जितना भी विवश कर ले मैं चंद्रधर शिव भक्त हूं और शिव भक्त ही रहूंगा आप मेरी भक्ति को भंग नहीं कर सकते अगर आपको लगता है कि मेरे प्रभु की साहिता मुझ तक पहुचने से रोक सकते है आप तो ये आपकी भूल है भूल है आपकी और ये यह मैं प्रमाणित करके रहूंगा अब सारी उज्जैन नगरी सारी उज्जैन नगरीय साक्षी बनेगी और यह देखेगी कि मेरे प्रभु शिवशंकर महादेव शंभू कैसे विवश होंगे अपने इस भक्त की सा सहायता करने के लिए उसे क्याह संकट और काल का जो भक्त है स्वयं महाकाल को स्वयं महाकाल को अब मैं यही बैठा रहूंगा जब तक महादेव स्वयं मेरी सहायता नहीं करते ओम नमः शिवाय किंतु माता पिता श्री दीदी मंसा को दिया वचन कदापि भंग नहीं करेंगे व्यर्थ है उनका यह हट मेरे वचन व्यर्थ नहीं होंगे प्रण लेता हूं मैं ना मैं यहां से लूंगा ना ही पलके ऊा जब तक मुझे प्रभु महादेव के दर्शन नहीं प्राप्त होते और मुझे विश्वास है मेरी भक्ति की शक्ति इतनी महान है कि वो स्वयं महादेव को यहां आने के लिए विवश कर देंगे प्रण लेता हूं मैं ना मैं यहां से लूंगा कि वो स्वयं वहा ब यहां आने के लिए करे जब तक मुझे प्रभु महादेव के दर्शन नहीं प्राप्त [संगीत] होते ओम नमः शिवाय ओम नम शिवाय ओ नम शिवाय नमय म म म मना म मव च ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नम ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय आएंगे ओ नम श मेरे प्रभु महादेव अवश्य आएंगे नम शिवाय उन्हे आना होगा मेरे प्रभु महादेव मुझे दर्शन देंगे ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शम शिवाय ओम नमः [संगीत] शिवाय पुत्री मंसा तुमने कितने दिनों से अन्न का एक दाना भी नहीं खाया आज तो खा लो ऐसे कब तक निराहार रहोगी तब तक जब तक चंद्रधर भोजन ग्रहण नहीं करता जब चंद्रधर भोजन ग्रहण करेगा तभी मैं भोजन ग्रहण करूंगी प्रभु महादेव का महान भक्त मेरे कारण भूखा पहसा है भला मैं कैसे भोजन ग्रहण करू नहीं पुत्री तुम्हारे कारण नहीं वो अपने अहंकार के कारण भूखा है तुम उसके कारण स्वयं को क्यों कष्ट दे रही हो जो कष्ट मुझे चंद्रधर की दशा को देखकर हो रहा है उसके समक्ष मेरा कष्ट कुछ भी नहीं है माता तब हमें उनका कष्ट दूर कर देना चाहिए दीदी [संगीत] मंसा करना तो मैं भी वही चाहती हूं गणेश किंतु हटी है वो मेरे हाथों से जल की बू तो क्या अमृत भी स्वीकार नहीं है उसे हां दीदी क्योंकि अभी खोने को कुछ बचा ही कहां है उनके पास इसलिए वह तो अपने प्राण तक देने के लिए तत्पर है किंतु वह भूल रहे हैं उनकी पत्नी के गर्भ में उनकी एक और संतान है उनका स्मरण कराना होगा उन्हें कि यदि वह लौटेंगे तो उन्हें पुनः पिता होने का सुख प्राप्त होगा संभव है तब उनका मन बदल जा अर्थात भ्राता मुझे उसे उसकी पत्नी से मिलाने का उपाय सोचना होगा किंतु कैसे भ्राता मैंने जितनी बार उसकी सहायता करने की प्रयास किया उतनी ही बार उसने अस्वीकार कर दिया नहीं दीदी उनके परिवार से मिलाने का प्रयास आपको नहीं करना है उसके लिए तो उनके बचपन का मित्र ही पर्याप्त है और वह तो उज्जैन नगरी में ही है उनका नाम है [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] साहा अरे प्र नहीं नहीं कितनी बार कहा बारबार मत उठो प्र मैं तो बस आप ही की सहायता करना चाहती थी किंतु कुछ करने के लिए है ही नहीं सभी कार्य तो हो गए नौका भी तैयार है हम आज ही चंदनगर की यात्रा भी आरंभ कर सकते हैं बस एक ही शंका है आप गर्भवती है और यह यात्रा करना आपके लिए उचित है कि नहीं नहीं नहीं स्वामी आप इस पर फिर से विचार मत कीजिए मुझे अपने में देवी मां के मंदिर जाना है क्योंकि उन्हीं के आशीर्वाद से ही तो मुझे स्वस्थ शिशु प्राप्त होगा किंतु यह मिलेंगे कैसे और चंद्रधर को अपने साथ ले जाएगा कैसे तुम्हें तो भली भाति ज्ञात है चंद्रधर ने प्रण लिया है जब तक महादेव नहीं आते वह अपने स्थान से कहीं भी नहीं जाएगा प्रण लेता हूं मैं ना मैं यहां से लूंगा ना ही पलके झप काऊंगा जब तक मुझे प्रभु महा देव के दर्शन नहीं प्राप्त होते मैंने भी आपको वचन दिया है दीदी मैं देवी की उपाधि पाने में आपकी सहायता करूंगा इसलिए अब चंद्रधर को उनके मित्र साहा से मिलाना मेरा उत्तरदायित्व है मेरे अनुज मुझे तुम पर पूर्ण विश्वास है किंतु तुम ये कैसे करोगे तुम चंद्रधर का हट तो जानते ही हो किंतु दीदी उन्होंने यह तो स्वीकार किया था ना कि मैं या कोई भी और भगवान महादेव के ही रूप है तो अब उन्हें इसका अनुभव भी हो जाने दीजिए अनुज गणेश क्या करने जा रहा है आना ही होगा महादेव आपको आना ही होगा ओम नमः [संगीत] शिवाय ओम नमः [संगीत] शिवाय ओम नमः [संगीत] [संगीत] शिवाय हर हर [संगीत] महादेवम मेरे महादेव मेरे प्रभु आ गए बुद्धि के देवता अद्भुत हो तुम और अद्भुत है तुम्हारी य लीला ब्राह्मण देवता पधारी भोजन के लिए पधारी है हर हर [संगीत] महादेव [संगीत] [संगीत] [संगीत] हठी व्यक्ति अपने हठ में सत्य को नहीं देख पाता और अपना ही अहित कर लेता है
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