Wednesday, 31 December 2025

मनसा देवी क्रोध में पहुँची कैलाश Ishita Ganguly Malkhan Vighnaharta Ganesh Ep 785 Pen Bhakti

[संगीत] पिता श्री ने संकेत से माता को शांत कर दिया इसका क्या अर्थ है संकट का आभास होते हुए भी वह उसे दूर करने का उपक्रम क्यों नहीं कर रहे [संगीत] हैं मुझे क्षमा कर दो बहन वल्ली नहीं दीदी क्षमा तो मुझे मांगनी चाहिए नहीं वल्ली तुम छोटी हो और मैं बड़ी जैसा मैंने व्यवहार किया तुम्हारे साथ मुझे कदापि नहीं करना चाहिए तुम्हें संभालने के स्थान पर मैं तुमसे स्पर्धा करने लगी नहीं दीदी मैं छोटी हूं आपका आदर करना मेरा कर्तव्य है भूल तो मुझसे भी हुई है नहीं बल्ली भूल मुझसे हुई है मेरी गलती है नहीं बहन वल्ली मुझे क्षमा कर दो गलती [संगीत] [प्रशंसा] हुई हमसे बहुत बड़ी भूल हो गई और अब अब हम अपनी भूल भी समझ चुके और ऐसी भूल दोबारा ना करने का निर्णय भी ले [संगीत] चुके जो भी होता है भले के लिए ही होता है और मुझे पूर्ण विश्वास है और आज के बाद तुम दोनों के बीच ऐसा संबंध स्थापित होगा जो आपसी विश्वास और आदर का उदाहरण बनेगा आओ अब निश्चिंत होकर प्रसाद ग्रहण [संगीत] करो मुझे माता एवं पिता श्री से पूछना चाहिए कि कौन है यह देवी जो इतने क्रोध में भरी कैलाश की ओर बढ़ रही है अनर्थ हो गया मन क्रोध से भरी जगत कारू आ रही है माता कौन है ये जरत [संगीत] कारू ब्रह्मांड में आज जो भी विशेष है वो उपस्थित थे किंतु केवल मैं हूं नहीं कैलाश पुत्री जिसकी उपेक्षा की है कैलाश ने मुझे ही कोई आमंत्रण नहीं आया ऐसा क्यों क्यों हुआ ऐसा प्रणाम देवी मैं मैं आपसे परिचित नहीं आप कौन है मुझे अपना परिचय देने और भीतर आने की कृपा कीजिए प्रथम पूज्य पार्वती नंदन गणेश मेरा वास्तविक परिचय तो देवाधि देव महादेव से ही आपको मिल जाएगा आप उन्हीं से पूछ लीजिए पुत्री पुत्री गणेश यह तुम्हारी बहन है मंसा मंसा कितना प्यारा नाम है हमारी प्रिय पुत्री हां मैं पुत्री हूं जगत पिता और जगत माता की पुत्री किंतु प्रिय पुत्री हय मुझे ज्ञात नहीं हां मुझे अवश्य ज्ञात है कि मैं वो पुत्री हूं जो कैलाश से बाहर रहने पर विवश है हां मैं वो पुत्री हूं जिसे कैलाश ने बुला दिया है मैं वो पुत्री हूं जिसे शुभ आयोजन से वंचित रखा गया है मैं वो पुत्री हूं माता जिसका अपने ही परिवार में कोई स्थान नहीं है ऐसा कोई क्रोध नहीं जिसे मां की ममता ना पिघला सके निश्चय ही मैं मनसा को अपने स्नेह से मना [संगीत] लूंगी आओ पुत्री [संगीत] नहीं मां मेरे पग कैलाश तक पहुंच चुके हैं किंतु इसके आगे नहीं पेंगे मैं भीतर नहीं आऊंगी मां कदापि नहीं क्योंकि मुझे ज्ञात है यदि बिना निमंत्रण के एक पुत्री घर लौटे तो उसके साथ कैसा व्यवहार किया जाता है भूतकाल में कैलाश इसका ताप सह चुका है और मुझे ज्ञात है कि माता सती के साथ क्या हुआ था किंतु प्रश्न पूछने का अधिकार तो संसार में हर पुत्री का ही होता है ना माता तो उसी अधिकार से मैं कैलाश के द्वार से ही पूछूंगी कि मुझसे ऐसी कौन सी भूल हो गई कि मेरा ऐसा निरादर किया गया इस प्रकार तिरस्कार किया [संगीत] गया माता एवं पिता श्री दोनों शांत हो गए कुछ कह क्यों नहीं रहे [संगीत] [संगीत] हैं यहां ऐसा सन्नाटा क्यों छाया हुआ है मेरे प्रश्नों का उत्तर कोई क्यों नहीं दे रहा है [संगीत] आपकी एक पुत्री अशोक सुंदर और दूसरी पुत्री ज्योति भी यहां है आपने दोनों पुत्रियों को आमंत्रित किया है किंतु मुझे मुझे आमंत्रित नहीं [संगीत] किया यह दोनों देया यह माता एवं पिता श्री की पुत्रियां है अर्थात मेरी बहने हैं यह दोनों यहां है तो माता एवं पिता श्री बहन मनसा को बुलाना कैसे भूल गए मुझे ही कह दिया होता मैं ही निमंत्रण दे आता उन्हें जगत पिता महादेव आपकी पुत्री मंसा आपकी उत्तर की प्रतीक्षा कर रही है आपके लिए तो प्रत्येक संतान महत्त्वपूर्ण है ना मैं भी तो आपकी पुत्री हूं तो मेरे साथ ये भेदभाव क्यों ये अन्याय क्यों पिताश्री उत्तर दीजिए मुझे क्या मैं आप दोनों की पुत्री नहीं नहीं पुत्री ऐसा मत कहो पुत्री मैं आपकी पुत्री हूं ना माता तो कहिए मेरे साथ य भेद भाव क्यों कुछ तो कहिए उत्तर दीजिए आप दोनों कुछ कह क्यों नहीं रहे यह तो मैं भी सोच रहा हूं कि माता एवं पिता श्री कुछ कह क्यों नहीं रहे हैं बहन मंसा का क्रोध शांत क्यों नहीं कर रहे [संगीत] हैं माता ने सबको निमंत्रण देने का कार्य मुझे सौंपा था किंतु मुझे बहन मंसा का भान ही नहीं था और इसलिए मैंने उन्हें नहीं बुलाया संभव है यह मेरी ही मुझसे क्या भूल हुई ऐसा कौन सा दोष किया है मैंने जिसके कारण मेरा ऐसा निराद हुआ माता दीदी मंसा क्षमा करें भूल आपसे नहीं मुझसे हुई है सभी देवी देवताओं को आमंत्रित करने का दायित्व मेरा था और मुझे ज्ञात ही नहीं था कि जो सर्व ज्ञाता है बुद्धि दता है प्रथम पूज्य है जो विघ्न हरता श्री गणेश है उन्हे क्या ज्ञात नहीं था मैं भी तो सुनू क्या आपको यह नहीं ज था श्री गणेश कि देवी मनसा आपकी एक बहन है मुझे तो लगा था कि कैलाश केवल मुझे निमंत्रित करना भूल गया क्यक क्योंकि मुझसे ही कोई भूल हुई होगी किंतु शूल समान चुभने वाला सत्य तो मुझे अब ज्ञात हुआ कि आपने अपने परिवार की पूजा में केवल देवी देवताओ को ही आमंत्रित किया है किंतु सत्य तो यह है कि मुझे देवी देवताओं की श्रेणी में रखा ही नहीं जाता है मुझे देवी माना ही नहीं जाता है इसलिए मुझे आमंत्रित नहीं किया गया दीदी आप मेरे शब्दों का उचित अर्थ नहीं समझी नहीं गणेश अब मैं सब समझ रही हूं सब जान चुकी हूं सभी देवी देवताओं को आमंत्रित किया गया केवल मुझे नहीं किया गया मेरा अर्थ वो नहीं था दीदी अर्थ यह है कि कैलाश मुझे देवी नहीं मानता तो निमंत्रण किस बात का अब मैं जान गई हूं कि यहां हुआ क्या [संगीत] है मैं ये तो समझ गई कि मुझे यहां आमंत्रित क्यों नहीं किया गया किंतु ये नहीं समझे कि कुमार कार्तिके जो केवल देवता ही नहीं देव सेनापति भी है श्री गणेश प्रथम पूज्य है यहां तक कि आपकी आंशिक पुत्र मंगल भी मंगल देव है और कल वृक्ष से प्राप्त अशोक सुंदरी और आपकी दूसरी पुत्री ज्योति भी देवया है तो मैं क्यों नहीं जो स्थान उन दोनों को प्राप्त हुआ है वो मुझे क्यों नहीं क्या कारण है पिताश्री क्या जिस प्रकार मेरा जन्म हुआ था क्या इसीलिए मेरे साथ ऐसा पक्षपात किया जा रहा है या फिर इसलिए कि मेरा पालन पोषण किसी और ने किया है कैसे हुआ था इनका जन्म और पालन पोषण माता एवं पिताश्री ने क्यों नहीं किया किसी अन्य ने क्यों किया उत्तर दीजिए माता पिताश्री उत्तर दीजिए देवाधि देव महादेव और मां पार्वती के केवल एक पुत्री को केवल एक पुत्री को देवी नहीं माना जाता ऐसा क्यों [संगीत] माता किसी का जन्म उसका देवी देवता बनना निर्धारित नहीं करता [संगीत] मंसा भक्तो का विश्वास उनका समर्पण उनकी श्रद्धा उनकी निष्ठा उनकी सच्ची भक्ति ही हमें देवी देवता के पद पर आसीन करती है अन्यथा उन सच्चे भक्तो के बिना तो हम भी देवता नहीं किंतु तुम मेरी पुत्री हो और पुत्री के रूप में तुमने जो अपने पिता के लिए किया व अदभुत है अतु है इसमें किसी को कोई भी संदेह नहीं ऐसा क्या किया था मंसा दीदी ने जो इतना अद्भुत था मैं समझ गए पिता मैं आपकी पुत्री हूं किंतु देवी नहीं बन पाई यदि ऐसा है तो आपकी यह पुत्री देवी का स्थान पाकर रहेगी मेरी भी पूजा होगी मेरे भी भक्त होंगे पिताश्री पुत्री यह इतना सरल नहीं कहने भर से नहीं सच्चा भक्त पाने से ही यह संभव होगा तो बताइए पिता सच्चा भक्त कौन है कैसा होता है जो सदा धर्म के मार्ग पर चले वही सच्चा भक्त है जो निष्ठा के साथ सदाचार का पालन करे कराग्रे वसती लक्ष्मी कर मध्य सरस्वती कर मूले तू गोविंदम प्रभाते कर दर्शन [संगीत] ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय जो नियमित रूप से वेदों द्वारा निर्धारित वैदिक दिनचर्या का पालन करें जो हर अवस्था में सदा ईश्वर के प्रभुत्व में आस्था [संगीत] रखे जो अपने सभी दायित्वों को निभाते हुए भी पूजा पाठ और धर्म कर्म से पीछे ना [संगीत] हटे ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय [संगीत] सच्चे भक्त की यही पहचान है कि अपने जीवन के हर क्षण में अपने कर्तव्य और अपने आराध्य की भक्ति में बिना कोई भूल किए संतुलन बनाए [संगीत] रखे जैसे मेरा भक्त [संगीत] चंद्रधर प्रभु मेरे प्राण या ना रहे परंतु आपके जल अभिषेक का नियम कभी नहीं हो सकता बस अपने भक्त पर इतनी कृपा बनाए [संगीत] रखिएगा अपने सांसारिक कर्तव्यों का पालन करते हुए व प्रतिदिन इस कठिन चढ़ाई को चढ़कर मेरी पूजा और अभिषेक करना नहीं भूलता ऐसे ही भक्तो की अटूट भक्ति हमें देवता बनाती है पुत्री तो ठीक है पिता आपका परम भक्त चंद्रधर मेरी भी अटूट भक्ति करे अटूट भक्ति करे इसकी भक्ति से ही मुझे देवी का स्थान प्राप्त होगा यह तो मेरे लिए भी अति प्रसन्नता की बात होगी पुत्री किंतु तुमने मेरे ऐसे भक्त का चुनाव किया है जिसकी भक्ति के मार्ग को बदलना किसी साधारण प्राणी द्वारा क्षण भर में सागर लागने के समान है आपका भक्त मेरा भी भक्त बन सकता है इसमें आपको इतना संदेह क्यों है पिताश्री संदेह तुम पर नहीं पुत्री विश्वास है मुझे अपने भक्त चंद्रधर पर उसकी अटूट भक्ति पर उसके समर्पण पर समर्पण है पिताश्री किंतु ऐसी परीक्षा जो एक व्यक्ति को टूटने की सीमा तक ले जाए क्या तब भी वो अपनी भक्ति पर स्थिर रह [संगीत] पाएगा प्रभु यह आप ही की कृपा का प्रसाद है कि मैं हर दिन आपका जलाभिषेक कर पाता हूं और आगे भी इसी प्रकार करता रहूंगा ओम नमः शिवाय हर हर महादेव हर हर महादेव देवाधि देव महादेव की जय हो हर हर महादेव देवाधि देव महादेव की जय [संगीत] हो [संगीत] नाग [संगीत] देवता पिता श्री आपने तो कहा था कि आपका यह परम भक्त आपके लिए कुछ भी कर सकता है किंतु यह तो सर्प देखकर असमंजस में पड़ गया है तनिक सी कठिनाई से विचलित होकर य अवश्य आपकी पूजा किए बिना ही चला [संगीत] जाएगा प्रणाम नाग देवता यदि आप मेरे प्राण लेना चाहते हैं तो ले लीजिए बस पहले मुझे अपने प्रभु की पूजा और जलाभिषेक संपन्न करने [संगीत] दीजिए हे नाग देवता यदि मुझे डसने की इच्छा है तो पूर्ण कर लीजिए और मुझे आगे बढ़ने के लिए थोड़ा स्थान तो दीजिए भूल से मेरा पग आप पर पड़ गया तो आपको कष्ट [संगीत] होगा [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] जो मैंने सोचा उसके विपरीत यह तो आगे बढ़ता जा रहा है [संगीत] नाग देवता तो अत्यंत कुपित लग रहे हैं मुझे ही संभलकर चलना होगा जिससे मेरा पांव इन पर ना पड़े नहीं मेरा जल कलश गिरे प्राण जाए तो जाए पर यह जल नहीं लकना चाहिए जो मैं ने प्रभु के अभिषेक के लिए लाया ओम शंकराय नमः ओम नमः [संगीत] शिवाय अपने प्राणों की चिंता ना कर मेरा ये भक्त मेरी पूजा और उसके मार्ग में पड़े सर्पों केलिए चिंतित [संगीत] है इसीलिए मेरा महान भक्त है किंतु पिता श्री आपके सभी भक्त यह भली भाति जानते हैं सर्पों पर आपकी विशेष कृपा है तो आपका यह भक्त भला सर्पों से क्यों विचलित होने लगा बाधाएं कितनी भी आए मुझे तो अपने प्रभु के पास जाना ही है उनकी पूजा तो करनी ही है ओम नमः [संगीत] शिवाय क्या पिताश्री अपने भक्त चंद्रधर की एक और परीक्षा लेने जा रहे [संगीत] हैं ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय अब यह तीव्र वायु प्रवाह कहां से [संगीत] उत्पन्न [संगीत] य क्यों कर रहा है अपने जीवन की रक्षा के लिए वहां से भागता क नहीं हे ऋषभ महाराज आपके मार्ग में आने के लिए मैं क्षमा चाहता हूं किंतु मेरे प्रभु को जल चढ़ाए बिना मैं लौट भी नहीं सकता ओम नमः शिवाय प्रभु अगर आज मैं आपका जल अभिषेक करने में असफल रहा तो क्षमा कीजिएगा [संगीत] मुझे ओम नमः शिवाय ओम नमः [संगीत] शिवाय नम शिवाय [संगीत] [संगीत] आपका कोटि कोटि धन्यवाद प्रभु अब ये भक्त आपकी पूजा कर पाएगा ओम नमः शिवाय वह इसलिए प्रसन्न नहीं है कि वह संकट मुक्त हुआ अभी तो इसलिए प्रसन्न है कि व मेरा जल अभिषेक कर सकेगा कदाचित पिता श उचित ही कह रहे [संगीत] हैं प्रभु धन्य है आपका परम भक्त चंद्रधर किंतु शिव भक्त को भला नंदी जी से कैसा भय नहीं पिता श्री अभी भी यह प्रमाणित नहीं हुआ है कि आपका यह परम भक्त उतना महान है जितना कि आप समझते हैं अब दीदी मनसा को भला क्या संदेह हो सकता है मुझे संदेह है पिताश्री क्योंकि नंदी जी तो आपके वाहन है और एक वृषभ को अपनी ओर आते हुए देख चंद्रधर इसलिए स्थिर रहा होगा क्योंकि उसे विश्वास होगा कि आपका वाहन उनकी भक्ति में कभी भी विघ्न नहीं [संगीत] डालेगा [संगीत] अब तो मैं निकट पहुंच ही गया शीघ्र ही मैं अपने प्रभु के सामने पहुंच जाऊ ओ नमः शिवाय यह तो ज्वालामुखी फटने का संकेत है आज तो निरंतर बाधाएं आ रही है इससे पहले कि ये ज्वालामुखी मेरे मार्ग की बाधा बने मुझे शीघ्र ही वहां पहुंचना होगा ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय अद्भुत है दीदी ज्योति की शक्ति और अद्भुत है भक्त चंद्रधर की भक्ति ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओ नम हे प्रभु मुझे बस इतना समय दीजिए कि मैं आप तक पहुंच पाऊ फिर मेरे प्राण भी चले जाए तो मुझे कोई चिंता नहीं ओम नमः शिवाय अब तो किसी भी समय ज्वालामुखी का प्रकोप होगा मुझे शीघ्र ही पहुंचना ओम नमः शिवाय विपदा सामने हो और प्राणों पर बनाए ऐसी कठिन परिस्थिति में भी केवल और केवल अपने आराध के दर्शन का प्रयास एक सच्चा भक्त ही कर सकता है तो क्या यह चंद्रधर अपनी भक्ति में अपने प्राण भी अर्पित कर [संगीत] देगा [संगीत] उत्तम व्यक्ति वह है जो ऊंच नीच धनी निर्धन का भेद त्याग कर सबको समान दृष्टि से देखता है

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