Wednesday, 31 December 2025

बाली ने हनुमान पर तीर चलाया Ishant Sankat Mochan Mahabali Hanuman 314 Pen Bhakti

[संगीत] यह मायावी अस्त्र नहीं राक्षसी अस्त्र है मुझे दुख है केसरी जी कि मेरा पुत्र ऐसा कर रहा है और मैं विवशता से देखने के अतिरिक्त कुछ नहीं कर पा रहा हूं मर्कट अब तुम्हारा अंत निकट है अंतिम बार अपने प्रजन को देख लो कुछ क्षण के पश्चात ही यह बाण तुम्हारे वक्ष स्थल को भेद देगा हो [संगीत] [संगीत] अब देखता हूं कैसे बचते हो कितना भी उछल लो मर्कट परंतु आज तुम बच नहीं सकोगे बस अब बहुत प्रहार कर लिया आपने वाली भैया वाली भैया अब नष्ट होगा आपका यह मायावी [संगीत] अस्त्र [संगीत] या [संगीत] [संगीत] इतना सरल नहीं है इसे वेदना संभालो इसका वार [संगीत] [संगीत] आ [संगीत] मायावी अस्त्र महागा आगने अस्त्र रूप प्रकट करो मर्कट अब होगा तुम्हारा अंत ये क्या ये मायावी अग्नि का बल ये क्या ये मायावी कपाल की अग्नि तो तप कर रही है मुझे अब समझे मर्कट बर्दानी शक्तियों के बिना असहाय हो गए हो तुम ये अग्नि तुम्हें जला देगी शूल तुम्हें भेद देंगे खड़क तुम्हारी दे को विभक्त कर देगी मायावी शक्ति वरदान के बिना मेरा हनुमान इन भीषण कपाल की अग्नि का सामना कैसे कर पाएगा हे प्रभु मेरे पुत्र की रक्षा कीजिए उसे उसकी वरदानी शक्तियां दोबारा प्राप्त हो जाए लंकेश उस वानर बालक की वरदानी शक्तियों को संभालने के योग्य नहीं एसी की दे नर बालक की शक्तियों का लाभ उठाने के लिए भेजा था मैंने इस ब्राह्मण को किंतु ये कोई रक्षा करो कोई बचाओ सहायता करो हमारी कोई रक्षा करो रक्षा करो ये कैसी धनिया है कौन पुकार रहा है मुझे कौन चिल्ला रहा है मैं इसे सहन नहीं कर सकता य तीव धनि में सहन नहीं कर सकता देवेश्वर हनुमान की शक्तियां पाकर विक्षिप्त से हो गए हैं य विप्र इन्होंने तो अपने कर्ण भी बंद कर लिए देवेश्वरी विशेष शक्तिया उन्हीं को दी जाती है जिन्ह विशेष दायित्व निभाने होते हैं उ संसार के प्राणियों को संकटों से मुक्त कराना है इसलिए हनुमान को जो शक्तियां प्रदान की गई थी उनमें एक शक्ति ऐसी भी थी जिससे हनुमान संकट ग्रस्त व्यक्ति की गुहार को कहीं से भी सुनकर उसे शीघ्र सहायता पहुंचा सके हनुमान को ऐसी गुहार का बोध हो जाता था किंतु अधर्मी रावण के सानिध्य में आने के कारण इन दूषित मन वाले विप्र के लिए यह गुहार मात्र विचलित करने वाली ध्वनि के अतिरिक्त कुछ नहीं है कौन चिल्ला रहा है बंद करो यह चिल्लाना मुझसे नहीं सही जाती है तीव्र ध्वनि बंद करो चिलाना बंद करो जाने किसकी ध्वनि सुनाई दे रही है मुझे तो कोई ध्वनि सुनाई नहीं दे रही बसवार बस संभालिए स्वयं को और जो शक्तियां प्रा की है उन पर निरंतर करिए बंद करो च उस वानर बालक को युद्ध में उसी की शक्तियों से परास करना है तुम्ह संकट मोचन महाबली हनुमान देखो शक्तिहीन हो गया है ये शीघ्र ही ये अग्नि इसे भस्म कर देगी मुझे इस अगनी के ताप को सहते हुए इन मायावी राक्षसों का नाश करना होगा अन्यथा वाली भैया जीत गए तो सुग्रीव भैया के प्राण संकट में पड़ जाएंगे ये मूर्ख मर्कट स्वयं ही मृत्यु के मुख में जा रहा है चाहे कितना भी जला ले ये किंतु हनुमान पीछे नहीं [संगीत] हटेगा इससे भी बच गया मर्कट वरदानी शक्तियां तो दान कर दी है इसने किंतु इसे जो जन्म से अपनी आंतरिक शक्तियां मिली हैं उनकी भी उपेक्षा नहीं की जा सकती किंतु मैं यह कैसे भूल गया कि उन शक्तियों में से भी आधी शक्तियां मुझे प्राप्त हो चुकी [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] है मर्कट अब देखो मैं कैसे करता हूं तुम्हारा अंत ली भैया आप संभालिए मेरा प्रहार [संगीत] मर काट ओ मेरा दिव्य कंठर मर्कट मायावी असुरी शक्ति भले ही तुम्हारा कोई अहित नहीं कर सकी परंतु देव राजेंद्र से प्राप्त य शक्ति अवश्य ही तुम्हारा अंत कर देगी अपनी वरदानी शक्तियों के बिना हनुमान इंद्र देव द्वारा दिए गए दिव्य कंठ हार की शक्ति का सामना नहीं कर पाएगा परंतु मैं ऐसा होने नहीं दूंगा नहीं वायु देव यह हनुमान का युद्ध है धर्म और अधर्म के मध्य संग्राम है इसमें आपका हस्तक्षेप उचित नहीं होगा किंतु इस प्रकार तो हनुमान की पराजय भी हो सकती है और वाली हनुमान की पराजय ही नहीं उसके जीवन का भी अंत करना चाहता है ये क्या माली भैया तो पुनः दिव्य कंधार का प्रयोग कर रहे हैं देवराज द्वारा दिए गए इस कंठर का सम्मान करते हुए मुझे इसके प्रहार को सहना होगा हनुमान पुत्र हम देवताओं के प्रति तुम्हारा आदर प्रशंसनीय है किंतु पुत्र यह महा घातक शक्ति है दिव्य शक्तियों के बिना इसका सामना करना तुम्हारे लिए भी सहज नहीं होगा अब कौन सा नवीन ढोंग कर रहे हो मर्कट इस दिव्य अमोक शक्ति से भयभीत हो गए वाली भैया देवता द्वारा दी गई शक्ति का अनादर नहीं कर सकता मैं अस्त्र देवताओं का दिव्यास्त्र हो या राक्षसों का मायावी अस्त्र इनका आदर इन पर प्रति वार करके किया जाता है और यदि तुम इसका वार सहना चाहते हो तो तुम्हारी इच्छा [संगीत] हम आ हा [संगीत] आ हनुमान मैं आ रहा हूं पुत्र बस कोई नहीं आएगा यहां क्या हुआ मरक निकल गए प्राण यदि अब भी प्राण शेष है तो उठो जिससे मैं तुम पर अंतिम प्रहार कर सकू यदि मेरे हनुमान को कुछ हुआ तो मैं भी जीवित नहीं बूंगी जाने क्या होने वाला है तुम्हें अपने पिता के वचन को पूर्ण करना है तो उठो वचन पूर्ण करो अपने सुग्रीव भैया की रक्षा करो उठो मर्कट [संगीत] उठो रारा ज जय राध राम रा रा ज जय रा रा रा

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