[संगीत] तुम कुछ नहीं कर पाओगे वानर बालक तुम यहां से और कहीं तो क्या प्रेत लोक से बाहर भी नहीं जा पाओगे तुम किंतु हम तुम्हारी इच्छा पूर्ण कर सकते हैं तुम्हें अकाल मृत्यु देकर अकाल मृत्यु हनुमान ना जाने इतने बड़े प्रेत लोक में कहां होगा हनुमान पुत्र हनुमान हनुमान हनुमान हनुमान प्रेतराज मेरा मार्ग क्यों रोका आपने मुझे हनुमान से मिलना है हनुमान अवैध रूप से आया है प्रेत लोक में उससे आप नहीं मिल सकते मेरा हनुमान मुझसे यहां तक मिलने के लिए आया है मुझे आप उससे मिलने से नहीं रोक सकते रुक जाओ अकाल अकाल मेरा आप से करवत निवेदन है कि आप सब मेरे पिताश्री से मुझे मिलने दीजिए मैं यहां किसी से युद्ध करने नहीं आया हूं तराज मुझे स्तन से मुक्त कीजिए मुझे स्तंभन से मुक्त करो आप मुक्त तो हो चुके हैं सभी मोह माया के बंधन से फिर भी यदि आपको अपने पुत्र के प्रति अधिक प्रेम उमड़ रहा है तो आप उससे दूर रहे तो भला ही है नहीं प्रेतराज वो मुझसे मिलने यहां तक आया और और मैं केसरी आपके पुत्र ने बलपूर्वक प्रेत लोक में प्रवेश कर लिया है उसे कदाचित ज्ञात नहीं है कि प्रेत लोक में कोई जीवित प्राणी यदि प्रवेश करता है तो एक समय सीमा के पश्चात उसका जीवन अभिशप्त हो जाता है आयु क्षण हो जाती है अकाल मृत्यु का भय होता है यही नहीं उसे प्रेत योनि में भी जाना पड़ सकता है नहीं ऐसा नहीं होना चाहिए मैं आपकी आज्ञा का पालन करूंगा प्रेतराज ठीक है अब आप उसे देख तो सकते हैं किंतु यदि आप उसके निकट गए या वह आपके निकट आया तो स्मरण रखिए आप उससे कोई भी बात नहीं करेंगे यदि आपने उससे बात की तो उसे अभिशप्त होने से कोई नहीं बचा पाएगा नहीं मैं हनुमान को अभिशप्त नहीं होने दूंगा मेरा परिवार पहले से ही संकटों से जूझ रहा है अब हनुमान पर कोई और संकट नहीं आने [हंसी] दूंगा प्रतीत होता है कि तुम ऐसे नहीं मानोगे हां [हंसी] हा इनका वहार तो बहुत ही विचित्र है ऐसे कैसे सामना कर पाऊंगा मैं इनका ये तो अदृश्य हो गए ये क्या ये कैसी माया है कहीं से प्रहार कहीं से आघात लगे विचित्र है हम प्रेतों की माया दिखता कुछ है और होता कुछ और है कोई भी बच नहीं पाता हम प्रेतों के वार से वानर बालक कोई भी नहीं ये तो हनुमान पर विपरीत वार कर रहे और मैं देखने के अतिरिक्त कुछ नहीं कर पा रहा हूं यहां मेरा पुत्र संकट में है और वहां मेरा परिवार हनुमान मेरी आत्मा को यहां से मुक्त करा भी ले किंतु मेरी देह को उन राक्षसों से कैसे बचा पाएगा परलोक में पुत्र केसरी की आत्मा मोक्ष के लिए तड़प रही होगी मैं उसे और कष्ट नहीं दे सकता हनुमान अपनी मां को वापस ले आया था स्वामी हो सकता है अंजना के विश्वास की जीत हो जाए जी को पुन जीवन मिल जाए इस प्रकार हट कर के मृत देह के प्रति पाप कर रहे हैं आप सब मेरे लिए भी तो पुत्र समान ही थे केसरी जी किंतु अंजना उनकी पत्नी है उसकी इच्छा के विरुद्ध अंतिम संस्कार कैसे हो सकता है केसरी जी का अब कैसे समझाऊ मैं आप सबको हनुमान काल के निर्णय को तित नहीं कर सकता है महाकाल नहीं है और ना ही कालेश्वर है [संगीत] वो हनुमान मेरा पुत्र है मेरे विश्वास का सुदृढ़ आधार है वो वह अपने सामर्थ्य से भी अधिक करेगा अपने पिताश्री के जीवन को वापस लाने के वापस लाने केस ने के [संगीत] [हंसी] कुछ तो विचित्र है इन प्रेतों के प्रहार में कहीं से प्रहार करते हैं कहीं और से आघात लगती [हंसी] है इन प्रेतों की रणनीति समझ में आ रही [संगीत] है सामने जो दिखाई दे रहा है वो प्रतिबिंब है उस प्र का जो पीछे से वार कर बहुत अच्छे हनुमान प्रेतों की माया समझ गए हो तुम अब आप सबकी कोई माया नहीं चलेगी [संगीत] प्रेतो [संगीत] हे हनुमान ने दंड से भी कोई सीख नहीं ली यह तो प्रेत लो के भी नियम तोड़ने जा रहा है नियम है तो यम है नियम के नियम कठोर है पुत्री उन्हें परिवर्तित करना असंभव है हनुमान कुछ नहीं कर पाएगा किंतु हनुमान को तो लौट आने दीजिए पिताजी वैसे भी अंतिम क्रिया पुत्र के हाथों ही कराई जाती है रिक्षा जी सुग्रीव अब चिता सज्जित करवाइए यह मां और पुत्री तो केसरी के मृत्यु से विक्षिप्त हो चुकी [संगीत] [प्रशंसा] है लेकिन मेरा भी यह कर्तव्य है कि इन्हे अधर्म और बाप से बचाओ मैं पिता हूं उसका शत्रु नहीं हूं अपनी पुत्री के कुल का जाइए रुकिए रुकिए कृपया रुकिए नहीं आप ऐसा नहीं कर सकते सुग्रीव भैया आप मित्र हनुमान के हितेश है हां और आपको तो ज्ञात ही होगा कि मित्र हनुमान ने ने कितनी बड़ी से बड़ी समस्या का हल किया है हम उसे लौट आने दीजिए तुम मुझे ज्ञान मत दो मैं तुम्हारी बात मानूं या मेरे बड़ों की आज्ञा का पालन करूं तुम बालक हो बड़ों के कार्य में हस्तक्षेप मत करो पता श्री क्या हो गया है आपने तो मेरी हर इच्छा पूर्ण की है आप मेरे ही पिताश्री है [संगीत] ना अपने ही पिता पर शंका कर रही हो तुम मां होकर अपने ही पुत्र को संकट में डाल दिया तुमने उसे यमलोक भेजकर मुझे विश्वास हो गया है कि इस दुख ने तुम्हें पूर्णता विक्षिप्त कर दिया है [संगीत] बस अनुमान प्रेतो एवं प्रेत लोग को बहुत क्षति पहुंचाई है जिस प्रकार तुम्हारी करनी का दंड भुगत रहे हैं तुम्हारे पिता उसी प्रकार इसका भी सारा दंड भुगतना होगा उन्हें नहीं मेरे कारण और दंड नहीं पिताश्री [संगीत] को हां पुत्र अपने पिताश्री के प्राण वापस लेकर ही आ प्रेतराज मेरा दंड पिताश्री को क्यों मैं प्रस्तुत हूं मुझे दीजिए किंतु मैं यदि यहां से जाऊंगा तो अपने पिता श्री को लेकर प्रेत लोक में कोई किसी का संबंध नहीं होता बालक महाराज केसरी भी अब तुम्हारे पिता नहीं है व अब एक मात्र आत्मा है उन प्रेता आत्माओं की भाति जिन्ह कालदेव के आदेश पर प्रेत लोक लाया जाता है किंतु मेरे पिता श्री को यहां अन्याय पूर्वक लाया गया है और यह अन्याय का विरोध हनुमान सदैव करेगा और अपने पिता श्री को भी यहां से ले जाएगा बाल हट छोड़ दो बालक प्रेतराज के रहते यह असंभव है और असंभव है प्रेतराज का सामना करना ऐसा मत कहिए प्रेतराज जी मैं आपसे पुनः विनती करता हूं मेरे पिता श्री को मुक्त कर दीजिए बस मेरी अंतिम चेतावनी सुन लो यदि तुम अब भी यहां से लौट कर नहीं गए तो फिर कभी नहीं जा पाओगे मैं तुम्हें स्तंभित कर दूंगा फिर तुम्हारी आत्मा तुम्हारी देह सदैव के लिए यही रह जाएगी प्रेतराज जी मेरी मां के अश्रु मेरे पिता श्री का यह कष्ट मेरी मृत्यु से भी अधिक दुखदायक है मैं कुछ भी सहन करने के लिए प्रस्तुत हूं बालक यदि तुम्हारी यही हट है तो भुग तो प्रेत राज का कोप नहीं हे ईश्वर कैसी विडंबना है यह पुत्र य प्रताड़ित हो रहा है पत्नी को वहां दुख दिए जा र और मैं यहां मातृ मुख दर्शक बने हुए देखने को विवश [संगीत] हो सुग्रीव रिक्षा जी केस जी की देह को द्रोणी से बाहर निकाले यह तो मान ही नहीं रहे हैं यदि हनुमान शीघ्र नहीं आया तो बड़ा ही अनर्थ हो जाएगा नहीं यह महाराज कुंजा नहीं हो सकते मेरा हृदय जानता है स्वामी को वे कभी भी अंजना की कोई बात नहीं टालते मेरे हनुमान के आने के पूर्व मैं इन्हें ऐसा नहीं करने [संगीत] दूंगी रुक जाइए बालक अब तुम्हारे पिता तो क्या तुम्हारी मुक्ति भी असंभव है इस प्रेत लोक से यह सब तुम्हारे बाल हट का परिणाम है मेरे इस दिव्य पाश में बंधे बंधे अब तुम्हारी अकाल मृत्यु हो जाएगी नहीं तुम्हारे पिता को 11 दिवस के लिए प्रेत लोक भेजा गया है दो दिवस व्यतीत हो चुके हैं दो दिवस पश्चात केसरी कहां चले जाएंगे कुछ नहीं पता उन्हे कौन सी योनि प्राप्त होगी या उनकी आत्मा भटकती रहेगी यह कोई नहीं जानता तो नहीं होने दूंगा मैं अब तुम कुछ नहीं कर सकते हनुमान पिता की पीड़ा हरना तो दूर माता के अशु भी नहीं पहुच पाओगे तुम्हारी माता रोती तड़पती रहेंगी तुम्हारी प्रतीक्षा में [संगीत] नहीं [संगीत] वाह अंजना मैं धन्य हो गया तुम्हारे जैसी पत्नी और हनुमान जैसा पुत्र पाकर जो मेरे पुनर्जीवन के लिए प्राण प्रण से लगे हुए हैं ही है प्रेतों को तो सदैव भय रहता है अग्नि से और प्रेतराज ने हनुमान की कदा गरी भड़का दी अमर्ष की अगनी ढक उठी है हनुमान की देह में प्रेत लोक के लिए यह अशुभ संकेत है [संगीत]
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