Wednesday, 31 December 2025

बाल हनुमान अपने माता पिता की रक्षा कैसे करेंगे Ishant Mahabali Hanuman Episode 254 Pen Bhakti

[संगीत] [संगीत] ऋषिवर मतंग ने सावधान रहने को कहा था मैं पूर्ण सजगता से सबकी देखभाल करूंगा हनुमान आओ पुत्र तुम भी थोड़ी देर विश्राम कर नहीं मां मैं क्लांत नहीं हुआ हूं मैं आप सबकी रक्षा करने के लिए ही यहां खड़ा हूं वन्य प्राणियों का भी संकट हो सकता है ना आप सब विश्राम [संगीत] कीजिए [संगीत] [संगीत] व क्या है यह छाया तो पिताश्री की ओर बढ़ रही है कहीं पिताश्री नहीं पिताश्री [संगीत] क्या हुआ हनुमान आओ पुत्र तुम भी कुछ देर विश्राम कर लो किंतु मुझे चिंता हो रही है पिताश्री हम समय पर पहुंच नहीं पाएंगे चिंता मत करो पुत्र सम रहते हम लोग पहुंच [संगीत] जाएंगे चलो चलो उठो सब लोग पुनः सस जित हो जाओ संध्याकाल से पूर्व हमें पर्वत श्रंखला पार करनी है चलो चलो शीघ्र चलो पुत्र हनुमान चलो यह परछाई कहीं कालदेव के दूध ही तो नहीं है मुझे पूर्ण रूप से सजग रहना होगा चलो मित्र [संगीत] हनुमान तुम जाओ मैं आता [संगीत] हूं सावधानी से इस ओर खाई है रुक [संगीत] जाओ ये पर छया पुन आ गई यह तो पिताश्री की ओर बढ़ रही है पिताश्री ये कैसी ध्वनि है ये क्या ये तो भैसों का ट भागता हुआ आ रहा है हनुमान मैं इन भैसों को रोकने का प्रयास करता हूं तुम सबको रास्ते से हटो जी पिता श्री इस आय सब और इस और सब पीछे हट शिकता कीजिए पीछे हट सब तुम उस ओर जाओ जी [संगीत] महाराज [संगीत] श्र करो हनुमान शीघ्र जी पिता श्री स्वामी संभालिए सब शीघ्र आए मेरे हाथ पर शीघ्रता कीजिए [संगीत] बहुत अच्छे [संगीत] हनुमान हनुमान जी इधर जा ठीक हनुमान र जाओ पिता श्री पिताश्री म [संगीत] पिताश्री मैं आ रहा हूं पुत्र [संगीत] हनुमान [संगीत] हनुमान प्र श्री श्री [संगीत] हनुमान क्या हुआ पुत्र पिता श्री हनुमान इतने भभ क्यों लग रहे हो क्या सोच रहे थे हनुमान तुम्हें पहले कभी इस तरह चीखते हुए नहीं देखा क्या हुआ नहीं नानी कुछ नहीं हुआ मैं ठीक हूं कल से देख रही हूं तुम किसी चिंता में डूबे हुए हो कहीं वो कल वाले स्वप्न ने तुम्हें व्याकुल तो नहीं कर अब कैसे बताऊ मैं कि क्या हुआ है हनुमान जब किसी भी समस्या का हल निकालना हो तो उसके विषय में बात करनी चाहिए अन्यथा य ही व्याकुल रहोगे पुत्र बोलो क्या बात [संगीत] है मैं बताता हूं हनुमान को दु स्वप्न आ रहे हैं जिनके कारण चिंतित रहता है हमारा मित्र सच सच बताओ क्या दिखाई देता है तुम्हें स्वप्न [संगीत] में [संगीत] मां [संगीत] [संगीत] उस दुर स्वपन से चिंतित होकर ही मैं ऋषि मतंग से मिला था उन्होंने मुझे इस यात्रा का उपाय बताया [संगीत] है उस सपने के पश्चात ही तो तो ध्वज गिरा था भवन से जैसे कि तुमने केसरी जी की जान बचाई थी यह तो बहुत बड़े अशुभ संकेत है काली छाया व भैसे यह तो यम के प्रतीक है हमें और सावधान रहना होगा धज का गिरना स्वामी का स्वप्न में चट्टान से गिर जा मुझे तो बहुत भय लग रहा है स्वामी उचित होता कि हम भवन में ही रहते मां की बात मानकर यदि सब लौट गए तो परिवार का संकट दूर कैसे होगा परंतु अंजना इस तरह तीर्थ यात्र अधूरी छोड़कर लौटना भी तो अशुभ है मुझे तो भय लग रहा है स्वामी ना जाने आगे कौन से संकट का सामना करना पड़े संकट से बचने के लिए यदि मतंग ऋषि ने कोई उपाय बताया था तो उसके पीछे कुछ रहस्य होगा हा पिता श्री ऋषि मतंग ने बताया था कि यदि हम महामृत्युंजय महादेव के मंदिर में जाए और मंत्र की पूजा करें तो हमारे सारे कष्ट दूर हो [प्रशंसा] जाएंगे वहां जाना ही चाहिए आप सब प भीत ना हो उठे इसलिए हनुमान ने किसी को भी स्वपने के बारे में नहीं [संगीत] बताया हनुमान की चिंता उचित सबका भयभीत होना भी स्वाभाविक है मुझे ही सबको अतो उत्साहित होने से बचाना होगा आश्चर्य है आप लोग स्वप्न मात्र से ही इतने भयभीत हो रहे हैं हम लोग भगवान भोलेनाथ के तीर्थ पर जा रहे हैं भगवान शिव में आप सब ध्यान लगाइए वही हम सबकी रक्षा करेंगे किसी भी शुभ कार्य के मार्ग पर बा बाए तो आती ही है जो उन बाधाओं को पार करके निकल जाते हैं उसे ही शुभ और उत्तम फल की प्राप्ति होती [संगीत] है क्योंकि शुभ कार्य का परिणाम भी शुभ ही होता है हर हर महादेवर हर हर महादेव हर हर महादेव हर हर महादे हर हर महादेव हर हर महादेवर महादे हर महादेवर हर महा त्याग दो सारा भय छोड़ दो सारे अशुभ विचार और मन में भगवान भोलेनाथ की मूर्ति धारण करके आगे बढ़ो हमें समय रहते यात्रा पूर्ण करनी [संगीत] है चलो चलो चलो चलो सबके रक्षक मारुति वीरा परम सु चिंतित अति बल भीरा स्वजनों के सेवक हनुमान परम कृपालु स्नेह की खान ध्यान धरे मतंग मुनि वच संकट मोचन रचते रचना हनुमत जागृत है जिसके हित सदा सुखी वे रहे अपरी जिस प्रकार रात्रि का अंधकार छाने के पहले ही दीपक जलाकर प्रकाश की व्यवस्था की जाती है ठीक उसी प्रकार यदि कोई संकट आने का संकेत हो तो संकट का सामना करने या उससे बचने की व्यवस्था अग्रिम रूप से करने वाला मनुष्य ही जागृत माना जाता है ऐसा दूरदर्शी योद्धा ही संकट पर विजय पाता है और दुखों से मुक्त होकर सुख को प्राप्त करता [संगीत] है [संगीत] यह मार्ग तो यह पर्वत ये मार तो कुछ कुछ स्वप्न जैसा ही है कहीं कुछ हो ना जाए किंतु यहां स्वप्न की भाति पर्वतीय दर्रा एवं खाई नहीं है हनुमान क्या हुआ पुत्र पुनहा को सोचने लगे पुत्र कर्म करने से चिंता मिटती है चले चलो [संगीत] ये [संगीत] छाया

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