[संगीत] पुत्र हनुमान स्मरण रहे तुम्हारे पास गुरुदेव को ढूंढने के लिए अल्प समय ही शेष है कल सूर्यास्त से पूर्व ही तुम्हें गुरुदेव को ढूंढकर उन्हें स्वयं को शिष्य के रूप में ग्रहण करने के लिए मनाना होगा मैं स्मरण रखूंगा देवर्षी जब तक मैं गुरुदेव को ढूंढकर उन्हें मना नहीं लेता तब तक मैं एक क्षण भी ना ही कहीं रुकूंगा और ना ही कहीं विश्राम [संगीत] करूंगा प्रणाम देवर्षी कल्याण हो [प्रशंसा] [संगीत] हनुमान मा पिता श्री आप दोनों मुझे आशीर्वाद दे कि मेरे गुरुदेव को ढूंढने की यात्रा सफल [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] हो सफल रहो [प्रशंसा] पुत्र तुम्हें तुम्हारे गुरुदेव अवश मिलेंगे पुत्र मेरा शुभाशीष सदैव तुम्हारे साथ है ये गाथा महाबली हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली हनुमान हनुमत मार्ग अवध हुआ अदृश्य सीमा चक्र छुआ आगे जलती ज ला प्रचंड ऋषि का तप हो जाए ना भंग अब कैसे आगे जाएंगे कौन सी युक्ति अपनाएंगे पराजय नहीं करते स्वीकार है हनुमत में साहस अपार ये गाथा महाबली हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली [संगीत] हनुमान अब हमें प्रस्थान करने की अनुमति प्रदान कीजिए कल्याण क्या हुआ ऋषिवर आपके मस्तक पर चिंता की रेखाएं दिखाई दे रही हैं चिंता तो है देवऋषि कहीं मेरी ही भाति महर्षि श्रृंगी भी मना कर देंगे तो क्या होगा वो तो कदाचित ही मना करे यह तो आप भी जानते हैं और मैं भी अतुलनीय तपोबल और ज्ञान के भंडार है महर्षि सिंगी आपका कथन सत्य देव ऋषि जितने महान महर्षि शृंगी है उतनी ही त्याग मय तपो निष्ठ उनकी पत्नी है देवी शांता शांत देवी शांता वो शांता जिन्ह दान में दे दिया गया था उन्हीं के पिता महाराजा दशरथ के द्वारा और उन्होंने भी अपने पिता का मनोरथ पूर्ण करने के लिए राज महलों का सुख त्याग कर एक राजकुमारी होते हुए भी एक ऋषि पत्नी होना स्वीकार किया शांता के पति ऋषि शृंगी ने ही महाराज दशरथ की कामना पूर्ति के लिए पुत्र कामेश यज्ञ संपन्न कराया था और उसी फल स्वरूप अयोध्या नरेश महाराज को श्री राम लक्ष्मण भरत और शत्रुगन जैसे महान पुत्रों की प्राप्ति हुई हां देवरी उसी यज्ञ के फल स्वरूप जो विशेष प्रसाद महाराजा दशरथ के तीनों रानियों में वितरित किया जा रहा था उसी प्रसाद से हनुमान और श्री राम के जुड़ने की लीला आरंभ हुई सत्य कहा आपने ऋषिवर मतंग जब महाराज दशरथ की रानी सुमित्रा को उस विशेष प्रसाद की खीर दी गई थी तो एक चील उनके हाथ से झपट्टा मारकर वो खीर ले उड़ी थी वो चील खीर लेकर उड़ते हुए त मेरू [संगीत] पहुंच किंतु तभी उसके पंजों से वो खीर छूट [संगीत] गई हीर का वो विशेष प्रसाद पुत्र प्राप्ति की कामना लिए तपस्या कर रही देवी अंजना की झोली में जा गिरा और श्रृंगी ऋषि द्वारा किए गए पुत्र कमेश यज्ञ के द्वारा उत्पन्न उसका विशेष दिव्य प्रभाव अंजना की देह में समा [संगीत] गया इस प्रकार हनुमान और श्री राम के अंतर संबंधों का सूत्र इन दोनों के जन्म के पूर्व ही स्थापित हो गया था हनुमान के जन्म में महर्षि श्रृंगी का आशीर्वाद भी सम्मिलित है अतः संभव है कि हनुमान की उस दिव्यता को पहचान करर मषि संगी कदाचित हनुमान को अपना शिष्य बनाना स्वीकार कर [संगीत] ले [संगीत] ऋषिवर मतंग ने जिस स्वर्ण कमल वाले सरोवर के विषय में बताया था वह तो यही प्रतीत हो रहा है यही कहीं ऋषि और श्रृंगी की कुटिया होनी चाहिए हनुम की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली हनुमान दिव्य सरोवर को पहचान किया ऋषि कुटीर संधान माता शांता करती ध्यान यही है ऋषि का तप स्थान ये गाथा महा वो रही कुटिया राम भगत की जय जय जय रघुनंदन रा जय जय जय महाबली हनुमान जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली हनुमान भीतर जाकर देखता हूं [संगीत] [संगीत] हम [संगीत] यह तपस्विनी कदाचित ये ऋषि माता ही होंगी प्रणाम [संगीत] माते माते क्या यह महा ऋषि श्रृंगी जी की कुटिया है मुझे उनसे अति शीघ्र भेंट करनी है यह दिव्य आभा संपन्न बालक कौन है यह प्रतीत हो रहा है जैसे मैं इससे अंतर मन से जुड़ी हुई हूं यह गाथा महाबली हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली हनुमान कोमल स्वर में प्रश्न किया माता शांता ने ध्यान दिया सौम्य रूप छवि मनमोहक सम्मुख उनके खड़ा है बालक दशरथ पुत्री के भ्राता राम हनुमत को देख रही अ विराम दिवस अंत हुआ इंगित देख हुए हनुमत विचलित महाबली हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली [संगीत] हनुमान आप क्या सोच मैं सुमेरु नरेश केसरी जी का पुत्र हनुमान हूं और आप शीघ्र बताइए महर्षि श्री जी मुझे कहां मिलेंगे पुत्र यह कुटिया उन्हीं की है मैं उनकी पत्नी हूं शांता महाराज दशरथ की पुत्री तो आप शीघ्र बताइए वे कहां है पुत्र वो यहां नहीं है वह वहां पूर्व दिशा की ओर है घने वन में तपस्या धन्यवाद माते रुको हनुमान धिक्कार है तुम सब पर इतने बड़े रक्ष योद्धा होकर भी इतने दिनों में एक नर रूपी नारायण के बारे में सूचना नहीं ज्ञात कर पाए किसी भी कार्य के योग्य नहीं हो तुम सब लंकेश प्रयास कर रहे हैं शीघ्र ही प्रयास नहीं परिणाम चाहिए हमें यदि वो नारायण का अवतार है तो हम भी दशानन है दशानन [संगीत] कुछ भी करके कैसे भी करके मुझे उस नर रूपी नारायण के बारे में सूचना लाकर दो उस नारायण ने संसार को मेरे आतंक से बचाने के लिए अवतार धारण किया है [संगीत] ना वो नारा कहीं पर भी हो सकता है इसलिए तुम सब हर दिशा में जाओ मार काट अत्याचार और आतंक शुरू कर दो चारों ओ इतनी क्रूरता करो इतनी क्रूरता करो कि स्वयं क्रूरता भी धरा उठ है हर एक बालक को चाहे वो संसार के किसी भी कोने में क्यों ना पल रहा हो जहां भी जहां भी कोई बालक मिले उसका अपहरण कर लो जो तुम्हें रोकने आए उसका वद कर दो उन समस्त बालकों को ंक वन में एकत्रित करो जहां मैं स्वयं उस नर रूपी नारायण को मृत्यु दंड दूंगा देखते हैं नारायणी शक्तियां कैसे सफल होती हैं जाओ ऐसा ही होगा महाबली जय लंकेश जय लंकेश जय लंकेश [संगीत] [संगीत] सूर्य भी अस्त होने को है मुझे शीघ्र ही पहुंचना होगा [संगीत] ऋषि माता ने तो इसी दिशा की ओर इंगित किया था यही कहीं होंगे [संगीत] ऋषिवर बालक हनुमान तो पूरी बात सुने बिना ही चला गया ऋषिवर विशेष तापस भाव को प्राप्त करने के लिए घोर तप में लीन है यह तो मैं उसे बता ही नहीं पाई कहीं कोई अनर्थ ना हो जाए उसके [संगीत] साथ कहीं ऐसा ना हो कि हनुमान के द्वारा उनका तप भंग हो जाए कहीं वह उन्हें श्राप ना दे [संगीत] दे कोई अनर्थ होने से पहले ही मुझे कुछ करना [संगीत] होगा [संगीत] वो अग्नि क्यों चल रही है वन में कोई है क्या [संगीत] वहां हम मुझे कुछ करना [संगीत] होगा मुझे शीघ्र ही स्वामी के पास पहुंचना [संगीत] होगा [संगीत] यह तो भीषण अग्नि चल रही है यह तो वन के पशुओं को भी भस्म कर देगी मुझे पशुओं की रक्षा करनी होगी यह तो महर्षि श्रृंगी है मुझे हनुमान को रोकना [प्रशंसा] होगा य अग्नि तो विकराल रूप धारण किए हुए हैं यदि यह पूरे वन में फैल गई तो वन्य प्राणी संकट में घिर [संगीत] जाएंगे [संगीत] इस अग्नि से तो महर्षि श्रृंगी पर भी संकट आ सकते हैं मुझे इस अग्नि को फैलने से रोकना [संगीत] होगा [संगीत] [संगीत] ह हनुमान कहां गया आसपास तो कहीं दिखाई नहीं दे रहा कहीं उन लपटों में तो नहीं नहीं ऋषिवर के तप के तेज से उत्पन्न इन लपटों को पार करके भीतर जाना सहज नहीं [संगीत] [संगीत] है ये अग्नि की लपट तो मुझे भीतर जाने ही नहीं दे रही कुछ तो करना [संगीत] होगा
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