Wednesday, 31 December 2025

बाल हनुमान अपनी सारी शक्तियां कैसे भूल गए Ishant Sankat Mochan Mahabali Hanuman 332 Pen Bhakti

[संगीत] मैं ऋषि अंगी रस पुत्र सामर तुम्हें श्राप देता हूं कि जिन दिव्य शक्तियों ने तुम्हें उदंडी बना दिया है तुम उन समस्त वरदानी शक्तियों को पूर्णतया भूल जाओगे उन समस्त वरदानी शक्तियों को पूर्णतया भूल [संगीत] जाओगे [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] अपने तेज का सवा भाग तुम्हें वरदान के रूप में देता [संगीत] हूं [संगीत] मैं वरुण देव तुम्हें वरदान देता हूं कि तुम सदैव मेरे वरुण पाश और जल से सुरक्षित [संगीत] रहोगे मैं अग्निदेव तुम्हें वरदान देता हूं कि कितनी भी भीषण अग्नि हो उसकी ज्वाला तुम्हें किसी भी प्रकार से हानि नहीं पहुंचाएगी [संगीत] मुझ धना अध्यक्ष कुबेर का वरदान है तुम कभी भी युद्ध में विषाद नहीं रहोगे तुम कभी भी भी विचलित नहीं होगे मैं तुम्हें वरदान देता हूं अपनी इच्छा से ही अपनी मृत्यु का वर्ण कर सकोगे इच्छा मृत्यु का वरदान है तुम्हें मैं देवराज इंद्र तुम्हें वरदान देता हूं आज से किसी भी वज्र का कोई भी प्रभाव तुम पर नहीं पड़ेगा मैं ब्रह्मा तुम्हें वरदान देता हूं कि तुम्ह को कोई भी भ्रम श्राप नहीं लगेगा मैं तुम्हें चिरंजीवी होने का वरदान देता हूं मेरे भी अस्त्र शस्त्र से तुम्हें कभी कोई क्षति नहीं होगी [संगीत] [संगीत] द [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] मेरे पुत्र ने आपका क्या आहित किया था ऋषि सामत यह क्या अनर्थ कर डाला [संगीत] [संगीत] तुमने [संगीत] [संगीत] हनुमा जिसका भय था वही हुआ स्वामी त्रिदेव इसी क्ण का सामना करने से रोकने के लिए हमें यहां से दूर भेजने का प्रयास कर रहे थे परंतु अब वो समय आ गया है जब आप दोनों को हनुमान के जीवन [संगीत] से साबित होने वाला है हनुमान होने वाला है होने वाला हैने वाला है सामत हनुमान ने तो गंगा की पवित्र धारा को अन्य समस्त नदियों को जोड़कर उन्ह विशुद्ध और पवित्र करने का महा पराक्रम कार्य किया था यह तो पुरस्कार के अधिकारी था परंतु तुमने इसे श्राप देकर इनकी सारी शक्तिया ही छीन ली इतनी बड़ी भूल कैसे हो गई मुझसे [संगीत] [संगीत] [संगीत] हनुमान के पराक्रम को उसकी उदंड समझ बैठा मैं क्रोध वश मेरी मती फिर गई थी या यह नियति की कोई क्रीड़ा थी हनुमान तो बालक होते हुए भी मुझसे भी बड़ा भक्त है उसके भक्त की एक गुहार पर स्वयं प्रभु उसके हाथों से भोजन करने चले [संगीत] आए ऐसी भक्ति को प्रणाम करने के स्थान पर तुमने इसे श्राप दे दिया मैं तो मात्र तेजस्विता ही नहीं पहचान पाया था हनुमान की परंतु तुमने तो तुमने तो इसे तेज हीन कर दिया अक शत्र है मेरे लाल की महाबली महामाया भी और मेरा पुत्र शक्ति [संगीत] ही क्या होगा मेरे लाल का सामत तपस्या और साधना से तुम वरदान और श्राप की शक्ति तो पा लिए हो परंतु तपस्वी होते हुए भी तुम तुम में धैर्य नहीं है तुम में कोई संयम नहीं है तुमने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया है सामर जिसका दंड तुम्ह भुगतना [संगीत] होगा [संगीत] मैं ऋषि अंगी रस पुत्र सामत तुम्हें श्राप देता हूं तुम्ह श्राप देता हूं तुम्ह श्राप देता हूं तुम्हारा मन बहुत अस्थिर है तुम एक स्थान पर कभी भी अधिक समय तक टिक नहीं पाओगे अपने अस्थिर मन के ही भाति तुम एक स्थान से दूसरे स्थान भटकते रहोगे तुम्हें कभी मोक्ष की प्राप्ति नहीं होगी [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] [संगीत] सामरा बिना विचार किए कार्य करने वाले लोगों को यूं ही पश्चाताप करना पड़ता है मैंने पूर्ण सत्य जाने बिना ही हनुमान के पराक्रम को उसकी उदंड समझ लिया मैं पापी इसी दंड के योग्य हूं पिता श्री आपने मुझे श्राप देकर उचित ही किया पिताश्री मैं क्षमा प्रार्थना के साथ कहना चाहती हूं ऋषि बल आपने भी वही किया जो आपके पुत्र ने किया क्रोध व श्राप दे दिया आपने ऋषि साम व्रत को देवी अंजना [संगीत] यह मेरा क्रोध नहीं [संगीत] न्याय साम व्रत के दुष्कृतम् [संगीत] हनुमान नेत्र खोलो [संगीत] पुत्र उठो हनुमान केसरी जी जो कुछ भी हुआ उसके लिए मुझे बड़ा दुख है परंतु समस्या होती है तो उसका समाधान भी अवश्य होता है समाधान शाप का समाधान ऋषिवर हमारा जो कुछ भी है यह वैभव य राज पाठ सब कुछ ले लीजिए किंतु मेरे पुत्र के श्राप का समाधान करती [प्रशंसा] मेरे अनुमान को पूर्ववत कर दीजिए ऋषिवर देवी अंजना एक मां की पीड़ा को मैं भली भाति समझ सकता हूं किंतु आप चिंता मत कीजिए हनुमान श्राप मिलने से पूर्व हनुमान जैसा शक्ति वान था वह पुन वैसा ही शक्तिमान बन [संगीत] जाएगा [संगीत] सामत बहुत बड़ी भूल हुई है तुमसे और इस भूल का सुधार भी तुम्हें ही करना पड़ेगा तुम्हें अपना दिया हुआ श्राप वापस लेना होगा सामत पिता श्री परमपिता ब्रह्मा ने यह विधान बनाया है वरदान या श्राप कोई एक बार देने के पश्चात वापस नहीं लिया जा सकता यदि ऐसा हो सकता तो मैं एक क्षण बिना ही हनुमान को दिया हुआ श्राप वापस ले लेता यह तो मुझे भी ज्ञात है पुत्र ब्रह्मा जी के विधान के विरुद्ध कोई नहीं जा [संगीत] सकता किंतु दिए हुए श्राप को सीमित तो किया जा सकता है अन्यथा सारे देवक भी बात हो जाएंगे [संगीत] [संगीत] आ [संगीत] मैं सामर यह विधान करता हूं कि जब प्रभु श्री राम के सहायतार्थ किसी दुष्कर कार्य को करने के लिए कोई महानतम व्यक्ति हनुमान को उनकी शक्तियों का स्मरण कराएगा तब हनुमान की समस्त शक्तियां पुनः जागृत हो [संगीत] जाएंगी और हनुमान को मेरे श्राप से भी मुक्ति मिल जाएगी [संगीत] शक्तियां पाना सभी चाहते हैं किंतु यह सर्वदा स्मरण रहना चाहिए कि महान शक्तियां तभी महान कार्य करती हैं जब उन्हें प्राप्त करने वाला मनुष्य उनका प्रयोग संयम और विवेक के साथ करें [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] असंयुक्त बड़ी शक्तिया बड़ी दायित्व भी लेकर आती है जिन्ह निभाना सबके वश में नहीं होता हा सामत ने यदि संयम रखते हुए पूर्ण स्थिति पर विचार किया होता तो हनुमान को कदापि श्राप ना देते किंतु प्रिय अबोध हनुमान से भी अज्ञान का वश भूल अवश्य हुई थी किंतु स्वामी अज्ञानता वश हुई भूल का इतना कठोर दंड प्रिय भूल अज्ञानता वश हो या असावधानी से दंड ही उसका प्रतिकार है भले ही हनुमान अपनी महान शक्तियों के प्रयोग से महान दायित्व निभा रहे थे किंतु उनकी असावधानी से ही सामत का यज्ञ भंग हुआ था यही हनुमान की भूल थी अर्थात उद्दंडता थी विशेष शक्तियों के स्वामी को सदैव पूर्ण सावधानी और सजगता के साथ अपनी शक्तियों का प्रयोग करना चाहिए जो हनुमान नहीं कर सके और उन्हें इतना कठोर दंड प्राप्त हुआ [संगीत] [संगीत] हनुमान मेरे नाथ उठो [संगीत] पुत्र हनुमान हनुमान तुम्हारी मां तुम इस प्रकार नहीं देख सकती [संगीत] पुत्र तुम्ह उठना होगा मेरे लाल नेत्र खोलो [संगीत] पुत्र [संगीत] [संगीत] मां पिता श्री आप सब मुझे इस प्रकार क्यों देख रहे हैं मुझे कुछ हुआ था [प्रशंसा] क्या [संगीत] नानी जी हनुमान को कुछ हुआ था क्या उसकी देह पूर्णतः शक्तिहीन एवं क्लांत प्रतीत हो रही [संगीत] है आप ऋषिवर मुझे आपके किसी कार्य के लिए जाना था ना हनुमान की स्मरण शक्ति भी क्षीण हो गई है इसने जो पराक्रम किए उन्हें भी भूल गया है यह पिता श्री मुझे यह क्या हो गया मुझे कुछ स्मरण नहीं आ रहा है हनुमान की यह दशा मेरे कारण ही हुई है मेरा यहां से चले जाना ही उचित होगा सामत [संगीत] ठहरो मैंने भी हनुमान की भक्ति और शक्ति पर अविश्वास किया [संगीत] दोषी हम दोनों ही है हनुमान की इस स्थिति के लिए मैं भी तुम्हारे साथ चलता हूं पुत मैं निर्दोष हनुमान को इस स्थिति में नहीं देख [संगीत] सकता महाराज केसरी दुर्भाग्य से जो कुछ भी घटित हुआ है उसका दुख है मुझे क्षमा प्रार्थी हूं मैं आपसे मैं भी लज्जित हूं अपने कृत्य पर हो सके तो मुझे भी क्षमा कर [संगीत] दीजिएगा जाने से पूर्व हनुमान की भविष्य के लिए शुभकामनाए और आशीर्वाद [संगीत] होने को कौन डाल सकता है ऋषिवर यही विधि का विधान [संगीत] था जिसे ना तो एक पिता बदल सकता था और ना ही आप जैसे महान ऋषि परिवर्तित कर सकते थे शाप साम व्रत जो द डारे हनुमत खोई दिए बल सारे भूल ऋषिवर का कर डारी अब पछताए कोप पे भारी मात पिता संतप्त दुखारे किंतु नियत कौन है टार होवे कारण हृदय द्रवित जो करे जग पिता कर उचिता सब क लीला भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली [संगीत] हनुमान प्रणाम [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] ऋषिवर [संगीत] [संगीत] प्रणाम [संगीत] ऋषिवर [संगीत] [संगीत] हनुमान के साथ बहुत बुरा हुआ हनुमान के बहुत उपकार है हम देवताओं पर मैं भी उसे स्थिति में नहीं देख सकता देवराज इ हनुमान मेरा पुत्र है और पुत्र की पीड़ा एक पिता के लिए अधिक कष्टदायक होती मुझे तो भय है कि हनुमान अब स्वयं को संभाल भी पाएगा या नहीं न जाने क्या होगा वायु देव सदैव धर्म और सत्य को विजय दिलाने वाला हनुमान आज एवं अशक्त हो गया [संगीत] है और हम देवता मात्र मुख दर्शक बने हुए देखने को विवश है वरुण देव मेरा शिष्य होकर भी हनुमान ने सहायता की है मेरी पाताल लोग जाकर असुरों का वध कर समय रहते ही मेरा रथ वापस दिलाया हनुमान ने शीघ्र जाओ गुरुदेव सूर्यदेव के [संगीत] पास मेरी सहायता करने वाला भी हनुमान ही था [संगीत] सूर्यदेव रावण जैसे महाबले असुर राज के हाथों से अमृत को युक्ति से बचाया था हनुमान [संगीत] ने चंद्रदेव केवल अमृत को ही नहीं अपितु इस समस्त संसार को असमय काल कूप में समाप्त होने से बचाया था [प्रशंसा] मेरे अहंकार को तोड़कर मुझे मेरी फूल का आभास कराया देवराज शनिदेव के समक्ष इस प्रकार खड़े होने का साहस केवल हनुमान में ही है और आज वही [संगीत] हनुमान देवराज बहुत संकट की घड़ी है हनुमान ने हम सभी देवताओं को हर क्षण किसी ना किसी रूप में सहायता की [संगीत] है अब हमारा कर्तव्य है कि हम हनुमान की सहायता करें और उन्हें इस संकट से [संगीत] उभारे नारायण नारायण अग्निदेव सत्य कह रहे हैं देवराज अब हनुमान को पुन अपनी शक्ति संग्रह करनी होगी तभी हनुमान के जन्म लेने का उद्देश्य पूर्ण होगा नारायण नारायण सत्य है देव राजेंद्र कि अब तक देवताओ और संसार के हित के लिए हनुमान ने बहुत कुछ किया है और अब समय आ गया है कि हम सब भी हनुमान के लिए कुछ करें आप सत्य कह रहे दे ऐसी परिस्थिति में तो अब केवल महादेव ही हमें उचित मार्ग दिखा कि हम सब हनुमान के लिए क्या [संगीत] करें मां ऋषिवर की बात का तात्पर्य क्या था और पिताश्री किस होने को टालने की बात कर रहे थे हनुमान को कुछ स्मरण में नहीं आ रहा है मां मुझे कुछ स्मरण क्यों नहीं है मां मुझे बताइए ना क्या हुआ था पुत्र जो हुआ उसमें स्मरण करने जैसा कुछ है ही नहीं इसलिए उस विषय के बारे में सोचकर समय व्यर्थ मत करो हनुमान सोचना है तो अपने भविष्य के बारे में सोचो पुत्र और आगे बढ़ो मुझे विश्वास है महादेव तुम्हारे भोले बाबा तुम्हारे भविष्य की दिशा का निर्धारण करने के लिए अवश्य कुछ [संगीत] करेंगे बाबा अब आप ही हनुमान की सहायता [संगीत] कीजिए ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय शिवाय

No comments:

Post a Comment

ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...