Sunday, 28 December 2025

देवी सरस्वती ने बाल हनुमान को ज्ञान दिया Ishant Sankat Mochan Mahabali Hanuman 336 Pen Bhakti

[संगीत] पूर्व कल्प के अंत में जब कलयुग समाप्त होने को था उस समय हुआ था भगवान विष्णु का मतस्य अवतार विष्णु देव के मत्स्य अवतार की सहायता से ही सृष्टि की पुनः रचना हुई थी माता यह कल्प क्या होता है हनुमान तुम्हें ज्ञात है युग कितने होते हैं हां मेरी मां ने मुझे बताया था चार युग होते हैं प्रथम युग सत्य युग द्वितीय युग तृता युग तृतीय युग द्वापर युग और चतुर्थ युग कलयुग हनुमान तुम्हारी मां ने तुम्हें उत्तम शिक्षा दी है अब सुनो यह चार युग मिलकर एक चतुर युग होते हैं और एक सहस्त्र चतुर युग मिलकर कल्प कहलाते हैं और कल्प के अंत में महाप्रलय होती है जिसमें सारा संसार समस्त चराचर प्राणी सब नष्ट हो जाते हैं सबका अंत हो जाता है सब कांत यह प्रलय क्यों होती है माता इसका होना आवश्यक है हनुमान जिस प्रकार संसार के समस्त प्राणी की एक आयु निर्धारित होती है उसी प्रकार एक कल्प की भी आयु सीवा होती है अतः कल्प के अंत में प्रलय होना निश्चित है प्रलय का एक कारण यह भी है कि कलयुग में पापा चार भ्रष्टाचार बहुत अधिक होता है और कल्प के अंतिम कलयुग के समाप्त होते-होते पाप कर्म इतने अधिक बढ़ जाते हैं कि पृथ्वी देवी उन पापों के बोझ को सहन नहीं कर पाती उनके करुण कंधन से ईश्वर द्रवित हो उठते हैं और परिणाम स्वरूप वे महाप्रलय की रचना करके सबका अंत कर देते हैं ये महाप्रलय महा विनाशकारी होती है हनुमान अच्छा [प्रशंसा] [प्रशंसा] उस समय की महाप्रलय भी महा भयंकर हुई होगी सब कुछ नष्ट होने का अर्थ है सबकी मृत्यु सबकी मृत्यु नहीं हनुमान कलयुग के पापम अंधकार में भी धर्म और आस्था की ज्योति जगाए रखने वाले कुछ भक्त हृदय मनुष्य भी होते हैं ऐसे कुछ स्त्री पुरुषों कुछ जीव जंतुओं एवं वनस्पतियों आदि को स्वयं ईश्वर ने अपनी लीलाओं के द्वारा विनाशकारी प्रलय से बचाया था यही तो मैं भी सोच रहा था माता कि भक्तों की रक्षा ईश्वर ने अवश्य ही की होगी हनुमान महाप्रलय से भक्तों के प्राण बचाने के लिए लिए ही भगवान श्री विष्णु देव ने ही मत से अवतार लिया [संगीत] था कलयुग के अंत का समय आ गया है किंतु प्रभु के श्री मुख पर विचलित होने के कोई संकेत नहीं दिखाई दे रहे [संगीत] हैं [संगीत] स्वामी जगत का अंत होने को है चग को अपने प्रथम अवतार के दर्शन दीजिए [संगीत] प्रभु प्रलय की विनाश लीला का आरंभ हो गया है आश्चर्य है मुझे आपके भक्तो एवं जीव जंतु आदि की चिंता हो रही है प्रभु किंतु आप निश्चिंत एवं प्रस चित दिखाई दे रहे हैं आपकी भी लीला का समय हो गया है [संगीत] प्रभु [संगीत] [संगीत] ओम तत्पुरुषाय विध महा मनाया धीमहि तनो विष्णु प्रचोदयात ओ नमो भगवते महा मय नमः किंतु माता उस छोटे से मत्से ने सारे भक्तों को महाप्रलय महाविनाश से कैसे बचा लिया शीघ्र बताइए माता वानर हूं ना चंचल बुद्धि हूं आप मेरी चंचलता पर ही हस रही है ना क्या करूं माता शीघ्र ही उतावला हो जाता हूं पुन हसने लगी आप माता हनुमान तुम्हारे भोले भाले मुखड़े और नटखट भाव मां से हसी आ गई थी हनुमान छोटी सी मुट्ठी में भी सारा संसार समा सकता है स्मरण रहे हनुमान संसार में छोटा बड़ा कुछ नहीं होता जो आज बड़ा दिखाई दे रहा है वो कल छोटा हो जाता है और जो आज छोटा है वो कल बड़ा भी हो जाता [संगीत] है मुझे तो कुछ समझ में ही नहीं आ रहा है माता हनुमान जब कथा पूर्ण होगी तब तुम्हें मेरे कथन का अर्थ समझ में आएगा अभी नहीं तो शीघ्र बताइए ना माता प्रभु विष्णु जी की मत से अवतार की कथा तो ध्यान पूर्वक सुनो जिन भक्तों को प्रभु बचाने वाले थे उनमें सर्वश्रेष्ठ भक्त थे महा तेजस्वी राजा सत्यव्रत अतः प्रभु सर्वप्रथम राजा सत्यव्रत के पास पहुंचे जो उस समय स्नान से निवृत हो रहे थे ओम हरि नारायण [संगीत] नमः ओम हरि नारायण नमः ओ हरि नारायण नमः ओम हरि नारायण नमः ओम हरि नारायण नमः रुक जाइए राजन यह मत्स मेरी अंजली में मुझे जल में मत छोड़िए राजन प्रभु आपकी लीला भी अनोखी है आपकी कृपा हो तो पत्थर भी बोल पड़ते हैं यह तो एक जीवधारी मत से है आप तो देख ही रहे हैं मैं एक छोटा सा मत हूं समुद्र में भयानक जलचर के मध्य मेरा जीवन कभी भी संकट में पड़ सकता है वे एक क्षण में मुझे अपना भोजन बना लेंगे मैं इसीलिए आपकी शरण में आया हूं मेरी रक्षा कीजिए मत तुम बिल्कुल चिंता ना करो मैं भली भाती तुम्हारी देखभाल करूंगा और तुम्हें रहने के लिए सुरक्षित और पर्याप्त स्थान दूंगा धन्यवाद [संगीत] राजन अर्थात माता प्रभु सत्यव्रत जी को प्रभु ने तनिक सा भी आभास नहीं होने दिया कि मत्स्य के रूप में स्वयं प्रभु ही थे हां हनुमान भगवान दर्शन देने से पूर्व अपने भक्त की भक्ति की कड़ी परीक्षा लेते हैं [संगीत] हां फिर राजा सत्यव्रत जी की प्रभु ने कैसे परीक्षा ली राजा सत्यव्रत उन मत्स रूपी प्रभु को कमंडल में लेकर महल पहुंचे हरि ओम नमो नारायण हरि ओम नमो नारायण हरि ओम नमो नारायण हरि ओम नमो नारायण हरि ओम नमो [संगीत] नारायण हरि ओम नारायण हरि हरि ओम नारायण हरि यह ध्वनि कहां से आ रही है यह गगड़ की ध्वनि तो और तीव्र हो यह ध्वनि कहां से आ रही है यह मत्स इतना शीघ्र कैसे बड़ा हो गया राजन आपने तो मुझे भली भाति देखभाल करने का वचन दिया था किंतु इस छोटे से कमंडल में मुझे रख दिया आपने यह बहुत छोटा है मैं असहज हूं इसमें अच्छा अच्छा तुम चिंता मत करो मैं तुम्हें तुम्हारे योग्य किसी बड़े और सुरक्षित स्थान पर ले जाता हूं धन्यवाद राजन हरि ओम नारायण हरि हरि ओम नारायण हरि अब तुम इसमें आराम से रहो यह स्थान तुम्हारे लिए काफी बड़ा अच्छा और सुरक्षित है यह विशाल पात्र तुम्हारे लिए उपयुक्त रहेगा तुम्हें यहां कोई कठिनाई नहीं [संगीत] होगी हरि ओम नारायण हरि अब क्या हुआ राजन रक्षा कीजिए मत्स तुम चिंता ना करो हम तुम्हारे साथ किसी भी प्रकार की कोई दुर्घटना नहीं होने देंगे हम तुम्हें इससे भी बड़े और उपयुक्त स्थान पर रखेंगे धैर्य रखो अर्थात पुनः प्रभु की लीला हुई फिर क्या हुआ माता शीघ्र बताइए ना फिर जैसे ही राजा सत्यव्रत ने कक्ष के बाहर अपना पांव [संगीत] रखा अब तुम इसमें रहो और आशा करता हूं कि तुम यहां सुख पूर्वक रह सकोगे कदाचित ऐसा ही हो किंतु आप मुझे एक आकी छोड़कर मत जाइए कहीं पुन कुछ हुआ तो मैं क्या करूंगा अरे नहीं नहीं मत तुम चिंता मत करो मैं तुम्हें छोड़कर कहीं नहीं जाऊंगा तुम यहां बिल्कुल सुरक्षित [संगीत] हो परंतु मा हनुमान को एक बात समझ नहीं आ रही है यदि प्रभु को मत्स्य रूप में बड़ा होना ही था तो वह छोटे रूप में क्यों आए और वह धीरे-धीरे करके बड़े हुए एक ही बार में बड़े क्यों नहीं हो जाते बड़ी परीक्षाओं के उपरांत ही प्रभु के दर्शन होते हैं हनुमान यह राजा सत्यव्रत के धैर्य एवं उनकी सहनशीलता की परीक्षा थी इसके साथ ही भविष्य की घटना से भी भी इनका संबंध था अब क्या हो रहा है पुन बड़ा हो गया य [संगीत] मत हे भगवन विचित्र है य मत इसकी देह में कितनी तीव्रता से वृद्धि हो रही है राजन क्या सोच रहे हैं शीघ्र कुछ कीजिए यह पात्र भी मेरे लिए छोटा पड़ रहा है [संगीत] [संगीत] [संगीत] नन्ही मीन का मंडल माए आकारा में बढ़ती जाए ताल तलैया सरी समंदर हारे मच्छ से सारे पयोधर धर्म परायण धर्म अधिष्ठापन तो रे निर्बल निष्ठा लेवे परीक्षा नृप की आए मत्व तारा हरि [संगीत] दर्शाए यह क्या विचित्र माया है एक साधारण मत्स के लिए तो क्या इस संसार के किसी भी प्राणी के लिए ऐसा चमत्कार करना असंभव है कदाचित कदाचित मेरे प्रभु की मुझ पर विशेष कृपा हुई है और और उन्होंने यह निश्चय किया है [संगीत] कि प्रभु मेरे प्रभु मेरे नारायण हरि मैं जानता हूं कि इस अद्भुत मत्स रूप में आकर आपने अपने इस भक्त पर विशेष कृपा की है प्रभु अब आप मुझे दर्शन देकर मेरा जीवन धन्य कर दीजिए प्रभु मुझे दर्शन दीजिए मुझे दर्शन [संगीत] दीजिए प्रभु महाराज सत्यव्रत वर्षों की कठिन तपस्या एवं साधना से भक्त भगवान को भी अपने वश में कर लेता है देखिए आज मैं भी आपकी श्रेष्ठ भक्ति के बंधन में बंकर यहां चला आया मेरे तो भाग्य ही खुल गए हरि नारायण आपकी जय हो आपको मेरा कोटि कोटि नमन जय हो आपकी प्रभु आपने दर्शन देकर मेरे संपूर्ण जीवन की साध पूर्ण कर दी प्रभु मेरे भगवन अब मुझे अपने इस जीवन में कुछ और प्राप्त करने की इच्छा नहीं रही किंतु महाराज सत्यव्रत आज तो मुझे आपसे कुछ चाहिए प्रभु मेरे पास मेरा तो कुछ भी नहीं है जो कुछ है सब आपकी कृपा का फल है प्रभु आप आज्ञा दे प्रभु मैं अपना जीवन भी आपके चरणों में अर्पित करने के लिए प्रस्तुत हूं राजन आपको अपना जीवन अर्पित नहीं करना है आपको औरों की जीवन रक्षा का कार्य करना है प्रभु मैं आपके इस कथन का आशय नहीं समझा राजन इस युग का अंत सात दिनों में होने वाला है पृथ्वी के अनेक भागों में प्रलय आरंभ हो चुका है शीरी य संपूर्ण पृथ्वी प्रलय जल में समा जाएगी और इस पृथ्वी पर स्थित समस्त चराचर प्राणी मृत्यु को प्राप्त हो जाएंगे इस विनाशकारी प्रलय में अब तक पृथ्वी का चतुर्थ भाग डूब भी चुका है इसलिए राजन मैंने आपको एक महान दायित्व सौंपने का निश्चय किया है कि आप सभी भक्त स्त्री पुरुषों सभी प्रजाति की वनस्पतियों और वृक्षों के बीच समस्त पशु पक्षियों के नर मादा जोड़े एवं सप्त ऋषियों को उनके परिवार सहित एक विशाल नौका में एकत्रित कर ले यह कार्य आपको सीमित समय अवधि में पूर्ण करना है मैं अपनी पूर्ण क्षमता के साथ आपके इस आदेश का पालन करूंगा प्रभु किंतु चिंता ना करें राजन आपकी सहायता के लिए मैं रहूंगा आपके साथ बस आपको इतना स्मरण रखना होगा कि नौका को जल में उतारने से पूर्व आपको नागराज वासुकी को भी अपने साथ नौका में रखना होगा प्रभु जब मेरे शीर्ष पर आपका वरद हस्त है तो यह कार्य तो संपन्न होगा ही बस अपना आशीष मुझ पर सदा यूं ही बनाए रखें प्रभ मुझे आप पर पूर्ण विश्वास है महाराज सत्यव्रत जिस प्रकार आपने मेरे इस मत से रूप जीवन की रक्षा के लिए इतनी तत्परता से प्रयत्न किए उसी प्रकार अन्य जीवों की रक्षा करने के लिए भी आप उतनी ही तत्परता से कार्य करेंगे अवश्य प्रभु आपके इस आदेश का पूरे प्राण प्रण से पालन होगा अच्छा अब समझा हनुमान कि भगवान विष्णु जी राजा सत्यव्रत जी की इतनी कड़ी परीक्षा क्यों ले रहे थे क्यों वह पहले नन्ने मच्छ के रूप में आए फिर धीरे धीरे बड़े होते गए और य विशाल रूप धारण कर लिया राजा सत्यव्रत जी सहनशीलता की सीमा को देखना चाह रहे थे व कि सबके प्राण बचाने के लिए राजा सत्यव्रत पूर्ण तत्परता से कार्य कर सकते हैं या [संगीत] नहीं किंतु मैं अभी भी यह नहीं समझ पा रहा हूं कि भगवान विष्णु ने मत्से का रूप ही क्यों धारण किया जब पूर्ण कथा सुनोगे हनुमान तो तुम्हें यह भी समझ आ जाएगा जैसे तुम राजा सत्यव्रत की परीक्षा के बारे में जान गए हो परीक्षा की सफलता ने ही राजा सत्यव्रत को इतना महान उत्तर दायित्व दिलाया वे भी पूर्ण तत्परता एवं मनोयोग से विष्णु देव के भक्तों सहृदय एवं सत् कर्मी स्त्री पुरुषों एवं अन्य जीवधारियों और वनस्पतियों को एकत्रित करने में जुट गए उनके सेवक भी हर दिशा से मनुष्यों प्राणियों और वनस्पतियों को ला रहे [संगीत] थे [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] सेवकों हमें पूरी तीव्रता के साथ कार्य करना होगा बिना रुके क्योंकि प्रलय का जल यहां किसी भी क्षण पहुंच सकता है इसलिए बिना क्लांत हुए पूरी शक्ति से कार्य [संगीत] करो महाराज अब हम श्रमिकों की भाति कार्य मत कीजिए हम शीघ्र कार्य पूर्ण कर लेंगे राजा तो प्रजा का सेवक होता है प्रजा के जीवन की रक्षा करना ही राजा का प्रथम कर्तव्य है जितने हाथ श्रम करेंगे जी उतना ही कार्य तेजी से पूर्ण होगा जी [संगीत] महाराज साथियों वर्षा कितनी भी तीव्र गति से हो हमारी दृढ़ इच्छा शक्ति को परास्त नहीं कर सकती क्योंकि हमें प्रलय को परास्त करना है किसी भी मूल्य पर [संगीत] [संगीत] साथियों समय बहुत अल्प है मित्रों अपनी संपूर्ण शक्ति और सामर्थ्य लगा दो विनाशकारी प्रलय का जल हमें डुबाने को उतावला है किंतु हम भी सबके जीवन की रक्षा के लिए तत्पर है हमें संसार के भविष्य के लिए सभी चराचर प्राणियों और वनस्पति को बचाना है एक क्षण का भी विलंब नहीं होना चाहिए अन्यथा अनर्थ की संभावना बढ़ जाएगी यह आखरी लकड़ी शेष है महाराज सभी मनुष्य पशु पक्षी वर्ग एवं वनस्पतियों के बीज आद एकत्रित कर लिए गए हैं नागराज वासुकी भी शीघ्र ही आते होंगे नौका का कार्य भी लगभग पूर्ण हो चुका है यह लो लगाओ इसे आओ श्र करो जी महाराज जो महाराज यह तो पूर्व संकेत है प्रल नौका के द्वार खोल दो और सबको शीघ्र अति शीघ्र नौका में भेजो जी महाराज शीघ्र करो जी महाराज श्र चलो श्र कर श्र चलो रक्षा करो रक्षा करो जाइए [संगीत] शीघ्र [संगीत] यह वनस्पति और वृक्षों के बीज आदी है जाइए जाइए श्र कीजिए चलो शीघ्र चलो की हिंसक पशुओं को देखकर कोई भयभीत ना हो इस विनाशकारी प्रलय से सबके प्राण बचाने हैं हमें आप सब लोगों से हमारी यह विनती है कि इस कठिन घड़ी में एक दूसरे की सहायता करें वो मनुष्य हो या पशु पक्षी आप सब सहयात्री है इस नौका में आइए शीघ्र कीजिए जी महाराज चलो श्र करो श्र करो प्रलय जल निकट आ गया [प्रशंसा] है प्रलय जल तो आ ही गया है राजन कहीं य शेष लोग छूट ना जाए आप चिता कीजिए मैं किसी को छूटने नहीं दूंगा श्र कीजिए जाइए श्र हा जी महाराज श्र करो और कोई शेष बचा [संगीत] है ये नागरा आज वासुकी कहां रह [संगीत] गई महाराज और प्रतीक्षा मत कीजिए द्वार बंद कराइए हमें नागराज वासुकी की प्रतीक्षा करनी ही होगी प्रभु ने उन्हें साथ लाने को कहा था किंतु महाराज जल यदि नौका में भर गया तो कोई नहीं बच पाएगा आप सब लोग धैर्य रखें मुझे पूर्ण विश्वास है नागराज वासुकी शीघ्र ही आते होंगे [संगीत] प्रभु श्री नारायण का नाम लो और द्वार बंद करो जल्दी हरि ओमम नारायण ह हरिम नारायण ह आप सब लोग सतर्क रहे धैर्य रखें और तनिक भी भयभीत ना हो प्रभु श्री नारायण हम सबकी रक्षा करेंगे निश्चिंत रहे आप लोग हे भगवान ऐसे विनाशकारी लहरे कहीं ये नौका ही ना बलट जाए शुब शुभ बोलो प्रभु पर भरोसा रखो वो सब ठीक कर देंगे प्रभु श्री हरि नारायण की जय प्रभु श्री हरि नारायण की जय हरि ओम नारायण हरि हरि ओम नारायण हरि हरि ओम नारायण हरि हरि ओम नारायण हरि हरि ओम नारायण हरि माता प्रभु की कृपा से सब नौका सहित जल में तो उतर गए परंतु क्या नौका इतनी सुदृढ़ बनी थी जो प्रलय की भयंकर लहरों की थपेड़ों को सहन कर सके सब सुरक्षित रह सके जैसे जैसे नौका आगे बढ़ रही थी प्रलय कारी लहरें और अधिक भयावह हो रही थी धैर्यवान और संकल्प व्यक्ति को ही जीवन में बड़ा कार्य करने का उत्तरदायित्व मिलता है

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