[संगीत] [संगीत] स्वर्ण जितना तपता है उतनी ही उसकी चमक बढ़ती है और फिर हम है ना हनुमान की देखभाल के लिए और जब राम अवतार में मेरा हनुमान से मिलन होगा उसके पश्चात तो उसका समस्त उत्तरदायित्व मेरा होगा अतः आप दोनों निश्चिंत होकर स्वर्ग की ओर प्रस्थान करें और स्वर्ग का आनंद उठाने के पश्चात आप दोनों को दुर्लभ मोक्ष की भी प्राप्ति ई स्वर्ग के पश्चात मोक्ष यह मोक्ष क्या है देव सबसे बड़ा आनंद है ये सच्चित आनंद अर्थात परम आनंद जीवन मृत्यु आदी समस्त भव बंधनों से मुक्ति तो क्या मेरा हनुमान भी होगा वहां मेरे साथ नहीं हनुमान को संसार के कल्याण के लिए कार्य करना है गंगा मया के लिए मुझे उनका मार्ग जीव जंतुओं से रहित करना [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] होगा वो आनंद वो मोक्ष वो स्वर्ग नहीं चाहिए हमें जहां मेरा हनुमान ना हो हम हनुमान के लिए स्वर्ग छोड़ सकते हैं प्रभु किंतु स्वर्ग के लिए हनुमान को नहीं छोड़ सकते तो आप दोनों की क्या इच्छा है ये कि आपकी ममता और आपका पुत्र प्रेम राम कार्य में बाधा बनी नहीं परमपिता हनुमान के जीवन के उद्देश्य की पूर्ति में बाधा नहीं बनना चाहती मैं हमारा पुत्र प्रेम कभी भी हनुमान के कार्य के मध्य नहीं आएगा हम हृदय पर पत्थर रखकर स्वयं को उससे दूर कर लेंगे किंतु उसे छोड़कर यहां से कहीं और दूर नहीं जाएंगे किसी का कोई अहित नहीं होने देगा हनुमान [संगीत] आइए नारायण नारायण हनुमान तो सबको सुरक्षित रखने के लिए इतना श्रम कर रहा है किंतु कहीं कोई हनुमान के इस कृत को उद्दंडता समझकर रुष ना हो जाए नारायण नारायण जब श्री राम के कार्य का समय आएगा हम उसे कदा भी नहीं रोकेंगे यहां रहने से हमें य आशा तो रहेगी कि हम उसे कभी ना कभी पुन देख सके अपने हनुमान की एक झलक पाने के लिए हम अपना सारा जीवन इस पृथ्वी पर बिता सकते हैं न पर हनुमान ना हो वहा एक पल भी नहीं रह पाएंगे हम इनका कथन सर्वता उचित है प्रभु इनकी ममता और दुलाल हनुमान के कार्य में बाधक नहीं बनेगी वैसे भी हनुमान को अपनी मां की आशीर्वाद सेही सदैव आत्मविश्वास की शक्ति प्राप्त [संगीत] हुई अपने पुत्र के लिए प्रतीक्षा उससे पुनर्मिलन की आशा स्वर्ग सुख एवं मोक्ष से भी अधिक आनंद हो है आप कैसे एक माता पिता को इस आनंद से वंचित कर सकते हैं सत्य है मां की ममता और पिता के स्नेह के समक्ष स्वर्ग और मोक्ष भी गौण हो जाते हम प्रदेव [संगीत] भी इनके विरुद्ध नहीं जा सकते किंतु एक निवेदन है आपसे आप भले ही पृथ्वी पर रहे परंतु जब समय आए तो हनुमान को उसके उद्देश्य की पूर्ति के लिए प्रोत्साहित करें उसकी बाधा ना बने प्रभु हम आपको वचन देते हैं कि श्री राम के कार्य में हमारा पुत्र मोय कभी भी बाधक नहीं होगा हम पर इतनी कृपा करने के लिए आपको बहुत-बहुत धन्यवाद आप सबको शत शत [संगीत] नमन [संगीत] कल्याण [संगीत] अंजना हनुमान के शापित होने का भय सता रहा है तुम्हें प्रिय जब ईश्वर हमारे पुत्र के साथ है तो फिर कैसी चिंता देखना हनुमान शीघ्र वापस आ [संगीत] जाएगा [संगीत] नारायण नारायण जल का प्रवाह तो ऋषिवर की कुटिया की ओर है और हनुमान हनुमान अन्य मनुष्यों की रक्षा में लगा हुआ [संगीत] है अरे ये भी गंगा जी की मार् की ओर आ रहे हैं क छोड़ छोड़ो छोड़ो कहीं कोई अनर्थ हो गया तो दोष हनुमान को ही लगेगा नारायण [संगीत] नारायण ऋषिवर जी की कुटिया को भी गंगा मया के मार्ग से हटाना होगा [संगीत] मुझे किसने किया हैय दुस्स मेरा तब भंग करने का यह क्या किस मायावी ने मेरी कुटिया उठाकर यहां स्थापित कर दी दंड का भागी है [संगीत] वो हनुमान तुमने मेरे साथ परिहास किया है इसका दंड तुम्हे भुगतना होगा मेरी कुटिया वाले स्थान पर इतना तीव्र जल प्रवाह मेरी कुटिया और मैं संकट में पड़ सकते थे इसका अर्थ है हनुमान ने हमें जल के मार्ग से हटाकर हमारी रक्षा की है धन्यवाद हनुमान धन्यवाद तुम्हारा कल्याण हो अकस्मत ही यह कंपन कैसे होने लगा युवराज हनुमान युवराज हनुमान लौट आए हैं साथ में परम पावनी गंगा मैया को भी लाए हैं [संगीत] [संगीत] फ [संगीत] हनुमान मेरे लाल तुमने असंभव को भी संभव कर दिया अरे गंगा का वेग तो पंपास राज्य की सीमा की ओर बढ़ रहा है जहां ऋषि सामत ज कल्याणकारी यज्ञ कर रहे [संगीत] [संगीत] हैं प्रणाम गंगा [संगीत] [प्रशंसा] माता हनुमान तुम्हारा मनोरथ सफल हो गया तुम्हारी इस अद्भुत प्रयास से जमू द्वीप की अन्य नदियों को भी मैं स्वयं से जोड़ सकी अब वे नदिया भी स्वच्छ एव पवित्र हो गई है माता मैं तो मात्र निमित था मुझ पर तो कृपा आपने और ऋषिवर अगस्त ने की है माता आप मुझ पर अपना आशीर्वाद ऐसे ही बनाए रखें हनुमान अब जिस उद्देश्य से तुम मुझे यहां तक लाए हो उसे पूर्ण करो पुत्र मेरा जल लेकर शीघ्र ऋषि अंगर के पास जाओ अवश्य माता [संगीत] प्रणाम ऋषि अंगी रस मेरी प्रतीक्षा कर रहे होंगे जल भरने के लिए पात्र यही कहीं होगा ढूंढता हूं कैसे लेकर जाऊं गंगाजल [संगीत] को ओम भद्रं करणे शयाम देवा भदम पश्मा जत्रा र रंगवा सतन देवत यदा अनर्थ है ये जल कहां से आ रहा है यह जल इस यग को विध्वंस कर रहा है परंतु उस और तो जल का कोई श्रोत ही नहीं [संगीत] है अवश्य यह किसी ने जान के किया है किसने किया है दु मैं पूछता हूं किसने किया है दुस्ता हनुमान ये क्या कर रहा [संगीत] है कहीं यह सब हनुमान ने तो नहीं किया हनुमान [संगीत] हनुमान हनुमान ने मेरी पुकार भी नहीं [संगीत] सुनी कहीं ऐसा तो नहीं कि हनुमान अपनी दिव्य शक्तियों का दुरुपयोग कर रहा [संगीत] है तो मेरा संदेह सर से निकला हनुमान नहीं उ दंता की है हनुमान तुम्हें इस उद्दंडता के लिए दंड अवश्य मिलेगा अवश्य मिलेगा [संगीत] [प्रशंसा] तुम्हें [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] ताता [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] ध [संगीत] ऋषिवर लीजिए गंगा मैया का पवित्र जल आपके आशीर्वाद और ऋषि अगस्ते की कृपा से गंगा मैया सुमेरू में पधार चुकी है ऋषिवर इतना ही नहीं गंगा मैया के मार्ग में आने वाली समस्त नदियां उनसे जुड़कर पवित्र हो गई उचित है उचित है किंतु बड़ी देर कर दी तुमने प्रभु के स्नान के लिए मैं कब से प्रतीक्षा कर रहा था लाओ गंगाजल क्षमा [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] करें [प्रशंसा] [संगीत] ओम तस्मा जत सर्वत सतम प्रसम पशु चक्रे वायव नारण ग्राम्या मंदा किस्तु यवा सर्व पाप हरम शुभम तदम कल्पित देव स्नानाम प्रति [संगीत] ग्रता नहीं नहीं नहीं [संगीत] हनुमान तुम्हारी भक्ति तुम्हारी श्रद्धा तुम्हारी शता सब कुछ मिथ्या [संगीत] है देख लिया आप लोगों ने पवित्र जल तक अशु हो गया इस स्पर्श मेरे प्रभु की प्रतिमा शुद्ध होने के स्थान पर और अशुद्ध हो गई ना जाने मुझसे कहां और कैसे भूल हो गई मेरी पूजा अधूरी रह गई मेरे प्रभु का विग्रह अशुद्ध हो गया और इसका कारण केवल तुम हो हनुमान और अब तुम्ह इसका दंड भोगना होगा कहीं परमपिता ब्रह्मदेव का कथन सत्य ना हो जाए कुछ कीजिए स्वामी अन्यथा अनर्थ हो जाएगा क ऋषि और हनुमान को शापना [संगीत] देते [संगीत] हनुमान मेरा कोप श्राप बनकर तुम पर टूटेगा [प्रशंसा] [संगीत] हनुमान [संगीत] रुक जाइए ऋषिवर की रस षि की [संगीत] रस यह स्वर प्रभु के श्री विग्रह से आ रहा है क्या ऋषि अंगी रस शुद्धता मात्र जल में ही नहीं जल अर्पित करने वाले के हृदय में भी होनी चाहिए दोष गंगाजल का या हनुमान की भक्ति का नहीं अभी तो आपके दूषित मन का है [संगीत] प्रभु प्रभु प्रभु य आप कह रहे प्रभु शुद्ध मन से की गई भक्ति ही सफल होती [संगीत] है भक्ति में ईर्ष्या द्वेष या प्रतिस्पर्धा का कोई स्न नहीं होता किंतु आप तो भक्ति की स्पर्धा करने लगे व भी हनुमान के [संगीत] [प्रशंसा] साथ मुझसे मुझसे बहुत बड़ी भूल हो गई है प्रभु मैं श प्रार्थी मनुष्य को स्वयं की भक्ति पर विश्वास रखना चाहिए किसी की भक्ति पर संदेह करने वाला मनुष्य का भक्ति बल क्षीण हो जाता [संगीत] है हनुमान की भक्ति साक्ष्य है इसका आप हनुमान के हाथ से मेरा अभिषेक [संगीत] कराइए [संगीत] [संगीत] [संगीत] परंतु इसमें तो कुछ ही बूंदे शेष है [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] पवन [प्रशंसा] पुत्रा पवन [संगीत] पुत्र [संगीत] [संगीत] हो [संगीत] आ [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] मेरे पुत्र की निश्चल भक्ति को प्रमाणित करिए प्रभु ईर्ष्या मन में अंगी रस धारे द्वेष से भगवन कर दई कारे जल की बूंद जो हनुमत डारी प्रभु प्रतिमा भई उजियारी अंगी रस मनी कपी शक्ति सबसे अग्रज हनुमत भक्ति भक्ति समर्पण का है नाम राम का जो है उसके राम ये गाथा महाबली हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] हनुमान मेरे प्रभु मेरे हनुमान की भक्ति पुनः प्रमाणित हो [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] गई [संगीत] [प्रशंसा] हनुमान मुझे क्षमा कर दो हनुमान और आप सब से भी मैं क्षमा मांगता हूं अपने भक्ति के अहंकार में मैं हनुमान की भक्ति पर संदेह कर बैठा [संगीत] था अपनी भक्ति को श्रेष्ठ प्रमाणित करने के लिए मैं स्पर्धा करने लग गया था हनुमान के [संगीत] साथ हनुमान की भक्ति भाव के प्रति दवे भाव आ गया था मेरे मन में मुझे क्षमा कर दो क्षमा कर दो मुझे हे श्री राम भक्त हनुमान हनुमान [संगीत] हनुमान आ [संगीत] ब तुमने मेरे यज्ञ को नष्ट किया है [संगीत] हनुमान [संगीत] मैं ऋषि अंगर पुत्र सामत तुम्ह श्राप देता हूं कि जिन देव शक्तियों ने तुम्ह उदंडी बना दिया है तुम उन समस्त वदानी शक्तियों को पूर्णत भूल जाओगे उन समस्त मर्दानी शक्तियों को भूल भूल जाओगे [संगीत] [संगीत]
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