[संगीत] इस नाग बालक के कारण कोई भी संकट उत्पन्न हो सकता [संगीत] है इसलिए इसे सुरंग के अंदर दिव्य गरुड़ पंख के पास जाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए हनुमान कहीं य गरुड़ मुझ पर आक्रमण ना कर दे तुम चिंता मत करो नाग भूषण तुम्हें कुछ नहीं होगा केवल मुझे छोड़ना मत यदि ऐसा है तो मैं भी अपने मित्र को अकेला नहीं छोड़ूंगा मैं भी इसके साथ यही रहूंगा नहीं मित्र हनुमान आप जाइए मुझे यह जानकर प्रसन्नता हुई हनुमान कि तुम्हारे लिए तुम्हारे मित्र की सुरक्षा सर्वोपरि है तुम्हारा मित्र भी हमारे साथ चल सकता है किंतु महाराज यदि इस नाग बालक के कारण कोई संकट उत्पन्न होता है तो हनुमान ही उसका उत्तरदाई होगा उचित है यदि मेरे मित्र से कुछ अनुचित हुआ तो उसका उत्तरदायित्व मेरा होगा अब तो ठीक है चित्र केतू अब तो कोई आपत्ति नहीं है ना आपको चलिए सब मेरे साथ प्रस्थान कीजिए धन्यवाद जटायु [संगीत] जी चलो [संगीत] [संगीत] मित्र [संगीत] मंत्री जी जी महाराज वन संघ के सभी राजाओं को मेरी ओर से आमंत्रण पत्र भेज दीजिए पुत्र वाली को वन संघ का अधिनायक बनाने हेतु सबकी सहमति आवश्यक है इसलिए सबका आना अनिवार्य है सब आएंगे महाराज मुझे पूर्ण विश्वास है युवराज बाली के आगमन से सब बहुत प्रसन्न होंगे और एक म से युवराज बाली को अपना अधिनायक चुनेंगे [संगीत] अब यह हास परिहास छोड़िए भैया प्रतीत हो रहा है कि पिताश्री इसी ओर आ रहे हैं उनके आने से पूर्व ही आप इस सिंहासन से उठ [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] जाइए अरे वाह यह करोड़ राज्य में इतनी बड़ी सुरंग हनुमान [संगीत] सावधान मित्र बचो अच्छा हुआ हनुमान कि तुम लोग बच गए तुम्हें इस जगह की जानकारी नहीं है तुम आगे मत चलो मेरे पीछे पीछे चलो ध्यान रखना यहां पक पक पर सावधान रहना है यह हमारी स्वचालित सुरक्षा व्यवस्था के अंतर्गत किया गया एक वार था जो कि हमारे दिव्य पंख को रखने की की गई एक व्यवस्था है अब मेरा ध्यान से अनुसरण करो जहां जहां मैं पाव रखूं वहां वहां अपने पांव रखना अब आगे बढ़ते हैं युवराज यह क्या आप सिंहासन पर यह आपको शोभा नहीं देता आप अभी युवराज हैं युवराज नहीं महाराज आप के महानतम महाराज [संगीत] [संगीत] वाली [संगीत] पर्यास कर रहे हो पुत्र वाली मेरे पश्चात तो तुम ही सिंहासन पर बैठने वाले हो अत अभी वहां से उठो और अपना उचित स्थान ग्रहण [संगीत] करो पिता श्री य यही सर्वोत्तम स्थान है मुझ महानतम वाली के लिए हां आप अवश्य अपने लिए कोई उचित स्थान ढूंढकर ग्रहण कर लीजिए वाली यह राज सिंहासन है राज्याभिषेक के पश्चात ही कोई इसे ग्रहण कर सकता है अतः सिंहासन से उठो और सिंहासन की मर्यादा का उल्लंघन मत करो शक्ति और बाहुबल से भी राज सिंहासन प्राप्त किए जाते हैं पिताश्री बस वाली बहुत हो चुका तुम्हारा यह हट कदाचित तुम नहीं जानते कि यह राजद्रोह है अतः वहां से उठो अन्यथा मुझे अपने राज्य अधिकार का पालन करते हुए तुम्हें दंडित करना होगा पिता श्री आंधियों के चलने से वृक्ष उखड़ जाते हैं पर्वत नहीं हिलते बाली पर्वत है उसे हिलाने का प्रयास भी मत कीजिए क्योंकि यहां किसी को भी ज्ञात नहीं है कि महानतम वाली वरदान प्राप्त [संगीत] वाली क्या कर सकता है महाराज यह हम कहां आ गए आगे तो मार्ग ही नहीं है और वह दिव्य पंख भी नहीं है यहां पर तो मात्र अग्नि की दीवार है य अग्नि भीति मात्र एक छलावा है एक माया है ताकि अनाधिकृत रूप से प्रवेश करने वाले प्राणी इसमें प्रवेश ना कर [संगीत] सके [संगीत] वास्तव में तो यह उस दिव्य पंख तक जाने वाला रहस्यमय द्वार [संगीत] [संगीत] है [संगीत] आओ तुम सब मेरे पीछे आओ यह हमारे खग विद्या के मंत्र रक्षक आचार्य हैं [संगीत] हनुमान प्रणाम आज कल्याण हो महाराज जटायु यह है हम करणों की दिव्य शक्ति हमारे दिव्य पंख जिन्हें द दिशाओं और 14 भवनों के केंद्र स्थल में स्थापित किया गया है जिसके कारण हम गरु को दस दिशाओ और समस्त के ऊपर समान रूप से उड़ने की शक्ति प्राप्त होती है आश्चर्यजनक है यह सब खग विद्या से इन्ह य स्थापित किया गया है हनुमान इनके द्वारा प्रदान की गई उड़न शक्ति के द्वारा ही समस्त पक्षी वर्ग अनेक संकटों से मुक्त रहते हैं मैं इस दिव्य पंख की सुरक्षा के लिए पूर्णता सुरक्षित था मैं अश्वस्त था कि पंख अपनी जगह पर सुरक्षित है क्योंकि इस दिव्य पंख के अपने स्थान से हटते ही हम गणों की शक्ति धीरे-धीरे समाप्त होना प्रारंभ हो जाती है अब तो आपको भी विश्वास हो गया ना चित्रकेतु जी हमारा दिव्य पंख पूर्णता सुरक्षित है किंतु महाराज आपको यह दिव्य पंख प्राप्त कैसे हुआ हनुमान गरुण जी और अरुण जी संसार के प्रथम पक्षी हैं हम उन्हीं के वंशज हैं किंतु उड़ने की शक्ति केवल गरुण राज के पास ही [संगीत] [प्रशंसा] थी इसीलिए उन्होंने हम गरुण के कल्याण के लिए अपने इस दिव्य पंख को अभिमंत्रित कर हमें प्रदान कर दिया था अर्थात य दिव्य पं किसी भी पास चला गया तो उसे उड़ने की शक्ति प्राप्त हो जाएगी हां [संगीत] हनुमान हो [संगीत] अब यह क्या है किंतु इस पंख की शक्ति का संधान तभी हो पाएगा जब उस जाति के लोग यज्ञ द्वारा दिव्य पंख को अभिमंत्रित कर इसको अपने पास र रख और जब तक यह पत्र उनके पास रहेगा उनको उड़ने की शक्ति प्राप्त होती रहेगी इस सुनहरे पत्र पर अंकित है उनका यह दिव्य [संगीत] मंत्र लीजिए राज पुरोहित जी इसे सुरक्षित स्थान पर पुन रख दीजिए [संगीत] [संगीत] हनुमान दिव्य पंख और दिव्य मंत्र अपनी जगह सुरक्षित है अब हमें वापस चलना चाहिए प्रणाम आचार जी कल्याण हो [संगीत] चलिए मेरे नाग वर तीव्रता से बढ़ो गरुड़ राज्य की [संगीत] ओर एक क्षण हनुमान जटायु जी अब तो आप आश्वस्त है कि नागों में से किसी ने भी दिव्य पंख नहीं चुराए वह अपने रहस्यमय सुरक्षा स्थान पर सुरक्षित है और वैसे भी कोई भी नाग इस स्थान के रहस से परिचित नहीं है अब तो आप मेरे पिता श्री नागराज पंच भन को मुक्त कर दीजिए तुम पुनः हमारे महाराज पर दोषारोपण कर रहे हो के लिए तुम्हें मृत्यु दंड दिया जा सकता है क्या हुआ प्रतीत होता है जैसे सर्प सूंघ गया हो सबको यदि महानतम वाली ने अपने वरदान के बारे में बता दिया तो कहीं अचेत ही ना हो जाए आप सभी वाली तुम्हें कोई भी वर प्राप्त हुआ हो किंतु तुमने एक अक्षम्य अपराध किया है जिसके लिए तुम्हें दंडित अवश्य किया जाएगा और वो दंड मैं स्वयं तुम्हें [हंसी] दूंगा किस अधिकार से राजा मैं हूं मैं बैठा हूं किष्किंधा के राज सिंहासन पर स्वीकार कर लीजिए पिताश्री कि अब आप राजा नहीं रहे बाली पुत्र तुम तो ऐसे ना थे राज सत्ता राज सिंहासन प्रभुता महत्वाकांक्षा सब करा देती है पिताश्री बाली भैया आप पिता श्री का अपमान कर रहे हैं सुग्रीव बस बाली उद्दंडता की सारी सीमाए लांग चुके हो तुम अब अब तुम्हें दंड अवश्य मिलेगा उद्दंडता की सारी सीमाए लांग चुके हो तुम अब अब तुम्हें दंड अवश्य मिलेगा दंड मुझे सर को दीपक से जलाने का प्रयास करोगे या लोग को लकड़ी से काटने का पिताश्री अब इस संसार में कोई भी शेष नहीं है जो मुझ महानतम वाली के समक्ष दो पल भी टिक सके महाबली [संगीत] कोकक ऐसा मत कीजिए पिता श्री प्रणाम महाराज युवराज बाली को बंदी बनाकर कारागृह में डाल दिया जाए जो आजा [संगीत] महाराज [संगीत] सेनापति जी यदि आपने शीघ्र ही महाराज पंच भन को मुक्त नहीं किया तो सारे नाग आक्रमण कर देंगे और युद्ध कोई भी हो उसका परिणाम विनाशकारी ही होता है बस बस महाराज यह नाग बालक बार-बार आपके ऊपर दोषारोपण कर रहा है अन्य कोई होता तो अब तक उस का अंत कर चुके होते सेनापति जी अब ये नाग बालक हमारे दिव्य पंख के रहस्य को भी जान गया है इस प्रकरण को हम गरुण सभा में ले जाएंगे हां महाराज वहां सभी गरुड़ निर्णय करेंगे कि इस नाग बालक को मुक्त करना उचित होगा या नहीं गरुड़ स में निर्णय होगा इस नाग बालक का हां गरुण सभा में निर्णय होगा इस नाग बालक का ठीक है अगर आप लोगों की यही इच्छा है तो इस नाग बालक के भाग्य का निर्णय र स में ही होगा ना जाने अब मित्र भूषण के साथ क्या होने वाला है गरुड़ सभा में
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti
[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...
-
[संगीत] महाभारत प्रता श्री आपने सु शर्मा को ऐसा वचन क्यों दिया मेरे वचन पालन करने का तो प्रश्न ही नहीं उठता अनुज तुम क्या समझते हो कि स...
-
महाभारत इच्छा है तुम्हारी बस इसने तो एक ही रट लगा रखी है केशव इसे तो आपको गुरु बनाना है वस इस देश में गुरुजनों की क्या कमी है तुम हमें ह...
-
[संगीत] किंतु मेरे परिवार पर से किस पर संकट आने वाला है ऋषिवर बताइए ना ऋषिवर संकट किस पर होगा यह सोचने के स्थान पर तुम्हें यह सोचना चाहि...
No comments:
Post a Comment