Wednesday, 31 December 2025

बाल हनुमान ने अपने पिता की सेवा की Ishant Bharat Mahabali Hanuman Episode 247 Pen Bhakti

[संगीत] अनुमा मां देखिए ना पिताश्री के पांव में कितने छले पड़ गए हैं बहुत पीड़ा हो रही होगी इन्हे मुझे ज्ञात है हनुमान जिस प्रकार तुम मेरे लिए कुछ भी करने लिए सदैव तत्पर रहते हो उसी प्रकार तुम्हारे पिता श्री ने मेरे स्नेह वश मेरे प्राण बचाने का प्रयास [संगीत] किया इसीलिए उनके पांव में छाले पड़ गए किंतु ऐसा क्या हो गया था यह मति ऋषि के कहने पर चंद्र जल लाने के लिए चंद्रगी पर्वत पर बिना पादुका के गए [संगीत] [प्रशंसा] पिता श्री आपको तो बहुत पीड़ा हो रही होगी ना नहीं पुत्र मनुष्य जिससे प्रेम करता है उसके कष्ट दूर करने में यदि कोई पीड़ा होती है तो वह भी सुखदाई होती है तुम चिंता मत करो पुत्र तुम्हारी मां ने औषधि लेप लगा दिया है किंतु पिता श्री आपको तो पीड़ा हो ही रही होगी ना मां आप शीघ्र ही लेप दीजिए मैं पिता श्री को अपने हाथों से लेप [संगीत] लगाऊंगा पिताश्री पाव रखिए यहां पिता श्री मैं नहीं था ना इसीलिए आपको इतना कष्ट उठाना पड़ा किंतु आपने बताया तक नहीं और आप मेरे लिए युद्ध अभ्यास करने लगे पुत्र हनुमान माता-पिता के लिए संतान के सुख के समक्ष किसी भी पीड़ा का मोल नहीं है किंतु पिता श्री आपको कष्ट में देखकर मुझे बहुत दुख हो रहा है यह लो [संगीत] हनुमान पिता श्री मैं लेप लगाऊंगा तो आपकी सारी पीड़ा एं दूर हो [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] जाएंगी मुझे तो असीम सुख की अनुभूति हो रही है पुत्र माता-पिता को सबसे बड़ा सुख तभी प्रा होता है जब उसकी संतान उसकी सेवा करती है पिता श्री मुझे भी आपकी सेवा करते हुए असीम आनंद का अनुभव हो रहा है यह गाथा महाबली हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली हनुमान सच्चे सुत है मारुती धीर मात पिता सेवा व्रत बीर जनक जननी सेवा अनमोल जग में कौन लगाए मोल आा पालन हनुमत धर्म से सेवा कर्म सु पावन कर्मा मारुति पुत्र बरल जग माही तुम समान सुत को नहीं चाहि धा महाबली हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली [संगीत] हनुमान उस साध बालक को तो ज्ञात भी नहीं है कि जिन देवताओं और सृष्टि के लिए उसने बार-बार कष्ट स अपने प्राण संकट में डाले वही देवता उसके विरुद्ध देव सभा का आयोजन कर रहे हैं कितने दिनों के पश्चात आज वह नन्हा बालक अपनी मां के आंचल में सोया [संगीत] होगा देवराज उ पु देने के स्थान पर हम उसे दंड देने के लिए विचार विमर्श करेंगे देवऋषि अब आप ही बताए कि यह कहां का न्याय है व्यवस्था है नियमों की वायु देव काल के नियम बड़े ही कठोर और नियम भंग करने वाला बालक हो या कोई देव वो नियम अनुसार दंड का भागी तो होता ही है हम वो स्वप्न किंतु पिताश्री तो वैसे भी कष्ट में है उन्हें स्वप्न के विषय में बताऊंगा तो वह और विचलित हो जाएंगे मैं स्वयं ही स्वप्ने के विषय में समझने का प्रयास करता [संगीत] हूं यही है वो स्थान जहां से वसुरी छाया आगे बढ़ेगी नारायण [संगीत] नारायण देवर्षी प्रणाम देवर्ष आप यहां हनुमान अभी जो कुछ भी घटित हुआ था उससे कुछ परिस्थितियां निर्मित हो गई है तुम्हारे विरुद्ध जिनका साम तुम्ह करना [संगीत] होगा प्रणाम देवर आप किन परिस्थितियों के विषय में बात कर रहे हनुमान से कोई भूल हुई है क्या देवी अंजना अंधकार को दूर करने के लिए ज्योति स्वयं को जलाती है इसे ज्योती की भूल कहेंगे क्या ऐसी ही कुछ भूल हुई है हनुमान से किंतु इसे भूल समझने वाले देवताओं ने हनुमान को दंड देने के लिए देव सभा [संगीत] बुलाई किंतु ऐसे क्या भूल कर दी मैंने देवर्षी हनुमान पुत्र तुमने सृष्टि की रक्षा करने के लिए कालचक्र को विपरीत दिशा में घुमाया था जिससे समय असंतुलित हो गया और ग्रह नक्षत्रों की स्थिति परिवर्तित हो गई यही भूल तुम्हा हां देवर्षी कालदेव भी मुझसे इसी बारे में कुछ इंगत कर रहे थे किंतु कोई बात नहीं मैं अपनी भूल को सुधारने का प्रयास करूंगा इस विषय पर विचार विमर्श करने के लिए कालदेव ने देव सभा बुलाई है उनका मानना यह है कि तुमने उनके कार्यों में हस्तक्षेप किया है पुत्र हनुमान भूल चाहे अज्ञान वश हुई हो किंतु उसे सुधारने का प्रयास तो करना ही चाहिए और साथ ही क्षमा प्रार्थना करने से दोष का मार्जन भी हो जाता है इसीलिए तुम्हे कालदेव से क्षमा अवश्य मांगनी चाहिए ठीक है मां मैं ऐसा ही करूंगा और प्रयास करूंगा कि ग्रहों की स्थिति भी ठीक कर पाऊं हनुमान यह जान लो पुत्र कि देवता जब रुष्ट हो जाते हैं तो अनिश की संभावनाए बढ़ जाती है इसलिए उचित होगा कि तुम अभिलंब जाकर स्वयं ही देव सभा में उपस्थित हो जाओ आरोपी के स्वयं उपस्थित हो जाने न प्रक्रिया में उदारता से निर्णय लिया जाता है कि व कोई आप चिंता मत कीजिए मैं शीघ्र ही लौट आऊंगा आप केवल मुझे आज्ञा और आशीर्वाद दीजिए मेरा आशीर्वाद तो सदैव तुम्हारे साथ है अपना ध्यान रखना पुत्र प्रणाम वर्षी नारायण नारायण आज्ञ दे [संगीत] मां [संगीत] ग्रह नक्षत्र तो यही है किंतु मुझे तो ज्ञात ही नहीं है कि इनकी पूर्व की स्थिति कैसी थी अब मैं कैसे इनकी स्थिति ठीक करूंगा ये लो जल से भरा पात्र इस जल से भरे पात्र को लेकर तुम्हें संपूर्ण सृष्टि की परिक्रमा करनी है और यह स्मरण रहे कि परिक्रमा लगाते हुए तुम्हें मार्ग में जितने भी उल्का पिंड मिले तुम्हें उनकी गणना करनी है गुरुदेव सूर्यदेव शिक्षा ग्रहण करते हुए मैंने पूरे ब्रह्मांड का भ्रमण किया था उस समय को स्मरण करना होगा तो ही मैं इन सारे ग्रह नक्षत्रों की स्थिति ठीक कर [संगीत] पाऊंगा अब मुझे ग्रहों का ज्ञान दीजिए तो यह है ग्रह नक्षत्र की स्थिति किंतु आज की [संगीत] स्थिति [संगीत] अ पूर्व की स्थिति और आज की स्थिति की तुलना करता हूं [संगीत] [संगीत] अब ग्रह नक्षत्रों की स्थिति पूर्ववत हो जाएगी [संगीत] [संगीत] हम [संगीत] हनुमान तुमने मेरे बुद्ध ग्रह को पुनः अपनी कक्षा में स्थापित कर दिया है तुम्हें धन्यवाद क्षमा करें बुद्धदेव तुमने मेरे ग्रह की स्थिति को ठीक किया है हनुमान तुम तो आशीर्वाद के पात्र हो क्षमा क्यों मांग रहे हो बुद्धदेव मेरे कारण आपके ग्रह नक्षत्र की स्थिति परिवर्तित हो गई थी इसीलिए क्षमा प्रार्थना कर रहा हूं ये गाथा महाबली हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली हनुमान जय बजरंग ज्ञान के सागर तब विवेक से सृष्टि उजागर अर्जित ज्ञान सकल अप प्रणाम शनिदेव सृष्टि को मंगलमय बनाते अपनी भूल सुधार करे जो सच्चा वीर कहे जग उसको महा विनम्र महा बलशाली मारुति महिमा जग से निरा बप राधा महाबली हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली हनुमान जय जय जय रघुनंदन राम जय जय ज महाब हनुमान भूल तो सबसे होती है किंतु महान वो होता है जो अपनी भूल को स्वीकार करता है जो अपनी भूल से उपजी हुई विसंगतियों का शमन करने का प्रयास करता है अपनी भूल के लिए विनम्रता के साथ क्षमा मांगने वाला व्यक्ति दुर्बल नहीं साहसी होता है क्योंकि क्षमा मांगने का साहस सब नहीं कर पाते भूल करने से उत्पन्न हुई विसंगतियां कभी-कभी बड़े अनर्थ का कारण बन जाती हैं अतः यदि कोई भी भूल हो तो शीघ्र ही उसे स्वीकार करके उसका निवारण करना [संगीत] चाहिए प्रणाम काल दूतों मैं केसरी नंदन अंजने पुत्र हनुमान हूं पृथ्वी लोक के सुमेरू से आया हूं मुझे कालदेव से भेंट करनी [संगीत] है हनुमान अब तुम यहां क्या करने आए हो पहले तो तुम्हारे पास कालदेव के लिए समय ही नहीं था मुझे क्षमा करें चित्रगुप्त जी उस समय मुझे मेरी मां का वचन एवं व्रत भी पूर्ण करना था और मैंने कालदेव से यह भी कहा था कि मैं वापस आऊंगा और उनसे क्षमा मांगूंगा किंतु वह यहां नहीं है तुम्हें देव सभा में मिलेंगे जो उन्हीं ने आयोजित की है तुम्हारे विरुद्ध विचार विमर्श करने के लिए सभी देवता वहां पहुंच गए होंगे ये आप क्या कह रहे हैं कालदेव देव उचित कार्य हनुमान उसके प्रति इतनी कठोरता उचित नहीं है नियमों का पालन कठोरता से ही करना चाहिए देवराज आपने भी एक समय हनुमान को कठोर नियम से बांध कर रखा था जब उसकी मां स्वर्ग में आ गई थी अपराध के निर्णय में भावुकता का कोई स्थान नहीं होता अब तो उसका निर्णय न्याय सभा में ही किया जाएगा उसने अपराध किया है तो दंड तो उसे भुगतना ही होगा हनुमान ने तोड़ा है उसे दंड तो मिलेगा [संगीत] ही प्रणाम देवगण कल्याण वस्तु नाम कालदेव हनुमान तुम्हारा स्वागत है सभा में क्षमा करें देव राजेंद्र हनुमान इस समय अतिथि नहीं आरोपी है आप उसका स्वागत कैसे कर सकते हैं कालदेव [संगीत] कालदेव आपका रुष होना तो स्वाभाविक ही है मैं आपसे क्षमा मांगने ही आया था मुझे क्षमा कर [संगीत] दीजिए नारायण नारायण प्रणाम [संगीत] [संगीत] देवर्ष कालदेव मैं स्वीकार करता हूं कि मैं अपराधी हूं किंतु मैंने सृष्टि की रक्षा के लिए यह सब किया मुझे ज्ञात है कि ने सृष्टि को बचाने के लिए अज्ञान वश यह सब किया है कालदेव भले ही अज्ञान वश हनुमान से सृष्टि के नियम भंग हुए हैं किंतु हनुमान का कार्य परोपकार की श्रेणी में आता है और परोपकार के लिए पुरस्कार दिया जाता है दंड [संगीत] नहीं हनुमान ने क्षमा प्रार्थना कर ली है कालदेव आपको हनुमान को भी क्षमा कर देना [संगीत] चाहिए आप मुझे क्षमा कर देंगे ना कालदेव [संगीत] अनुमान सृष्टि को बचाने की प्रक्रिया में सृष्टि का नियम भंग हुआ है और यदि नियम भंग करने वाले को यूं ही क्षमा मिलती रही तो अराजकता फैल जाएगी नियम का पालन कोई नहीं करेगा पुत्र कालदेव सृष्टि की रक्षा करने में आप भी असमर्थ रहे थे हनुमान ने जो भी किया है वह परिस्थिति के अनुसार उचित था नहीं पिता श्री वह उचित नहीं था हनुमान ने काल के कार्य में हस्तक्षेप किया था काल चक्र विपरीत दिशा में घूम रहा था ग्रह नक्षत्र की स्थिति परिवर्तित हो गई थी कालदेव जिन ग्रह नक्षत्रों की स्थिति प्रभावित हुई थी उन्हें मैंने यथावत कर दिया है उनकी स्थिति को ठीक करके तुम क्षमा के पात्र नहीं हो जाते हो हनुमान

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