Sunday, 28 December 2025

देवी वैष्णवी ने तपस्या क्यों की थी Hitanshu Sumbul Vighnaharta Ganesh Episode 837 Pen Bhakti

[संगीत] मैं वैष्णवी प्रभु श्री राम से विवाह करूंगी ताकि सदैव उनके साथ र स किंतु प्रभु श्री राम ने तो एक एक पत्नी व्रत धारण किया है यह कैसे संभव था माता वैष्णवी देवी का विवाह प्रभु श्री राम से क्या उनकी इच्छा से प्रभु श्री राम के मन में दुविधा उत्पन्न नहीं हुई यह प्रश्न तो भक्त श्रीधर और उनकी पत्नी देवी सुलोचना के मन में भी थे प्रभु श्री राम का विवाह तो वनवास के पूर्व ही माता सीता के साथ हो चुका था ब्राह्मण देवता माता रनी को किसी ने रोका नहीं माता रानी जब निर्णय लेती है तो किसी के भी रोकने का प्रश्न ही नहीं उठता चिंता मत करिए महारानी सब कुशल होगा पुत्री वैष्णवी को कुछ नहीं होगा जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय श्री [संगीत] राम पुत्री वैष्णवी पुत्री वैष्णवी पुत्री वैष्णवी पुत्री पुत्री पुत्री वैष्णवी सब ठीक तो है ना पुदी वैष्णवी [संगीत] [संगीत] पुत्री क्या कोई चिंता का कारण तो नहीं नहीं पिताजी मां चिंता का कारण नहीं हर्ष का कारण है हर्ष किंतु तुमने तुमने यह वेशभूषा क्यों धारण की है मां जब मेरे आराध्य के अवतार मेरे प्रभु श्रीराम वनवास का जीवन व्यतीत कर रहे हैं तो क्या उनकी भक्त को राज भवन के सुख भोगना शोभा देगा कदापि नहीं ये तो मेरा सौभाग्य होगा सुख दुख में प्रभु के साथ र मुझे आशीर्वाद [संगीत] दीजिए [संगीत] जय श्री [संगीत] राम जय श्री रा कहां है आप प्रभु अपने इस भक्त को दर्शन क्यों नहीं देते मैं कहा ढूढ आपको मेरा मार्ग दर्शन कीजिए प्रभु मुझे आप तक पहुंचने का मार्ग दिखाने की कृपा [संगीत] कीजिए ये [संगीत] बच्च अद्भुत दिव्यता है इनम अवश्य मेरे प्रभु यहां से गए [संगीत] हैं [संगीत] मेरे प्रभु ी श्री [संगीत] राम हे श्री राम वहां के आगे कभी प्रभु के पद चिन्ह तो कभी उनके स्पर्श का आभास उन्हे मिलता रहा और माता रानी देवी वैष्णवी आगे बढ़ती [संगीत] [संगीत] रही [प्रशंसा] [संगीत] ला [संगीत] इसी प्रकार माता रानी देवी वैष्णवी प्रभु श्री राम के पद चन्नों को देखते हुए पंचवटी से किष्किंधा पहुंची हां भक्ति का पवित्र पावन धाम किष्किंदा जा श्री प्रभु राम के प्रमुख भक्त संकट मोचन महावली हनुमान को प्रथम बार अपने प्रभु के दर्शन प्राप्त हुए वर हदय की किसको सुनाए आज व्यथित रघुराई कैसे ज्योती को दे बोलो नयन स्वयं ही विदाई हां उसी दिन भक्त को अपनी भक्ति का उद्देश मिला अपने प्रभु के चरणों में अपना ठोर मिला हे श्री राम जय श्री राम जय श्री राम हे श्री [संगीत] राम प्रभु आपके स्पर्श से य शीला भी दिव्यता से भर गई है जय श्री राम जय श्री राम राम राम राम श्री राम राम राम राम राम राम राम श्री राम राम राम राम मे प्रभु श्री राम श्री राम प्रभ राम राम राम श्री राम रा राम श्री राम राम राम श्री राम राम राम राम श्री राम राम राम रा राम राम राम श्री राम राम राम राम राम राम राम श्री राम राम [संगीत] रामम आपके दिव्य दर्शन पाते आपकी दृष्टि दक्षिण की ओर थ अर्थात मुझे उसी ओर जाना चाहिए जय श्री [संगीत] राम जब भक्त को दिशा मिल जाए तो वो विलंब नहीं करते माता रानी देवी वैष्णवी उसी क्षण दक्षिण की ओर बढ़ गई तो अंतत प्रभु श्री राम से उनकी भेंट हो ही गई [संगीत] नहीं माता वैष्णवी के वहां पहुंचने के पूर्व ही प्रभु श्री राम लंकेश रावण से निर्णायक युद्ध करने हेतु लंका के लिए कूछ कर चुके थे अतः माता वैष्णवी ने वहीं रुककर उनकी प्रतीक्षा करने का निर्णय लिया ओम विष्णवे नमः ओम श्रीमत नमः ओ मधुसूदना एक और जहां माता वैष्णवी तप कर रही थी वही दूसरी ओर प्रभु श्री राम दशान लंकेश से घमासान युद्ध कर रहे थे इस युद्ध की संपूर्ण अवधि में माता रानी देवी वैष्णवी तपस्या में लीन रही ओम सुभे शनाय नमः ॐ मधुसूदना नमः और फिर इस विजय यात्रा के बाद अब प्रभु श्री राम की एक और यात्रा का समय था उनके वनवास के अंत के साथ माता सीता के संग अयोध्या लौटने का समय तो उन्होंने मुझे आपको ऋषिवर आप मिले थे प्रभु श्रीराम से मेरा अर्थ प्रभु श्री राम ने भक्त हनुमान को पहले ही भेज दिया जिससे वह जाकर प्रभु के भ्राता भरत को सूचना दे सके और तब पुष्पक विमान पर आरुण होकर प्रभु माता सीता और श्री लक्ष्मण जी के साथ अयोध्या के लिए निकले किंतु प्रभु श्रीराम ने तो पुष्पक विमान में उड़ान भरी और माता वैष्णवी देवी धरती पर उनकी प्रतीक्षा कर रही थी तो प्रभु ने उन्ह कैसे देखा आ और विश्वास से सब संभव हो जाता है माता रानी भी विश्वास को स्थिर रख प्रभु की प्रतीक्षा में तपस्या करती रही ओ पुरुषोत्तमा नमः ओ सुभ नम शवा मधुसूदना नम हनुमान जी ने प्रभु श्री राम के वनवास से लौटने की सूचना सबको दे दी किंतु मार्ग में ऐसी घटना घटी जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की [संगीत] थी प्रभु क्या हुआ आपने विमान क्यों रोक दिया है मैंने नहीं रो का हनुमान यह कार्य किसी अदृश्य और दिव्य शक्ति का है प्रभु आप मुझे अनुमति दीजिए मैं अभी इसका रहस्य ज्ञात कर लेता हूं ओम सुभाय नमः ओम पुरुषोत्तमा नमः कौन है यहां जो प्रभु के भक्ति भाव में इतनी डूबी हुई है ओम पुरुषोत्तमा नमः नम ओम रामाय नमः ओम पुरुषोत्तमा नमः राम राम राम श्री राम राम राम राम राम राम राम श्री राम राम राम राम राम राम राम श्री राम राम राम राम राम राम राम श्री राम राम राम [संगीत] कौन है कैसे दिव्य शक्ति है स्वामी जिसने हमें भी यहां थाम दिया इसका रहस्य क्या है यह तो हमें हनुमान ही बता सकते हैं यह तो हमें हनुमान ही बता सकता ओ सुभे शय [संगीत] नमः इनके भक्तिमय स्वर में इनके इस दिव्य जाप में अदभुत शक्ति है इसी शक्ति से प्रभु का विमान भी रुका होगा प्रभु को शीघ्र जाकर बताता हूं ओम केशवा नमः प्रभु जिनके व्यक्तित्व में दिव्यता का ओज है और स्वर में मात्र आपके प्रति भक्ति प्रभु ऐसी एक देवी है जो केवल आपकी प्रतीक्षा में तपस्या में लीन है वो कौन है हनुमान प्रभु बस उनका इतना परिचय ज्ञात है कि उनकी भक्ति की शक्ति अपूर्व है प्रभु अद्भुत है माता के समान तेजोमय है उनका मुख मंडल तो वह अवश्य आपके दर्शन की प्रतीक्षा कर रही होंगी प्रभु ऐसे भक्त को उनकी भक्ति का फल शीघ्र ही मिलना चाहिए मुझे उन देवी के पास ले चलो हनुमान ओ मधुसूदना नमः ओम केशवा [संगीत] नमः ओम केशवा नमः ओम विष्णवे नमः ओम श्रीमत नमः ओ मधुसूदना नमः ओम मधुसूदना [संगीत] [संगीत] नमः [संगीत] ज जयम नानानाना जम [संगीत] नाना [संगीत] [संगीत] प्रणाम [संगीत] प्रभु मेरी तपस्या सफल हुई आपके दर्शन पाकर मैं कृतार्थ हुई [संगीत] प्रभु प्रणाम प्रभु प्रणाम नहीं देवी [संगीत] उठिए कृतार्थ तो हम हुए हैं दे आपकी तपस्या आपकी भक्ति और आपकी श्रद्धा ने हमें आगे नहीं जाने दिया मैं आपकी इस अटूट निष्ठा से बहुत प्रभावित हूं अब भक्त की इच्छा ही मेरी भी इच्छा [संगीत] है प्रभु के दर्शन सभी इच्छाओं का अंत है प्रभु मैं तो बस आपके चरणों में रहने की इच्छुक आपकी सहभाग बनकर बनग बन मुझ पर कृपा करे प्रभ कृपा करे क्षमा कीजिए देवी यह संभव नहीं है मैं वचन बद्ध हूं अपने इस अवतार में मैं एक पत्नी व्रत धर्म का पालन करूंगा और देवी सीता ही मेरी पत्नी है इसलिए अभी मैं आपको अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार नहीं कर सकता इसलिए अभी मैं आपको अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार नहीं कर सकता क्षमा कीजिए देवी मैं वचन बध हूं और देवी सीता ही मेरी पत्नी है इसलिए अभी मैं आपको अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार नहीं कर सकता किंतु आप चिंता ना करें समय आने पर आपको आपकी तपस्या का फल अवश्य प्राप्त होगा आपके आराध्य प्रभु श्री हरि नारायण आप पर कृपा वर्षा अवश्य करेंगे कलयुग में जब मैं कल की अवतार लेकर अवतरित होऊंगा तो आपसे ही विवाह करूंगा तो आपसे ही विवाह करूंगा किंतु त्रेता युग से कलयुग तक आपको प्रतीक्षा करनी होगी प्रभु मैं अवश्य करूंगी अवश्य करूंगी आपकी [संगीत] प्रतीक्षा प्रतीक्षा भक्त और भगवान के संबंध को और सुंदरता प्रदान करेगी आप इसमें अकेली नहीं होंगी दे कलयुग के आगमन पर आपकी भक्ति में आप ही का एक भक्त आपको पुकारेगा तब आपका आविर्भाव होगा और वही भक्त त्रिकूट पर्वत पर आपको आपका विशेष धाम प्राप्त करने में सहायक [संगीत] बनेगा ईश्वर की परीक्षा में व्यक्ति को सामर्थ्य वान बनाने की भावना छिपी होती है इसलिए अंत तक धैर्य नहीं खोना चाहिए

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