Wednesday, 31 December 2025

भगवान सत्यनारायण की कथा कैसे प्रारंभ हुई Hitanshu Digvijay Vighnaharta Ganesh Ep 774 PenBhakti

[संगीत] प्रणाम पिताश्री धन्यवाद मां आपका निमंत्रण पाकर हम कृतार्थ हुई धन्यवाद नहीं शीघ्रता करो अतिथि पूजा की तैयारिया संपन्न करने कभी भी पधार सकते हैं आप बिल्कुल भी चिंता मत कीजिए मां आपकी पुत्रियां यहां आ गई है ना अब किसी भी अतिथि के स्वागत में कोई कमी नहीं होगी शिकता करो जगत पिता और जगत माता से यह भूल हो जाए कि वो अपने ही एक पुत्री को निमंत्रण देना ही भूल जाए ये संभव नहीं क्या वो यह भी भूल गए हैं कि मैं उन्हीं की एक पुत्री हूं मुझे अपनी पुत्री मंसा को भूल गए संभव है वो भूले नहीं संभव है मां किसी और को भेज रही है मुझे लेने के लिए कदाचित श्री गणेश को या फिर कार्तिके को या फिर बासुकी जी मुझे स्वयं महादेव की तीसरी पुत्री मंसा को लेने आ रहे हो [संगीत] [संगीत] लगभग सभी अतिथि पधार चुके हैं इसीलिए अब हमें भी सारी तैयारिया शीघ्र ही समाप्त करनी होगी हां [संगीत] स्वामी बो [संगीत] लीज अरे वाह देवी देव सेना आपने पूजा का प्रसाद तो अपने हाथों से ही तैयार कर ली मुझे पूर्ण विश्वास है कि अत्यंत स्वादिष्ट भी अवश्य होंगे जो प्रभु श्री सत्यनारायण जी को भांगे [संगीत] भी और देखिए ना ये देवी बल्ली द्वारा की गई यह पूजा व्यवस्था इतनी दिव्य [संगीत] है मैं तो बस इतना ही चाहती हूं यह स्पर्धा की भावना जो इन दोनों के बीच में है वह आज प्रभु सत्यनारायण की पूजा के प्रभाव से गंभीर मनमुटाव बनने से पहले ही मिट [संगीत] जाए [संगीत] प्रणाम महादेव बहन पार्वती आपने इस व्रत की इतनी अद्भुत तैयारी की है मुझे विश्वास है आज आपके मन में जो भी इच्छा होगी वो अवश्य पूर्ण होगी आप दोनों का स्वागत है [संगीत] प्रणाम प्रणाम पिता श्री प्रणाम माता पूजा की समस्त तैयारियां हो चुकी है [संगीत] आइए [संगीत] अद्भुत सभी अतिथि पधार भी [संगीत] गए यह दोनों देवियां कौन है आज से पहले इन्हें कैलाश में कभी नहीं देखा और मुझे ऐसा आभास क्यों हो रहा है जैसे दोनों में माता का अंश हो पूजा के शुभ मुहूर्त का समय हो गया है हमें पूजा आरंभ करनी [संगीत] चाहिए कोई बात नहीं इन दोनों देवियों का परिचय तो मैं माता से पूजा के पश्चात भी प्राप्त कर लूंगा आशा है सभी पधार चुके हैं सुदामा जी वह कहां है अभी तक क्यों नहीं आए प्रणाम प्रभु मैं यहां हूं और अपने साथ उनको लाया हूं जिन्होंने पूर्व में यह व्रत किया था गुहा राजा सूर्यवंशी महाराज दशरथ महाराज मोरध्वज और धर्मात्मा [संगीत] मनु नारायणम गदा दक्षम गोविंदम कीर्ति भाजन गोवर्धन उधर देवम [संगीत] भुवनेश्वर अद्भुत सुदामा जी आप सभी का स्वागत है आइए आसन ग्रहण कीजिए ब्रह्मदेव अब किसी का आना शेष नहीं आप पूजा आरंभ कीजिए अब किसी का आना शेष नहीं आप पूजा आरंभ की किसी काना शेष ले आप पूजा आरंभ कीजिए कौन है यह दोनों देवियां क्या संबंध है इनका माता और पिता श्री से उनके इतने निकट आसन ग्रहण क्यों किया इन दोनों ने हम पूजा का शुभारंभ संकल्प कलश स्थापना और गौरी गणेश नव ग्रह अष्ट दिगपाल सोरस मात्र का पूजा से [संगीत] करेंगे ओम पवित्र पवित्रो सर्वा वस्म ग तो पवा य स्मत पुंडरीकाक्ष से पाया अभ्यंतर शुच पुन पुंडरीका क्म पुन पुंडरीका क्म पुन पुंडरीका क्म [संगीत] आसन [संगीत] पंचामृत मायानी पयो म पंत से स्नान कर समायुक्तम स्नाना प्रति गृह ओ भूर भुव स्व गणेशाम का समर्पयामि [संगीत] वस्त्रम उप वस्त्र अर्पित करें तवा तोषण संत्रा जयाम रक्षणम परम देहल करणम वस्त्र मत शांति प्रय में ओ भूर्भुव नारायणा ब्याम नमः वस्त्रम समप गणेश और अंबिका को वस्त्र समर्पित करें कर्म किंचन सिध उप वस्त्रम प्रयम सर्व कर्मो पकार कम ओ भूर भुव स्व नारायणा ब्याम नमः उप वस्त्रम समर्पयामि आज मन के लिए जल अर्पित करें वस्त्र उपव आयम जलम समर्पयामि नस्त नत युक्त त्रिगुण देवता मयम उतम मया दमण परमेश्वर ओ भूर भुव स्व नारायणा भम नमः य पवित समर्पयामि [संगीत] प्रेम से बोलिए सत्यनारायण भगवान की [संगीत] जय इसी के साथ ही भगवान सत्यनारायण की पूजा तो संपन्न हुई अब सत्यनारायण कथा का इसको सुने बिना पूजा और व्रत अधूरे हैं प्रभु ब्रह्मदेव इसके पहले की आप कथा सुनाए हमें यह बताने की कृपा करें कि यह पूजा और व्रत आरंभ कैसे हुए पुत्र गणेश आपके प्रश्न का उत्तर तो सत्यनारायण कथा के प्रथम अध्याय में ही छिपा हुआ है सत्यनारायण कथा के प्रथम अध्याय में हमें ज्ञात होगा कि इस पूजा की स्थापना कैसे हुई एक समय की बात है नशा आरण्य तीर्थ में यज्ञ के लिए शौनक जी के साथ 88 सहस्त्र ऋषि गण एकत्र हुए थे और जब वहां एक महान ऋषि सूत जी पधारे तो सभी के मन में एक ही प्रश्न था कलयुग में शारीरिक मानसिक और आत्मा के स्तर पर मानव महान यज्ञ करने में समर्थ नहीं होंगे तब मनुष्य जाति के उद्धार का क्या उपाय होगा तब श्री सूद जी ने बताया कि तीनों लोकों का भ्रमण करने वाले देव शी नारद के मन में भी यही प्रश्न था और उसी प्रश्न को लेकर वह सीधे श्री हरिनारायण के समक्ष प्रस्तुत हुए हे देवर्ष मानव जाति के उद्धार हेतु आपने यह अत्यंत उत्तम प्रश्न पूछा है परमेश्वर वो सर्वोच्च परालु के ऊपर सृष्टि के पालन का दायित्व होता है और इस परम सत्य शक्ति को जो भी भक्त श्रद्धा और भक्ति से स्वीकार कर सत्यनारायण कथा और व्रत का श्रवण करता है उसे उसके जीवन में दुख पीड़ा दरिद्रता आदि से छुटकारा मिलेगा साथ ही उसका ज्ञान भी उजागर होगा और मृत्यु के उपरांत उसके पुण्य के फल स्वरूप उसे उत्तम जन और अंतता मोक्ष की भी होगी इस प्रकार श्री हरिनारायण ने श्री सत्यनारायण की पूजा की महिमा और महत्व बताकर देवर्षी नारद को उसकी विधि से भी परिचित कराया और जगत को सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण और सरलतम व्रत प्रदान करने की कृपा [संगीत] की इति श्री रेवा खंडे श्री सत्यनारायण व्रत कथा प्रथम अध्याय समाप्त [संगीत] बोलो श्री सत्यनारायण भगवान की [संगीत] जय [संगीत] श्री सत्यनारायण कथा के दूसरे अध्याय में उन दो भक्तों की कथा है जिन्होंने इस व्रत को किया और उनमें से प्रथम वो थे जिन्हें इस पूजा और व्रत के परिणाम स्वरूप अपने संपूर्ण जीवन को परिवर्तित करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ और वो भक्त और कोई नहीं परम भक्त सुदामा थे मेरा आपसे अनुरोध है कि आप स्वयं अपनी कथा सुनाकर यहां उपस्थित साधु समाज को धन्य करें जो आज्ञा ब्रह्मदेव प्रभु श्री सत्यनारायण भगवान की जय जय प्रभु श्री सत्यनारायण की कृपा और उनके आशीर्वाद से मुझे गोलोक वास का परम सुख प्राप्त हुआ मुझे परम प्रभु श्री कृष्ण का सखा कहलाने का सौभाग्य भी प्राप्त हुआ परंतु उससे पहले मेरे जीवन का दुर्भाग्य मुझे प्रतिपल काटता था क्योंकि ब्राह्मण शतानंद के रूप में एक और मेरा उत्तम परिवार था सुंदर सुशील पत्नी थी पुत्र पुत्री थे और दूसरी ओर थी मेरी दरिद्रता ऐसा दुर्भाग्य था कि मैं अपने परिवार के निवास हेतु एक उत्तम कुटिया धारण करने के लिए वस्त्र तो क्या एक बार का भोजन भी उपलब्ध करने में असमर्थ [संगीत] [संगीत] था [संगीत] [संगीत] आ [संगीत] यह कैसा दुर्भाग्य है मेरा कि मैं अपने परिवार को एक ऐसी छत भी नहीं दे सकता जो टपकती ना हो जिससे मेरा परिवार बदलती ऋतुओं के प्रभाव से सुरक्षित रह सके [संगीत] [संगीत] स्वामी आपके नेत्रों में अश्रु क्यों है स्वामी आप रोक क्यों रहे हैं ना ही खाने के लिए भोजन है और ना ही पहनने और उड़ने के लिए वस्त्र रोने के सिवाय और कर भी क्या स कितने माह बीत गए मैं अपने परिवार के लिए उचित भोजन भी ना ला सका और कुछ दिनों से वह एक समय का भोजन जो किसी प्रकार में जुटा लिया करता था वह भी नहीं मिला ऐसी भीषण दरिद्रता में ऐसे अभाव में अपने परिवार को देखकर कौन नहीं रो [प्रशंसा] पड़ेगा अब अब दुखी मत होए स्वामी जिस प्रकार अपनी ही कुटिया से मैं मैंने यह मुट्ठी भर अनन बटोरा है ना उसी प्रकार आज हमें पेट भर भोजन भी अवश्य मिलेगा स्वामी हां आज मैं भूखा नहीं [संगीत] रहूंगा मुझे भरपेट भोजन मिलेगा यह सच कह रहा है मां आज हमें भोजन मिलेगा हां बेटा प्रभु की कृपा दृष्टि हम पर अवश्य रहेगी मुझे विश्वास है हरी कृपा से आज कुछ ना कुछ अत्यंत उत्तम ही होगा हमारे साथ तो क्या आज चुरमा भी बनेगा हम सब खूब खाएंगे ओ खीर भीना मुझे तो खी बहुत स्वादिष्ट लगती [संगीत] है हां हां सब कुछ मिलेगा और हम सब पेट भर के भोजन करेंगे किंतु उससे पहले तुम सबको मेरे साथ चलके सूर्य नमस्कार करना होगा चलो चलो चलो तुम भी चलो हमारी पुत्री कितनी समझदार हो गई है ना उसके भाई बहन अपने पिता को विचलित ना देख सके इसलिए उनका ध्यान बटाक अपने साथ ले गई है उसकी उसकी विवाह की आयु हो रही है किंतु मैं कैसा पिता हूं उसके विवाह के लिए कुछ जोड़ पाना तो दूर मैं तो उसे एक समय की रोटी भी नहीं दे पा रहा हूं स्वामी आप ही तो कहते हैं ना जो कष्ट सहते हैं उन पर प्रभु का वास होता है क्योंकि हमारे जीवन में आने वाली यह यह कठिनाइया यह भी तो प्रभु की परीक्षा ही है हमें संकट के समय में प्रभु पर विश्वास बनाए रखना है इसे ही सच्ची भक्ति कहते हैं प्रभु श्री हरि पर विश्वास रखिए स्वामी जब हमारे जीवन की डोर उन्हीं के हाथों में है तो वही इन कष्टों को दूर करने का कोई उपाय अवश्य निकालेंगे आप उचित कहती है प्रभु श्री हरि नारायण हमारी सहायता अवश्य करेंगे मैं उन पर विश्वास भंग नहीं होने दूंगा कभी भंग नहीं होने दूंगा आपने जो भी अनन एकत्रित किया है उसे दीजिए मैं प्रभु को तो प्रसाद चढ़ा दूं हटो मशक दूर हटो उस अन्म से [संगीत] [संगीत] प्रभु आज आपके भक्त के पास आपको जल चढ़ाने के सिवाय और कुछ नहीं है कृपा करके इसे स्वीकार [संगीत] [संगीत] कीजिए ओम श्री [संगीत] हरि दीदी भूख लगी है और भूख के कारण रात भर सो भी कहां पाया हूं हां दीदी मुझे तो अभी ऐसी भूख सता रही है कि अगर आज भी भोजन ना मिला तो कहीं मैं यही ना गिर जाऊ हां दीदी ऐसे बिना भोजन के हम कैसे [संगीत] रहेंगे हे प्रभु अपने परिवार का दुख मुझसे देखा नहीं जा रहा है आशा कितनी भी ढूंढू हा तो निराशा ही लगती है भूख सता रही है तो इसका तो बड़ा सरल उपाय है हम सभी दिन भर अलग अलग प्रकार के खेल खेलेंगे इतना आनंद आएगा कि भूख अपने आप [संगीत] जाएगी ये लेज पिता श्री आप तनिक भी चिंता मत कीजिए पिताजी भूख की बात तो हम दीदी को सताने के लिए कर रहे थे और हमें कौन सी अधिक भूख लगी है हां पिताजी अगर आज भी भोजा ना मिला तो कोई बात नहीं आप हमें कोई अच्छी सी कथा सुना दीजिएगा बस हम सबको नींद आ जाएगी हां हां पिताजी और इतने दिन हो गए हमें तो अब हलवा बुड़ी खाने का मन ही नहीं करता है अच्छा चलो अब बातें बंद करो और खेल आरंभ करो पिताजी को जाने दो [संगीत] [संगीत] चलो [संगीत] दूसरों के लिए पूजा पाठ करने की उत्तम वृति ऐसा उत्तम कार्य करने वाला ब्राह्मण पूर्ण रूप से प्रभु पर ही निर्भर था जो लोगों की इच्छा होती थी वह दे देते थे और मुझे उसी में ही संतोष करना होता था किंतु परिवार भूखा रहे तो उसका मुखिया कैसे संतुष्ट रह सकता है मेरे बालक भूखे रहकर भी मुझसे कुछ नहीं मांगते थे किंतु उनकी पीड़ा तो मुझे विचलित करती थी और मैं उसे दूर करने के प्रयास के लिए प्रतिदिन के समान प्रभु श्री हरि नारायण का नाम लेकर उनकी कृपा की आशा में मैं एक बार फिर निकल पड़ा हरि ओम नारायण हरि हरि ओम नारायण हरि भिक्षम [संगीत] देही हरि ओम नारायण हरि भिक्षम [संगीत] देही हरि ओम नारायण हरि भिक्षम देही [संगीत] हरि ओम नारायण हरि हरि ओम नारायण हरि ओम श्री ना नारायण हरि भक्ष श्याम देही भक्ष श्याम देही जो भी सच्चे मन से देना चाहे इस ब्राह्मण की झोली में डालने की कृपा करें चलो जाओ जाओ यहां से ब्याम [संगीत] देही ओम श्री नारायण हरि एक फल कुछ तो प्राप्त हुआ अब मेरी झोली खाली नहीं रहेगी [संगीत] संध्या हो गई आज भी प्रभु ने मुझे अपनी कृपा से वंचित रखा प्रभु यह कैसी परीक्षा ले रहे हैं आप मेरी धनी धनी सार गरे ग रे ग [संगीत] म पिताजी पिताजी मुझे भूख लगी [संगीत] है मेरे बालक कितनी आशा से मेरी प्रतीक्षा कर रहे हैं उनको निराश होते कैसे देख सकूंगा मैं आज मैं भूखा नहीं रहूंगा मुझे भरपेट भोजन [संगीत] मिलेगा खाली झोली लेकर मैं कैसे आगे बढूं क्या चुरमा भी बनेगा हम खूब खाएंगे हे प्रभ श्री हरि नारायण देखिए प्रभु आज भी बस एक ही फल मिला इस एक फल से सबकी शुधा कैसे तृप्त कर पाऊंगा मैं इतने दिन हो गए हमें तो अब हलवा बड़ी खाने का मन ही नहीं करता नहीं श्री हरि आज यह लाचार पिता मात्र एक फल लेकर अपनी संतानों के पास नहीं जा सकेगा अब चाहे जो हो जाए भले मेरे प्राण ही क्यों ना चले जाए मैं य मैं यह खाली झोली लेकर अपने घर नहीं लौटूंगा अपनी अपनी अंतिम शवास तक भिक्षा मांगूंगा आगे जो भी होगा आपकी इच्छा से होगा प्रभु आपकी इच्छा से [संगीत] [संगीत] हा ओम जय नारायण हरि मेघ वर्ण तुम सुंदर पीतांबर राजे स्वामी पीतांबर राजे संभालिए अपने आपको कमल नयन चतुरा ब्रा देव आपका यहां आना प्रभु हरि की ही कृपा है आपके कारण ही मैं गिरने से बच गया मेरी रक्षा करने के लिए आपको कोटि कोटि [संगीत] धन्यवाद आज मैं भूखा नहीं रहूंगा मुझे भट भोजन मिलेगा मुझे खी साजिश लगती [संगीत] है श्री [संगीत] हरि श्री हरि अभी भी हरि का नाम जप रहे हो जिन्ह तुम पर तनिक भी दया नहीं आई ना भिक्षा मिली ना कोई सुख मिला तो बस फल और अब तो वो भी नष्ट हो चुका है भक्त तो बस भक्ति करना जानता है ब्राह्मण देवता और भक्ति में स्वार्थ नहीं देखा [संगीत] जाता सच्चा भक्त वही है जो प्रभु पर अंतिम श्वास तक विश्वास रखें

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