[संगीत] युवावस्था भी हमारे जीवन का कितना सुंदर काल होता है ना बाहु में बल मन में कुछ बड़ा कर जाने की चाह आंखों में भविष्य के सुंदर और कोमल सपने और इसी में मनुष्य के भीतर पनपता है प्रेम किसी को देखकर उस पर मन मोहित हो जाता है और फिर मनुष्य अपना सब कुछ उस पर निछावर कर देना चाहता है फिर प्रेम की परिणति होती है विवाह में क्यों सबको अपने खट्टे मीठे संस्मरण स्मरण हुआ है ना परंतु यहीं से अधिकतर माता पिता और संतान के मध्य विचारों का विरोध प्रारंभ हो जाता है संतान को लगता है कि उसका चुना जीवन साथी ही उसके लिए उपयुक्त है और माता-पिता को लगता है कि संतान अनजाने में भूल कर रही है संतान का तर्क होता है कि उसे विवाह किससे करना है यह उसका अधिकार है और माता-पिता का तर्क यह होता है कि अब भी जीवन साथी चुनने की समझ संतान में ही नहीं तो इस अवरोध को काटा कैसे जाए उचित निर्णय कैसे लिया जाए इसका एक ही मार्ग है अपने उत्तरदायित्व का भान और अपनों से बड़ों के मापदंडों का भान विवाह करने से पूर्व यह जान लेना आवश्यक है कि विवाह केवल अपने प्रेम को पाने का मार्ग नहीं है अपितु विवाह से जीवन का एक नया द्वार भी खुलता है और हर नए जीवन के साथ नए उत्तरदायित्व भी होते और यदि इन उत्तरदायित्व को समझकर निर्णय लिया जाए तो विश्वास कीजिए आपका दांपत्य जीवन आनंद से भरा रहेगा और आपको कभी यह पछतावा नहीं होगा कि आपने कोई अनुचित निर्णय लिया यदि य दुधन के समक्ष खड़ा होना है यदि लक्ष्मणा का साथ चाहिए तो तुम्हें दुर्योधन जैसा ही कुछ करना होगा उसी के जैसा बनना होगा तुम्ह जब आज तक लोगों के लाख कहने पर मैं अपने पिता जैसा नहीं बना तो उनके शत्रु जैसा बनने की भी मुझे कोई आवश्यकता नहीं [संगीत] है लक्ष्मणा [संगीत] एकांत मैंने तुम्हें चेतावनी दी थी कि किसी पर विश्वास मत करना और जिस पिता पर मुझे विश्वास नहीं था उन्होंने उसे आज भी नहीं बनने दिया तुम कहती थी ना कि वह मेरे पिता है मेरी प्रसन्नता मेरा हित चाहेंगे परंतु किसी का भी कोई भी प्रयास स्तंभ से उसका भविष्य नहीं छीन [संगीत] सकता हम अब भी यह विवाह रोक सकते हैं [संगीत] लक्ष्मणा मैं तुम्हारे साथ हूं लक्ष्मणा चलो मैं तुम्हारे साथ स्वयं चलकर तुम्हारे पिता से इस विषय में बात करूंगा [संगीत] क्या हुआ भय है कि तुम्हारे पिता मेरा वद कर देंगे अवश्य ऐसा हो सकता है परंतु तुम एक होकर मैं निष्प्रभ पिता से बात करूं तो चलो इससे पूर्व यहां कोई आ जाए हम यहां से चलते हैं अब हमें कोई नहीं रोक पाएगा लक्ष्मणा नहीं साम विश्वास रखो सब ठीक हो जाएगा चलो साम मैं तुम्हारे साथ नहीं चल रही मैंने कुमार उत्तर से विवाह करने का निर्णय ले लिया है हां सा यदि पिताश्री को मेरे इसी संबंध में मेरा हित दिखता है तो मैं उन्हें निराश नहीं [संगीत] करूंगी वर चुनने का अधिकार कन्या का होता है लक्ष्मणा उसके पिता का नहीं लक्ष्मणा तुम क्या चाहती हो वह अधिक महत्व रखता है बताओ लक्ष्मणा तुम क्या चाहती [संगीत] हो मुझे ना निर्णय स्पष्ट रूप से बताओ लक्ष्मणा क्योंकि मेरे लिए कुछ महत्व रखता है तो वो यह है कि मैं तुमसे प्रेम करता हूं मैं जानना चाहता हूं लक्ष्मणा तुम भी मुझसे उतना ही प्रेम करती हो या नहीं मैंने अपना निर्णय दे दिया है साब जिस पिता ने मुझे जीवन दिया यदि वही मेरा जीवन साथी चुने तो मुझे उसमें कोई बुराई नहीं दिखती मैं कुमार उत्तर से ही विवाह करूंगी सा फिर कभी मुझसे भेट करने का प्रयास मत [संगीत] करना ठीक है मैं कभी तुम्हारे सामने नहीं आने का वचन देकर चला जाऊंगा बस इतना बता दो तुम्ह मुझ से प्रेम है या [संगीत] नहीं उत्तर दो लक्ष्मणा उत्तर दो [संगीत] क्या हुआ [संगीत] तुम सब के साथ प्रसन्न नहीं रह पाओगी तुम्हारे साथ केवल तुम्हारा भविष्य नहीं हस्तिनापुर का भी मान और सम्मान जुड़ा है अब निर्णय तुम्हे लेना है क्या चाहिए तुम्हे अपने पिता का सम्मान या या फिर अपना [संगीत] स्वप्न मैं ठीक हूं काका श्री कुमार केवल मुझे विवाह संबंध की बधाई दे रहे थे आज्ञा दीजिए मुझे उत्सव के लिए तैयारी के लिए जाना है [संगीत] नी [संगीत] आ [संगीत] क्या सम कोई समस्या [संगीत] [संगीत] हैम [संगीत] तुम्हारे स्थान पर कोई और होता तो अब तक मेरे बाणों के प्रहार से वह विराट नगर के बाहर होता परंतु मैं वासुदेव का सम्मान करता हूं इसलिए शांत [संगीत] हूं फिर कभी कुमारी लक्ष्मणा के निकट आने का प्रयास मत कर अन्यथा मैं विवश हो जाऊंगा संभ कोना आपके वासुदेव से भय है और ना ही उनका सम्मान करने वालों से इसीलिए फिर कभी मुझे धमकाने का प्रयास मत कीजिएगा संभ को ना आपके वासुदेव से भय है और ना ही उनका सम्मान करने वालों से इसीलिए फिर कभी मुझे धमकाने का प्रयास मत कीजिएगा तुम धमकाने में और चेतावनी देने में अंतर नहीं समझ रहे हो सा सब कुछ ठीक है ना साब कोई तुम्हें कष्ट नहीं दे रहे ना नहीं भीम काका मुझे कोई कष्ट नहीं दे रहा आज्ञा दीजिए प्रणिपात [संगीत] स्मरण रहे अंगराज यह मेरे भतीजे अभिमन्यु के विवाह का उत्सव तुम्हारे रंगभूमि नहीं कहीं भी पहुंचकर अतिथियों को कष्ट पहुंचाने का तुम्हारा पुराना अभ्यास है यहां कोई भी विकट स्थिति खड़ी मत करना मुझे स्मरण है कि मैं यहां अतिथि बनकर आया हूं यहां से केवल अतिथि लेकर लौट जाना चाहता यहां चल रहे किसी भी प्रपंच का भाग बनने की मेरी कोई आकांक्षा नहीं यदि यहां किसी ने विकेट स्थिति को जन्म दिया तो मुझे उसे काटना अच्छी तरह आता है और इसे तुम भली भांति जानते हो अरे आप दोनों अभी तक यहीं है चलिए उत्तरा का बस अलंकरण समारोह आरंभ होने जा रहा है [संगीत] आइए सुनो सेवक जिस विशिष्ट भोजन के विषय में मैंने कहा था क्या उसकी व्यवस्था हो गई जी भद्र 50 शेर भात 100 शेर साक 200 शेर मिष्ठान और राजभोग तैयार है इतने भिन्न और विशिष्ट भोजन किसके लिए धर क्या कोई सैनिकों का दल आने वाला यहां नहीं महारानी यह मेरे पुत्र की शुदा शांत करने की व्यवस्था है व भी इस विवाह समारोह में आ रहा है हम आपके इस पुत्र को मिलने के लिए उत्सुक है निश्चिंत रहिए महारानी जब आएगा तो सभी को स्वयं ज्ञात हो [संगीत] जाएगा और अब जो तुम्हें आशीर्वाद देने वाले हैं वो यह हस्तिनापुर के पर्यायवाची हैं महाराज त्य राष्ट्र के ज्येष्ठ ता श्री अपने वचन के लिए किसी भी सीमा तक जाने वाले महान योद्धा गंगापुत्र महामहिम भीष्म हां पुत्री तुम इनसे जो आशीर्वाद मांगना चाहती हो मांग सकती हो गंगापुत्र अपनी नई पीढ़ी की प्रथम वधु को मनचाहा आशीर्वाद देंगे प्र पिता मा मैं आप जितनी बुद्धिमान नहीं हूं परंतु जो कुछ घटित होते देखा है उसके आधार पर संभावना अवश्य है कि आने वाले समय में एक भयानक युद्ध होगा और योद्धा धर्म के आधार पर मेरे होने वाले पति को भी इस युद्ध में सम्मिलित होना होगा इस परिवार की बहू और एक पत्नी होने के नाते मैं आपसे अपने पति की दीर्घायु का आशीर्वाद मांगना चाहती हूं अरे अरे अरे रुकिए बेटा मा क्या हो रहा है पिता ये कैसी कामना है वही कामना युवराज जो हर पत्नी अपनी पति के लिए करती और इस कामना में कुछ भी अनुचित नहीं शेष गंगापुत्र पर निर्भर करता है कि वह यह आशीर्वाद देना चाहते हैं या [संगीत] [संगीत] नहीं पुत्री उत्तरा मैं तुम्हें वचन देता हूं कि जब तक रणभूमि में यह गंगापुत्र खड़ा रहेगा तब तक तुम्हारा सौभाग्य और तुम्हारा सुहाग दोनों पर कोई आंच नहीं आएगी [संगीत] क्या लक्ष्मणा कुमार उत्तर से विवाह कर रही और व तुम्हें देखना तक नहीं चाहती हां मित्र सही सुना तुमने परंतु व ऐसा कैसे कर सकती है वो तो केवल तुमसे प्रेम करती तुम्हारी लक्ष्मणा ने ही मुझे संदेश लेकर तुम्हारे पास भेजा था और अब और अब लक्ष्मणा का कहना वो मेरा मुख तक नहीं देखना चाहती परंतु उसके कहने का तात्पर्य यह नहीं था मैं समझा नहीं उसने ऐसा कहा परंतु उसके कहने का यह तात्पर्य नहीं था मुझे तो तुम्हारे कहने का तात्पर्य समझ नहीं आ रहा मित्र तुम नहीं समझोगे मित्र क्योंकि तुमने अभी तक प्रेम नहीं [संगीत] किया प्रेम में शब्द सत्य नहीं कहते सत्य दृष्टि में छिपा होता है और सत्य यह है कि लक्ष्मणा मुझसे अब भी प्रेम करती है मुझे पहेलियां समझ नहीं आती मित्र अपना मंतव्य स्पष्ट कहो यह तो मुझे भी स्पष्ट नहीं हर कोई भिन्न-भिन्न खेल खेल रहा है मेरे महान पिता का कहना है कि जो हुआ अच्छे के लिए हुआ और गांधार राज का कहना है यदि मुझे युवराज दुर्योधन के समक्ष खड़ा होना है और लक्ष्मणा का साथ चाहिए तो मुझे उनकी भाती बनना होगा उनकी भाती करना होगा कुछ समझ नहीं आ रहा मैं भला युवराज दुर्योधन की भाती क्यों बनू क्या करूं उनकी तरह समझ नहीं आ रहा मैं कैसे इस विवाह को रोकू परंतु मुझे यह पहेली समझ में आ गई है मित्र मैं जानता हूं अब क्या करना है क्या तुम्हें अपने प्रेम पर पूर्ण विश्वास है ना तो चलो मेरे साथ कहां लक्ष्मणा का हरण करने परंतु मैं तो लक्ष्मणा से प्रेम ं राज के संकेत को समझो मित्र युवराज दुर्योधन की भाति बनने का अर्थ है कि तुम्हें उनकी भाति साहस दिखाना होगा उनकी भाति करने का अर्थ है जैसे उन्होंने राजकुमारी भानुमति का अपहरण किया था वैसे ही तुम्हें भी करना होगा लक्ष्मणा को पाने के लिए मित्र लक्ष्मणा निश्चित रूप से तुमसे अभी भी प्रेम करती ह वो निश्चित रूप से अपने पिता के विरुद्ध नहीं जा सकती परंतु तुम जा सकते हो य सोचने का समय नहीं है मित्र अपने हृदय की सुनो मित्र अपने हृदय की सुनो हमें सबसे पहले लक्ष्मणा को इन सब आयोजनों से दूर रखना होगा ताकि उसे यहां से दूर ले जाने के लिए हमें अधिक समय मिल सके तुम समझ रहे हो ना मित्र साम तुम सही कह रहे हो मित्र मैं अपने प्रेम का बलिदान नहीं दूंगा और ना ही लक्ष्मणा को इतना बड़ा बलिदान देने [संगीत] दूंगा आज पहली बार अपने पिता के पद पर चलेगा साम भरण करेगा शम हरण करेगा [प्रशंसा] साम
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