Saturday, 27 December 2025

दुर्योधन को पांडवों पर संशय क्यों था Gautam Rode Suryaputra Karn Episode Pen Bhakti

[संगीत] हमारा सबसे बड़ा शत्रु कौन है आप में से कुछ कहेंगे कि जो हमारा विनाश चाहे तो कुछ कहेंगे कि जो पीठ पीछे प्रहार करे आप में से कुछ यह भी मानते हैं कि जो हमारे परिवार की शांति को भंग करे व हमारा शत्रु और कुछ यह भी मानते हैं कि जो हमारे सामाजिक सम्मान को समाप्त कर दे वो हमारा सबसे बड़ा शत्रु है ना परंतु सत्य इन सबसे भिन्न है हमारा सबसे बड़ा शत्रु हमारे सबसे निकट रहता है या कहे हमारे भीतर रहता है कौन है ये शत्रु वो शत्रु है हमारा मन हमारा मस्तिष्क क्योंकि यह हमें किसी भी क्षण उचित से अनुचित की ओर धर्म से अधर्म की ओर ढकेल होता है यह एक क्षण में हमारा परिवार तोड़ सकता है हमारी प्रतिष्ठा भंग कर सकता है इसलिए यदि सफल होना श्रे होना तो अपने मन पर नियंत्रण रखना सीखिए यदि मन अनुशासित हो तो उससे अधिक सर्जन कोई नहीं कर सकता और यदि मन अनुशासित ना हो तो उससे अधिक विध्वंस कोई नहीं कर सकता यदि मन में हार हो तो आपको कोई जिता नहीं सकता और यदि मन में जीत की लगन हो तो आपको कोई हरा नहीं सकता मुझे बल प्रयोग करने पर विवश मत [संगीत] [हंसी] [संगीत] करो नहीं तुम स्वयं प्रस्तुत नहीं होगे कैसे कैसे भूल गया मैं कितना आनंद आता है तुम पांडवों को मुझे कष्ट देने में तो ठीक है धर्मराज शर प्रार्थना कर रहे होगे तुम कि मैं तुम्ह पकड़ ना पाऊ व्यर्थ है व्यर्थ है बचा कर रखो अपनी प्रार्थना को अगले 12 वर्ष में काम आएंगी तुम्हारी प्रार्थना बचा के रखो और तो ठीक व भीम कहां है कहां हो [संगीत] भीम तुम्हें क्या हो गया सदा मेरी ललकार का उत्तर देने वाला वो विक्रो दर भीम कहां छिपा बैठा है काकर कहां छिपा बैठा है क्या हो गया भीम देख एक तेरे समक्ष वही दुर्योधन है जिसने पंचली का अस्त्र हरण करवाया [संगीत] था ति अ मानस्य रात्म भी आज आज भी मेरी टंगा से बिठाने पर दूर है आज [संगीत] भी नबी किता देना कभी [संगीत] क्या हो गया कहां छुपा बैठा है बड़ बोला भीम क मामा श्री लगता है वन में इस भूखे भीम ने कुछ ऐसा ली आएगी जिसने उसका पौरुष उससे छीन लिया है नबक हो गए य सभी पांडव [संगीत] न स्मरण है महाराज आप आपने क्या कहा था आपने कहा था कि आप चाहते हैं कि आपका पुत्र आपको गर्व भरी दृष्टि से देखे परंतु इस समय आपका व्यवहार आपके पुत्र की दृष्टि झुका [संगीत] देगा देखिए किसी दूसरे राज्य का युवराज आपकी प्रजा में सबको ऐसे ललकार रहा है जैसे विराट राज उसके दास है और आप यू मन खड़े [संगीत] हैं तुम नहीं हो भी तुम भी नहीं [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] नहीं मैं जानता हूं कि मेरे मित्र कीचक का वद तुमने ही किया [संगीत] प्रतिशोध लूंगा मैं प्रतिशोध [संगीत] लूंगा महाराज राजा वो नहीं होता जो स्वर्ण सिंहासन पर बैठे हीरक मुकुट धारण करे राजा वो होता है जो अपनी प्रजा के मन के सिंहासन पर बैठे मान का मुकुट धारण करें चेत जाइए महाराज चेत जाइए इस समय आपका पुत्र कुमार उत्तर ही नहीं अी तू आपकी प्रजा भी अपने राजा से साहस की आशा बाधे खड़ी है पूरे राज्य के समक्ष आपका निरादर हो रहा है जागिए महाराज जागिए अब यही अवसर है सबको बता देने का कि मत्से के राजा आप है र तुम तो पांचों पांडव में सबसे अधिक बुद्धिमान हो अंतिम अंतिम अवसर दे रहा हूं तुम्ह अंतिम पांचाली समेत पांचों भाई मेरे समक्ष आ जाओ क्योंकि जब तक मैं तुम्हें पहचान नहीं लेता मैं यहां से किसी को जाने नहीं दूंगा भले ही पूरी रात्री बीत जाए किसी को नहीं पा पांडव के समक्ष 4 सैर अच्छा नाम है सर्रे हस्तिनापुर युवराज के लिए मधुरा प्रस्तुत करो अंजली [संगीत] पांचाली [संगीत] [संगीत] माम श्र ठीक कहते हैं क्रोध में मैं बुद्धि से काम नहीं [संगीत] लेता महाराज आप केवल भय और संशय के दबाव में है अपने भय और संशय को दूर की महाराज दूर कीजिए और रोकिए रोकिए इस दुर्योधन को महाराज [संगीत] रोकिए उन पांचों मोतियों को ढूंढ रहा [संगीत] था जबकि वो सूत्र मेरे समक्ष है जिसने उन पांचों को एक सूत्र में बांध के रखा [संगीत] है [संगीत] मैं जानता हूं कि तुम हो द्रोपति कि पूरे समय अपना मुख घट से छुपा के रखे इतनी प्रताड़ना के पश्चात मु से तक ना निकाले [संगीत] कुछ कीजिए महाराज किस बात का भय है क्या उसका कारण वस्त्र हरण की लज्जा है या फिर पुन अपमान का डर देखना जो पांडव मेरे ललकार के पश्चात भी प्रस्तुत नहीं हुए वो कैसे तुम्हारे घुंगट उठाते ही प्रस्तुत हो जाएंगे [संगीत] अरे शाबाश दुर्योधन अब होगा इन पांडवों का अज्ञातवास [संगीत] भंग कितना पीछे जाओगी पांचाली अब और कोई मार्ग शेष नहीं [संगीत] है रुक जाओ कुमार [संगीत] धरन [संगीत] ओ विराट राज आपके कंठ में स्वर भी है जत नहीं था मुझे य आपका सर ऊंचा भी होता है परंतु विलंब कर दिया आपने क्योंकि आप ना तो मेरे पास रुकने का धैर्य है और ना ही आपके पास मुझे रोक पाने की [संगीत] शक्ति मैं सावधान करता हूं कुमार धुन आप जानते हैं ना कि आप हस्तिनापुर के युवराज को ललकार रहे हैं हस्तिनापुर नहीं मत से राज है विराट नगर है य यहां भरी सवा में स्त्री के मान का हरण नहीं [संगीत] होता परंतु भरी सभा में स्त्री का अपमान करने वाले का वद अवश्य हो सकता है मेरी प्रजा तुम्हारी दास नहीं तुम्हारा उन पर कोई अधिकार नहीं सर्री को छूने का प्रयास ही मत [संगीत] करना [संगीत] [संगीत] महाराज विराट हम आपकी प्रजा का अपमान नहीं कर रहे हैं हम तो केवल पांडवों को ढूंढने का प्रयास कर रहे [संगीत] हैं स्मरण है ना को आपके सेनापति ने हमें वचन दिया था कि मत्स राज्य पांडवों को ढूंढने में हमारी सहायता करेगा सहायता सर झुका के मांगी जाती है गंधार नरेश उंगली उठाकर नहीं और रही बात वचन की तो मैंने नहीं की चकने दिया था उसकी मृत्यु के साथ उसका वचन भी टूट गया आप लोग शीघ्र ही यहां से प्रस्थान करें वही आपके हित में होगा आप मुझे देख बज दुर्योधन को ललकार रहे हैं देख दुधन को नहीं मैं हस्तिनापुर के मध्य युवराज को चेतावनी दे रहा आपके आगमन पर हमने आपका बहुत आदर सत्कार किया विवश मत कीजिएगा आपके प्रस्थान पर आपका निराधर करना पड़े अरे हा इस तो मैं एक पग भी और आगे बढ़ाया तो मेरे सैनिक प्रहार करने के लिए स्वतंत्र [संगीत] होंगे मैं तुम्हे क्षमा नहीं करूंगा विराट राज मेरा अपमान है प्रतिशोध अश लूंगा दुर्योधन यह अवसर उचित नहीं है चलो यहां [संगीत] से इस विराट राज्य की कृपा से कब तक बच पाओगे नपुंसक पांडवों मैं तुम्हें फिर से वन भेज कर ही सास लूंगा और तुम तुम पांचाली तुम्हारा तर्फ एक बार फिर तोड़ेगा यह दुर्योधन और तुम विराट राज तुमने तो मत्स के विनाश को ललकारा है अब पांडवों के साथ-साथ तुम्हारा भी विनाश होगा मेरे प्रतिशोध की अग्नि से तुम्हारे राज्य का हर एक घर र हो जाएगा ू समागम क क्या क आ कलपत ूप समागम हम कलपत ूप समागम [संगीत] हम

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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...