[संगीत] मनुष्य सदैव स्वप्न देखता है और जीवन भर उन्हें पूर्ण करने के प्रयास में लग जाता है परंतु प्रश्न यह उठता है कि हमारे प्रयासों के पश्चात हम में से कई सफल क्यों नहीं होते कारण है सय [संगीत] संयम अर्थात स्वयं को रोक सकने की क्षमता अब आप कहेंगे जब आगे बढ़ना है तो स्वयं को रोकना क्यों विकास के विज्ञान में संयम का ज्ञान बहुत ही आवश्यक है चार पग आगे बढ़ना हो तो एक पग पीछे हटने का साहस ही संयम है संयम अपने इंद्रियों पर अपने आकर्षणों पर अपनी इच्छाओं पर कभी सोचा है नदी की गहराई में जाने के लिए सांसों को रोकना पड़ता है पर्वत पर चढ़ने के लिए अपने पांव को रोकना पड़ता है यही संयम होता है यदि गहराई से देखेंगे तो आप पाएंगे कि लक्ष्य को पाने के लिए संयम होना सबसे अधिक आवश्यक है [संगीत] [संगीत] गौरंग गौरंग गौरंग गौरंग गरंग गंग मेरे गौरा की तुमने हत्या कर दी हत्या कर दी तुमने मेरे गौरांग की धनुर तुमने एक मुख और विवश अत पशु की हत्या कर दी जो कीचड़ में फसा हुआ था तुमने महापाप किया है धनुर्धर बेव मैंने मैंने इसे नहीं मारा मैं तो केवल राक्षस का वद कर रहा था वो राक्षस व अभी यही था वाह धनुर वाह कौन सा राक्षस है य य तो कोई राक्षस नहीं है अपने आपको निर्दोष सिद्ध करने के लिए असद का सहारा मत लो धनु तुमने मेरे गौरांग की हत्या नहीं की तुमने उसकी माता मां की भी हत्या की है तुमने सिर्फ उसकी मां की ही नहीं तेरे परिवार के सदस्य की भी हत्या की है धनुर्धर ब्राह्मण देपा आपको भ्रम हो रहा है भला मैं क्यों मारूंगा इसे ग हत्या का महापाप किया है तुमने तुम्हारे पास उससे बच पने का कोई अवसर नहीं [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] है यह तो वही पुष्प हार है जो मैंने शिवलिंग को अर्पित किया [संगीत] था [संगीत] [संगीत] प्रभु मुझे क्षमा कर दीजिए प्रभु मैं आपको पहचान नहीं पाया आपको पहचान नहीं पाया प्रभु मुझे क्षमा कर [संगीत] दीजिए प्रभु ओम नमः [संगीत] शिवाय ओ नम शिवाय उठो बत क्षमा कीजिए प्रभु मैंने मैंने आपकी आराधना भंग कर दी क्योंकि यही उचित था मनुष्य की सबसे बड़ी आराधना उसका कर्तव्य का पालन होता है अर्जुन जो तुमने भली किसी और के प्राणों की रक्षा के लिए तुमने अपनी तपस्या अर्थात तुम अपने कर्तव्य को भली भाति जानते मैं केवल यह देखना चाहता था कि तुम पशु पता के योग्य हो या नहीं इसलिए मुझे तुम्हारी परीक्षा लेनी [संगीत] पड़ी और तुम इस परीक्षा में सफल हुए अर्जुन मैं तुम्हें प्रसन्न मन से पशुपतास्त्र प्रदान करता हूं अर्जुन कल्याण हुआ में [संगीत] आप सब दुखी मत होइए ब्राह्मण देव मैं मानता हूं अनजाने में मुझसे पाप हुआ मैं सबकी पीड़ा समझ सकता [संगीत] हूं आपकी हानि की पूर्ति मैं करूंगा यदि मैं तुम्हारे पुत्र की हत्या कर देता और अपनी सारी संपत्ति तुमको दे देता तो क्या तुम मुझे क्षमा कर देते कदा भी क्षमा नहीं करोगे तुम तुमने महापाप किया है मैं अगनि होत ब्राह्मण विजय तुम्हें श्राप देता हूं श्राप किस प्रकार तुमने टीचर में फसे हुए मेरे असहाय बछड़े को मारा है उसी प्रकार तुम भी एक दिन पृथ्वी में असहाय गिरे रहोगे और तुम्हारी कोई सहायता नहीं करेगा और मेरे बछड़े की भात तुम्हारी मृत्यु उसी प्रकार होगी कोई दया नहीं मिलेगी धनुर्धर य दुख ब्राह्मण का श्राप [हंसी] है सूर्य पुत्र क सूर्य [संगीत] पुत्र अभ शापित कर अभी शापित आज मेरे मन में जल रही प्रतिशोध की अग्नि को थोड़ी सी शीतलता प्रदान [संगीत] हुई अभि शापित कांड तुमने मेरे गर्भ पर पहाड़ किया मेरे आत्म सम्मान को ठेस पहुंचाई मुझे युद्ध में पराजित कर पीड़ा दी और मैंने तुम्हें पराजित करने की भूमिका निर्माण की तुमने मुझे पराजित किया होता तो किसी स्थिति में मैं तुम्हें क्षमा कर भी देता परंतु तुमने मेरे पुत्र अर्जुन के विरुद्ध खड़े होकर अपने जीवन की सबसे बड़ी भूल की है जब तक तुम्हारा संपूर्ण विनाश नहीं हो जाता तब तक यह देवराज इंद्र संतोष से विश्राम नहीं करे धनुर मेरा श्राप कभी व्यर्थ नहीं जाएगा को हत्या के पाप का दं तुम्ह हमेशा ता रहेगा ता रहेगा [संगीत] यह इंद्र लोक है अर्जुन यहां दुख की परछाई भी नहीं यहां केवल सुख आनंद [संगीत] शांति शमा की जी पथे मेरे भाई वहां पीड़ा भोग और मैं यहां आनंद करूं ऐसा कैसे हो सकता [संगीत] है हमें अपनी प्रतिज्ञा पूर्ण करनी है महायुद्ध करना है स्त्री के अपमान का प्रतिकार करना है मुझे अर्जुन उस प्रतिकार को पूर्ण करने के लिए तुम्हें कुछ दिव्या अस्त्र की आवश्यकता पड़ेगी उनकी दीक्षा देने के लिए ही मैं तुम्हें यहां लाया हूं आओ अर्जन आरंभ [संगीत] [संगीत] कर [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] और [संगीत] [संगीत] मैं अगनि हो ब्राह्मण विजय तुम्ह श्राप देता हूं श्राप जिस प्रकार तुमने टीचर में फसे हुए मेरे असहाय बछड़े को मारा है उसी प्रकार तुम भी एक दिन पृथ्वी पर असहाय गिरे रहोगे और तुम्हारी कोई सहायता नहीं करेगा हरि ही परशु धारी रामन चंदर एकरा जहा [संगीत] प्रधा सयावा चंद [संगीत] [संगीत] ब आज एक बार फिर परशुराम का फरसा उठाए क्योंकि घोर अन्याय हुआ है मेरे शिष्य को आकारणी श्राप दिया गया है मैं पूरे संसार का सर्वनाश कर दूंगा विध्वंस कर दूंगा आज संसार में प्रलय आएगी ना सार होगा 21 बार इस धरा को क्षत्री विहीन कर देने वाला परशुराम एक बार फिर इस धरा को मानव विहीन कर देगा उपकार का बदला उपकार से ना चुकाना ऐसे मानव जाति को जीवित रहने का कोई अधिकार नहीं देगा परिश्रम गुरुदेव [संगीत] नहीं ऐसा अनर्थ मत कर गुरुदेव शांत हो [संगीत] जाइए इतना क्रोध क्यों करोध मुझे [संगीत] तो श्राप और अपेक्षा का अभ्यास सा हो गया है एक श्राप थोड़ी ना मिला है मुझे मेरा जीवन तो प्रारंभ से अभी शपत रहा है और आपने भी तो मुझे श्रप दिया है गुरुदेव मैं जमदग्नी पुत्र परश राम तुम्हें श्राप देता हूं मेरे द्वारा दिए गए दिव्या का आवाहन नहीं कर पाओगे ये मेरा है उसी अपराध की अग्नि में तो परशुराम अभी तक चल रहा है पुत्र ऐसा कहकर मुझे पाप का भागी ना बनाए मां की मार और गुरु की फटकार जीवन में इससे बड़ा प्रसाद नहीं हो सकता और वैसे भी गुरुदेव कोई भी श्राप और कोई भी पीड़ा मेरे भाई जो उनकी मृत्यु से अधिक नहीं हो सकती मुझे परिवर्तन चाहिए न्याय चाहिए समानता चाहिए गुरुदेव और इस न्याय परिवर्तन और समानता को पाने के लिए एक श्रप तो क्या सहस्त्र श्रप सह सकता में अ का में मोक्ष और कोई शरा आपके इस शिष्य को अपने लक्ष्य से अपने कर्म पत से हटा नहीं सकता गुरुदेव य हस्तीन य हस्व री हस्ती हस्ती लो को भी अधिक ताप में रखा जाए तो वह भी पिघल जाता है पाषाण पर चोट करो तो उसमें से भी चिंगारियां निकलती है परंतु कण तुम तो स्वर्ण हो स्वर्ण तुम्हें जितना तपाया जाता है तुम उससे कहीं अधिक चमकदार बनकर निकल आते हो यहां कई वीर योद्धा आए और आएंगे भी पर तुम जैसा धैर्यवान अ वीर योद्धा ना भूतो हो ना भविष्य हो ना कभी हुआ है और ना ही कभी होगा मैं तो चिरंजीवी हूं कभी मृत्यु को प्राप्त नहीं होगा परंतु वस मृत्य भी तुम जैसे रवान और वीर योद्धा को प्रणाम करेगी और कामना करेगी कदाचित से तुम्हारे हाथों पराजय देखनी पड़े अपने कर्म पद पर आगे बढ़ो तुम भले ही अभिशा पित हो और संसार के वीर योद्ध से कहीं अधिक श्रेष्ठ सिद्ध हो के तुम मृत्युंजय कण बनोगे [संगीत] करना शति करना नवी [संगीत] कर
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