Saturday, 27 December 2025

दानवीर कर्ण के सामने कौन सी कठिन समस्या थी Mahabharat Scene B R Chopra Pen Bhakti

[संगीत] महाभारत आचार्य वर्ग की सेवा में अधिरथ का प्रणाम तुम तो महाराज के सारथी हुआ करते थे जी आचार्य व यह तुम्हारा पुत्र है जी आचार्य व क्या नाम है तुम्हारा राधे राधे राधे क्यों की मां का नाम राधा है तुम्हारा नाम तुम्हारे मुख मंडल के तेज से मेल नहीं खाता है बस तुम्हारे मुखड़े पत सूर्य का तेज है तुम इसका नाम करण रखो जो आजा अच्छा अब यह बताओ तुम्हारा आना कैसे गा ये शस्त्र विद्या सीखने की हट कर रहा है आचार्य व और शस्त्र विद्या के लिए कोई पिता अपने पुत्र को आपके सिवा और कहां ले जा सकता है मैं इसे विद्यादान देकर अति प्रसन्न होता अधिरथ क्षमा चाहता हूं आचार्य मैं दान नहीं लेता और विद्या दान में दी भी नहीं जा सकती आयुष्मान बाबा परंतु इस गुरुकुल में राजपुत्र क्षत्रियों के अतिरिक्त किसी और को शिक्षा नहीं दी जा सकती है और तुम्हारा पुत्र कण इन दोनों कसौट पर खरा नहीं उतरता अधिरथ तुम्हें इसके लिए कोई और गुरु ढूंढना होगा तो क्या शिक्षा दाय आचार्य क्या माता सरस्वती पहले पिता का नाम नाम पूछती है संसार चाहे मुझे जिस नाम से पुकारे बाबा परंतु आप मुझे राधे क कीजिए आपके मुंह से करण सुनकर ऐसा लगता है जैसे कि मैं आपका कोई लगता ही नहीं क्या मैं एक प्रश्न कर सकता हूं अवश्य यह युवक कौन है यह मेरा पुत्र है अश्वथामा अर्थात ना तो यह राजपुत्र है और ही क्षत्रिय प्रणाम आचार्य गुरु द्रोण का यह शिष्य भी युद्ध ही की आज्ञा मांग रहा है कुल गुरु क्योंकि उसे हस्तिनापुर की भूमि पर उगाने वाला यह अभिमान का वृक्ष अच्छा नहीं लग रहा इससे पहले कि यह जड़ पकड़ ले इसे काट ही डालना [संगीत] चाहिए क्या तुम्हारे पास केवल शब्दों के वान है पार्थ यह धनुष और य वान से भरा तुनीर क्या केवल दिखावे के लिए परंतु याद रहे कि मैं ब्रह्मास्त्र तक तुम्हारा पीछा नहीं छोड़ दान में पाया हुआ राज्य किसी को क्षत्री नहीं बना सकता है अंग राज करण मनुष्य को छत्री बनाती है उसकी खाव खाने योग्य छाती और उसकी बान चलाने योग्य बुझाए यह सूत पुत्र है इसके हाथ में कशा दो दुर्योधन और इससे अपना रावा आ जाओ अर्जुन यह तुम्हारे हाथों आने वाली मृत्य के योग्य नहीं ऋषियों के गोत्र नदियों के स्रोत को कौन देखता भीम और यह भी मत भूलो कि तुम सबके जन्म के विषय में भी अटपटे प्रश्न किए जा सकते हैं मैं तो सूत पुत्र नहीं हूं कण ने तो केवल अर्जुन को ललकारा था मैं तुम पांचों भाइयों को ललता हूं आओ और अपना सीत्व सिद्ध करो [संगीत] करण [संगीत] करण आयुष्मान भावा हे भगवन मेरे अ भाग्य के आपने मुझे दर्शन दिए हे दानवीर मुझे आना ही पड़ा तुम प्रतिज्ञा ब कि 20 दोपहर में मेरी पूजा समाप्ति के उपरांत यदि कोई तुमसे कुछ मांगेगा तो तुम उसे निराश नहीं करोगे इंद्र देव तुम्हारी इसी प्रतिज्ञा का लाभ उठाने के लिए तुम्हारे पास आने वाले हैं व निसंदेह तुमसे तुम्हारा कवच और कुंडल मांगेंगे हे दानवीर महापुरुष उन्हें य दोनों वस्तुएं ना देना यह तो संभव ही नहीं है भगवन उस समय तो यदि कोई मुझसे मेरे प्राण भी मांग ले तो मैं वो भी दे दूंगा यह कवच भाग्य के बाण रोक सकता है वत मैं क्षमा चाहता हूं भगवन किंतु यह जान लेने के उपरांत भी यदि कोई उस समय मुझसे मेरा कवच और मेरे कुंडल मांगेगा तो मैं उसे निराश नहीं करूंगा मुझे अपने जीवन से कहीं अधिक प्रिय मेरी प्रतिज्ञा है हे भगवन इस संसार में मेरी मा राधा और मेरे मित्र दुर्योधन के अतिरिक्त किसी ने मुझे अपमान के सिवा और कुछ नहीं दिया इसीलिए मैं चाहता हूं कि जब मैं जाऊं तो लोगों को ऋणी छोड़ जाऊ फिर तुम ऐसा करना कवच कुंडल पा लेने के उपरांत जब व तुम्हें वर मांगने की आज्ञा दे तो उनसे उनका शक्ति अस्त्र मांग लेना [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] हे [संगीत] कर्ण प्रणाम आयुष्मान भव आप मुझे यह आशीर्वाद ना दीजिए ब्राह्मण देवता किंतु आदेश दीजिए कि मैं आपकी क्या सेवा कर सकता हूं मैं दूसरे ब्राह्मणों की भांती तुमसे धन मांगने नहीं आया हूं इससे क्या होता है आप यदि कुछ मांगने ही आए हैं तो मैं आपकी मांग अवश्य पूरी करूंगा कहिए क्या चाहिए [संगीत] आपको मुझे तुम्हारा कवच चाहिए तुम्हारे कुंडल चाहिए यह दोनों वस्तुएं तो मेरे शरीर का भाग है आप मेरे दूसरे अस्त्र शस्त्र ले लीजिए मुझे और कुछ नहीं चाहिए मैंने तो सुना है तुम बड़े दानवीर हो यह दूसरा प्रणाम किस लिए पहला प्रणाम ब्राह्मण के लिए था और यह दूसरा प्रणाम इंद्र देव के लिए [संगीत] है परतु आप चिंता ना कीजिए मैं यह जानता हूं कि आप मुझसे मेरा कवच और मेरे कुंडल क्यों मांग रहे हैं किंतु हे इंद्रदेव मैं प्रतिक बद्ध हूं आपने मुझसे मांगा ही ऐसे समय है कि मैं आपको ना नहीं कर सकता यह मेरे लिए बड़े गर्व की बात है कि मैं ही एक ऐसा मानव हूं जिसके आगे स्वयं देवराज इंद्र हाथ फैला रहे हैं आ [संगीत] हे कर्ण कदाचित परमपिता ब्रह्मा के लिए तुम जैसा कोई और दानवीर बनाना संभव नहीं सूर्यदेव ने तुम्हें बता दिया था कि मैं आने वाला हूं उन्होंने तुम्हें यह भी बताया था कि मैं तुमसे क्या मांगने वाला हूं फिर भी तुमने इस पल को पीठ ना दिखाई तुमने ना केवल इस पल का सामना किया बल्कि उसे पराजित किया कोई वर मांगो वत्स जो जी चाहे मांगो इंद्र ना नहीं करेगा हे भगवन कुछ देने के उपरांत कुछ मांग लेना सभ्यता के विरुद्ध है यदि कुछ मांग लिया तो फिर मेरे देने का अर्थ निकल जाएगा उसका यश भंग हो जाएगा मैं क्षमा चाहता हूं भगवन किंतु मैं इस समय आपसे कुछ मांगकर दान की मर्यादा का उल्लंघन नहीं कर सकता परंतु आपको वर्तमान और भविष्य की परिनिंदा से बचाने के लिए अवश्य मैं कुछ मांगूंगा यदि उचित जानिए तो मुझे शक्ति दीजिए शक्ति तथास्तु ये लो किंतु तुम इसका प्रयोग एक बार कर सकते हो फिर मेरा अस्त्र मेरे पास लौट आएगा मैं इसका प्रयोग दो बार करना भी नहीं चाहता हूं भगवन क्योंकि इस संसार में केवल मेरा एक ही शत्रु है एक [संगीत] ही जन्म जात कुंडल कवच थे अंगों के अंग वही काट कर दे दिए अद्भुत दिव्य प्रसंग महाभारत महाभारत महाभारत महाभारत हो महाभारत [संगीत]

No comments:

Post a Comment

ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...