Saturday, 27 December 2025

दुर्योधन और शिखंडी का संवाद Gautam Rode Suryaputra Karn Episode 189 Pen Bhakti

[संगीत] कभी-कभी हमें लगता है कि हमारे अपने हमारे हिताशी हमारे माता-पिता को हमारे मन की बात ही नहीं समझ आ रही जैसे उन्हें हमारे हर कार्य में हर निर्णय में खोट दिखाई दे रहा हो और हम कर बैठते हैं विद्रोह ऐसी अवस्था में हमें वही अच्छा लगने लगता है जो हमारी मन की बातों का समर्थन करें हम उसे ही अपना हिताशी समझ लेते हैं परंतु जो आपसे मीठी बातें कर रहा हो वह आपका हिताशी है यह आवश्यक नहीं कुछ विषैले फूल बड़े सुंदर दिखते हैं कुछ विषैले फल असाधारण रूप से बड़े स्वादिष्ट होते हैं और यह भी आवश्यक नहीं कि हमारे रोगों का निदान करने वाली औषधि सदा मीठी हो इसलिए विष और औषधि में अंतर को परखने का प्रयास करें हो सकता है जो आपके हित की बात कर रहा हो वह आपको संकट के गर्थ में ले जा रहा हो बात बात पर आवेश में ना आए हो सकता है कि आपके माता-पिता की कड़वी बातों में आपका ही हित छिपा और माता-पिता को भी प्रयास करना चाहिए कि यदि उनकी संतान अनुचित निर्णय ले रही है तो उसके अनुचित होने का भान प्रेम से करवाए दबाव और शासन से नहीं क्योंकि कभी-कभी कटु शब्द और कटु वचन अनुचित निर्णय को और पक्का कर देता है पुत्री उत्तरा मैं तुम्हें वचन देता हूं कि जब तक रणभूमि में यह गंगापुत्र खड़ा रहेगा तब तक तुम्हारा सौभाग्य और तुम्हारा सुहाग दोनों पर कोई आंच नहीं आएगी [संगीत] परंतु आपके पश्चात कदाचित तुम्हें यह ज्ञात नहीं कि मुझे इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त है फिर भी तुम्हारा संशय मिटाने के लिए मैं वचन देता हूं कि तुम्हारा पति अभिमन्यु सुरक्षित [संगीत] तुमने मेरे साथ अन्याय किया है भीष्म तुमने हस्तिनापुर के सिंहासन के लिए मेरा जीवन नाश कर दिया मेरा त्याग कर दिया मैं नया जन्म लेके आऊंगी भीष्म तुमसे प्रतिशोध पूर्ण [संगीत] करने बहुत व्यस्त हो लक्ष्मणा अभी से ही अपने विवाह की तैयारियां प्रारंभ कर [संगीत] दी प्रणिपात काकी श्र प्रसन्न रहो पुत्री एकांत तुम्हारी सास तो राजकुमारी उत्तरा के वस्त्र लंक समारोह में व्यस्त है इसलिए वो चाहती थी कि यह सभी उपहार हम तुम तक पहुंचा दे और वैसे भी महारानी सुदेशना से अधिक मेरा मन है कि मैं तुम्हें होने वाली महारानी की भाति सजते [संगीत] हुए [संगीत] आओ पुष्प जैसे कोमल मुख पर ये उदासी की परछा है क्यों सब ठीक तो है ना लक्ष्मणा तुम कुशल तो हो मैं तो ठीक हूं काकी श्री परंतु आप इतनी क्षमाशील कैसे हो सकती है अर्थात अर्थात मेरे पिताश्री ने जो किया वो भुलाया नहीं जा सकता और मैं जानती हूं कि क्षमा भी नहीं किया जा [संगीत] सकता परंतु यह जानते हुए कि मैं उन्हीं की पुत्री हूं आप मुझसे इतना स्नेह कर रही है मैं कुरुवंश की वधु हूं लक्ष्मणा और कुरुवंश की पुत्री से स्नेह करना मेरा कर्तव्य [प्रशंसा] [संगीत] है मैं आपसे कुछ मांग सकती हूं काकी [संगीत] श्री यह निर्णय तो मांग सुनकर ही ले पाऊंगी पुत्री बिना सोचे समझे वचन देने की पीड़ा बहुत अनुभव कर चुकी हूं हो सके तो मेरे पिता श्री को क्षमा कर [संगीत] दीजिए उनकी ओर से मैं आपसे क्षमा [संगीत] चाहती जानती हो लक्षमी ना हम स्त्रियों के जीवन की सबसे बड़ी भूल क्या होती है कि हम अपने जीवन में आए हुए पुरुषों की भूलों की क्षमा मांगती है और उनकी भूलों का दंड स्वीकार करती हैं और वो इसलिए क्योंकि कदाचित हमें यही सिखाया जाता है मैं कुछ समझी नहीं बस इतना समझ लो कि उस अधर्म के लिए क्षमा मत मांगो जो अधर्म तुमने किया नहीं और ना ही उस भूल के लिए दंड भुगतना स्वीकार करो जो भूल तुमने की नहीं सदा अपने हृदय की सुनो क्या आपने अपने ह्रदय की सुनी थी जब आपको जीवन में कोई विकल्प नहीं दिया गया और पांच पुरुषों से विवाह करना पड़ा विकल्प था परंतु मैंने उस थिति से बाहर निकलना उचित नहीं समझा मैंने अपने हृदय की सुनी और सबके कल्याण के लिए मैंने पांच पुरुषों से विवाह करने का निर्णय मैं तुम्हारे पिता श्री को क्षमा नहीं कर [संगीत] पाऊंगी परंतु तुम्हें एक सीख दूंगी सदा अपने हृदय की बात सुन और अपने निर्णय का सम्मान करना अपने जीवन से जुड़े किसी भी निर्णय के लिए कभी किसी और पर निर्भर मत [संगीत] होना पांचाल कुमारी की जय हो पांचाल से कुमारी स खंडनी और कुमार दृष्ट दिन पधार चुके हैं नव विवाहित युगल को पंचाल राज्य की ओर से हार्दिक बधाई यह भेट स्वीकार करें यह स्वर्ण मुद्रा पंचाल राज्य और हमारे मित्र राज्य विराटनगर और पांडवों के प्रति संधि और सहयोग का प्रतीक है इसे आप स्वीकार [संगीत] करें ये कटार पंचाल राज्य और हमारे मित्र राज्य की शक्ति दर्शाती है हम पंचाल राज्य और हमारे मित्र राज्य की सेना का एक बड़ा भाग आपको हेट करते [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] हैं और यह माटी पांचाल राज्य और उसके पड़ोसी मित्र राज्य की भूमि का संकेत है हम पांचाल अथवा हमारे मित्र राज्य की भूमि का एक बड़ा भाग आपको भेंट करते [संगीत] हैं य क्या होरहा हैय ये क्या हो रहा है यह क्या हो रहा है क्या हो रहा है य बंद करो बंद करो ये स्वांग ब करो जत नहीं है दिग्विजय के पश्चात तुम्हारे तुम्हारे पांचाल पर मेरा अधिकार है हस्तिनापुर का अधिकार है और इस बाती ये य भेट देना हमारे अधिकार के लिए चुनौती है यदि यह भेट वापस ना ली गई तो तो मैं इसे युद्ध की चुनौती मानूंगा य की चती अधिम रामम साम [संगीत] क्या पिताश्री ने तुम दोनों को य पहरेदारी करने को कहा है जी राजकुमारी युवराज का निर्देश है हम आपकी रक्षा के लिए यहां प्रस्तुत [संगीत] रहे हस्तिनापुर की राजकुमारी लक्ष्मणा का हाथ विराट कुमार उत्तर के हाथ में देने का प्रस्ताव रखता तुम संभ के साथ प्रसन्न नहीं रह पाओगी अब निर्णय तुम्हे लेना है अपने पिता का सम्मान या या फिर अपना स्वप्न कौन है वहां [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] अरे कौन हो तुम भाही रुको मेरे बा पी आटो तुम ऐसे नहीं मानोगे [संगीत] नारो तुम यहां क्या कर रहे हो यह बताने का समय नहीं है लक्ष्मण समय कुछ कर दिखाने का है [संगीत] ठहर वीरो विवाह के शुभ अक्सर को रक्त रंजित मत कीजिए आप दोनों ही मेरे होने वाले संधि हैं मैं आपसे विनती करता हूं कृपया शांत हो जाए विराट राज उचित कह रहे हैं दुर्योधन तुम सभी अपने अपने शस्त्र नीचे करो ये पहले पले सोचना था पितामह पहले सोचना चाहिए [संगीत] था ना मैं ना यहां कोई और कोई मूर्ख नहीं है सब दिख रहा है कैसे ये विवाह भेट के नाम पे क्या कुचक्र चल रहा है यहां सब दिखाई दे रहा [संगीत] है सत्य वचन दुर्योधन मैं तो भली भाति यह भी जानता हूं कि यह किसके संकेत पर हो रहा [संगीत] है मैं तो भली भाति यह भी जानता हूं कि यह किसके संकेत पर हो रहा है मुझे ये विराट राज से ऐसी आशा नहीं थी पिता नहीं थी ऐसी [संगीत] आशा मैंने यहां आखर भीता पता पैर बुलाकर आपको संधी बनाने का प्रस्ताव रखा और आपने हस्तिनापुर को ही अपमानित [संगीत] किया यदि आपकी पुत्री का विवाह इस सर्जुन के पुत्र से हो रहा है तो मेरी पुत्री का विवाह भी आपके पुत्र से हो रहा [संगीत] है फिर इनका सम्मान और हमारा अपमान ऐसा क्यों विराट राज क्यों ऐसा यदि आपको ऐसा अनुभव हो रहा है तो मैं आपसे क्षमा चाहता हूं कुमार दुर्योधन परंतु सत्य में मुझे समझ में नहीं आ रहा मैंने किस प्रकार आपका अपमान [संगीत] किया मैं आपको समझाता हूं विराट राज यहां आपकी पुत्री और जा माता के विवाह पर उपहार नहीं दिए जा रहे हैं ना बल्कि शक्ति का प्रदर्शन करके हमें नीचा दिखाया जा रहा है नीचा बताइए क्या यह अपमान नहीं [संगीत] है और तुम पांचाल कुमारी जो पहार तुम यहां भेट स्वरूप आ हो उसम केवल मेरा मेरा और हस्तिनापुर का अधिकार है केवल मेरा य य य कौरवों की संपत्ति है तुम्हारी नहीं क्योंकि कक मित्र कण मेरे आवाहन पर एक विजय प्रयाण के समय तुम्हारे पिता को पराजित किया था पांचाल को पराजित किया [संगीत] तब से पांचाल की समस्त संपत्ति य भूमि तुम्हारी सेना सब सब मेरी है सब मेरी है हम [संगीत] है जो मैं आज करने आया हूं उसके लिए यह जानना अति आवश्यक है कि तुम कुमार शम से प्रेम करती हो या राजकुमार उत्तर से विवाह करना चाहती [संगीत] हू इस प्रश्न का उत्तर मैं कुमार सांप को पहले ही दे चुकी हूं मुझे इस विषय में कोई कोई बात नहीं कर मैं तुमसे विनती करती हूं वृष से चले जाओ यहां से मुझे समारोह के लिए तैयार होना है कहां उस विवाह के लिए जिसके लिए ना तुम्हारा हृदय और ना ही तुम्हारी आत्मा अनुमति देती [संगीत] है और ऐसा किसने कहा तुम्हें सामने सां ने कहा तुम्हारे यह कहने के पश्चात भी कि तुम उसका मुख तक नहीं देखना चाहती व तुम्हारे हृदय की बात समझ गया कि तुम्हारे मन में आज भी वही उसके अतिरिक्त तुम किसी और को अपना पति स्वीकार नहीं कर [संगीत] सकती यह जीवन तुम्हारा है लक्ष्मण तो निर्णय भी तुम्हें ही लेना है मैं केवल यह कहना चाहता हूं कि अभी भी अवसर है बताओ तुम्हारे हृदय में क्या है क्या तुम साम से प्रेम करती हो उससे विवाह करना चाहती [संगीत] हो सदा अपने हृदय की बात सुनना और अपने निर्णय का सम्मान करना अपने जीवन से जुड़े किसी भी निर्णय के कभी किसी और पर निर्भर मत होना बताओ लक्ष्मणा यह अंतिम अवसर [संगीत] [संगीत] है

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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...