Saturday, 27 December 2025

दुर्योधन और शकुनि ने रणनीति तय की Gautam Rode Suryaputra Karn Episode 215 Pen Bhakti

[संगीत] जल प्रकृति को इस संसार की सबसे अनूठी देन वह महासागर में भी मिलता है और मीठे तालाब में भी वो पवित्र गंगा में भी होता है और दुर्गंध आती नाली में भी हम तालाब और नदी को सम्मान इसलिए देते हैं क्योंकि उसका मीठा जल हमारी प्यास बुझाता है परंतु सागर का जल पीने योग्य नहीं होता इसीलिए कभी-कभी हम उसे उतना महत्व नहीं देते और नाली के जल को हम हे दृष्टि से देखते हैं तो क्या यह उचित है हमारे संबंध भी इसी जल की भाति होते हैं जिस संबंध से हमें लाभ ना उससे हम दूर हो जाते हैं कभी ईर्षा के कारण कभी अहंकार के कारण उस संबंध को तोड़ देते हैं तो क्या संबंध को तोड़ देना उचित है तनिक विचार कीजिए माना कि सागर का जल फसल नहीं दे सकता परंतु मोती तो देता है माना कि नाली का गंदा जल हमें किसी भी कार्य के लिए उपयुक्त ना लगे परंतु व भी कहीं लगी अग्नि को बुझा सकता है ठीक इसी प्रकार प्रत्येक संबंध कहीं ना कहीं किसी ना किसी परिस्थिति में उपयोगी हो सकता [संगीत] है [संगीत] [संगीत] पिताश्री आप इस भूमि को प्रणाम क्यों कर रहे हैं क्योंकि यह [संगीत] एक अति पावन भूमि है जहां मेरे पूर्व परशुराम ने तपस्या की परंतु अब यह एक युद्ध भूमि है अब यहां तपस्या नहीं शत्रुओं का संघार होगा एक योद्धा के लिए युद भूमि उसकी कर्म भूमि धर्म भूमि और योग्य भूमि होती है मंदिर के समान पवित्र होती है परंतु पिताश्री मेरी दृष्टि में यह सोच एक योद्धा को युद्ध में निर्बल बनाती है मेरा मानना है कि योद्धा जब तक क्रोधित ना हो तब तक व प्रहार नहीं कर सकता नहीं क्रोध में किया गया प्रहार शत्रु से अधिक स्वयं को हानि पहुंचाता [संगीत] है परंतु यह तुम्हारा नहीं तुम्हारी आयु का दोष है जब मैं भी तुम्हारी आयु का था तो ऐसा ही सोचता था मेरे भीतर भी यही आक्रोश यही क्रोध था परंतु मेरे गुरु परशुराम ने मुझे सिखाया है कि कैसे अपने क्रोध को अपना शस्त्र बना अपनी दुर्बलता नहीं कि कैसे शांत मन से उस क्रोध को प्रहार में परिवर्तित करना चाहिए पुत्र जब भी शत्रु सामने हो तो दृष्टि में अवश्य क्रोध रखो परंतु मन शांत रहना चाहिए परंतु पिताश्री आज आज जो मैंने देखा वो तो कुछ और ही था जब आप पांडवों के समक्ष थे आपकी दृष्टि में क्रोध नहीं था व योद्धा कैसे अपने अपने शत्रुओं को कोमल भाव से देख सकता [संगीत] है शक नहीं कि हर कोई जो हमारे विपक्ष में खड़ा हो हमारे विरोध में खड़ा हो वह हमारा शत्रु हो शत्रु हमारे भीतर होता [संगीत] है जो बीते कर्मों का फल बनकर हमें सर्प की भाति टता है इसमें कोई संदेह नहीं कि भीम सबसे बली है प्रबल योद्धा परंतु यह भी निश्चित कुमार रणनीति में सबसे कुशल और प्रहार में सबसे गतिमान परंतु एक सेना के दो सेनापति कैसे हो सकते हैं धर्मराज अब आप ही बताइए कि किसे सेनापति चुना [संगीत] जाए मेरा निर्णय यह है कि हमारी सेना के नेतृत्व के लिए सबसे अधिक योग्य एक विकल्प शेष है युधिष्ठिर [संगीत] कन वासुदेव सेनापति पद के लिए भीम से अधिक कुशल और कौन हो सकता [संगीत] है भीम की कुशलता पर मु मुझे कोई संदेह नहीं परंतु हमें एक ऐसा सेनापति चाहिए जो युद्ध में गंगापुत्र के समक्ष खड़ा हो [संगीत] स वो जिनके कारण युद्ध में विजय हमारी होग और वो केवल एक ही जो कौरवों के सेनापति गंगापुत्र भीष्म का सामना कर [संगीत] सकती [संगीत] श्रीखंड [संगीत] प्रणिपात यह युद्ध केवल आपका नहीं मेरा भी है हर उसका है जिसको कौरवों के अन्याय से कष्ट हुआ है और मैं वचन देती हूं कौरवों को परास्त करने के लिए मैं पूरा प्रयास करूंगी हर हर महादेव हर हर महादेव हर हर महादेव हर हर महादेवर हर हर महादेव हर हर [संगीत] महादेव एक समस्या अब भी सामने है वासुदेव [संगीत] हमारे पास सात अक्ष सेना है और कौरव सेना न अक्ष हमें कोई ना कोई समाधान अवश्य निकालना होगा वासुदेव उन पांडवों के पास सात अश्विनी सेना है और हमारे पास न चिंता करने की आवश्यकता उन्हे है हमें नहीं यदि तुम यूं ही बैठे बैठे आनंद मनाते रहोगे ना दुर्योधन तो शीघ्र ही यह समीकरण बदल जाएगा मेरे कहने का तात्पर्य यह है कि शीघ्र ही यह समीकरण बराबर का हो जाएगा दुर्योधन समझ गए कैसे मद्र राज शल स्मरण है नकुल सहदेव का मामा है वो मामा और हर मामा अपने भांजे के अतिरिक्त और किसी का सगा नहीं हो सकता ना और यह बात तुमसे अधिक कौन जान सकता है उसके पास दो दो अक्षण सेना है दो और वो भी अति शक्तिशाली वो यदि पांडवों के पक्ष में चला गया ना तो पांडवों की शक्ति हमसे अधिक हो जाएगी निश्चित और हां कलिंग का स्वयंवर तो स्मरण है ना तुम्हें दुर्योधन शल्य को शत्रु का क्रोध अधिक शक्तिशाली बना देता है देखा है तुमने देखा है ना और हां मैंने तो यह भी सुना है कि शल्य सेना का हर एक सैनिक शल्य की इस विद्या में थोड़ा कम थोड़ अधिक कुशल है य तो चिंता का विषय है बाबा श्र नहीं होना चाहिए शैल को अपने पक्ष में कैसे किया जाए है मेरे पास एक योजना है दुर्योधन मद्र राज शल्य अपने वचन का पक्का है और उनके चरित्र का थोड़ा सा कच्चा इस स्वभाव से ड़ रसिक भी है तुम समझ रहे हो ना मैं क्या कह रहा हूं रस है थ [संगीत] [हंसी] [संगीत] चल ता करो शार पांडू के शर तक पहुचने में और कितना समय लगेगा हम शीघ्र ही वहां होंगे [संगीत] महाराज र क्यों रोका मार्ग में कोई है महाराज किसका साहस जो मध राज का मार्ग रोक सके मदराज की कोई सूचना अनुज अब तक मामा श्र का कोई समाचार नहीं आया है समझ में नहीं आ किस कारण इतना विलंब हो रहा है प्रतीक्षा केवल दुर्बल करते हैं ना योद्धा केवल प्रयास करता है युद्ध आने को है कहीं ऐसा ना हो कि तुम प्रतीक्षा करते रह जाओ और शत्रु अपने प्रयास में सफल हो जाए अभी युद्ध के नियम निर्धारित नहीं हुए हैं किसे क्या कब कहां कौन सी अनहोनी हो [संगीत] जाए [संगीत] [संगीत] [संगीत] प्रण पात्र मदराज कौन है आप आपकी सेविका है आपकी यात्रा बहुत लंबी है आपकी सेवा के लिए आए हैं आपको आपकी गंतव्य स्थान तक पहुंचाने किसने आपको भेजा है वासुदेव वासुदेव वासुदेव को हमारा धन्यवाद क परंतु मुझे आज विल हो रहा है प्रणाम मराज क्या आप हम दोनों को दंड वर बनाना चाहते [संगीत] हैं और वैसे भी युद्ध प्रारंभ होने में अभी कुछ दिन शेष है मदराज कहीं आप यह तो नहीं मानते कि हम इतने सुंदर नहीं है क्या आप हमें आपकी सेवा का अवसर प्रदान कर सके मत्र राज युद्ध में में जाने से पहले आपकी थकान का शांत होना बहुत आवश्यक है तो क्या आप हमें यह अवसर प्रदान नहीं [संगीत] करेंगे सेवा का आनंद ले रहे हैं ना अवश्य मुझे आशा नहीं थी कि वासुदेव भी रसी एक स्वभाव के हैं महाराज आपका यह पात्र मदरा से रिक्त क्यों [संगीत] [संगीत] है महाराज हमसे क्या भूल हुई अभी तो आप युद्ध का आनंद उठाते रहे लेकिन हमें भी तो आप अपनी सेवा का लेने दीजिए प्रणिपात [संगीत] राज आशा करता हूं वासुदेव से अतिथि सत्कार में कोई त्रुटि ना रह गई हो नहीं नहीं वासुदेव यह तो मेरे जीवन का सबसे उत्तम सत्कार था मैं अति प्रसन्न हूं कि यह युद्ध मैं आपकी तरफ से लड़ रहा हूं और युद्ध के पश्चात मैं एक बार फिर से इज जत का लेना जाऊगा अवश्य ऐसा सत्कार मैं आपका एक बार क्या कई बार करवाऊंगी परंतु मैं आपसे आश्वासन नहीं मांग रहा हूं मैं आपसे वचन चाहता हूं कि इस युद्ध में आप पूर्ण बल से और पूर्ण मनोयोग से हमारी सहायता करेंगे करेंगे ना आप मदराज आपको मेरे आश्वासन पर संदेह है तो ठीक है मैं आपको वचन देता हूं कि जिसने मेरा ऐसा उत्तम सत्कार किया है मैं युद्ध के अंत तक उसके पक्ष से लडूंगा मैं आपको वचन देता हूं कि प्राण जाने तक मैं शल्य अपने की ओर से अपने शत्रु का नाश करूंगा उत्तम अति उत्तम धन्यवाद मदराज धन्यवाद धन्यवाद [संगीत] मदराज धन्यवाद मैं दुर्योधन कौरवों की सेना में आपका स्वागत करता हूं तुम तुमने सत्कार किया था मेरा झे भ्रम में रख के मुझसे वजन लिया चल किया है तुमने मेरे साथ चल किया है वासुदेव ने पांडवों के साथ चल ये वो छलिया वासुदेव नहीं है ये है मेरा मित्र उ एक [संगीत] वासुदेव य मामा श्री की सेना कौरवों के शिविर की और क्या कर रही है ये सोचने का नहीं बढ़ने का समय है मैं तुम सबको महाराज चल शांत हो जाएंगे शांत आपने तो वचन दिया है तो अब आपको कौरव की ओर से ही लड़ना होगा और युद्ध के नियमानुसार अपने ही पक्ष के योद्धा पर प्रहार नहीं करते मदराज तो आइए कौरो दल में आपका मैं शकुल महारथी शल्य का स्वागत करता तुम सबने छल किया है छल देख लूंगा तुम्हें सबको ये सब क्या [संगीत] हुआ पुत्र नकुल मैं मगद राज कदाचित हिचके जा रहे हैं आओ पांडव पुत्रों मिलो गौरव के नए सहयोगी से महारथी महाराज शल क्या मुझे क्षमा करें तुम्हारे मामा श्री के साथ बहुत बड़ा झल हुआ [संगीत] है मुझे भ्रम में रखकर वचन ले गया है मुझसे भ्रम से ही सही परंतु आप वचन के भार से बध है मदराज दुर्योधन तुमने हमारे साथ ल किया है मामा ने सबसे पहले हमें आश्वासन दिया था शांत विधर शांत पांडवों को आश्वासन मिला था परंतु कौरवों को वचन मिला है वि कोदर वचन और वचन वचन होता है उसे तोड़ा नहीं जा सकता परंतु यदि महाराज शैल वचन भंजक होने का कलंक अपने मस्तक पर लेना चाहते हैं तो वो य से जा सकते हैं परंतु युधिष्ठिर तुमने तो इस युद्ध को धर्म युद्ध का नाम दिया है तो क्या तुम अपने मामा का वचन भंग करने का अधर्म अपने मस्तक पर लेना चाहोगे बोलो युधिष्ठिर [संगीत] यह सब तुमने किया है पाखंडी सावधान सावधान अधिकार [संगीत] [संगीत] योयो

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