मेरा यह शक्तिशाली यज्ञ सभी मृत असरों को पुनर्जीवित कर देगा इसीलिए किसी भी प्रकार के भय या शंका का कोई स्थान नहीं है यहां भविष्य मेरी मुट्ठी में है क्योंकि इस यज्ञ के बाद संसार की सारी शक्ति झुक जाएगी मेरे समक्ष तुम्हें बस कार्तिकेय और उसके देवताओं को युद्ध में उलझा कर रखना है मेरे यज्ञ के संपन्न होने तक कोई बाधा नहीं आनी चाहिए यह सुनिश्चित करना है [प्रशंसा] तुम्हें स्वामी इस अनर्थ कारी युद्ध में एक और पुत्र को दिया आपने स्वामी अपनी आंखें खोलिए और देखिए क्या हो रहा है क्या होने वाला है और रोक लीजिए इस अनुचित युद्ध को रोक लीजिए इस विनाशकारी युद्ध को पूर्ण विश्वास है मुझे माता सुरास पर वो कुछ अनुचित नहीं होने देगी यथा माता तथा पुत्र माता संतान की प्रथम गुरु भी होती है संतान में वही गुण आते हैं जो माता उसे देती है अब होने को रह क्या गया है स्वामी तीन पुत्र खो चुके हैं विभूति और शी मुखन अपने एक मात्र पुत्र आदि मुखम की मृत्यु देख चुके हैं और इसका एक मात्र कारण माता सुरा सही ही है इसलिए मैं कह रही हूं युद्ध रोक लीजिए अन्यथा जो जीवित रह गए हैं वो भी आपकी माता के चरणों में मृत पड़े रहेंगे यदि यह यज्ञ संपन्न नहीं हो सका तो होगा अवश्य पूर्ण होगा मां का यज्ञ यह यज्ञ एक मात्र देवी शक्ति के वर्तमान अवतार रोक सकती है और वो भी तब जब दिन में रात का अंधकार हो जाए यह किस अवतार की बात कर रहा [संगीत] [प्रशंसा] है देवर से मुख जी अब आप ही इनको समझाइए कहिए ना उनसे कि वो ये विनाशकारी युद्ध रोक दे समझना मुझे नहीं इसे क्योंकि इसके पुत्र के जीवित होने की एकमात्र आशा मां का यज्ञ है माता सुरास के पुत्र के रूप में नहीं उनके लिए मातृ भक्ति के लिए नहीं तो आज अपने उस पुत्र के लिए ही युद्ध भूमि में उतरना जिनका निर्मम वत किया है उन देवताओं ने जिनका निर्मम वत किया है उन देवताओं ने अवश्य जेष्ठ मैं यह युद्ध अवश्य करूंगा सिमो प्रण लेता है भानु गोपन प्रण लेता है प्रण ये पिता कल का युद्ध अपने लिए नहीं अपने पुत्र के प्रतिशोध के लिए युद्ध का आरंभ करेगा कल जिस युद्ध का प्रारंभ होगा वो इस यज्ञ के संपन्न होने के बाद ही समाप्त [संगीत] होगा स तुम रण भूमि में आ तो गए हो न तो यहां से लौट नहीं पाओगे मूर्ख हो तुम भान कोपल स्वयं अपनी मृत्यु की ओ बढ़े आ रहे हो मुझ पर वार तो क्या मुझे स्पर्श भी नहीं कर सकोगे तुम मेरी मायावी शक्तियां मेरी सेना को सुरक्षित करेगी देवराज इद्र व्यर्थ है तुम्हारे सभी प्रहार व्यर्थ है यह दुष्ट आकाश में चले गए देवकन इन दुष्टों के इस मायावी अंधकार को भेदना होगा [संगीत] [हंसी] हमें इस मायावी अंधकार को अपना कवच बनाकर हमारी ऊर्जा से हम पर बार किया है इन दुष्टों ने [संगीत] यह अपनी माया का विष और उगले उसके पहले ही हमें इसे रोकना होगा भ्राता मेरा नाम ही मेरा परिचय है देवताओं भानु कोपन हूं मैं भानु अर्थात सूर्यदेव जिन्ह उचित पाठ पढ़ाया था मैंने आज जब तक तुम्हारे सूर्य देव आकाश में रहेंगे तब तक मुझे रोकने के तुम्हारे सभी प्रयास विफल होंगे भानु गमन का तो परिचय तुम्ह मिल ही गया अब अपना परिचय दो पहचानो वास्तविक भान गपन को वार करो मुझ पर [संगीत] वार का का का [संगीत] का ये काग हट क्यों नहीं रहे हैं कुछ कुछ दिखाई क्यों नहीं दे रहा कहीं आज कुछ अनिष्ट तो नहीं होने जा रहा देवताओ कहां गया तुम्हारा पराक्रम क्या हुआ तुम्हारे पल का सब धरा का धरा रह गया क्या था मुझे कुछ नहीं कर सकोगे तुम आज बल्ली ने तो मेरा पूजा स्थल तैयार भी कर दिया सब व्यवस्थित तो है ना मुझसे कोई भूल तो नहीं हुई ना आप पूजा आरंभ कीजिए और भी कुछ चाहिए तो मैं ले आऊंगी और उस समय में अपने पिता श्री की औषधि भी तैयार कर [संगीत] लूंगी [संगीत] इतने स्नेह से मेरा ध्यान रखने वाली मुझे पीड़ा नहीं पहुंचा सकती मेरे और मेरे स्वामी के बीच कदापि नहीं आ सकती तो क्या मैंने जो इस दर्पण में देखा था व मेरा भ्रम [संगीत] था क्या मुझसे छूट गया [संगीत] [संगीत] है सिंह मुख से पहले मैं भानु कोपन को रोकूंगा गणेश जिससे वो अपनी माया न उत्पन्न कर सके और उस अधि में तुम उसकी बची हुई माया को नष्ट करो जी [संगीत] भ्राता पुत्र मैं तुम्हें आकाश तत्व प्रदान करता हूं जयता जयता जय यता शक्ति रूप काटक देवा सेनाद श्वर शक्ति [प्रशंसा] स्वरा नाशी अविनाशी महा से न रूप अभिता दंड पाण शक्ति धरा सुख मण्यम [संगीत] [प्रशंसा] देवा सर्व भूता [संगीत] अवरा ये कैसा दिव्य और अदभुत रूप है इस बालक का इसका सामना कैसे करूं मैं आकाश भूत स्वरूप प्रभु कार्तिके की जय आकाश भूत स्वरूप प्रभु कार्तिके की जय आकाश भूत स्वरूप प्रभु कार्तिकेय की ज ना कोई माया ना तुम्हारा कोई रूप कोई नहीं रोक सकता मुझे क्योंकि मुझ पर वार तो तुम तब करोगे जब वास्तविक भानु कोपन को पहचानोगे अहंकार अति विश्वास को जन्म देता है और अति विश्वास विनाशकारी भूल करवाता है इसलिए पहचानना तो तुम्हें है भ्राता को उनके आकाश भूत रूप को जिसे तुम अह वश मात्र माया समझ रहे हो और जिस माया पर तुम्हें इतना अहंकार है वह [संगीत] [संगीत] देव सैनिको सचेत हो जाओ जैसे ही इस माया का नाश होगा हम असूर सेना पर फिर प्रहार कर [संगीत] सकेंगे जता जता जय उ शक्ति रूप का दे श्री श्वर देव देव [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] शरा आकाश भूत स्वरूप प्रभु कार्तिके की जय आकाश भूत स्वरूप प्रभु कार्तिके की [संगीत] जय सर्व भूता अनश्वरा जय भूता स्मा जय द जय जनल जय जय जय [संगीत] परमात्मा जय जय जयता शति रूप कार्तिक देवा सेनी योगेश्वर देव देव [संगीत] शव आ अनाद सर्व मुझे पुन माया का प्रयोग करना होगा अन्यथा अनर्थ हो जाए श स माया नहीं यह मेरा अस्त्र है बालक कैसे रोकोगे इसे तुम ल र शक्तिया महान सब प्रयुक्त है शक्तिया महान सब प्रयुक्त है आज के युद्ध में जय हो या पराजय अंतिम विजय तो मेरी ही होगी मेरे यज्ञ के संपन्न होने [संगीत] पर तुम सभी को यह एक अवसर दे रहा हूं मैं समर्पण कर दो और धर्म का पद स्वीकार कर लो मेरी सेना नि शस्त्र शत्रु पर वार नहीं करेगी इसीलिए इसे मेरी चेतावनी कम और सुझाव अधिक [संगीत] [संगीत] समझो वर है का के महावीर है का अब चुनाव तुम्ह करना है अधर्म का हट करोगे या धर्म का पालन यह अनुचित युद्ध करोगे अथवा धर्म के समक्ष घुटने टेक कर समर्पण और आज तुम्हारा चुनाव ही तुम्हारा भविष्य निर्धारित करेगा नहीं नहीं मेरे असुर सैनिक कदापि समर्पण नहीं कर सकते कदापि [संगीत] नहीं [संगीत] [संगीत] स [संगीत] [संगीत] [संगीत] विनाश काले विपरीत बुद्धि सत्य को जानकर भी जो अपने अहम में उसे स्वीकार नहीं करते वह स्वयं के विनाश को आमंत्रित करते [संगीत] हैंसर है हम घुटने टेकते नहीं शत्रुओं को घुटने टेकने पर विवश करते हैं सत्य सामने हो किंतु फिर भी कोई उसे स्वीकार ना करे तो उसका विनाश तो निश्चित है कन है किसी से कया तुमने हमें अवसर अवश्य दिया किंतु हम तुम्हें कोई अवसर नहीं देंगे अब तुम्हारे अंत के साथ इस युद्ध का अंत भी होगा है [संगीत] ू ससुर मैं और मेरे भ्राता तुम्ह प्रभु तक नहीं पहुंचने [संगीत] [संगीत] देंगे अब हमें कोई नहीं रोक सकता सता कोई नहीं देखा तुमने कैसे नष्ट हो गई तुम्हारी गदा [संगीत] अब तुम सभी का विनाश करूंगा मैं यह दुष्ट असुर बुद्धि की नहीं शस्त्रों की ही भाषा समझते [संगीत] हैं धर बस अब बहुत हो गया अब अंत करूंगा मैं तुम्हारा वीर बाहू महान सबया महान सब का खब से का से सत्य का असत्य से सत्य का असत्य से ति कहानी की तेरे युत है ति कहानी की तेरे ड़ नहीं दिवस नहीं मास नहीं पर नहीं युगों का बन रहा मान अभिमान क्या हैसन क्या है आज े देखो नरा लड़ रहे हैं सर मुबा सर यु [संगीत] है य [प्रशंसा] [संगीत] है [संगीत] प्रभु कार्तिकेय की जय प्रभु कार्तिकेय की जय प्रभु कार्तिकेय की जय रुकेगा ये जयकारा मेरा यज्ञ संपन्न होगा मेरी विजय [संगीत] होगी संपन्न होने को है मेरा यज्ञ जो मृत है वो भी जीवित हो उठेंगे वद मेरा नहीं तुम्हारा होगा हट जाओ मेरे मार्ग से प्रतिशोध लूंगा अपने पुत्र की हत्या का अंत करूंगा मैं तुम्हारा और तुम्हारी इस पूरी सेना का कितने भी गर कर लो मैं गिरंगा [संगीत] [प्रशंसा] नहीं हे मां शक्ति कृपा कीजिए मेरे प्रभु कार्तिक दुष्टों के विरुद्ध इस धर्म युद्ध में विजय हूं यह आशीष [संगीत] दीजिए बारबार इसकी निष्ठा इसकी भक्ति देखकर मेरे मन में शंका उठ जाती [संगीत] है [संगीत] गणेश जी ये ये दुष्ट तो देव सेनापति के प्रहार से सुरक्षित बच गया यदि ऐसा ही रहा तो इसका इसका अंत असंभव हो जाएगा देवराज सिहम मुख माया सुरा सई और ऋषि कश्यप का पुत्र है उसका वध करने के लिए प्रभु कार्तिकेय को अपना विराट देव सेनापति स्वरूप धारण करना होगा देव सेनापति प्रभु कार्तिकेय की जय देव सेनापति प्रभु कार्तिकेय की जय देव सेनापति प्रभु कार्तिकेय की [संगीत] जय ेश्वरा सर्वेश्वरा परब्रह्मा है स्वामीनाथ शीख पाना महासे स्वामी जय सरा नाथा श्री श्री पर ब्रह्मा असुर विनाशी अखंड श्री गुहा [प्रशंसा] शिवाम [संगीत] प्रच अहंकारी व्यक्ति सत्य को स्वीकार नहीं करता और स्वयं के विनाश का कारण बनता है
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