शिक्षा पूर्ण करके अब सारे शिष्यों का गुरुकुल से प्रस्थान करने का समय आ गया था मण चाहते थी अपने आचार्य को कुछ उपहार दी इसीलिए वह मधु और फल एकत्रित करने घने वन में चले गए हे माता प्रकृति हे महान वृक्षों कुछ मीठे फल प्रदान करने की कृपा [संगीत] कीजिए आप सभी को अनेकों [संगीत] [संगीत] धन्यवाद मण कंठा तुम तो गुरु दक्षिणा में भी सबसे आगे हो हा तुम्हारी पोटली और पात्र हम सभी से सबसे बड़ी [संगीत] है प्रणाम [संगीत] गुरुदेव गुरुदेव मेरी गुरु दक्षिणा स्वीकार करें और मुझे आदेश दीजिए कि गुरु दक्षिणा में मैं क्या प्रस्तुत [संगीत] करूं तुम इतना हट कर रहे हो तो मैं इन्हें स्वीकार करता हूं पुत्र मणि कंठा किंतु मुझे इससे अधिक गुरु दक्षिणा में और कुछ नहीं चाहिए क्योंकि तुम्हारे गुरु को सांसारिक सुख प्रदान करने वाली किसी वस्तु में कोई रुचि नहीं है गुरुदेव जैसे शिष्य को शिक्षा देना एक गुरु का धर्म है वैसे ही गुरु की हर आवश्यकता को पूर्ण करना एक शिष्य का आप मुझे बताइए गुरुदेव क्या कष्ट है आपको और कुछ नहीं पुत्र मणिकन तुम सभी की शिक्षा पूर्ण होते देख रह रहकर मेरे सामने मेरे पुत्र सर्वोत्तम का मुख आ जाता है मेरे लिए तो जीवन का सबसे बड़ा उपहार यही होता वह भी सामान्य बालकों की भाति शिक्षा प्राप्त कर पाता किंतु नियति के आगे सब विवश है इसलिए तुम्हें चिंता करने की आवश्यकता नहीं तुम मेरे सबसे प्रतिभाशाली शिष्य रहे हो इसलिए तुमसे यह गुरु दक्षिणा स्वीकार करता हूं और तुम्हें आशीर्वाद देता हूं कि तुम अपनी सभी इच्छाओं को को पूर्ण कर सको आपका बहुत-बहुत धन्यवाद [संगीत] गुरुदेव गुरुदेव सर्वोत्तम कहा है जब से हमारी परीक्षा समाप्त हुई है वह कहीं दिखाई नहीं दे रहा जब से उसे ज्ञात हुआ है कि तुम लौट रहे हो वो मुरझाया बैठा है कुटिया से बाहर निकलना ही नहीं [संगीत] गुरुदेव एक बार जाने के पूर्व मैं उससे अवश्य मिलना चाहता [संगीत] हूं प्रणाम गुरुदेव सर्वोत्तम सर्वोत्तम सर्वोत्तम कितनी देर से तुम्हारा नाम पुकार रहा हूं तुम बाहर क्यों नहीं आ रहे हो बोलो उत्तर [संगीत] दो बहुत बोल सकते हो तुम बस तुम्हें उचित प्रकार से प्रयास करने की देर है तुम्हें स्मरण है गुरुदेव ने हमें एकाग्रता का पाठ सिखाया था गुरुदेव ने कहा था कि ओम का स्वर वहां भी ऊर्जा जागृत कर सकता है जहां कुछ भी ना हो बस तुम पूरी निष्ठा और एकाग्रता के साथ प्रयास करो [संगीत] ओ मेरा विश्वास करो और ओम बोलने का प्रयास करो इसमें अपार शक्ति [संगीत] है बस तुम अभी बोलने ही वाले हो [संगीत] बोलो पेड़ की ऊंची हिलती हुई टहनी पर बैठे पंछी जो होते हैं ना वो कभी नहीं डरती पता है क्यों क्योंकि उसे स्वयं पर विश्वास होता है और अपने पंखों पर तुम्हें स्वयं पर और तुम्हारे स्वर पर दोनों पर विश्वास करना होगा यह तुम्हें शक्ति देगा पूर्ण विश्वास के साथ एक बार फिर से कहो ओ बस तुम बोलने ही वाले हो एक बार पुनः विश्वास के साथ [प्रशंसा] कहो ओ अति उत्तम एक बार पुन कहो [संगीत] [प्रशंसा] ओ अब कहो ओम हरि ओम अ रि ओम हरि आप कहो ओम हरा ओम ह रा ओम हर रा ओम हरा ओम हरा ओम हरा ओम हरा ओम हरा अब बोलो ओम हरि हरा ओम हरि हरा ओम हरि हरा ओम हरि [संगीत] हरा आपने जो उपहार दिया उसके लिए धन्यवाद धन्यवाद प्रभु धन्यवाद धन्यवाद भी कह रहे हो वो भी बिना मुझे देखे इसमें कैसा आनंद प्रभु मैं कैसे देखू मैं देख नहीं सकता असत्य सर्वता असत्य है य मैं अभी बोलना सीखा आपके कारण आपसे असत्य कैसे कहूंगा इतने वर्षों से जब मैं शिक्षा प्राप्त कर रहा था तुम्हारे नेत्र एक तक मुझे ही देखते थे आपके दर्शन चाहता था आपके समान ज्ञानी बनना था ना तो पुनः प्रयास करो मैंने कहा था ना स्वयं पर भरोसा यही है सफलता की कुंजी प्रभु आप सामने पर दिखाई नहीं देते तुम्हें पूर्ण विश्वास [प्रशंसा] [संगीत] है स्वामी अपा [संगीत] स्वामी नमाम स्वामी अपा हरि हरा स्वरूपा स्वामी आराध आराध स्वा अया अपा अपा [प्रशंसा] [संगीत] अया अ अ इसने तो मुझे भीतर से झक छोड़ दिया है कहां से आ रहा है ईश्वर क्या हुआ महारानी महि अयप्पा अपा अयपा किंतु मां प्रभु को देखकर सर्वोत्तम के मुख से अयप्पा क्यों निकला जबकि उन्हें ज्ञात था कि प्रभु का नाम मण कंठा है क्योंकि जब उसे दृष्टि प्राप्त हुई तो उसने सर्वप्रथम प्रभु विष्णु को देखा और उसने उन्हें अया पुकारा और फिर उसकी दृष्टि प्रभु शिद पर पड़ी और फिर उसने अप्पा अर्थात जगत पिता महादेव को पुकारा और फिर व अति उत्साहित होकर प्रभु को इसी नाम से पुकारने लगा अपा अपा [संगीत] अपा धन्यवाद प्रभु पानी के लिए दृष्टि के लिए आप अया अर्थात हरि और अप्पा हरा के अंश है यह मैं समझ चुका हूं आपको अनेको धन्यवाद [संगीत] प्रभु हरि हरा स्वरूपा स्वामी अयप्पा आराध आराध्या स्वामी अपा नमाम नमाम स्वामी लोक महाज स्वामी लोकवीर महापूज्यम सर्व रक्ष करम विभ लोकवीर महापूज्यम सर्व रक्षक विभ लोकवीर महापूज्यम सर्व रक्षक विभ लोकवीर महापूज्यम सर्वर रक्ष करम विभ लोकवीर महापूज्यम [संगीत] सक्षक [संगीत] [संगीत] लोकम महापूज्यम सर्व रक्षम नमाम नमाम स्वामी अ लोक वरम महापूज्यम सर्व रक्ष करम [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] विभ [संगीत] स्वामी शरणम [संगीत] [संगीत] यापा [संगीत] कल्याण हो [संगीत] मित्र पिताजी पुत्र सर्वोत्तम [संगीत] पिताजी ये मेरे प्रभु है अयप्पा अयप्पा अपा अयप्पा ये अत्यंत महान है दयावान है हां पुत्र प्रभु अयप्पा जो नारायण भी है और शिव [संगीत] भी प्रभु अयपा की जय प्रभु अयपा की जय प्रभु अयपा की जय प्रभु आ की जयम की मेरे लिए किसी महा संकट की चेतावनी है महारानी प्रभु अपा की जय प्रभु अप्पा की जय प्रभु अपा की जय प्रभु अपा की नहीं नहीं नहीं नहीं ये ये मुझे आद नहीं कर सकते नहीं नहीं नहीं [संगीत] यह अवश्य उन देवताओं का ही कोई छल है मुझे भह भीत करेंगे महा असुरी महिषी को कदा भी नहीं [हंसी] यह स्वर्ग मेरा है और मेरा ही रहेगा महासुर महिषी का और अपने इस ल का दंड देवता भुग देंगे ऐसा कठोर दंड दूंगी उन्हें कि सच उन्हें उगलना ही होगा नारायण नारायण इस दुष्ट को आभास तो हो गया है कि इसका समय अब निकट है इसके पापों की गागर भरने पर जो इसका वध करने आए हैं वह संपूर्ण रूप से तैयार है अर्थात नियति ने जो नियत किया है वो होकर रहेगा नारायण नारायण मैं तुम्हारी भक्ति से अत्यंत प्रसन्न हूं मित्र मैं तुम्हें वचन देता हूं आज से मुझे उसी नाम से जाना जाएगा जो तुमने मुझे दिया [संगीत] है अयप्पा [संगीत] अयप्पा कोई भी गुरु आपके जैसा शिष्य पाकर धन्य हो जाए इससे बड़ी गुरु दक्षिणा भला और क्या हो सकती है गुरुदेव मैं मण कंठा आज यदि अयप्पा हूं तो आपके और आपकी शिक्षा का ही फल है अब अपने शिष्य को जाने की अनुमति दीजिए गुरुदेव प्रभु इतना महान कार्य उसका श्रेय ना लेना यह आपकी दिव्यता ही तो है मैं स्वयं आपको आपके राज भवन लेकर [संगीत] जाऊंगा राजकुमार मण कंठा की जय राजकुमार मण कंठा की जय राजकुमार मण कंठा की जय राजकुमार मण कंठा की जय राजकुमार मण कंठा की जय राजकुमार मण कंठा की जय राजकुमार मण कंठा की जय राजकुमार मण कंठा की जय राजकुमार मण कंठा की जय राजकुमार मण कंठा की जय राजकुमार मण कंठा की जय राजकुमार मण कंठा की जय राजकुमार मण कंठा की जय राजकुमार मण कंठा की जय राजकुमार मण कंठा की जय राजकुमार मण कंठा की जय राजकुमार मण कंठा की जय राजकुमार मण कंठा की जय राजकुमार मण कंठा की जय कुमारप्पा की जय राजकुमार अपप्पा की जय राजकुमार अपप्पा की जय राजकुमार अपप्पा की जय राजकुमार अपप्पा की जय राजकुमार अपा की जय की राजकुमार अपा की राजकुमार अपा की राजकुमार अपा की राजकुमार अपा की राजकुमार अपा की राजकुमार अपा की राजकुमार अपा की राजपा की अब आप इन्ह मण कंठा नहीं अयप्पा पुकार अपा गुरुदेव आपने सर्वथा उचित ही कहा था महाराज आपके पुत्र हरि हरा के ही प्रसाद है उनके अंश हैं और उनकी दिव्यता से ही इन्होंने मेरे पुत्र को वाणी और दृष्टि प्रदान की है इसलिए इनका नाम अयप्पा पड़ा है राजकुमार अयप्पा की जय राजकुमार अपप्पा की जय प्रणाम की जय राजकुमार अपप्पा की जय राजकुमार अप्पा की जय राजकुमार अपप्पा की जय राजकुमार अपप्पा की जय राजकुमार अपप्पा की जय राजकुमार अप्पा की प्रणाम माता राजकुमार अप्पा की जय राजकुमार अप्पा की जय राजकुमार अप्पा की जय राजकुमार अप्पा की जय राजकुमार अप्पा कीय लो अब तो ये हरी हरा का अंश भी घोषित हो गया अब इसे यहां से कैसे दूर करूं [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] की भैया अनुज यह क्या जब से बड़े राजकुमार मण कंठ आए हैं छोटे राजकुमार राजराजन को तो कोई देख ही नहीं रहा है अरे इन पर भी तनिक ध्यान दीजिए यह भी इस परिवार का भाग है अनुज मेरे [संगीत] अनुज मेरे अनुज मेरे [संगीत] भ्राता [संगीत] मिल लो जितना गले मिलना है मिल लो आलिंगन भी कर लो लेकिन अब इस परिवार में कोई एक दूसरे के गले नहीं मिलेगा ये मैं सुनिश्चित करूंगा मैं सच्चे ज्ञान का प्रकाश ना केवल व्यक्ति की अत आत्मा को प्रकाशित करता है बल्कि उसके संपर्क में आने वालों को भी प्रकाशित कर देता है
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti
[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...
-
[संगीत] महाभारत प्रता श्री आपने सु शर्मा को ऐसा वचन क्यों दिया मेरे वचन पालन करने का तो प्रश्न ही नहीं उठता अनुज तुम क्या समझते हो कि स...
-
महाभारत इच्छा है तुम्हारी बस इसने तो एक ही रट लगा रखी है केशव इसे तो आपको गुरु बनाना है वस इस देश में गुरुजनों की क्या कमी है तुम हमें ह...
-
[संगीत] किंतु मेरे परिवार पर से किस पर संकट आने वाला है ऋषिवर बताइए ना ऋषिवर संकट किस पर होगा यह सोचने के स्थान पर तुम्हें यह सोचना चाहि...
No comments:
Post a Comment