गुरु जी के यह बताने पर भी कि प्रभु मण कंठा अर्थात प्रभु अयप्पा साधारण नहीं असाधारण है दिव्य है तब भी महामंत्री रुका नहीं प्रभु के माता-पिता भी यह भूल गए थे कि वह दिव्य व्यक्तित्व है किंतु अंतर यह था कि अपने संतान के प्रति मां की ममता अत्यंत प्रबल थी और वहीं दूसरी ओर वह महामंत्री अपनी दुष्टता के कारण उनकी दिव्यता देख पाने में असमर्थ था क्योंकि वह तो अंधकार में ही डूबा था और उसी अंधकार से रानी के मन को भी अंधकार में डुबाना चाहता था लीजिए पिता श्री मैं पूजा के लिए पुष्प ले आया रुको पुत्र क्या हुआ पिता श्री आप इसे स्वीकार क्यों नहीं कर रहे स्वामी आप इसके हाथों से प्रभु हरिहरा के पूजा के पुष्प क्यों नहीं ले रहे हैं पिता श्री [संगीत] जेष्ठ होने के कारण इस पर पहला अधिकार मनीक ढा का [संगीत] है जब से बड़े राजकुमार मणिकन आए हैं छोटे राजकुमार राजराजन को तो कोई देख ही नहीं रहा है अरे इन पर भी तनिक ध्यान दीजिए यह भी इस परिवार का भाग है अब समय आ गया है मेरे सफल होने का बस अग्नि में तनिक कृत डालने की आवश्यकता है तो इसमें समस्या क्या है मां पिता श्री मेरी सामग्री का उपयोग करेंगे और हम दोनों तुम्हारी सामग्री से पूजा [संगीत] करेंगे ओ हरि हराय नमः ओ हरि ह कंदराय कर गौरी उमा स्वामी शरणम ओम स्वामी शरणम महामंत्री परिवार में व मनस्य उत्पन्न करने का प्रयास करता किंतु मण कंठा का नैसर्गिक प्रेम मंत्री के इस स्वार्थ पूर्ण वमस को श में ही मिटा देता यह मेरे कार्य को कठिन बना रहा है कैसे कैसे दूर करो इस कंठ [संगीत] को भैया मैं भी आपके साथ [संगीत] चलू [संगीत] चलिए यह भी उचित ही है महारानी छोटे भाई को तो बड़े भाई की परचा ही बनकर रहना होता है अब आपका पुत्र भी जीवन भर यही करेगा क्षमा करें महारानी आपका शुभ चिंतक हूं इसीलिए कटु सत्य कहता हूं आपने देखा महारानी महाराज ने क्या किया मुझे तो बहुत बुरा लगा क्या आपको बरा नहीं लगा आपके सामने आपके पुत्र का तिरस्कार मंत्री वर क्षमा करें महारानी आपका अपना पुत्र आपका अपना रक्त जिसे आपने स्वयं जन्म दिया है आज उसका अधिकार छीनकर किसी अन्य को दे दिया गया धीरे-धीरे उसके सारे अधिकार छीनकर उसे दे दिए जाएंगे महारानी जिसे यहां होना ही नहीं चाहिए था मंत्री व अपनी सीमा में रहिए जेष्ठ को उसका अधिकार मिलना ही चाहिए और महाराज ने कुछ अनुचित नहीं किया कल वही सिंहासन की शोभा बढ़ाएगा इसलिए मेरे हृदय को दूषित करने के स्थान पर उसके लिए निष्ठा अपनाए क्योंकि समय आने पर आपको उसकी ही सेवा करनी होगी महारानी क्षमा प्रार्थी हूं महारानी परंतु मणिकन जिसे मात्र आपने गोद लिया है उसे सारे अधिकार प्राप्त है और आपका अपना पुत्र राजराजन जो आपका अपना रक्त है उसे कोई अधिकार प्राप्त नहीं बस इसी चिंता में हूं मैं महारानी व्यर्थ है आपकी चिंता महाराज ने मण कंठा को और उसने अपने अनुज को उपयुक्त अधिकार दिए हैं और न्याय इस राजवंश की परंपरा है मुझे कोई चिंता नहीं महारानी य जेष्ठ और अनुज का स्नेह कब तक रहेगा और क्या आप इस स्नेह को सदा के लिए सुनिश्चित कर सकती क्या आप यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि उनकी संतानों में भी ऐसा ही नहीं रहेगा नहीं ना यदि उन्होंने विरोध किया तो आपका एक मां का हृदय यह कैसे स्वीकार करेगा कि एक के कारण दूसरे का अधिकार छीन लिया जाए नहीं ना महारानी शुद्ध हृदय के माता पिता की संतान का भी हृदय शुद्ध हो यह आवश्यक नहीं यदि राजकुमार मणिकन की संतानों में दुष्टता हुई तो दुर्भाग्यवश तब हम में से कोई भी जीवित नहीं रहेगा परंतु महारानी हमें उसके लिए अभी से सजग रहना होगा क्योंकि सत्ता का लो व्यक्ति से कुछ भी करा सकता है महारानी यदि मण कंठा की संतानों ने राज राजन और उनकी संतानों का वध कर दिया तो इसलिए महारानी अब राज राजन के अधिकारों की रक्षा आपके हाथ में है जब से बड़े राजकुमार मण कंठा आए हैं छोटे राजकुमार राजराजन को तो कोई देख ही नहीं रहा है जेष्ठ होने के कारण इस पर पहला अधिकार मली कठा का है किंतु मैं क्या कर सकती हूं कटीला पौदा झाड़ बने उससे पहले उसे जड़ से काट देना चाहिए महारानी इससे पहले कि मण कंठा या उसकी होने वाली संताने संकट बने उसे समाप्त कर देना ही उचित होगा और इसका एक ही उपाय है मण कंठा का मण कंठा काण कंठा कां का यह क्या कह रहे हैं आप य मैं कैसे कर सकती हूं आपको कहां कुछ करना है मारानी आप केवल आदेश दीजिए मैं ऐसा उपाय करूंगा कि यह अयप्पा स्वयं को अपने आप अपने अंत की ओर ले जाएगा इतना महंगा सुझाव यह महामंत्री कितना क्रूर है ना और अनुचित कर्म है है ना धर्म के अनुसार यह तो हत्या तुल्य अधर्म है जो परिवार को तोड़ने का प्रयास करता है या जो अपने स्नेही जनों को दूर करने का प्रयास करता है व तो हत्या के समान पाप करता है और जहां एक और उस दुष्ट मंत्री ने एक मां की ममता का लाभ उठाकर उसके मन में अपनी ही संतान के प्रति विष खोलने का प्रयास किया वही दूसरी ओर अब मैं तुम्ह एक अंतिम अवसर दे रही हूं मुझे अपनी पूरी योजना बता दो अन्यथा मैं तुम्ह इतना कष्ट दूंगी कि सह नहीं सकोगे तुम सब हमें कितने भी कष्ट क्यों ना झेलने पड़े कोई इसे कुछ नहीं बताएगा शांत रहोगे तो और कष्ट स होगे क्योंकि अब मैं तुम्हारे विरुद्ध तुम्हारी ही शक्तियों का उपयोग करूंगी दरी तुम कुछ भी क्यों ना कर लो तुम हमसे कुछ भी ज्ञात नहीं कर पाओगी कुछ भी नहीं [संगीत] [संगीत] आ नारायण नारायण अब देवताओं को अधिक कष्ट सहने की आवश्यकता नहीं है समय आ गया है कि महिषी को सत्य बताया [संगीत] जाए अब समय आ गया है मेरा [संगीत] समय ओम नमस्ते देवेश सुरा सुर नमस्कृत्य भूत भव्य महादेवाय हरित पिंगल लोच श्री मा [संगीत] का है बड़ा विचित्र है इतने वर्षों में आज प्रथम बार है जब पूजा का समय हुआ है और वो यहां नहीं है तुम से शीघ्र जाओ और उन्हें यहां लेकर आओ महाराज महाराज प्रणाम महाराज महाराज महारानी की अवस्था जय हरि हरा आ [संगीत] स्वामी क्या हुआ महारानी आप कुशल तो है ना बहुत पीड़ा हो रही है स्वामी कुछ कीजिए आप चिंता मत कीजिए मां राजवत कहां है कोई शीघ्र जाकर उन्हे बुलाकर लेकर आए महाराज राज वैद तो राज्य में ही नहीं है किंतु महामंत्री किसी अन्य वैद को ला रहे हैं जो औषधियों के महा ज्ञानी है महामंत्री जी क्षमा कीजिए महाराज की दृष्टि अत्यंत तीक्षण है यदि उन्होंने मुझे पहचान लिया तो आप चिंता मत करो जब किसी अपने को पीड़ा होती है तो उसके परिवार वाले अपनी सुध बुध खो बैठते हैं राजा और मण कंठा की भी यही स्थिति है इसलिए तुम्हारे वैद होने के इस स्वांग को कोई नहीं पकड़ पाएगा बस तुम अपना कार्य अच्छे से करना और इसके लिए तुम्हें उचित मूल्य भी प्राप्त हो रहा है ना चलो आओ मेरे साथ आओ आइए आइए वद जी शीघ्रता कीजिए आइए देखिए प्रणाम महाराज आइए भोजन में तो ऐसा कुछ ग्रहण नहीं कर लिया था आपने जिसके कारण पीड़ा हो रही है नहीं [संगीत] महाराज क्या हुआ ब जी महारानी पेट के गंभीर रोग से ग्रसित है इससे उनके प्राण भी जा सकते हैं कोई तो उपाय होगा उपाय है महाराज किंतु अत्यंत कठिन है आप मेरी कठिनाई की चिंता छोड़िए वैद जी मैं महारानी के प्राणों के लिए कुछ भी कर सकता हूं तो सुनिए महाराज इस रोग के लिए इन्ह बागन का दुख चाहिए जो स्वयं शांति से प्रदान करते महाराज जिसके लिए उसे कोई रना ना दी जाए बंदी ना बनाया जाए और ना ही उसे आहत किया जाए तभी यह उपचार फलित होगा महाराज [संगीत] वैद जी आप यह क्या कह रहे हैं यह कार्य इतना आसान नहीं है बाघिन का दूध लेकर आना इसमें प्राणों के लिए संकट हो सकता है नहीं नहीं वे जी आप कोई दूसरा उपचार बताइए मैं स्वयं जाऊंगा और मैं शीघ्र ही लौट कर आऊंगा महाराज आप नहीं जा सकते महारानी को आपकी बहुत आवश्यकता है आप आप आप मुझे आज्ञा दीजिए मैं जाऊंगा मैं अपने प्राणों को संकट में डाल दूंगा इसकी कोई आवश्यकता नहीं कोई आवश्यकता नहीं मैं जाऊंगा पिताश्री मुझे अनुमति दीजिए जेष्ठ पुत्र होने के नाते यह मेरा कर्तव्य भी है और अधिकार भी मुझ में य संकट उठाने का कौशल भी [संगीत] है हमें मेरे बारे में नहीं मा की चिंता करनी है आप निश्चिंत रहिए श्र ही बान के दध के साथ लौटूंगा [संगीत] नारायण नारायण देष और अधिक कितने समय तक इस कष्ट के भागी बनेंगे आप समय आ गया है महेशी को अपने सत्य से उजागर किया जाए नहीं देवऋषि हमें कितनी भी प्रताना क्यों ना सहनी पड़े हम हम उस ससुरी को कुछ नहीं बताएंगे सत्य कैसा सत्य देव श नारद रुकिए मत देवर्ष बताइए मुझे किस सत्य की बात कर रहे हैं आप नहीं देवऋषि देवऋषि कुछ मत बताना तुम्हारे काल स्वामी [संगीत] अपा स्वामी शरणप्पा हरि हर सुने शरणप्पा आपद बांधने शरणम महिषी के कर्मों का फल अब उसे मिलने वाला था क्योंकि नियति उसे प्रभु अयप्पा के सामने लाने की योजना बना चुकी थी जहां एक और स्वामी अयप्पा वन जाने के लिए तैयार थ और वही दूसरी ओर महा असुरी महिषी प्रभु स्वामी अयप्पा के बारे में जान चुकी थी महेशी अब निकट आ गया है तुम्हारा अंत देवताओं के कष्ट भंजन स्वामी अयप्पा शीघ्र आ रहे हैं तुम्हारा काल बनकर नहीं यह कैसे वचन कह रहे हैं आप देवर्ष क्या आपको मेरे वरदान के बारे में जत नहीं अमर तुल्य है मेरा वरदान अमर तुल्य नारायण नारायण प्रभु कृपा से नारद तो किसी के बारे में वह भी जानता है जो व्यक्ति स्वयं अपने बारे में नहीं जानता ज्ञात है मुझे तुम्हें प्राप्त हुआ वरदान महेशी एकमात्र महादेव और नारायण के पुत्र के हाथों ही तुम्हारी मृत्यु संभव है क्यों सत्य कहा ना मैंने एक और सत्य जान लो महिष मण कंठा स्वामी अयप्पा मोहिनी रूपी नारायण और कामेश्वर रूपी महादेव के पुत्र है ओ स्वामी शरण मैपा ये ये कदा भी उचित नहीं है अन्याय है ये अन्याय छल है ये तुम सभी देवताओं का छल है मेरे साथ नहीं महेशी नहीं ना तो यह छल है और ना ही अन्याय है ये न्याय है न्याय छल अन्याय और अत्याचार तो तुम आसुरी शक्तियों का स्वभाव है ब्रह्मदेव से छल करके वरदान प्राप्त किया है तुमने देवताओं और ऋषियों मुनियों के साथ अन्याय और अत्याचार किया है तुमने किंतु अब अब मेरी वक्र दृष्टि पड़ेगी तुम पर जिससे तुम्हें तुम्हारे दुष्कर्म का परिणाम मिलकर रहेगा प्रभ अपा तुम्ह तुम्हारे दुष्कर्म का उचित दंड अवस से देंगे म अवश्य देंगे [संगीत] [संगीत] ना मुझ पर तुम्हारी दृष्टि पड़ेगी ना उसका प्रभाव होगा [संगीत] शनिदेव [संगीत] शरीद मसी मेरी दृष्टि भले ही तुम तक ना पहुंची हो तब भी समय आने पर प्रभु अपा के हाथों अपने कर्मों का फल भोगने के लिए तैयार रहना नहीं शनिदेव ने वो नहीं मैं बनूंगी उसका काल वध करूंगी उसका देव नारद बताइए मुझे कैसा दिखाई देता है वो कहा मिलेगा वो मुझे वो कैसे दिखाई देते हैं कैसे दिखाई देते हैं स्वा जिनका जन्म महादेव और नारायण के अंश से हुआ हो उनका वर्णन अवनीय है जिनके जन्म से ही उनके कंठ में बस कर दिव्य मणि स्वयं अपनी शोभा बढ़ाता है उनके जैसा तेजस्वी कदाचित ही कोई और होगा मण कंठा स्वामी अयप्पा तो अनेकों मणियों से भी अधिक तेजस्वी है नमाम नमामि स्वामी अयप्पा हरि हरा स् स्वामी प्रभु नारायण के अलौकिक और मनमोहक मुस्कान है उनके अधर पर और प्रभु हरा शिव के समान दिव्य नेत्र जिनम हरी और हरा दोनों की छवि के दर्शन होते हैं उन्ह देखकर कोई भी मंत्र मुग हो जाता बहुत सुन चुकी मैं उसकी प्रशंसा अब उसे ढूंढ कर उसका काल बनूंगी [संगीत] मैं [संगीत] कोई व्यक्ति कितना भी सज्जन क्यों ना हो बुरी संगति उसके स्वभाव में कुटिलता ला ही देती है
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