Friday, 2 January 2026

युद्ध में गणेश जी ने भानुकोपन को क्या समझाया था Uzair Vighnaharta Ganesh Episode 698 PenBhakti

श्री सेनानी कार्तिके प्रभु की जय श्री सेनानी कार्तिके प्रभु की जय श्री सेनानी कार्तिके प्रभु की जय श्री सेनानी कार्तिके प्रभु की जय श्री सेनानी कार्तिक प्रभु की जय शक्ति रूप कार्तिक देवा सेनानी योगेश्वर देव देव शक्ति स्वरा दंड पाण शक्ति धरा ताक देवा नि शस्त्र हो गए तुम रानियन नि शस्त्र इसके पास जो भी शक्ति है उससे हमें मुक्ति पानी ही होगी इसके आघा की पीड़ा से भी अधिक असैन मेरा यह अपमान है भ्राता कार्तिके आज से आपके श्री सेनानी स्वरूप की जो भी सच्चे मन से आराधना करेगा वह किसी भी संकट को भेदने में सफल होगा क्योंकि उसका सेनापति बन उसकी रक्षा स्वयं प्रभु [संगीत] करेंगे ओम श्री सेनानी नमह सेनी [संगीत] नम एक बालक हमें रोक दे और जय जयकार से संपूर्ण युद्ध भूमि गूंज उठे नहीं यह कताप उचित नहीं [संगीत] है ल केसरी वसरी भता [संगीत] भता मेरे ता की दर का अवश्य मिलेगा तु भैया भानु कोपन इनसे मेरा प्रतिशोध आपको लेना ही होगा क्योंकि अब मैं अपना लज्जित मुख किसी को दिखा नहीं सकता ना पिता श्री को नाराज माता सुरा सई को जल समाधि लेने के सिवा है अब मेरे पास और कोई विकल्प नहीं छोड़ा इन देवताओ ने ऐसा मत करना बता उचित कहा तुमने क्योंकि तुम मुख दिखाने के लिए जीवित ही नहीं [संगीत] रहोगे मेरा अपमान ही मेरी मृत्यु है और मरे हुए को कोई कैसे मार सकता है य अस्त्र मुझ तक पहुंचे उससे पहले मैं ही जल समाधि में लीन हो जाऊंगा भैया भानु कोप इनसे मेरी पराजय का प्रतिशोध आप अवश्य [संगीत] [संगीत] लीजिएगा [संगीत] रानिया मेरा पुत्र [संगीत] [संगीत] ईरानियन जाओ जाओ यहां से ये महेंद्रपुरी में प्रवेश का मार्ग है आप यहीं रुकिए हम आगे जाकर द्वारपालों का ध्यान भटका कर आते हैं आप यही रुकिए भानू कोपन के कोप को बढ़ा दिया है तुमने अब मेरे कोप से बचना असंभव है अपने भाई का प्रतिशोध लूंगा मैं तुम सबको नष्ट कर दूंगा वध करूंगा तुम [संगीत] [संगीत] सबका श्री सेनानी के वार से कोई अस्त्र सुरक्षित रह जाए यह कैसे संभव है फिर इसका अस्त्र पुनः कैसे गठित हो रहा है ओ तो यह मात्र मायावी अस्त्र है वास्तविक अस्त्र तो इसके पीछे बंधा है जब तक यह अपने मायावी अस्त्र की शक्ति का प्रयोग करेगा इस युद्ध का अंत नहीं होगा इसकी तो तब होगी जब इसका वास्तविक अस्त्र नष्ट [संगीत] होगा मूर्ख असुर इतना बड़ा चमत्कार देखा तुमने फिर भी इस भ्रम में हो कि एक मायावी अस्त्र की सहायता से अपने भ्राता का प्रतिशोध ले सकोगे मायावी अस्त्र से तो अपना वास्तविक महास्त्र भी प्रयोग करोगे तो भी प्रभु श्री कार्तिकेय को कोई हानि नहीं पहुंचा सकोगे और हानि तो क्या उनका स्पर्श करने का सामर्थ्य भी कहां है तुम में सूर्यास्त होने वाला है आज के युद्ध के अंत के पूर्व हमारी विजय होनी [संगीत] चाहिए पुत्र भानु कोप संयम रखोगे तो ही विजय होगे देखो कार्तिकेय और उसके योद्धा आज तक संयम से ही विजय होते आ रहे हैं वही तुम्हें भी करना [संगीत] है [संगीत] [प्रशंसा] भ्राता जब इसने अपना वास्तविक अस्त्र उठा ही लिया है तो फिर यह लौट क्यों रहा है और अभी तो सूर्यास्त में भी कुछ समय शेष है कदाचित यह भय बत हो चुका है तभी अपने पिता सुरा पद्मन और भ्राता ईरानियन के भाति युद्ध स्थल से पलायन कर रहा है मायावी महास्त्र है इसके पास उसका प्रहार करने के स्थान पर यह कायरो के समान पलट क्यों रहा [संगीत] [संगीत] है [संगीत] आ [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] [संगीत] मी [संगीत] वहां अब चारों ओर कमल पुष्प भी क्यों खिल उठे हैं [संगीत] भानु कोपन के हदय विदारक चित्कार के बाद अब ये स्तब शांति क्यों है क्या हो रहा है वहां मैं मैं बहुत विचलित हूं वहां जो भी हो रहा है अच्छा ही हो रहा है दीदी अजा मुखी दीदी अजा मुखी आप यहां आप कुशल तो है ना कुशल क्यों ना होंगी मैं मैं वहां हूं जहां सर्वाधिक बलशाली योद्धा है किंतु मेरे पुत्र उनका क्या हम तो उन्हें यहां से देख भी नहीं पा रहे हैं [संगीत] चिंता मत कीजिए मैं आप दोनों को यहां से लेने आई हूं आपके पिताजी महेंद्रपुरी के पीछे के द्वार पर आप दोनों की प्रतीक्षा कर रहे हैं चलिए मेरे [संगीत] साथ आपके साथ चलकर हम प्रभु कार्तिके से हमारे पुत्रों की जीवन की भिक्षा तो मांग सकते हैं माता सुरा सई की क्रूरता के कारण मैं तो उसके अंत समय में अपने पुत्र से भेट तक ना कर सकी तो अब विलम मत कीजिए चलिए मेरे साथ माता सुरसे से कुछ नहीं छिपता इसलिए वह अवश्य हमें रोकने का कोई उपाय करेंगी उसमें उलझे तो हम यही रहने पर विवश हो जाएंगे [संगीत] प्रभु मुझे ना अपने आप पर संशय है और ना आप पर अपने मन को शांत रखने के लिए मैं चाहती हूं कि आपके दर्शन आपकी पत्नी के साथ ही हो [संगीत] तोरे नैना मोरे नैना दोनों के है एक [संगीत] नैना हो तोरे नैना मोर नैना दोनों के है एक नैना तोरे नैना मोरे नैना दोनों के है एक [संगीत] [संगीत] नैना [प्रशंसा] शी वन कन्या मल्ली मेरे स्वामी के साथ क्या हो गया ऐसा क्या देख लिया इस दर्पण में कि आपके मुख का रंग ही उड़ गया [संगीत] है देव सेना ने जो दृश्य देखा उससे वो स्तब निराश है और उसकी यह निराशा देवताओं की सेना को भी प्रभावित कर सकती [संगीत] [संगीत] [संगीत] है [संगीत] [संगीत] वीर बाहू जी देव सैनिकों सावधान रहिए यह दृश्य जैसा लुभावना दिख रहा है वैसा है नहीं आओ आओ निओ ही सया मा है खो जाओ जाओ माया है सब नवी जगत में खो जाओ नवीन सब माया है जाओ माया है सो रहे हो तुम मैं ही सत्य ो रहे हो तुम मुझ में सो जाओ तुम मुझ में इस नवीन च हो जाओ सो जाओ जगत सो रहे हो तुम नवीन जगत [संगीत] में राता यह कैसा सोहन है जिससे खींचे ये सभी इन कमल पुष्पों की ओर बढ़े जा रहे [संगीत] हैं [संगीत] अब तो अमोग महास्त्र ही एकमात्र उपाय [संगीत] [संगीत] [संगीत] है [संगीत] ह [संगीत] नहीं नहीं ऐसा नहीं हो सकता कदापि नहीं हो सकता [संगीत] [संगीत] आ र स सेना देवसेना ये लीजिए मेरा हाथ पकड़ देव सेना मैं आपको ऊपर खीच लूंगी देखा तुमने देखा तुम्हारी समस्त सेना नष्ट हो गई मेरे भाई को लज्जित कर सागर में धकेला था ना तो अब देखो कैसा प्रतिशोध लूंगा मैं तुम्हारे एक एक सैनिक को सागर में डुबोकर मृत्यु प्रदान करूंगा मैं अब अब हम क्या करें भ्राता देवसेना ये लीजिए मेरा हाथ पकड़िए देव सेना लीजिए पकड़िए मेरा हाथ मैं आपको ऊपर उठा लूंगी यह आपके जीवन और मृत्यु का प्रश्न है संकोच मत कीजिए लीजिए मेरा हाथ पकड़िए देव [प्रशंसा] सेना जो मेरे और मेरे स्वामी के मध्य आ रही वही मेरी रक्षा करें से तो उत्तम है मैं स्वयं ही नीचे गिर कर मृत्यु को स्वीकार कर लू देव सेना अपना हाथ दीजिए यह मुझे अपना हाथ क्यों नहीं दे रही है यह हम कहां जा रहे हैं दीदी यह मार् तो राजमाता सुरास के कक्ष की ओर जाता है ना हम वहां क्यों जा रहे हैं देर सेना आप गिर जाएंगी ये आप क्या कर रही है अपना हाथ दीजिए मुझे दीजिए हाथ दीजिए [संगीत] अपना देखा तुमने देखा आज के युद्ध में मेरी विजय हुई [संगीत] मेरी [संगीत] हट अनुचित है हानि हो सकती है इसलिए हट छोड़ और श्र मेरा हाथ पकड़ मैं आपको ऊपर खींच लूंगी आप गिर जाएगी देव से ना त क्या ठस तन को लगेगी मन को तो नहीं मेरे स्वामी को मुझसे दूर करने वाली से मैं कैसे ले सकती हूं सहायता यदि हमारे हाथ पूजा के लिए उठते हैं तो पर स्थिति आने पर सहायता लेने और देने के लिए भी उठते चाहिए उसमें कोई संकोच नहीं करना चाहिए आप थक रही है देवसेना आपकी पकड़ ढीली पड़ रही है अभी समय है देवसेना मेरा हाथ पकड़ लीजिए मेरा हाथ पकड़ लीजिए शीघ्रता कीजिए ये तो और नीचे जा रही [संगीत] है मेरे प्रभु और रे बीच आकर इसने जो आघात मुझे दिया है वो नीचे गिरने से कई अधिक है नहीं मैं इसकी सहायता नहीं [संगीत] लूंगी इसकी शक्ति कम हो रही है हाथ निरंतर फिसलते जा रहे हैं मुझे ही कुछ करना होगा शीघ्र ऊपर खींचना होगा इन्हें [संगीत] हा [संगीत] मैं आपको कुछ नहीं होने [संगीत] दूंगी [संगीत] देवसेना आप ठीक तो है [संगीत] ना मूर्छा में चली गई दे सेना देव सेना देव सेना देव [संगीत] सेना देवसेना देवसेना अपने नेत्र खोलिए देवसेना मोर्चा से बाहर आइए मुझे जल और औषधि से इनका उपचार करना [संगीत] होगा यह दर्पण तो इनके हाथ में था ऐसा क्या देख लिया इन्होने इस दर्पण में कि इनकी ऐसी दशा हो गई ये है मेरा प्रतिशोध हमारा प्रतिशोध तुम्हारी संपूर्ण सेना जल में समाहित हो गई बस एक कमी रह गई तुम्हारा अंत नहीं कर पाया सूर्यास्त जो हो गया इसके बाद तुम तो वार करते नहीं इसलिए तुम्हें मारकर आनंद भी नहीं आता किंतु कोई बात नहीं आज की रात्रि मैं तुम्ह देता हूं शौक मना लो अपनी सेना का क्योंकि कल के बाद ना कोई शौक मनाने वाला वाला होगा और ना ही युद्ध करने वाला तुम्हारे इन कथनों का उत्तर देकर मैं अपने शब्द व्यर्थ नहीं करना चाहता क्योंकि उचित उत्तर तुम्हें समय आने पर स्वत ही मिल [संगीत] [संगीत] जाएगा [संगीत] हम यहां तक तो पहुंच गए और हमारा यहां कोई पीछा भी नहीं कर रहा अ मुखी इधर [संगीत] चलो पुत्री पदम कोमल और विभूति तो यही थी अब कहां चली गई उन्हें तो असुर माता सुरा सही का आदेश था फिर वो कहां जा सकती है हां महेंद्र पुरी में माता सुरास की इच्छा के बिना कुछ नहीं हो सकता कहीं कहीं उन्हें सूचना तो [संगीत] नहीं सुरा सही हों मैं तो अपने ही कक्ष की ओर ले जाऊंगी ना तुम्हें चलो मुक्ति चाहिए तुम्ह वही मिलेगी तुम्हें मुक्ति प्राणों से मुक्ति पाना मुझसे मुक्ति पाने का एक मात्र उपाय [संगीत] है [संगीत] [संगीत] जयता जयता जय युक्ता शक्ति रूप का देवा सेना की योगेश्वर देव देव शक्ति धरा आपके शक्तिधर रूप को नमन है गणेश का प्रणाम स्वीकार कीजिए भ्राता के शक्तिधर रूप धारण करने के पीछे भी अवश्य कोई विशेष कारण है [संगीत] राना श्री श्री परब्रह्मा असर वि श्री जीवात्मा जय हो रा [संगीत] प्र निराशा एक ऐसा दुर्गुण है जो व्यक्ति को विवेक शून्य बना देता है और सकारात्मक सोच इससे बचने का एकमात्र उपाय है

No comments:

Post a Comment

ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...