[संगीत] महाभारत [संगीत] ओ एक देव सर्व भूतेषु गुढ़ सर्वव्यापी सर्व भूतात्मा कर्मा सर्व भूता देवास साक्षी चेता केवल निर्गुण मेरी समझ में आज का गुरुवर का श्लोक आया ही नहीं तुम तो ब्राह्मण हो तुम ही समझा दो ना पंच तत्वों के सहयोग से बने हुए इस चर और अचर जगत में सबके भीतर छुपा हुआ वह एक ही पूज्य परमेश्वर है वही सर्वदाता है प्रकाशक है वो सब में समाया हुआ है सब प्राण की आत्मा वही एक परमात्मा सब कर्मों का वही एक नेता और निर्णायक है उसी की चेतना सब चेतन प्राणियों में है वही केवल है वह निर्गुण है अर्थात सब गुण उसी में निहित है साक्षी को भूल गए तुम वह सबके भाव कर्म और शब्द का साक्षी है चाहे कोई कितना ही अकेला हो वह साक्षी सभी के साथ रहता है सब कुछ देखता है सब कुछ सुनता है कभी कभी कभी तेरी बातें मेरी समझ में नहीं आती कृष् पर तू बातें बड़ी समझदारी की करता [संगीत] है गुरु माता तुम यहां बैठे हो कृष्ण और बलराम दोनों ही भूखे होंगे सुदामा और तुम्हारे गुरु की पूजा समाप्त नहीं होती भूख तो मुझे भी लगी है गुरु माता तुम तो ब्राह्मण हो भूख सह लोगे पर वे दोनों उन दोनों की भली कही आपने कृष्ण तो नंद गांव में माखन चुराकर खाने के लिए प्रसिद्ध था और वो बलराम भी कुछ कम नहीं थे आप मुझे खिला दीजिए ना मुझसे भूख सही नहीं जाती जब तक कृष्ण नहीं आ जाता खाना वाना नहीं मिलेगा चुपचाप बैठा रह मैं रसोई में जाकर बैठ जाऊ खाने की सुगंध तो मिलती रहेगी अरे भोजन के पीछे मत भाग मूर्ख भगवान के पीछे भाग इन बच्चों के भोजन के बारे में तो सोचो पूजा आत्मा का भोजन है परंतु शरीर के लिए भोजन की आवश्यकता है या नहीं खल धर्म साधन चल वत्स मैंने तेरे लिए माखन निकाला है नंदगांव के साथ-साथ मेरा माखन भी छूट गया गुरु माता ऐसा क्यों कहते हो कृष्ण मैं यशोदा ना सही पर मां तो हूं ममता तो है मुझ में तुरंत हाथ मु धोले तब तक मैं भोजन लगाती हूं हे कृष्ण अब इस ब्राह्मण पर कृपा कर और भोजन के लिए चल हा हां [संगीत] चलो बस माते बस अरे खाएगा नहीं तो शिक्षा में ध्यान कैसे लगेगा मुझे भूख नहीं है माते भूख नहीं है तो अपनी थली मेरी ओर सरका दे ना चुप मैं अपने हाथों से खिलाऊंगी अपनी कृष्णा को अरे वाह गुरु माता सेवा तो मैं करता हूं और दुलारा आप इसे करती है तो जेश बदा बनने को किसने कहा था यदि छोटे होते तो ऐसा क्यों होता नहीं नहीं मैं बड़ा ही ठीक हूं अब तुम लोग शीघ्री खाना खाकर सो जाओ कृष्ण और सुदामा जी कल सुबह तड़के ही तुम दोनों को जंगल से लकड़ियां चुनने जाना है जो आज्ञा गुरुवर मैं भी जंगल में चला जाऊं गुरुजी नहीं वत्स बलराम कल सुबह तुम्हें खेत में हाल चलाना है जो आज्ञा [संगीत] गुरुदेव पर देख सुदामा तुझे एक बात कहे देती हूं तू कृष्ण का पूरा ध्यान रखना इसे खाने का ध्यान नहीं रहता है इसीलिए तो तुझे इसके साथ भेज रही हूं आप मेरी चिंता ना करें माते कैसे ना करूं जब तक तुझे कौर बना के ना खिलाऊ तू खाता ही नहीं यशोदा मैया ने इसे बिगाड़ दिया है गुरु माता नहीं पुत्र यशोदा ने तो इसे बना दिया है और फिर चपलता तो बालपन की आत्मा है यह तो साक्षात चपलता है गुरु माता तू तो ज्येष्ठ भ्राता है तूने रोका क्यों नहीं इसे रोकने की तो आपने भली कही इसे कौन रोक सकता है यह स्वयं रुक जाए तो रुक जाए और लगाई बुझाए का तो यह गुरु है मैं तनिक कुछ कहता तो तुरंत जाकर यशोदा मैया से जड़ देता कि मैया मुझे बहुत खी जाता है इसलिए मैंने इसके बीच में बोलना ही छोड़ दिया है माते आप इनका दुखड़ा सुनिए मैं तो चलता हूं चलो सुदामा यह चड़े की पोटली तो ले जा अरे माते आप ब्राह्मण को बोज ठ होने को कहती है पोटली मैं ले चलता हूं इसके चक्कर में मत पड़ना सुदामा वरना भूखा ही रह जाएगा तू चलो सुना है नंद गांव में तुम बंसी बजाया करते थे हां वहां तो मैं और भी बहुत कुछ किया करता था अच्छा तो क्या गैया तुम्हारी बंसी सुनकर लिया करती थी लकड़िया चुनो लकड़िया वर्षा होने वाली है वर्षा नहीं यह बरसने वाले बादल नहीं एक बार हमको भी सुना देना तेरी बंसी क्या तुम गैया हो बातें मत बना सुना देना क्या गुरुदेव ने तुम्हें यह नहीं बताया कि हर कार्य की एक घड़ी होती है तो समझ लो कि बंसी बजाने की घड़ी बीत गई पीछे देखने से मनुष्य का मन भटकता है ब्राह्मण देवता तेरी बातें मेरी समझ में नहीं आने वाली तभी तो कह रहा हूं कि लकड़िया चुनो यह लकड़िया चुनने की ही घड़ी है [संगीत] [संगीत] अब चला जाए लकड़ियां भी बहुत हो चुकी है और रात होने वाली [संगीत] है अरे यह तो फस गए हम लोग अब जब हम लोग नाले तक पहुंचेंगे उसका पाट भी चौगुना हो जाएगा और मुझे तो तैरना भी नहीं आता तो पानी रुकने के पश्चात चलेंगे और पानी रुका ही नहीं तो आज नहीं रुकेगा तो कल रुक जाएगा तब क्या सारी रात हम यही पड़े रहेंगे जब तुम्हें तैरना ही नहीं आता तब तो यह करना ही पड़ेगा और कोई बाग या भेड़िया हमें चट कर गया तो तो किसी पेड़ पर चढ़कर रात बिता लेंगे हा ये ठीक है चलो चलो [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] आए वो दोनों नहीं अभी तक तो नहीं आए और यह भयंकर वर्षा तुम चिंता डरिए मत गुरु माता कृष्णा है ना वहा वो सुदामा को बचा लेगा अरे तू कैसा भाई है बलराम तुझे अपने भाई की चिंता नहीं वह बड़ा समर्थ भाई है गुरु माता वह अपने विषय में चिंता करने ही नहीं देता मैं उसे भली बात जानता हूं और व भी आज से नहीं मुझे तो भूख लगी गुरु माता कुछ खाने को मिलता तो जब तक मेरा कृष्ण नहीं लौटता किसी को भोजन मोचन नहीं मिलेगा कृष्ण ओ कृष्ण हा डरना मत मैं हूं तेरे साथ यदि तू ना होता तब तो मैं बहुत डरता पेड़ को कस के पकड़े रहना यह समझ लेना कि वह पेड़ नहीं मैं हूं मैं गुरु माता ने तेरा ध्यान रखने को कहा था ना उनसे यह कहना ना भूलना कि मैंने तेरा ध्यान रखा पर तू भी अपना ध्यान रखना पर इस भूख का क्या करू चिड़ी की पोटली तो मेरे पास है यदि मुझे भूख लगी है तो उसे भी भूख लगी होगी कृष्ण ओ कृष्ण सो मत जाना सो गया तो पेड़ से टपक पड़ेगा अच्छा उसे खिलाई बिना तो खा नहीं सकते पर एक फक्की मारने को खाना थोड़ी कहते हैं अब इस बरसते पानी में उसके पास चूड़े की पोटली लेके कैसे जाऊ भीगने का डर नहीं यदि कोई बाग या भेड़िया आ जाए तो क्या करूंगा उसके पास पहुंचने का कोई उपाय सोचना पड़ेगा अरे तू सोया तो नहीं नहीं भूख के मारे नींद कैसे आएगी [प्रशंसा] ये भी ठीक है यदि मैं जाके उसे खिलाऊ तो वो तुरंत सो जाएगा और इस समय सोना ठीक नहीं अरे गुरु माता सो जाइए सो कैसे जाऊ इस आंधी और पानी में व ऐसे ही पानी में उसने एक दिन गोवर्धन पर्वत उठा लिया था इसलिए तो कहता हूं चिंता ना कीजिए सो जाइए [प्रशंसा] चड़े की पटली ऊपर ही भुला है क्या वो क्या हुआ कि अनजाने में धीरे धीरे करके मैं सारा चूड़ा खा गया अच्छा किया अगर तू ना खाता तो तू सो जाता और तू सो जाता तो तू गिर जाता अगर मैं खाता तो मैं सो जाता और मैं सो जाता तो मैं गिर जाता पर हां मेरा यह चोड़ा तुझ पर उधार रहा अब अधिक भू मत लटका भोर होने वाली है लकड़ियां उठा और आश्रम चल सब चिंतित होंगे i'm आयुष्मान भव क्या हुआ इतने दुखी क्यों दिखाई दे रहे हो मुझसे एक भूल हो गई ऋषिवर भूल कैसी भूल गुरु माता ने जो चूड़ा हम दोनों के लिए दिया था वो मैं अकेला ही खा गया यह तो अनर्थ हो गया सुदामा तुमने तो यह समझ लो कि सूर्य पर अपने हृदय के द्वार ही बंद कर लिए अपने भाग्य में दरिद्रता लिखा ली अब तुम्हें वासुदेव कृष्ण बचा ले तो बचा ले क्योंकि यह करके तुम जहां पहुंच चुके हो वहां तक तो मेरा आशीर्वाद भी नहीं जाता परंतु भूल कर के जो तुमने उसे स्वीकार किया है उसके लिए मैं भगवान से प्रार्थना करूंगा कि तुम्हें क्षमा करें [संगीत] चल तुझे गुरु माता बुला रही है तो क्या तूने बता दिया मैं क्यों बताता मित्रों की बात तो मित्रों में रहनी चाहिए गुरुदेव ने भी कहा था कि अच्छा मित्र भगवान का वरदान होता है तो भला मैं मुट्ठी पर चिड़े के लिए तुझ जैसे मित्र को कैसे गवा सकता हूं चल गुरु माता तु से अति प्रसन्न है तेरे लिए खीर बनाई है खीर खाकर हम खेलने चलेंगे ये देख हमारे लिए गुरु माता ने कितनी अच्छी गेंद बनाई है महाभारत महाभारत महाभारत महाभारत हो महाभारत [संगीत]
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