Monday, 5 January 2026

श्री कृष्ण गोकुल कैसे पहुँचे Shri Krishna Janmashtami Scene Mahabharat B R Chopra Pen Bhakti

महाभारत [संगीत] [प्रशंसा] [प्रशंसा] [प्रशंसा] अ [प्रशंसा] [प्रशंसा] [प्रशंसा] वसुदेव जी आइए उतर आइए मैं आप ही की प्रतीक्षा कर रहा [प्रशंसा] था पर आप वहां से निकल कैसे आए मित्र बेड़िया कट गई द्वार खुल गए और यमुना ने रास्ता दे दिया यह है देवकी का आठवा पुत्र आओ वासुदेव के आठवें पुत्र नन्हे वासुदेव आओ नंद की गोदी में आ जाओ बेटे मैं आपका आभारी हूं वासुदेव जी कि आपने संकट के इस क्षण में अपने इस मित्र पर भरोसा किया मेरा गौरव बढ़ाया यह बालक कोई साधारण बालक नहीं यही तो कंस के अत्याचारों से भारतवर्ष को मुक्त कराएगा इसे पृथ्वी पर लाकर आपने और देवकी बहन ने अपना कर्तव्य पूरा किया है अब बारी है कर्तव्य निभाने की मेरी और यशोदा की ब्रजभूमि को कं से मुक्ति दिलाने वाले नंद का प्रणाम स्वीकार करो तुम्हारे यहां विराज में से यशोदा का घर धन्य हो गया देव के पुत्र ब्रज भूमि धन्य हो गई वसुदेव जी आप इस भरे पूरे घर से रीते हाथ कैसे जाएंगे अभी आया रुकेगा मित्र जाइएगा नहीं देर नहीं होगी [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] सोचने का समय नहीं है वासुदेव जी सोचने का समय है ही नहीं कंस तो आपके बच्चे के जन्म का समाचार सुनते ही अवश्य आएगा क्या कहिए उ से देखिए वासुदेव जी मैं आपका मित्र हूं और यशोदा देवकी जी की सहेली और आज ही हमारे घर इस कन्या ने जन्म लिया है कन्या हां कन्या के जन्म की बात कोई नहीं जानता स्वयं यशोदा भी नहीं व तो बेचारी अचेत पड़ी है तो क्या जानबूझ करर आप कर रहे हैं तो क्या मैं इतना स्वार्थी बन जाऊ कि अपने पुत्र की रक्षा के लिए इस कन्या की बलि दे द नहीं मित्र नहीं कदाचित अत्याचारी कंस का मन इस कन्या को देखकर बदल जाए अब देर मत कीजिए वासुदेव जी मेरा क मान लीजिए जैसा तुम कहोगे मैं वैसा ही करूंगा स्वार्थ में मनुष्य कितना अंधा हो जाता है वासुदेव जी आप स्वार्थ में अंधे नहीं हो रहे स्वार्थ में अंधा है वह पापी अत्याचारी अधर्मी कंस हा वो अंधा है वो नहीं जानता अपने अंत को अपने पापों के परिणाम को अपने अधर्म के अभिशाप कोए मित्र अब देर मत कीजिए [प्रशंसा] और हां क्षण भर के लिए भी यह मत सोचिए कि आप स्वार्थ कर रहे हैं यह तो परमार्थ है जगत के कल्याण के लिए [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] चली कुमारी [संगीत] नंदिनी आए नंद कुमार त्याग बिना संभव नहीं जीव जगत उद्धार जीव जगत उद्धार [संगीत] [प्रशंसा] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] क्या हुआ तुम्हारे पुत्र की जगह नंद यशोदा ने अपनी पुत्री [प्रशंसा] [संगीत] भेजी आठवा पुत्र आठ पुत्र आठ आठवा पुत्र आठवा पुत्र आठवा पुत्र मत्र महाभारत महाभारत महाभारत महाभारत हो महाभारत [संगीत]

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