[संगीत] संसार में सबसे अधिक घाव किससे हो सकता है इंद्र के वज्र से या विष्णु के चक्र से या भीम की गदा से या फिर गांडीव के बाण से नहीं सबसे अधिक घाव यदि कोई पहुंचा सकते हैं तो वह है हमारे शब्द हमारे वचन यदि शब्द बाण अस्त्र तो हमारी जीवा उनका संधान करने का यंत्र है शब्द चाहे तो अमृत बनकर आपको जीवन दान दे सकते हैं या फिर घृणा का विष बनकर आपके जीवन को पीड़ ई बना सकते हैं यह शब्द ही है जिनके घाव का किसी भी वैद्य के पास कोई उपचार नहीं इसलिए जो वस्तु जितनी घातक होती है वही वस्तु उतनी ही अमूल्य भी होती है और वचन सबसे अमूल्य होते हैं इसलिए मीठी बोली बोलने का प्रयास कीजिए अपने हृदय की तुला से तोलक वचन बोलने का प्रयास कीजिए जी मेरी प्रतीक्षा करना अर्जुन प्रयास करूंगा कि तुम्हें भी सम्मान जनक अंत [संगीत] में मि इन पांडवों को इनकी नियति तक अवश्य पहुंचा ंगा [संगीत] मैं परंतु उससे पहले उस विश्वासघाती को उसकी नियती तक [संगीत] पहुंचा तो हमारे ही पक्ष में है [संगीत] धर्म अ मानस र्म [संगीत] रा र्म मानस रात्म य [संगीत] कभ र्म मानस रात्म सं [संगीत] स मा तो है महामहिम के शिविर में अग्नि लगाने का दुस्स किसने किया उत्तर दो एक विश्वास घाती को यही डंड मिलना चाहिए यही सावधान दुर्योधन आज की हार के कारण शब्दों का चयन करना भी भूल गए हो तुम लजा नहीं आती तुम्ह नहीं आचार्य मैंने सर्वाधा उचित शब्दों का ही चयन किया है आज जो कुछ भी हुआ वो व इनके कारण हुआ है इनके पांडवों के प्रति प्रेम भाव के कारण [संगीत] ही अजन वीरगति को हो [संगीत] गया इसीलिए मैं मैं हस्तिनापुर का युवराज दुर्योधन आज अभी और इसी शान से आपको कौरव सेना के सेनापति से मुक्त करता हूं जाइए चले जाइए वापस हस्तिनापुर और जाकर विश्राम करिए [संगीत] वहा अपने शब्दों पर नियंत्रण रखो दुर्योधन और अपनी सीमा मत लांगो सीमा लांग नहीं र आज तो सीमा बना रहा [संगीत] इस समय मैं ऐसे व्यक्ति के सामने खड़ा हूं जो हमसे अधिक हमारे शत्रुओं के पक्ष में है जिनके मौन रहने के कारण ही मेरे मित्र ने अपना पुत्र और मैंने अपना रक्षक खो दिया [संगीत] हस्तिनापुर के युवराज की सासे चलती रहे तो उसने अपनी सा खो दीन की मृत्यु का दुख जितना तुम्ह है उतना हमें है हम सबको है परका य नहीं तुम महामहिम के साथ दर व्यवहार करो जो मैं तुम्ह कदा भी करने नहीं दूंगा बस गुरुदेव यदि आप भी पिता मा के साथ विदा लेना चाहते हैं तो आप भी जा सकते हैं आपको स सम्मान विदा करेगा यह [संगीत] दुर्योधन तैयार हो जाओ मित्र कल से इस युद्ध में तुम अपने मित्र का साथ इनसे कहीं अधिक इस यु में मुझे तुम्हारी आवश्यकता है मित्र दो सहोदर एक दूसरे का रखना भाए य उत्तर आपको ही लेना होगा की रक्षा केवल आप ही कर सकते हैं कदापि [संगीत] नहीं जब तक मैं ु भूमि में उपस्थित हूं तब तक अंगराज कण युद्ध भूमि में पद नहीं रखेगा क्यों मेरा मित्र मेरे साथ में युद्ध में खड़ा नहीं हो सकता बताइए क्यों कल को यदि फिर से मेरे प्राणों पर संकट आया मेरे प्राणों की रक्षा कौन करेगा मैं करूंगा तुम्हारी रक्षा शत्रु को तुम्हारे समीप आने नहीं दूंगा [संगीत] कल सूर्य की पहली किरण के साथ तुम ही नहीं अपितु समस्त पांडव भीष्म पितामह का वह रूप देखेंगे जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की हो यह मेरा वचन है अर्जुन हो या युधिष्ठिर कृष्ण हो या भीम गंगा पुत्र भीष्म के प्रताप के आगे झुकेंगे यह मेरा वचन [संगीत] है [संगीत] युद्ध का चौथा [संगीत] दिन पितामह देव की रचना कीजिए मुझे अपने प्राण का विश्वास दिलाइमा बस दुर्योधन अन्य कोई व्यू नहीं चलो सारथी [संगीत] यह तो अच्छा संकेत है माता प्रतीत होता है पितामह इस नरस हार को समाप्त करना चाहते हैं इस युद्ध पर विराम चाहते हैं गंगापुत्र इस महायुद्ध पर विराम अवश्य लगाना चाहते हैं परंतु अपने सभी शत्रुओं का अंत करने के [संगीत] पश्चात आक्रमण करो पांडु पुत्रों और यदि समर्थ्य हो तो जीवित [संगीत] [संगीत] रहो मास महाभारत महाभारत [संगीत] महाभारत ये क्या कर रहे पितामह कभी-कभी कर्तव्य की चेतना आकांक्षाओं के स्वप्न पर हावी हो [संगीत] जाती [संगीत] यह मेरी अंतिम चेतावनी है पांडु पुत्रों और तुम्हारे पास य अंतिम अवसर है समर्पण करो अन्यथा परिणाम के लिए प्रस्तुत रहो यदि समर्पण नहीं किया तो ऐसा सहार देखने को मिलेगा जिसकी आशा भी नहीं की होगी तुमने किस बात का समर्पण पिता मा किस बात का समर्पण आप भली भाती जानते हैं कि इस युद्ध के अलावा हमारे पास और कोई विकल्प नहीं और यही युद्ध हमें हमारा अधिकार और न्याय दिलाएगा तो ठीक है अपने इस निर्णय का परिणाम भुगतने के लिए तत्पर्य हो जाओ [संगीत] य पितामह क्या कर रहे हैं हमारे सेने बल का क्रूरता से अंत कर रहे अर्जुन तुम्ह पितामह को रोकना होगा क्योंकि हम सभी में केवल और केवल तुम इस सक्षम हो [संगीत] अजन युद्ध करो अथवा [संगीत] समर्पण तुम्हारे मौन ने मुझे उत्तर दे दिया और तुम द्वंद करना चाहते हो भी या [संगीत] नहीं तुम्हारे मौन ने मुझे उत्तर दे दिया है उचित होगा पिता मा मा कि आप अपनी ओर से कौरवों को भी आक्रमण करने की अनुमति दीजिए क्योंकि आप तो मेरे साथ द्वंद में व्यस्त होने वाले हैं मेरी ओर से लड़ रहे योद्धाओं का अपमान मत कीजिए पितामह ठीक है [संगीत] अर्जुन [संगीत] [संगीत] [संगीत] नया नाम अधिकार नाम राम धम साम्राज्य धम न्याय नाम अधिकार नाम रा धम साम्य ध [संगीत] युद्ध का नौवा [संगीत] दिन मा ये पितामह तो भ्राता युधिष्ठिर की ओर अपना रथ लेकर जा रहे हैं ता युधिष्ठिर संकट में है माधव हमें शकर कुछ करना [संगीत] होगा तुम भली भाति जानते हो युधिष्ठिर कि तुम मुझसे द्वंद करने में सक्षम नहीं हो इस कारण वश अपने सैनिकों की आहुति देना बंद करो समर्पण कर [संगीत] दो अद्भुत पितामह आज बत गंगापुत्र अच्छा है अच्छा है [संगीत] मेरे मार्ग से हट [संगीत] जाओ यह मेरी अंतिम चेतावनी है पुत्र मेरे मार्ग से से हट [संगीत] जाओ समर्पण [संगीत] करो हम कौरवों के समक्ष समर्पण नहीं करेंगे पितामह चाहे इसके लिए हम सबको अपने प्राण क्यों ना खोने पड़े [संगीत] जब तक शरीर में अंतिम शवास है जब तक शरीर में रख की अंतिम बूंद है हम समर्पण नहीं करेंगे पितामह और ना ही हम रुकेंगे ठीक है अर्जुन यदि तुम्हारा निर्णय यही है तो मेरा उत्तर भी जान [संगीत] लो यदा यदा धर्मस्या गंगा प गंगा [संगीत] मेरे शस्त्र ना उठाने के दिए गए वचन को मेरी दुर्बलता मत समझना स्मरण रखिए कि समय के साथ वचन के अर्थ का उत्थान ना होना धर्म नहीं अधर्म होता है मैं केवल अपने कर्तव्य का पालन कर रहा हूं वासुदेव और ऐसा करने से मुझे कोई नहीं रोक सकता कोई भी नहीं का का [संगीत] प्रयास केर से का विनाश [संगीत] भी वजन ना मारता युद्ध भाष आरता उसे मिलेगा युद्ध भी दंड भी प्रहार भी ंग कटेगा पाप का नाश होगा नीच का दमन करेंगे वासुदेव उसका अहंकार भी शत्र के प्रहार से से अगनि कृष्ण की करेगी पाप का जलन पाप से थकी रा काही मा पुकारती श [संगीत] द्वार सुरा को देखता के एक नन भूम कर आरती
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti
[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...
-
[संगीत] महाभारत प्रता श्री आपने सु शर्मा को ऐसा वचन क्यों दिया मेरे वचन पालन करने का तो प्रश्न ही नहीं उठता अनुज तुम क्या समझते हो कि स...
-
महाभारत इच्छा है तुम्हारी बस इसने तो एक ही रट लगा रखी है केशव इसे तो आपको गुरु बनाना है वस इस देश में गुरुजनों की क्या कमी है तुम हमें ह...
-
[संगीत] किंतु मेरे परिवार पर से किस पर संकट आने वाला है ऋषिवर बताइए ना ऋषिवर संकट किस पर होगा यह सोचने के स्थान पर तुम्हें यह सोचना चाहि...
No comments:
Post a Comment