[संगीत] ए सागर तो आप सभी ने देखा होगा बाहर से कितना उन्मुक्त और भीतर से कितना शान उसकी बलशाली लहरों को देखकर ऐसा लगता है की मानव वो सब कुछ चर चर कर देगी परंतु उसके घर में ना जान कितने अंडे अनजान जी पलटे हैं उसके भीतर मोती मुक्त जन्म लेट है सागर एक है परंतु सागर को लेकर के हमारी प्रकृति भिन्न-भिन्न होती है कोई उसमें तैरता है तो कोई उसकी लहरों का स्वादन करता है कोई उसमें अपने पाओ भी होता है [संगीत] कोई उसमें जीवन का आरंभ देखा है तो कोई उसमें अपने जीवन का अंत देखा है [संगीत] सागर एक है परंतु हमारी प्रकृति के अनुसार सागर की प्रकृति भी बादल जाति है इसी प्रकार जीवन है सबके लिए समान परंतु उसे जीवन में आपको प्रसन्नता देखनी है प्रसन्नता पानी [संगीत] यह आप पर निर्भर करता है कल की भूख मिट्टी चुकी है बात परंतु सागर अब भी प्यासा है [संगीत] [संगीत] नवीन युग का लिगन कर सके परंतु परंतु माधव [संगीत] आज मैं तुम्हारा साथ ही नहीं प्रश्न का उत्तर नहीं दे सकता हूं एक जेस्ट भ्राता के समाज और जैसा मैंने कहा [संगीत] अभी किसी और से मिलने का समय है [संगीत] जैसी आपकी आजा [संगीत] देव श्री कृष्णा गोविंदा हरे किन रे [संगीत] [संगीत] गौरव वंश के वत वृक्ष महामहिम भीष्म जिन्हें इच्छा मृत्यु का वरदान था क्या वासुदेव ने उन्हें अपने चल से भारत शाही नहीं करवाया है [संगीत] आचार्य ड्रोन का वक्त नहीं करवाया है मेरे पुत्र सुयोधन की रक्षा कर रहे उसके मित्र करण को चल से नहीं मरवाया है वासुदेव ने अंग्रेज के हाथों में विजय धनुष हक है तो तुम कुछ नहीं कर पाओगे [संगीत] [संगीत] जवाब देती हूं की जी प्रकार तुमने मेरे कल का अंत किया है तुम्हारा कल भी ऐसे ही आपस में लड़कर नष्ट हो जाएगा बहुत ही बुद्धिमान ज्ञानी पुरुष ने मुझे कहा था की मनुष्य अपने प्रत्येक चयन का परिणाम स्वयं भगत है [संगीत] [संगीत] [संगीत] आपका यह बाद मेरा चरण भेद नहीं पाया परंतु अब मेरे शरीर का यह भाग सबसे दुर्बल होगा और कोई भी बात मेरे इस स्मरण स्थल को भेद पाएगा और यही मेरे इस डे को त्यागने का करण बनेगा आपका स्वागत है कालदेव माता गांधारी का श्राप अपूर्ण हुआ मुझे [संगीत] प्रभु प्रभु मुझे माफ कर दो प्रभु मुझे बहुत बड़ी भूल हो गई मुझे लगा की यहां कोई हीरोइन है परंतु नहीं किया जो कुछ भी होता है सब में मैं स्वयं सम्मिलित होता [संगीत] करण के चक्र को कोई नहीं ताल सकता त्रेता युग में मैंने जब श्री राम का अवतार लिया था तब उसे युग में तुम वीर वानर वाली के नाम से प्रसिद्ध थे और उसे युग में मैंने बाढ़ चलाकर तुम्हारा वध किया था [संगीत] और उसे करण हेतु आज तुम्हारा बाद मुझे आकर लगा है [संगीत] मेरे जीवन का उद्देश्य धर्म स्थापना था और जब धर्म की नव राखी जा चुकी तो मेरी उपस्थित इस धरती का संतुलन बिगाड़ देखिए हर मनुष्य धरती पर एक उद्देश्य लेकर आता है और उसे उद्देश्य को पूर्ण करना उसका कर्तव्य होता है मैंने अपने जीवन का उद्देश्य पूर्ण किया थे और आज तुमने अपना कर्तव्य पूर्ण किया गया [संगीत] किंतु जब जब धारा पर धर्म और अन्य बढ़ेगा मैं तब तब लौटकर पुनः आऊंगा मैं जा रहा हूं किंतु मेरी सिख गीता का ज्ञान बनकर समस्त संसार विशेष रहेगी वो बालको की चंचलता में होगी इस संसार के कण-कण में होगी रूप बदलेगा किंतु मैं सदैव रहूंगा शरीर का अंत होता है किंतु जो अमर राहत है वह है सिख [संगीत] ऑन की बाली देहात है [संगीत] [संगीत] चिंता है जीवन की व्यर्थ है मृत्यु का भाई आत्मा को ना मार पाते शास्त्र अग्नि आसमा है सृष्टि साड़ी [संगीत] खुदा सुख होता जासूसी की योजना [संगीत] धर्म है [संगीत] नरोत्तम देवी सरस्वती [संगीत] [संगीत] खुदा [संगीत] को छोड़कर नहीं जा सकते [संगीत] मैं तुम सभी को यहां से मैं उनके आदेश का पालनपुर कर रहा हूं पर तुम्हारा भी यही कर्तव्य है [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] की लक्ष्य पूर्ण हो जान के पश्चात समापन आवश्यक [संगीत] [संगीत] ता है जो हर संकट का मोचन है ना [संगीत] धैर्य रखो पांचाल [संगीत] मुझे उन पर पूरा विश्वास है और अपने अनुज अर्जुन पर [संगीत] यह स्थान सुरक्षित ग रहा है [संगीत] विश्राम कर लेना चाहिए [संगीत] आज मैं तुम्हारा साथ ही नहीं हूं पार्थ आज मैं तुम्हारा शाखा हूं एक जेस्ट भ्राता के समाज ऊपर जैसा मैंने कहा वैसा कारोबार [संगीत] यह सब क्या [संगीत] [संगीत] जहां से एक मनुष्य की यात्रा समाप्त होती है वहीं से एक दूसरी यात्रा का आरंभ होता है [संगीत] [संगीत] तुम तक गई होगी जो विश्राम कर लो [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] या था प्रणाम [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] मैंने तुझे शास्त्र चलाया था मेरे परिवार [संगीत] [प्रशंसा] ये सब क्या हुआ है कैसे करूंगा मैं सबकी रक्षा
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