Friday, 2 January 2026

मोरया ने अपनी पत्नी को गणेश पुराण पढ़कर सुनाई Nishkarsh Vighnaharta Ganesh Episode 828 PenBhakti

[संगीत] मौर्या आज हमारे साथ गिली डंडा नहीं खेलोगे नहीं नहीं मित्रों मुझे देर हो रही है मोरेश्वर मंदिर जाना है कल ही तो गए थे प्रतिदिन जाओगे क्या हां प्रतिदिन जाएगा ये गणपति बाप्पा जो है उधर दर्शन देने के लिए उसके लिए मंदिर जाने की क्या आवश्यकता वो तो यही आ जाएंगे तुम्हारे लिए आ जाएंगे नहीं आ गए गणपति बापा का महा चमत्कार वो देखो [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] क्षमा करना गणपति बापा यह नहीं जानते आप तो सर्वत्र है ना और इस प्रकार मुझ पर अटूट विश्वास रखकर मोर्या प्रतिदिन मीलों चलकर मेरे मोरेश्वर मंदिर पहुंचता था सबके उपहास को सहकर ऐसा व वर्षों तक करता [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] रहा कहां जा रहे हो मोर्या पिछली बार कब दिखाई देते तुम्हें तुम्हारे गणपति बाप्पा मित्र इतना परिश्रम कहीं और कर लिया होता तो आज हमारे समान होते जीवन में सिर्फ गणपति बप्पा के दर्शन से ही इसके सारे कार्य हो जाते हैं पेट भी भर जाता है इसका हां भले ही बचपन में इसका पेट नहीं भरता था कभी इतना महत्त्वपूर्ण कार्य कर रहा है यह और तुम लोग अड़ंगा लगा रहे हो जाओ भाई जाओ गणपति तुम्हारी प्रतीक्षा कर रहे होंगे देखो गणपति प्रतीक्षा में इतने आधीर हो गए हैं कि बादलों पर बैठकर स्वयं आ गए विक्षिप्त बुद्धि मोर्या [संगीत] उसको विक्षिप्त बुद्धि का मानकर सभी उसको चिढ़ाते थे किंतु मोर्या ने अपने ऊपर इसका कोई प्रभाव नहीं होने दिया ना ही मुझ पर अपने विश्वास को टूटने दिया स्वयं अपने स्वास्थ्य की चिंता भी नहीं थी उसे ऐसी थी उसकी भक्ति प्रचंड ज्वर की अवस्था में भी वह मेरे दर्शन करने अवश्य आता था ओम गण गणपते नमः ओम गण गणपते नमः ओम गण गणपते नमः ओम गण गणपते [संगीत] नमः गणपति बापा [संगीत] पुत्र मुझे मंदिर जाना होगा देर हो गई आई आपने मुझे उठाया नहीं गणपति बापा भ होंगे पुत्र रुको आज तुम्हें तेज वर है आज रहने दो मत जाओ जाना तो होगाई मुझे गणपति बापा को भोग चढ़ाना है और प्रसाद भी लाना है आपने नहीं बनाया तो मैं बना देता हूं रुको [संगीत] पुत्र पुत्र प्रसाद तो मैं ले आई हूं किंतु ऐसी अवस्था में तुम्हारा जाना उचित नहीं है अवस्था कुछ भी हो आई बप्पा की कृपा सदा मुझ पर बनी रहती है मुझे कुछ नहीं होगा आप मुझे आज्ञा दीजिए पुत्र पुत्र पुत्र तुम्हें विलंब हुआ है तुम्हारे जाने तक मंदिर के पट बंद हो जाएंगे बाबा आप ही तो कहते हैं भक्तों के लिए भगवान के पट कभी बद नहीं होते [संगीत] [संगीत] [संगीत] आ [संगीत] ऐसी अद्भुत भक्ति को देखकर भगवान अपने हृदय के द्वार भी खोल लेते हैं तो फिर उसके लिए मंदिर के पट बंद कैसे रह सकते थे कुछ कहा था मैंने भक्त के लिए तो भगवान के द्वार सदा ही खुले रहते हैं आश्चर्य विश्वास नहीं होता आपने उसके लिए अपने द्वार भी खोल दिए थे प्रभु यह तो कुछ भी नहीं नहीं एक बार तो उसके लिए मुझे स्वयं मंदिर के बाहर आना [संगीत] पड़ा कहां जा रहे हो मौर्या मूर्खता मत करो लौट जाओ ऐसे तूफान में तो मंदिर भी नहीं खुले होंगे चिंता मत करो मित्र भक्त के लिए भगवान के पट सदा खुले रहते हैं मुल्क बनने की ठनी भी है क्या ये कोई साधारण तूफान नहीं है और अब तो मंदिर का मार्ग भी बंद हो गया होगा अच्छा हमारा कहा मत मानो जाओ अन्यथा तुम्हारे गणपति बप्पा को स्वयं यहां आना पड़ जाएगा हां हां आवश्यकता हुई तो बप्पा स्वयं ही आ जाए [संगीत] सुनो गणेशा हम तेरे सुनो गणेशा हम भक्त तेरे प्रभु तेरी महिमा गाए प्रभु तेरी महिमा काए बाबा तेरा ही प्रभु के द्वार पर य अवरोध वसे ऐसे ही नहीं छोड़ सकता मुझे इसे हटाना ही होगा [संगीत] पपा भक्त कष्ट में हो तो भगवान से भी नहीं देखा जाता वो अपने भक्त के सामने आकर उसका कष्ट हते हैं भक्त इतने कष्ट सहकर भगवान के पास पहुंचे तो भगवान भी उसे दर्शन देने के लिए उतने ही तत्पर हो जाते [संगीत] हैं आज इस तूफान के कारण आपको कोई भोग लगाने नहीं आया होगा किंतु आप चिंता मत करिए मैं आपके लिए भोग लाया हूं आप मन भर के खाएगा भक्ति से शक्ति है शक्ति से संसार और ईश्वर से संसार है भक्ति की शक्ति भक्त को वो पद दिलाती है जिसकी तुलना किसी से नहीं की जा सकती भगवान से भी बड़ा हो जाता है भक्त तो क्या उस दिन आपने मोर्या को साक्षात दर्शन प्रदान कि प्रभु वो दिन भी अब आने ही वाला था पुष्पदंत जी क्योंकि भक्त जितनी परीक्षाएं देता है भगवान के उतना ही निकट हो जाता है और अभी मोर्या की कुछ परीक्षाएं शेष थी किंतु इस बीच भक्ति में उसका इतना खो जाना उसके माता पिता के लिए चिंता का कारण बन गया था ओम गण गणपत नमः ओम गण गणपत नमः ओम गण गणपत नमः ओम गण गणपत नमः ओम गण गणपत नमः कल मंदिर से लौटने पर ऐसे ही बैठा है न रात्रि एक पल के लिए भी नहीं सोया स लिए मुझे ही दोषी मानते हैं महान भक्त होगा हमारा पुत्र ये ज्ञात था मुझे लेकिन वोह संसार से इस तरह विरक्त हो जाएगा य नहीं जानता था मैं अब तो इसका विवाह ही एकमात्र साधन है तभी वो समझेगा भक्ति अपने स्थान पर है किंतु जीवन के अन्य अपने स्थान पर किंतु यह सदा ही गणपति बाप्पा के भक्ति में लीन रहता है यह विवाह के लिए कहां तैयार होगा हमें प्रयास तो करना चाहिए [संगीत] ना आई भोग तैयार कर दीजिए मोरगांव मंदिर जाना [संगीत] है पुत्र मौर्य आई पुत्र हम चाहते हैं कि तुम अब विवाह कर लो क्या विवाह त्र क्षमा कीजिएगा आई बाबा विवाह मेरे लिए नहीं है मैं तो गणपति बप्पा का भक्त हूं मेरा पल पल उन्हीं की भक्ति के लिए है किंतु गणपति बापा की भी यही इच्छा हो तो हा पुत्र उनकी ही इच्छा से तो यह विचार हमारे मन में आए है तभी तो तुमसे पूछ रहे हैं पुत्र ईश्वर के प्रति तुमने अपना धर्म सदा निभाया है और अब अपने माता-पिता के प्रति अपना दायित्व भी निभाओ हम तुम्हारी गृहस्थ तुम्हारी संतान देखना चाहते हैं हां पुत्री मैंने तो कन्या भी ढूंढ ली है तुम उससे भेंट कर लो तभी निर्णय लेना उचित है आई मैं उससे भेंट करूंगा किंतु हां मैं तभी बोलूंगा जब गणपति बप्पा आज के समान मुझे उसकी स्वीकृति देंगे मुझे विलंब हो रहा है मैं मंदिर जा रहा [संगीत] हूं [संगीत] [संगीत] हमारी पुत्री संस्कारी है और बुद्धिमान [संगीत] भी [संगीत] कैसा अपार तेज है इन में अवश्य कोई दिव्य असाधारण व्यक्ति है [संगीत] यह प्रभु गणपति ने अपनी स्वीकृति दे दी है [संगीत] आई किंतु मैं कन्या से कुछ प्रश्न पूछना चाहता हूं अवश्य पुत्री आ जाना [संगीत] सभी लोग मुझे ढोंगी और विक्षिप्त समझते हैं गणपति भक्ति के सिवाय तो मुझे कुछ नहीं सूझता तो मैं आपको सामान्य वैवाहिक जीवन नहीं दे सकता ना ही समय और ना ही आपका ध्यान रख पाऊंगा फिर भी क्या आप मुझे अपने पति के रूप में स्वीकार करेंगे [संगीत] प्रभु के ऐसे महान भक्त ऐसे पवित्र हृदय वाले अवश्य अच्छे पति भी बनेंगे मुझे आपसे विवाह करने में कोया [संगीत] पति शीघ्र ही मोरया का विवाह हो गया किंतु आगे जो हुआ वह ना तो उसके माता-पिता की कल्पना के अनुसार था और ना ही उस नव विवाहिता कन्या [संगीत] के गणपति बाप्पा की प्रतिमा देखी आपके घर पर और गणेश पुराण भी तो वो तो आपने अवश्य ही पढ़ा होगा ना पापा में मुझे पूर्ण विश्वास है किंतु मैं गणेश पुराण पूरा नहीं पढ़ सकी तो मैं हूं ना एक ही रात्री में संपूर्ण पुराण पढ़कर सुना [संगीत] [संगीत] दूंगा [संगीत] श्री गणेश [संगीत] पुराण म प सा प ग म प रे प ग म [प्रशंसा] [संगीत] सा गरे वो मेरी भक्ति में इतना खोया हुआ था कि ना उसे यह ध्यान रहा कि यह उसके विवाह की प्रथम रात्रि थी और ना ही नव विवाहिता की उससे क्या अपेक्षा थी वह उसे मेरा पुराण पढ़कर सुनाता [संगीत] रहा [संगीत] आ [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] माजी वो स्वामी कहां गए वो तो प्रतिदिन के समान मोरेश्वर मंदिर के लिए निकल गया है [संगीत] पुत्री अंतता स्वामी आ [संगीत] गए पुष्प का कजरा लाया है मेरे [संगीत] [प्रशंसा] लिए स्वामी मेरी तो स्वामी ने देखा तक नहीं रघु भक्ति उचित है किंतु मेरा तो लिक भी ध्यान नहीं है स्वामी [संगीत] का स्वामी ये लीजिए ना गरम गुड़ पोली मैंने बनाई है और मैं ये आपको अपने हाथों से खिलाना चाहती हूं मुझे खिलाने का कोई लाभ नहीं बप्पा को खिलाओ पुण्य मिलेगा उन्हीं के लिए पकवान बनाओ [संगीत] लाओ लो मैंने यह भोग गणपति बाप्पा को चढ़ा दिया है अब ये प्रसाद सब में बांट [संगीत] दो इस प्रकार मोरया विवाह के पश्चात भी भक्ति में डूबा रहा उसके लिए उसके जीवन में पत्नी का कोई अस्तित्व ही नहीं था जिसके कारण हर दिन उसकी पत्नी की आशा पल पल निराशा में बदलती जा रही थी और एक दिन मुझे आज्ञा दीजिए मैं अपने आई बाबा के पास जाना चाहती हूं और अब मैं वही रहू गृहस्थी के बिना नहीं चलता है संसार और भक्ति के बिना ना हो भव सागर पार इसलिए दोनों व्यक्ति के लिए महत्त्वपूर्ण है

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