Saturday, 3 January 2026

विनायक जी ने असुरी त्रिंभा का उद्धार किया Nishkarsh Vighnaharta Ganesh Episode 734 Pen Bhakti

मेरा अस्त्र मुझे लौटा दो बालक अन्यथा अपने पांव तले मसल के रख दूंगा तुम्हें इतना क्रोध स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं है तुम्हें विश्वास है ब्रह्मदेव ने यह अस्त्र तुम्हारे लिए उत्पन्न किया था तो सत्य ही होगा लो इसे संभालो विनायक ये अस्त्र आपने उसे क्यों दे दिया ये कैसी मूर्खता की है तुमने अभी अस्त्र पाक मैं शीघ्र तुम्हारा अंत करूंगा [संगीत] स्वामी ये कैसा विचित्र आभास हुआ मुझे कहीं चाचा श्री धूम [संगीत] ज विनायक जय विनायक देवा जय विनायक है जय विनायक बहुत क विनायक आपने वद कर दिया इस दुष्ट का आपकी जय हो भ्राता मनु और मैंने यहां पहुंचने में विलंब कर दिया हां मां मैं और जगन भ्राता यही सोच रहे थे कि उस बालक का अंत देखने में कितना आनंद आता किंतु तब तक तो पिताजी ने उस बालक विनायक को असंभव को संभव कैसे कर दिया उसने अब मेरे कोप से उस दुष्ट बालक को कोई नहीं बचा सकता क्रोध नहीं भ्राता श्री उसका सामना सूझबूझ से करना पड़ेगा एक बालक होकर आप में असीम बल है आश्चर्य है मैंने आज तक आप जैसा बालक नहीं देखा एक ही पल में इतने विशाल काय दैत्य को पलम में धारा शय कर दिया ऋषि पुत्र विनायक कौन है आप मेरा परिचय तो आपको ज्ञात है काशी नरेश मैं महर्षि कश्यप और माता अदिति का पुत्र हूं माता की आज्ञा से अपने कर्तव्य पर एकाग्र रहकर उसे संपन्न करना चाहता हूं जिससे मैं माता के पास लौट सकूं प्रतीक्षा करूंगी अपने विनायक के लौटने की प्रतीक्षा करूंगी मैं जिस प्रकार माता अदिति को इधर विनायक के लौटने की प्रतीक्षा थी उसी प्रकार माता पार्वती भी उधर मेरे लौटने की प्रतीक्षा कर रही [संगीत] होंगी माता [संगीत] जल धन्यवाद पुत्र पुत्र गणेश तुम्हारा यहां ना होना मुझ मुझे हर क्षण कचोट रहा है अभी तुम यहां होते तो प्रतिदिन के भाती जलाभिषेक के लिए कलश भर लाते माता पुत्र [संगीत] पुत्र माता [संगीत] जल [संगीत] [संगीत] गणेश नहीं तो भी ध्यान तो उसी में ही लगा हुआ है इसीलिए ध्यान में बैठना भी कठिन हो रहा है कितने भी प्रयास कर लू पुत्र पर मैं अपने मन को समझा ही नहीं पा रही शीघ्र आ जाओ मेरे पास [संगीत] पुत्र स्वामी जिसने हमारे पिता का वध किया हम उसे उसका दंड दिए बिना जाने क्यों दे रहे [संगीत] हैं नहीं नहीं जाने देंगे उसे प्रतिशोध लेंगे प्राण दंड देंगे उसे किंतु पुत्रों जब शक्ति काम ना आए तो कपट विद्या काम करती है इसीलिए इसीलिए हमें सोच विचार कर योजना बनाकर इस बालक का सामना करना है मां मेरे पास कपट भी है और योजना भी आ हाहा वृक्ष की छाव उचित स्थान है विश्राम के लिए भी और मां के हाथों के लड्डू खाने के लिए [संगीत] भी काशी नरेश मुझे मेरी पोटली दीजिए ना नहीं नहीं विनायक जी विश्राम भोजन इसके लिए हमारे पास समय नहीं है हमें तो आगे बढ़ते रहना है वैसे भी मुझे लगता है कि हम हम मार्ग भटक चुके हैं लक्ष्य ज्ञात हो तो मार्ग अपने आप मिल जाता है चिंता मत कीजिए काशी नरेश मुझ पर विश्वास रख रखिए आपके विश्वास ने मेरे भीतर आस जगा दी किंतु मुझे इतना भी विश्वास है आपके हाथों उनके काका के मृत्यु का समाचार सुनकर रां तक और देवांतक शांत नहीं रहेंगे वह इसी ताक में रहेंगे कि कब उन्हें अवसर मिले और कब व हम पर प्रहार कर सके वह हम पर दृष्टि बनाए रखना चाहते हैं तो ऐसा करने दीजिए उन्हें उनकी दृष्टि हम पर रहेगी तो उनके प्रत्यक कार्य पर प्रभु परम ब्रह्म की दृष्टि भी तो रहेगी चिंता मुक्त होकर मुझ पर विश्वास रखिए बात विश्वास की नहीं है विनायक बस मैं अनावश्यक संकट से बचना चाहता हूं इसीलिए मेरा आपसे निवेदन है हमें चलते रहना [संगीत] चाहिए कदाचित विनायक जी ने मेरा निवेदन स्वीकार कर लिया नहीं यह तो यहां बैठ [संगीत] गए विनायक जी आप राजन जीवन का मूल मंत्र है विश्वास जैसा कि आपने कहा विश्वास है तो आस ही आस है और मैं कहता हूं विश्वास है तो संकट में भी समाधान है विश्वास है तो पत्थर में भी भगवान है और विश्वास नहीं तो भगवान साथ हो तब भी भय ही दिखाई देता है भगवान नहीं इसलिए मैं पुनः कहता हूं मुझ पर विश्वास रखिए और निश्चिंत होकर माता के हाथों के लड्डू [संगीत] खाइए अधिक विचार स्वयं पर प्रहार के समान होता है बस इतना समझ ली लीजिए जहां अविश्वास है वहां विश्वास श्वास नहीं लेता इसलिए विश्राम कीजिए और मेरे साथ कुछ लड्डू खा लीजिए माता के हाथों के लड्डू तो भगवान के प्रसाद के समान [संगीत] है देवी अब आप कुछ भोजन कर लीजिए नहीं स्वामी जब तक मैं अपने पुत्र को लड्डू नहीं खिला देती मैं ना तो कुछ खाऊंगी और ना ही कुछ पिऊंगी आपने उसके साथ लड्डू बांध कर तो भेजे और यदि उसे भूख लगेगी तो वह खा लेगा अपना नहीं तो अपने पुत्र का विचार कीजिए जो आपकी अद्भुत ममता से बंधा हुआ है यदि आप कुछ नहीं खाएगी तो पुत्र विनायक कैसे कुछ खा [संगीत] सकेगा अवश्य उस दिन विनायक के सामने रखे उन लड्डुओं का स्वाद बिल्कुल वैसा ही होगा जैसा कि मेरी माता के हाथों से बनाए मोदक का होता है मन कर रहा है मैं शीघ्र माता अदिति के निकट पहुंच और यह लड्डू खाऊं तो चलिए ना प्रभु आप चार खाएंगे तो दो मुझे भी तो मिलेंगे ना अभी नहीं मूषक जी जब तक विनायक की पूरी कथा का ज्ञान मुझे प्राप्त नहीं होता तब तक मैं नहीं जा सकता [प्रशंसा] [संगीत] किंतु ये क्या कर रहे हैं अभी तो इतने भूखे थे और अब लड्डू सामने है और अब बस उन्ह निहा रहे हैं इनके मन की थाप आना मेरे लिए तो कदा भी संभव [हंसी] [प्रशंसा] [संगीत] नहीं आप अपने पुत्र को भोजन के लिए और अधिक प्रतीक्षा मत करवाइए लीजिए कुछ भोजन कर लीजिए आपने सत्य कहा स्वामी माता और पुत्र तो एक दूसरे के प्राणवायु होते [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [हंसी] [प्रशंसा] [संगीत] हैं [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] बत [संगीत] गणेश हां हां देवी पार्वती आ आगा गणेश शीघ्र [संगीत] आएगा इतनी विचलित क्यों हो रही है आप मन को शांत कर आसन ग्रहण कीजिए किंतु देवी एक मां अपने मन को कैसे शांत कर सकती है और वो भी जब उसका पुत्र उससे दूर चला गया हो और देखिए ना देवी लक्ष्मी मुझसे कितनी बड़ी भूल हो गई गणेश जा रहा था और मैंने उसे भोजन भी नहीं दिया भूखा होगा मेरा पुत्र भूखा होगा देवी पार्वती आप व्यर्थ चिंता कर रही है यह तो आप भी जानती है कि देवी अदिति उसे कदापि भूखा नहीं रहने देंगी गणेश को देखते ही सर्वप्रथम दुलार से उसे भोजन करवाएगी वह इसलिए आप चिंता त्याग दीजिए देवी कित गणेश को क माता आदिति की हाथों का भोजन भा गया तो अपनी मां के हाथों के मोदक का स्वाद भूल गया तो तो मैं क्या करूंगी देवी देवी आप व्यर्थ चिंता कर रही है कोई कितना सावधान रहे भला अब तो मेरे पांव भी थक गए किंतु इनका मुख लड्डू खाते खाते नहीं थक रहा [संगीत] है कितना टहले गे राजन आइए कुछ लड्डू खाइए थोड़ा विश्राम कीजिए हमारी यात्रा अवश्य सफल होगी थकान तो हो रही है विश्राम भी करना चाहता हूं किंतु यहां असावधानी बरतना रुकना उचित नहीं है अभी तक तो शत्रु हम पर वार करने की योजना भी कर चुका होगा सही कहा पुत्र जगन तुमने यह थके भी है और भूखे भी तब तो अवश्य ही हमारी योजना सफल होगी मा भ्राता मानू तुम हमें मिले वरदान का प्रयोग करने के लिए तैयार रहो लीजिए राजन एक लड्डू तो खा लीजिए नहीं खाना चाहते तो आपकी इच्छा किंतु माता के हाथ के इतने स्वादिष्ट लड्डू खाने का अवसर गवा रहे हैं आप आ हाहा आनंद आ गया कितने भी खा लो मन ही नहीं भरता एक और खाता हूं विनायक आप पूछेंगे तो मैं मना नहीं करूंगा ये तो लड्डू खाए जा रहे हैं और मेरी भूख बढ़े जा रही है पर अब तो ये अब तो ये मुझसे खाने के लिए पूछ भी नहीं रहे [संगीत] हैं अब दो ही बचे हैं यह भी खा लेंगे विनायक मुझे मुझे ही मांग लेना चाहिए नहीं तो कुछ नहीं मिलेगा मुझे अभी तक शुधा तृप्त नहीं हुई शेष लड्डू भी खाता हूं और वैसे भी माता ने जो बनाया है वो तो प्रसाद है उसे कभी मना नहीं करना चाहिए अन्यथा भूखे ही रह जाना पड़ता है दो ही बचे हैं यह खाऊं या यह [संगीत] खाऊं ये कैसा स्वर है कोई आ रहा [संगीत] है शत्रु नहीं बस एक लक्कड़ हारा है बस अब इस अंतिम लड्डू को बड़ा स्वाद लेकर [संगीत] खाऊंगा रुकिए [संगीत] विनायक माता का प्रसाद है इसे अस्वीकार कैसे कर सकता हूं आपकी अनुमति हो ग्रहण कर लू मैं अवश्य राजन [संगीत] है ना स्वादिष्ट बहुत स्वादिष्ट है किंतु विनायक जी इसको खाने के बाद मेरी भूख और बढ़ गई किंतु राजन इस घने वन में जहां फल के वृक्ष भी नहीं है आपको भोजन कहां [संगीत] मिलेगा सब संभालो आपने मेरी सहायता की इसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद आप दोनों किसी लंबी यात्रा पर निकले हैं क्या अवश्य ही मार्ग भटक गए होंगे है ना यहीं समीप में मेरी कुटिया है वहां चलकर कुछ खा लीजिए और अपनी थकान भी मिटा लीजिए हम निर्धन हैं किंतु अतिथि सत्कार में किसी से पीछे नहीं हटते मेरी मां आपके लिए स्वादिष्ट भोजन बनाएगी और हम आपका ऐसा सत्कार करेंगे के आप कभी नहीं भूलेंगे [संगीत] इतने कोमल हाथ कठोर परिश्रम करने वाले लकड़हारे के तो नहीं हो सकते इन्ह तोहे देखते ही पहचान गया था यह अवश्य कोई दिव्य बालक है और आप अवश्य किसी राज्य के राजा है और राजा का सत्कार करना तो प्रजा का धर्म होता है तो मुझे और मेरे परिवार को अपनी सेवा का अवसर दीजिए हां यदि मुझे तुच्छ लकड़हारा मानकर आप मेरी कुटिया में नहीं चलना चाहते तो वह आपकी इच्छा है राजा का धर्म होता है धनी हो या निर्धन सभी प्रजा जनों को समान दृष्टि से देखना अन्यथा वो राज्य के योग्य नहीं तब तो आपका स्वागत है यही समीप है मेरी कुटिया उन झाड़ियों के पीछे मेरी मां तो आपके लिए भोजन बना ही देगी किंतु मैं और मेरा भाई मालिश में निपुण है मेरी मां विशेष औषधि भरा तेल बनाती हम दोनों भाई मिलकर आपकी ऐसी मालिश करेंगे कि आपकी आत्मा भी तर हो जाएगी आइए अब तो आपको चलना ही चाहिए मां भ्राता मनु देखिए कैसा है हमारा सौभाग्य आज हमारे य अतिथि पधारे [संगीत] हैं [संगीत] आइए आइए स्वागत है आपका आइए आइए राजिए आप लोग भूखे प्यासे होंगे ना मैं आप लोगों के लिए जल और भोजन ले आती हूं [संगीत] भोजन ग्रहण करो [संगीत] पुत्र मां यह यात्रा से बहुत थक गए हैं आप अपना विशेष औषधि वाला तेल दीजिए ना मैं और भैया मिलके मालिश करके इनकी थकावट मिटा देंगे हां हां पुत्र अभी लाती हूं अतिथि सत्कार तो हमारा परम धर्म है अब भी तेल ले आती हूं ऐसा क्यों प्रतीत हो रहा है जैसे कहीं कुछ अनुचित है बच गए यदि वो देख लेते तो हमारा भेद खुल जाता एक बार इस तेल की मालिश तो हो जाए फिर कोई चिंता नहीं अद्भुत शक्ति है मां के औषधि वाले तेल में और उतनी अद्भुत शक्ति है हमारे हाथों में कि हमारे छूते ही सारी शक्ति छूमंतर हो [संगीत] जाए भैया का अर्थ है कि थकावट दूर हो जाएगी और शक्ति वापस लौट आएगी क्यों भैया यही ना हा हा कि हमारे छूते ही सारी शक्ति छूमंतर हो जाए बस शांति ही शांति रहेगी उचित है तब तो आप सर्वप्रथम काशी नरेश की ही मालिश कर दीजिए राजन की मालिश की बात से ये ऐसे विचलित क्यों हो गए क्या है इनका भेद यह चाहते क्या हैं लीजिए यह कैसी बात कर दी आपने राजन तो महान है वह कैसे एक बालक को पीड़ित देख सकते हैं इसलिए व भी यही चाहेंगे कि सर्वप्रथम आपकी पीड़ा दूर हो दिव्य वालक और राजा की आज्ञा का पालन करना तो प्रजा का धर्म है ना इसलिए हम अपने धर्म से नहीं हटेंगे सर्वप्रथम हम आपकी मालिश करेंगे क्यों महाराज उचित है ना हां यह उचित कह रहे हैं विनायक मालिश तो पहले आपकी होनी चाहिए यह दोनों मेरी ही मालिश करने पर तुले हैं वह भी अपनी माता के द्वारा तैयार किए गए विशेष तेल से अवश्य इसमें इनका कोई ना कोई कपट है मां विशेष तेल तैयार हो गया हां बस लाई लाई मां को समय लग रहा है और इससे पहले कि मनू कुछ कहकर हमारा भेद खोल दे मुझे किसी युक्ति से इसे यहां से लेकर निकल जाना चाहिए जब तक मां तेल तैयार कर रही है आप हमें आज्ञा दीजिए कि हम आपकी और क्या सेवा कर सकते [संगीत] हैं नारियल का जल कंठ को तृप्त कर देता है उसका श्वेत गदा आ हाहाहा अत्यंत स्वादिष्ट होता है अब तो नारियल खाने की तीव्र इच्छा हो रही है बुला दीजिए ना उचित है आप यहीं विराजी हम यूं गए और यूं आए चलिए [संगीत] अतिथि बनाकर सदा के लिए विदा करने लाया था किंतु ये ये तो वास्तव में हमसे अपना सत्कार करवा रहा [संगीत] [संगीत] है यही परिणाम होगा उस बालक का लीजिए तेल तैयार हो गया किंतु मेरे पुत्र व कहां है वो दोनों विनायक के लिए नारियल लेने गए हैं बस अब इस तेल का स्पर्श हो जाने दीजिए आपको बहुत आनंद आएगा पुत्र माता किसी भी रूप में क्यों ना हो पुत्र के लिए तो वह माता ही रहती हैं इन दोनों को भी अभी जाना था ओ तो यह बात है इस घाव को छिपाने के लिए ही ये अपना मुख ढक रही हैं ये तो वही आसुरी जी हैं जिनको कुछ समय पूर्व ही मैंने घायल किया था माता आपको देखकर एक पल के लिए तो मुझे लगा जैसे मेरी ही माता मेरे सामने हो आप मेरी माता जैसी ही हैं और माता के हाथों से जो कार्य हो वो तो संतान को बहुत सुख पहुंचाता है तो आप ही मेरी मालिश कर दीजिए ना माता मैं मैं कर दूं मालिश किंतु मैं तो इस विष का प्रभाव नहीं सह सकती यह कार्य तो मेरे पुत्रों को ही करना था क्या हुआ माता आप रुक क्यों गई कर दीजिए ना मेरी मालिश मुझे बहुत अच्छा लगेगा अतिथि का आग्रह ठुकराया नहीं [संगीत] जाता रुक [संगीत] जाइए आपको माता पुकारा है तो इस विष से आपकी हानि कैसे होने [संगीत] दूं और आपने भी मुझे पुत्र कहा है तो मैं आप पर पुत्र को हानि पहुंचाने का दोष नहीं लगने दे सकता इसलिए मुझे विष लगाने का अपराध मैं आपको नहीं करने दूंगा यह क्या कह रहे हो पुत्र मैं भला विष क्यों लाऊंगी वो भी तुम्हारे लिए तुम तो मेरे पुत्र समान हो केवल पुत्र के समान कह देने मात्र से कोई आपका पुत्र नहीं हो जाता उसके लिए चाहिए वास्तविक ममता जैसे मेरी माता अदिति मुझे देती है इसलिए आपकी ममता की ढोंग को मैं भली भाति पहचान गया मैं मैं भला ममता का ढोंग क्यों करूंगी पुत्र मन में प्रतिशोध का विष और हाथ में दूषित विचारों का विष लेकर कोई किसी को को पुत्र कैसे पुकार सकता है धिक्कार है कम से कम माता शब्द का अपमान तो मत कीजिए अपने आंचल की छाव में तो माता अपनी संतान को आने वाले हर संकट से छिपा कर रखती है और आप विषम तेल छिपा रहे हैं आपका घाव देखकर मुझे आपके कपट का आभास हो गया था अनुमान था मुझे कि आप औषधि नहीं विष मिला रही है उस तेल में किंतु मैं शांत रहा क्योंकि मुझे आपने पुत्र कहकर पुकारा तो मुझे लगा आप मेरे साथ कपट नहीं कर सकेंगी क्योंकि मैंने तो सदा यही सुना है कि एक पूत कपूत हो सकता है किंतु माता कु माता कदापि नहीं हो सकती माता अपनी संतान की प्रथम गुरु होती है उसे सुपथम का ढोंग कर रही हैं उन्हें अधर्म की खाई में धकेल रही है क्या अपने पुत्रों के प्रति भी आपके के मन में कोई ममता नहीं आपके मन में कोई ममता नहीं आपके मन में कोई ममता नहीं कपूत हो सकता है किंतु माता को माता कदा भी नहीं हो सकती कात हो सकता है किंतु माता को माता कदा भी नहीं हो [संगीत] सकती धन्य है वह माता जिसने आपको अपने पुत्र रूप में पाया है उनके चरणों में मेरा वंदन तुम सारे शब्दों ने मेरे भीतर के सभी विकार रूपी विष को धो दिया है मुझे मेरे किए पर बहुत पछतावा है और सत्य है मैंने मां और ममता दोनों शब्दों का अपमान किया है मुझे क्षमा नहीं मुझे दंड दीजिए भूल कितनी भी गंभीर क्यों ना हो उसे स्वीकार कर उसे सुधारने का निर्णय लेना मोक्ष प्राप्ति का प्रथम पग है माता जय विनायक जय विनायक देवा जय विनायक जय विनायक जय विनायक देव जय विनायक जय विनायक जय विनायक देवा क्षमा क्षमा कीजिए प्रभु जाने अनजाने अपराध करती गई अब मुझे मु इसका दंड मिलना ही चाहिए प्रभु मैं इसी पल अपना जीवन आपको समर्पित करती [संगीत] हूं गजानना नमः ओ नोराय नम ॐ शर्व करय नम आपकी दिव्यता केवल बल में नहीं अपितु आपकी बुद्धि में भी है विनायक जी किंतु मेरे मन में एक शंका को शांत करने की कृपा करें प्रभु उस कुटिल कपटी आसुरी के मन में ना तो आपके प्रति श्रद्धा थी ना ही भक्ति फिर वह आपसे मुक्ति प्राप्त करने की भागी कैसे बन गई क्योंकि राजन उन्होंने एक मां के रूप में मुझे भोजन परोसा था उस पल में वह मेरे लिए माता अन्नपूर्णा का ही तो रूप थी और फिर अपने अपराध को स्वीकार कर उन्होंने स्वयं को मेरे प्रति समर्पित भी तो किया था मैं समझ गया प्रभु किंतु वो दोनों यहां लौटे यहां आकर उनके बारे में प्रश्न करें उससे पहले हमें यहां से चले जाना चाहिए राजन पाप की गागर तो जघन और मनु की भी भर चुकी है इसलिए उनका अंत अब उनकी नियती है हां प्रभु अब मुझे उनका उचित परिचय प्राप्त हुआ स्मरण हुआ कि उन्हें पहले से कोई विशेष और बड़ा वरदान प्राप्त है अद्भुत शक्ति है मां के औषधि वाले तेल में और उतनी अद्भुत शक्ति है हमारे हाथों में कि हमारे छूते ही सारी शक्ति छूमंतर हो जाए इसीलिए हम जब से यहां आए हैं वह दोनों मेरा स्पर्श करना चाहते थे जिससे वह मेरी शक्ति सोख कर अपनी शक्ति को दोगुना कर सके तो प्रभु आप उनका सामना कैसे करेंगे उसके लिए तो मुझे कुछ ऐसा चाहिए जिससे उन्हें भ्रम हो कि वो मेरा स्पर्श कर रहे हैं किंतु वास्तविकता में वह मुझे स्पर्श कर ही ना पाए ऐसा क्या हो सकता है मैं देखता हूं कदाचित मैं जो ढूंढ रहा हूं मुझे उनकी कुटिया में ही मिल जाएगा आप द्वार पर रहिए यदि वह दोनों आते दिखाई दे तो मुझे सावधान कर दीजिएगा हां [संगीत] प्रभु लक्ष्य स्पष्ट हो तो उस तक पहुंचने का मार्ग स्वतः स्पष्ट हो जाता है

No comments:

Post a Comment

ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...