[संगीत] ठीक है हनुमान मैं तुम्हें एक अवसर और दूंगा किंतु तुम यहां का अनुशासन नहीं तोड़ सकते तुम्हें अपने समय पर ही आगे आना होगा मुझ पर कृपा करने के लिए धन्यवाद [संगीत] [संगीत] देव [संगीत] हनुमान का भय उचित ही है उसका समय आते आते तो काल स्तंभ पर अंधकार छा जाएगा देवराज इंद्र पुत्र ज अब तुम भी आओ प्रणाम सूर्यदेव प्रणाम अरुण देव क्षमा करें देव किंतु मैं हनुमान के पश्चात अपनी परीक्षा देना चाहता हूं क्योंकि आज के दिन गुरुदेव की स्वीकृति मेरे लिए उतनी आवश्यक नहीं है जितनी हनुमान के लिए है और यदि आज इसे गुरुदेव नहीं मिल पाते हैं तो यह जीवन भर के लिए गुरु विहीन रह जाएगा [संगीत] प्रणाम [संगीत] देव क्षमा करें देव मैं भी हनुमान के बाद परीक्षा दूंगा क्षमा करें देव मैं भी हनुमान के बाद परीक्षा दूंगा पर दुखों को जो है हर सब के कष्ट निवारण करते हनुमत जब स्वयं है याचक अन्य हुए उनके सहायक प्राप्त होगा सूर्य का दर्शन मिला है उनको सबका समर्थन दूर किया हनुमत अवसाद पाएंगे सब पुण्य प्रसाद ये गाथा महाबली हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली हनुमान कोई बचा रक्षा करो रक्षा करो [प्रशंसा] हमारी रक्षा करो हमारी कोई बचाओ अरे कोई है बचाओ रक्षा करो हमारी पकड़ लो उसे घेर लो चारों ओर से रुको मतपत्र साहस से काम लो पकड़ लो उसे देखो तुम्हारे पिताश्री ने बताया था ना यदि हम एक बार सुमेरू पहुंच गए महाराज केसरी के छत्र छाया में हम सुरक्षित रहेंगे चलो शीघ्र चलो शीघ्र चलो पकड़ो सबको कोई बचकर भागने ना पाए अरे सुनो बालको यहां से सुमेरू जाने के लिए कौन सा पथ है चलो मित्रों भागो भागो भागो भागो [संगीत] भयभीत होकर इधर उधर मत भागो मित्रों स्मरण करो हनुमान ने क्या कहा था विपदा में भय से नहीं धैर्य और साहस से काम लेना चाहिए हमें इधर उधर भागने के स्थान पर उचित दिशा में दौड़ना चाहिए मैं एक लघु पथ जानता हूं जो उस ओर से उन चट्टानों के पीछे वाला लघु पथ ही हमें सुमेरू तक पहुंचाने का सबसे छोटा पथ है हमें उस पथ पर बढ़ना [संगीत] [संगीत] चाहिए [प्रशंसा] यह तो इसी ओर आ रहे हैं सब संकट में पड़ सकते हैं मुझे कुछ करना होगा नील यह क्या कर रहे हो राक्षसों का सामना कर ने का अर्थ है स्वयं को मृत्यु के मुंह में झोक देना मुझे अपनी मृत्यु की चिंता नहीं है अपने मित्रों की चिंता है यह मैंने हनुमान से ही सीखा है ठीक है जब सभी बालक तुम्हारे लिए अपना समय छोड़ने को तैयार हैं तो मैं तुम्हें परीक्षा देने का अवसर देता [संगीत] हूं जयंत भैया मित्रों आपने मुझे एक अवसर दिया इसके लिए मैं आपका बहुत आभारी रहूंगा आप सभी को मेरा बहुत-बहुत धन्यवाद परंतु इसके लिए तुम्हें मेरी परीक्षा में उत्तीर्ण होना [संगीत] होगा सूर्यदेव मैं किसी भी परीक्षा के लिए प्रस्तुत हूं हनुमान अब तुम्हारी परीक्षा जा अवश्य सूर्यदेव हनुमान तुम तो अनेक दिव्य वरदान के स्वामी हो नव ग्रहो को मुक्त कराने जैसा दुर कार्य कर चुके फिर तुम मुझे क्यों अपना गुरु बनाना चाहते प्राय सूर्या सर्वेशम रोगा मधि देवत आरोग्यम भास्करा छेद प्रख्या श्रुति स्मृति हे सूर्य हम पर कृपा करें हमारे पुत्र को अप शिष्य बना लीजिए हे सूर्यदेव हमारे पुत्र के गुरु बनकर उसका उद्धार करिए भले ही मुझे कोई गुरु नहीं प्राप्त हो पाए किंतु हनुमान भाग्यशाली है जो उसे ज्ञात हो गया कि आप ही उसके योग्य गुरु है सूर देव की करते स्तुति मात पिता की है यही विनती मत का करें उद्धार शिष्य रूप में करें स्वीकार ये गाथा महाबली हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली हनुमान शीघ्र उत्तर दो हनुमान तुम्हारे पास समय बहुत ही अल्प है [संगीत] लंब मत करो [संगीत] हनुमान मां ने बताया था कि किसी का जन्म स्थान कहां होगा उसके माता-पिता और गुरुदेव कौन होंगे सब विधि द्वारा पूर्ण निर्धारित होता है और मुझे पूर्ण विश्वास है कि आप ही मेरे पूर्व निर्धारित गुरु हैं और हां आपसे जो ज्ञान प्राप्त हो सकता है वह किसी अन्य से प्राप्त नहीं हो सकता और यह भी विधि द्वारा पूर्ण निर्धारित है यदि मुझे आपसे ज्ञान नहीं मिला तो मैं उनसे भी नहीं मिल पाऊंगा जिनसे मिलने के लिए मेरा जन्म हुआ है नारायण नारायण मेरा कोई अहित नहीं कर सकता फिर भी आप बारबार उस नर रूपी नारायण के बारे में सोचकर चिंतित रहती है क्यों माते चिंता क्यों नहीं होगी मुझे दशान तीनों लोगों पर रक्ष ध्वज लहराने का स्वप्न देखा है मैंने तुमसे तुम्हारे रूप में इस सं का भावी सम्राट देखा है मैंने तुम्हें महा ज्ञानी महाबली और शिव जी का महान भक्त इसलिए बनाया है जिससे कि तुम इस राक्षस कुल को सर्वोच्च शिखर पर ले जाओ किंतु व छलिया विष्णु नर अवतार लेकर तू चक्र रच रहा है क्या किया है तुमने उसे मिटाने के लिए जो मैं कर रहा हूं मा उसके पश्चात नर रूपी नारायण जहां पर भी छुपा हो उसे बहराना ही पड़ेगा मेरे रक्ष योद्धा चुनचुन कर इस संसार से बालकों को बंधी बना रहे हैं [संगीत] चलो शीघ्रता करें भाग चलते हैं यहां से गंद मादन सुश तुम इन्ह लेकर महाराज के पास जाओ मैं इन्हे देखता हूं मां अनुज को लेकर सुमेरू जाइए मुझे इन दोनों के साथ इन राक्षसों को रोकना है हां पुत्र तुम अपना ध्यान रखना हम बस जाते हैं हां मां जब तक हमारे मित्र और बाकी सब दूर ना निकल जाए हमें इन राक्षसों को रोक कर रखना [संगीत] होगा इस प्रकार तो यह बालक हमें आगे बढ़ने नहीं देंगे मुझे ही कुछ करना पड़ेगा हमारे मित्र काफी दूर निकल चुके होंगे अब हमें भी भागना होगा हां चलो चलो चलो चलो भागो कब तक भागोगे बालको हम तो यहां पर मात्र नर बालक को लेने आए थे परंतु तुमने उन्हें भगाकर अच्छा नहीं किया अब हम उसके स्थान पर तुम्ह लेकर जाएंगे और तड़पा तड़पा कर मारेंगे अब यह सारा संसार देखेगा कि हम राक्षसों के कार्यों में बाधा डालने का परिणाम क्या होता है भागो सबको और मेरे आदेश के अनुसार सारे के सारे बालकों दंडक वन के घने और हिंसक पशुओं से भरे हुए क्षेत्र में एकत्रित किया जा रहा है जहां असुरों के अतिरिक्त और कोई नहीं पहुच [संगीत] सकता उस मन में मेरे समक्ष एक एक बालक को मारा जाएगा फिर उस नर रूपी नारायण को सामने आना ही पड़ेगा और तब तब मैं उस नर रूपी नारायण को मृत्यु दंड दूंगा स्वयं अपने इही हाथों से मृत्यु दंड दूंगा मार दूंगा मैं उसे अब उस नर रूपी नारायण को मेरे हाथों से कोई नहीं बचा सकता माते कोई [संगीत] नहीं तो यही उत्तर है तुम्हारा हनुमान हां गुरुदेव [संगीत] प्रणाम सूर्यदेव इतना समय क्यों लगा रहे हैं आज का दिवस समाप्त होने वाला है कुंडली के अनुसार हनुमान के पास अब कुछ ही क् शेष है मैंने तुमसे एक प्रश्न किया तुमने ने उसके कितने उत्तर दिए हनुमान पहले गुरु निर्धारित फिर जो ज्ञान आपसे मिल सकता है किसी अन्य से नहीं तृतीय उनसे नहीं मिल पाऊंगा जिनके लिए जन्म हुआ [संगीत] है हां तीन उत्तर दिए प्रश्न एक और उत्तर तीन इसे अति कथन कहते हैं प्रश्न एक और उत्तर कहीं हनुमान ने कुछ अनुचित तो नहीं कह [संगीत] दिया हनुमान को एक प्रश्न का एक ही उत्तर देना चाहिए था क इसी को हनुमान की भूल मानकर गुरुदेव बनने से मना ना कर दे सूर्यदेव हे सूर्यदेव मेरे पुत्र का मनोरथ सफल कीजिए सूर्य लेंगे अपना निर्णय व्यथित है हनुमत हृदय अल्प समय है अब शेष शीघ्र मिले गुरु संदेश लगता है मैंने एक प्रश्न के तीन उत्तर देकर भूल कर दी अब तो सूर्यदेव कदाचित ही मुझे शिष्य के रूप में स्वीकार करेंगे सूर्य तो आस्त होने जा रहा है ना जाने क्या हुआ होगा हनुमान का सूर्यदेव ने उसे शिष्य के रूप में स्वीकार किया होगा या नहीं हनुमान जो न्यूनतम संवाद में अपनी बात को पूर्ण कर ले उसे ही योग्य और बुद्धिमान कहते हैं मित कथन भी एक कला है एक प्रश्न का एक उत्तर कैसे दिया जाता है अति संवाद से कैसे बचा जाता है यह मैं तुम्हें समझाऊ सम मैं तुम्ह समझाऊ [संगीत] अर्थात आपने मुझे शिष्य के रूप में स्वीकार कर लिया है देव हां हनुमान [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] आपको मेरा बहुत-बहुत धन्यवाद कोटि कोटि नमन कि आपने मुझे शिष्य के रूप में स्वीकार [संगीत] किया हनुमान यह तुम्हारे सत् कर्मों का ही फल है कि प्रतिकूल परिस्थितियां भी तुम्हारे अनुकूल हो [संगीत] गई हनुमान को समय रहते गुरु सूर्यदेव की स्वीकृति प्राप्त हो ही गई [संगीत] देव य जल [संगीत] कलश आओ हनुमान सूर्य से शिक्षा प्राप्त करेंगे जम प्रयोजन सिध करेंगे हनुमत का है यह लक्ष्य खंडित ना हो नियत भविष्य जगत पर करने उपकार नारायण ने लिया नर अवतार हनुमत होंगे उनके सहायक ज्ञान बनेगा पथ प्रदर्शक ये कांधा महाबली हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली [संगीत] हनुमान
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