Wednesday, 7 January 2026

हनुमान ने प्रभु राम को कौनसा उपहार दिया NirbhayWadhwa Mahabali Hanuman Episode 206 Pen Bhakti

[संगीत] [संगीत] आ [संगीत] यह स्थान सर्वदा उचित है यहां कोई विघ्न उत्पन्न करने वाला भी नहीं [संगीत] है यह गाथा महाबली हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली हनुमान मारुति विकल बनाते धाम मंगल मंदिर मूर्ति राम मंगल भवन सु मंगलकारी हनुमत के मन सदा बिहारी द्रव जगत पर हे प्रभु राम ुति राघव हे सुख धाम हनुमत के प्रभु दया करे जब भक्त हृदय आनंद भरे तब इसे देखकर राम जी अवश्य प्रसन्न हो जाएंगे मैं उन्हें अभी यहां लेकर आता [संगीत] हूं [संगीत] राम जी कहां [संगीत] होंगे प्रणाम सुमित्रा माता प्रणाम सुमित्रा माता आपको ज्ञात है राम जी कहां है हां हनुमान अपने कक्ष में मैं य उध वस्त्र के लिए लेकर जा [संगीत] रही सुमित्रा माता क्या आप यह वस्त्र मुझे देंगे मैं यह वस्त्र उन तक पहुंचा [प्रशंसा] दूंगा ठीक है हनुमान ये लो ले जाओ आपका बहुत-बहुत [संगीत] धन्यवाद [संगीत] हनुमान य क्या लाए हो यह आपके लिए अंग वस्त्र मैं लाया हूं किंतु तुम इसे क्यों लाए हो तुम अ हो हमारे मुझे आपके लिए कुछ भी करना बहुत अच्छा लगता है यह लीज अरे वाह कितना अच्छा है ना यह हनुमान लाओ यह मुझे दे [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] [संगीत] दो हनुमान कितना अच्छा लग रहा है ना मुझ [संगीत] पर राम भैया राम भैया पिताश्री आपको बाहर बुला रहे [संगीत] हैं हनुमान तुम यही विश्राम करो मैं अभी पिताश्री से मिलकर आता हूं [संगीत] हनुमान [संगीत] जी हां हनुमान तुम्हें विश्राम करना चाहिए कक्ष [संगीत] में क्या करूं मैं मैंने हिम देश में जो बनाया था राम जी के लिए विलं करने से कहीं द्रवित ना हो जाए मुझे शीघ्र ही कुछ करना होगा क्या हुआ [संगीत] हनुमान कुछ कहना है मित्र हां बहुत कुछ कहना है कुछ दिखाना भी है [संगीत] तो कहो [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] हनुमान [संगीत] विश्वर रूपम महा रूपम राम प्रभु जगदीश्वर सृष्टिकर्ता सर्व हरता जगत पालक [संगीत] प्रणाम सांस सांस में धड़के राम मन में राम भजन में राम जिव ह राम राम बस जाने नेत्र सभी को राम ही माने ऊपर राम ज्योति में राम कण कण में अंकित है राम करे प्रतीक्षा शिव जगदंबा राम मिलन में मोह विलंबा धा महाबली हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबल हनुमान सांस सांस में धड़के राम मन में राम भजन में राम जिव हा राम राम बस जाने नेत्र सभी को राम ही माने भूप राम ज्योति में राम कण कण में अरे हनुमान ये क्या हो गया राम भैया को तो पिता श्री ने यज्ञ स्थल पर बुलवाया था और यह हनुमान ना जाने उन्हें लेकर कहां जा रहे हैं हनुमान बहुत अच्छा किया तुमने अब देखना तुम्हारे माध्यम से कैसे आग लगाती हूं इन भाइयों में शस्त्र उठाने को विवश ना कर दो तो मंथरा नाम नहीं मेरा हाय हाय हाय हाय हाय यह वानर तो बड़ा ही मायावी निकला मुझे तो लगता है वोह निश्चित रूप से कोई राक्षस है देखा नहीं कैसे माया से अपनी देह का आकार बढ़ा लिया और ले उड़ा हमारे होने वाले युवराज राम को लेकर किंतु हनुमान राम भैया का कोई अहित नहीं कर सकता उनके कारण तो भैया पूर्णतया स्वस्थ हुए थे किंतु मेरे भरत वो भाग क्यों गया युवराज राम को लेकर देखा नहीं तुमने तुम्हारे नेत्रों के सामने चील की भाती झपटा मारकर ले उड़ा हमारे युगराज को कहीं मेरे सुकुमार राम के साथ कुछ बुरा ना कर दे नहीं हमारे होते हुए राम भैया का कोई कुछ भी अहित नहीं कर सकता मैं अभी धनुष और बाण लेकर आता हूं ठहरो [संगीत] लक्ष्मण ना तावला पन उचित नहीं है क्या तुम भूल गए पिताजी ने यज्ञ समाप्त होने तक हम सब सूर्यवंश को कोई भी अस्त्र शस्त्र ना उठाने की शपथ ली है [संगीत] भरत भैया उचित कह रहे हैं लखन भैया किंतु क्या हम मात्र ऐसे ही मुख दर्शक बने रहे हमें इसकी सूचना पिताश्री को देनी चाहिए वही कोई उपाय करेंगे चलिए किंतु युवराज भरत [संगीत] इस भरत के नेत्रों पर तो अपने राम भैया की भक्ति का ऐसा आवरण पड़ा हुआ है कि कुछ समझता ही नहीं है मैं मरी जा रही हूं इसे राजगद्दी पर बिठाने के लिए और यह स्वयं ही अपने मार्ग में कंटक बोर रहा है व है क्या आकाश में प्रतीत होता है कि जैसे कोई बड़ा पक्षी हो ऐसा लग रहा है जैसे किसी को उठा कर ले जा रहा ये सारे राजकुमार तो मेरी बातों में आए नहीं क्यों ना मैं इन रक्षकों को ही भड़का दूं यदि इन्होंने भी शस्त्र उठा लिया तब भी शस्त्र ना उठाने की प्रतिज्ञा भंग हो ही जाए और यज निष्फल हो जाएगा जो मुझसे हो नहीं पाया थाय अरे ले उड़ा ले उड़ा वो मायावी वानर मेरे प्रिय राम को अरे कोई रोको उसे अरे कैसे रक्षक हो तुम अपने युगराज की रक्षा करना तुम्हारा धर्म है मार गिराओ उस मायावी वानर को किंतु यज्ञ में अरे मूरख यज्ञ तो राम की कुशलता और युवराज बनने के लिए है किंतु वो वानर तो ले उड़ा हमारे युवराज को जब राम ही नहीं रहेंगे तो यज्ञ का क्या लाभ बात तो सही कह रही मंथ मैं अभी जाकर महाराज को बताता [संगीत] अरे मरक तब तक तो वो दुष्ट वानर ना जाने कहा ले उड़ेगा हमारे प्रिय युवराज को हाय रे मेरा राम हमें एक पल भी विलंब नहीं करना चाहिए चलो शस्त्रागार प्रतिज्ञा के कारण सारे अस्त्र और शस्त्र शस्त्रागार में रखवा दिए गए थे सैनिको [संगीत] चलो [संगीत] अब यह मूर्ख शस्त्र लेकर दौड़ पड़ेंगे उस वानर के पीछे और तब यज्ञ हो जाएगा निष्फल वानर ले जाओ राम को इतनी दूर ले जाओ कि लौट ना सके राम जी मैं इस कृति के लिए क्षमा प्रार्थी हूं किंतु मैं क्या करता वहां सब आपको प्रसन्न करने के लिए कुछ ना कुछ कर रहे थे मैंने भी आपको प्रसन्न करने के लिए कुछ किया है इसीलिए आपको ले जा रहा हूं यदि अधिक विलंब हो जाता तो व मिट भी सकता था इसीलिए मुझे आपको इस प्रकार लाना पड़ा हनुमान तुम इस प्रकार मुझे यहां ले आए यह तो अनुचित है ना राम जी आपको इस प्रकार लाना अनुचित था किंतु राम जी मैं क्या करता हनुमान विवश हो गया था वह सब आपको इस प्रकार घेरे रहते थे मुझे बात करने का या कुछ करने का कोई अवसर ही नहीं मिल रहा था तो मुझे आपको इस प्रकार यहां लाना पड़ा यह तुम क्या कर रहे हो हनुमान कहां लेकर जा रहे हो मुझे हम हिम पर्वत की ओर जा रहे हैं वहां एक बहुत ही सुरमय और एकांत स्थान है वहां आपको समर्पित करने के लिए हनुमान ने कुछ रचा है भक्त प्रभु की भव्य उड़ान हर्षित अंजनी सुत हनुमान कहां ना चले क्या मन में चाह जान रहे प्रभु मन की था नदी मेघ गिरी करते पार मन में भर कर भक्ति अपार प्रभु को उठाए शक्ति ये किसम भगवन सदा भक्त के बस में महाबली हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाब हनुमान सुमन जी जी महाराज यज्ञ सामग्री भंडारण पर विशेष ध्यान रख सामग्री समाप्त होने से पहले उपलब्ध हो जानी चाहिए मैं पूर्णतया सामग्री को तैयार रख रहा हूं महाराज सेवको को भेज दिया गया है या सामग्री लाने के [संगीत] लिए प्रणाम कल्याण हो राजन राजन राजकुमार राम अभी तक नहीं आए उन्हें यज्ञ में आहुति देनी है मैंने उनको बुलाया है शीघ्र [संगीत] आती पुत्र भरत तुम्हारे जेष्ठ भ्राता राम का है पिता श्री राम भैया को लेकर हनुमान ना जाने कहां उड़ गया है क्या हनुमान ले गए राम को किंतु क्यों और कहा ले गए मेरे राम को शांत राजन शांत शांत आप निहित यज्ञ कर रहे हैं आपका इस प्रकार उत्तेजित होना उचित नहीं है मत भूलिए उसी बालक के कारण राजकुमार राम का सुंदर मुखड़ा देखने को मिला है आपको जी गुरुदेव परंतु जीजा श्री उसके कृत के कारण हमारे राम को कोई क्षति पहुंची तो महाराज कुछ सैनिक शस्त्रागार का द्वार तोड़ने का प्रयास कर रहे हैं वे राजकुमार राम को बचाने के लिए अस्त्र प्राप्त करना चाहते हैं उन्हें रुकवा राजन आप निहित यज्ञ कर रहे हैं यदि किसी ने भी शस्त्र उठाया तो यह यज्ञ निष्फल हो जाएगा युद्ध जी आप शीघ्र जाइए और उन सैनिकों को रोकिए और स्मरण कोई भी सैनिक शस्त्र ना उठा पाए जैसी आपकी आा सुमन जी जी म आप एक याद कराइए कि हनुमान हमारे पुत्र राम को लेकर कहां गए हैं जी और आदेश प्रसारित कर दीजिए यदि हनुमान किसी को दिखाई दे और उस पर किसी भी प्रकार का बल प्रयोग ना किया जाए हनुमान हमारा एवं अयोध्या का अतिथि [संगीत] है जा सु करना मन का मंत्र यही है मन बड़ी प्रसन्न दिख रही हो क्या बात है अस बात आए तो जीवा कट जाए प्रसन्नता के दिन तो आपके आने वाले हैं महारानी कई कई मेरी चतुराई की लाठी चल गई तो सोने की लाठी लूंगी आपसे मुझसे पहलिया मत बुझाया करो स्पष्ट कहो क्या बात है वो वानर बड़ा ही मायावी निकला राम को लेकर उड़ [संगीत] गया [संगीत] और मैंने सैनिकों को उस वालर के विरुद्ध शस्त्र उठाने के लिए भड़का लिया है इधर शस्त्र उठे उधर यज्ञ निष्फल और मेरी चतुराई सफल असत के बात आए तो जीवा कट जाए मंत्रा मन तो कर रहा है कि तुम्हारी जीवा यही काट जब देखो सब नागिन के ती वेश उगलते ही र कभी तो कुछ अच्छा सोच लिया करो हनुमान राम को कोई हानि पहुंचाए ना पहुंचाए पर तुम मेरे राम को हानी अवश्य पहुंचाओ पता नहीं वो हनुमान राम को र कहां चला गया तुम प्रसन्न हो र कैसी स्त्री हो तुम मंथरा तुम्ह तो लज्जा आनी चाहिए ता नहीं कहा चला गया मेरा राम साल में होगा राम राम राम तु कहां हो तुम महारानी ककई को क्या हो गया इका एक राम के प्रति प्रेम उने लगा महारानी कई कई को राम की मोह से बाहर निकालना ही होगा राम जी आपको हनुमान की गंधे पर बैठकर कोई कष्ट तो नहीं हो रहा ना नहीं हनुमान मुझे तो कोई कष्ट नहीं हो रहा है किंतु मेरा भार उठाने में कहीं तुम्हें पीड़ा तो नहीं हो रही है क्लांत हो गए होग तुम जिसके लिए हृदय में प्रेम और श्रद्धा हो उसका भार तो स्वतः ही पुष्प के समान भार हीन हो जाता है राम जी मैं क्लांत नहीं हुआ हूं आपको लेकर उठने में तो हनुमान को सीम आनंद की अनुभूति हो रही है और अब वो स्थान भी निकट ही [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] है प्रभु श्रीराम जय हनुमान प्रभु श्री राम जय हनुमान

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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

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