[संगीत] हनुमान भोजन ग्रहण कर लीजिए महारानी ने भेजा है आपके [संगीत] लिए मां कहती है कि कभी भोजन का अनादर नहीं करना चाहिए किंतु मैं क्या करूं मुझे अभी भोजन ग्रहण करने की इच्छा ही नहीं [संगीत] [प्रशंसा] है ठीक है मैं यहां रख देती हूं जब इच्छा हो तब कर लीजिएगा भोजन [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] धन्यवाद सखा अब तुम देखना हनुमान ध्यान रखेगा कोई भी ऐसा कार्य नहीं करेगा जो अनुचित हो सबको प्रसन्न रखेगा हनुमान प्रणाम चिरंजीवी भाव यह देखो मैं तुम सबके लिए रक्षा सूत्र और देवी शक्ति मुद्रिका लाई [संगीत] हूं इन्हें धारण करने से बुरी शक्तियां सदैव दूर ही रहती हैं और यह रक्षा सूत्र किकवी बांधे गी अपने प्रिय भाइयों के हाथों [संगीत] में [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] यह रक्षा सूत्र और देवी शक्ति मुद्रिका कुल वशिष्ठ ने मंत्र पूरित करके दी [संगीत] है यह तुम्हारी रक्षा करेगी [संगीत] अब वो बचा हुआ रक्षा सूत्र मैं हनुमान को बांध के आती हाय हाय हाय दिखाई नहीं देता [संगीत] तुझे अरे टकरा गई इस बुढ़िया से रुक मैं उठाती हूं गिरा दिया रक्षा सूत्र [संगीत] को क्षमा करे महारानी अब क्या कहूं आपसे असत्य बात आए तो जीवा कट जाए मुझ बुढ़िया से तो इस भवन की सभी दासिया चीरती है अब इसे ही देखिए जानबूझकर टकरा गई मुझसे मैं तो देखने आई थी कि सभी राजकुमारों को और विशेष रूप से मेरे राम को रक्षा सूत्र बंध गया है कि नहीं बन गया रक्षा सत्र आज्ञा [संगीत] महारानी मैं हनुमान को यह रक्षा सूत्र बांध के आती [संगीत] हूं रक्षा सूत्र बनवा दिया उस दुष्ट ऋषि ने दशरथ के जेष्ठ पुत्र के हाथ में अब हम उसे कैसे पकड़ पाएंगे हमें लंकेश को सब बताना होगा वही कोई उपाय निकालेंगे हमें अमावस्या से पहले राम को लेकर लंका जाना [प्रशंसा] है पहले मुझे मेरे प्रभु से दूर कर दिया और अब सुमित्रा माता यह रक्षा सूत्र बांध [संगीत] गई सखा क्या प्रभु भी मेरी ही भाति व्याकुल हो रहे होंगे हनुमान के लिए किंतु सखा प्रभु को तो सारे भाई घेर के बैठे रहते हैं उन्हीं का समय है मुझे स्मरण रखने के [संगीत] लिए [संगीत] ये देखो सखा हनुमान तो बावला हो गया है हनुमान जागा हुआ है तो भी उसे स्वप्न आ रहे हैं प्रभु मेरे समक्ष खड़े [संगीत] हैं सुखा मुझे तो अभी भी प्रभु दिख रहे हैं क्या हुआ मित्र [संगीत] हनुमान यह कोई स्वप्न नहीं प्रभु प्रभु आए हैं भक्त के पास भक्त को नहीं हुआ विश्वास खुले नेत्र का सपना है क्या पास में प्रभु अपना है क्या खोए हनुमत स्वयं भुलाने राम भगत का मन पहचाने राम की माया राम ही जाने भेद कौन इनका अनुमान बलि हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली [संगीत] हनुमान प्रभु आप यहां क्यों चले आए आप मेरे दंड के लिए दुखी मत होइए [संगीत] हनुमान दंड तो हमें भी मिला है तुमसे दूर हो गए हैं हम किंतु प्रभु आप यहां क्यों आए यदि आपको यहां देखकर कोई आप पर आपत्ति उठाए यह उचित नहीं होगा हनुमान पता का आदेश तुम्हारे महल में प्रवेश ना करने का था मेरा यहां आने से रोकने का [संगीत] नहीं [संगीत] अरे [संगीत] वाह मां के बनाए हुए लड्डू इन्हे देखकर तो तदा सताने लगी है हनुमान तो आइए विराजी जय हनुमान जय रघुवर राम जय हनुमान जय रघुवर राम जय हनुमान जय रघुवर राम क्या हुआ [संगीत] हनुमान प्रभु हनुमान को भी तीव्र श्रधा सता रही है हनुमान बैठो हनुमान हनुमान बिना श्री राम लो हनुमान राम मां मार रही [संगीत] है प्रणाम महाराज प्रणाम महारानी जी पुत्र राम तुम यहां क्यों चले आए पि हनुमान हमारे अतिथि है और आपने ही तो सिखाया था कि अतिथि को वही सुविधा और सत्कार प्रदान करना चाहिए जो हम स्वयं उपभोग करते हैं बस वही देखने मैं यहां चला आया यह तो तुमने बहुत ही अच्छा किया राम मां [संगीत] मैं तो यह भी कहना चाहता था कि मेरे अयोध्या से बाहर जाने में हनुमान की भाति ही मैं भी दोषी हूं पुत्र तुम यह क्या कह रहे हो आप पिता श्री हनुमान ने किसी से अनुमति नहीं ली थी ना और मैं भी बिना किसी के अनुमति के अपने इच्छा से अयोध्या के बाहर गया था तो मैं भी तो उतना ही दुषी हूं ना जहां बना है भगत का धाम वहीं विराज रहे प्रभु राम छोड़ के आए राज भोग सुख कैसे देखे राम भगत दुख भक्त समीप रहे यह भान अतिथि मान का रखते ध्यान जैसे एक कोख से जन्म ऐसे जुड़े हैं राम हनुमन राम दोषी ना तो तुम हो और ना ही हनुमान मैंने इस विषय में कुलगुरु वशिष्ठ मंत्रि और सलाहकारों के साथ चर्चा की और उनका निष्कर्ष था कि हनुमान ने कोई अपराध किया ही नहीं [संगीत] अतः मैं हनुमान को आदेश देता हूं कि अब से हनुमान महल में मेरे पुत्रों की भाती ही [संगीत] रहेंगे यह स्थान तो बड़ा ही भयावह प्रतीत होता है युद्ध जी बताइए तो किससे मिलाने के लिए ले जा रहे हैं आप मुझे ये ये मृत है की दुर्गंध है जैसे गुरुदेव वशिष्ठ ने बताई थी कुमार [संगीत] युत कुमार युद्ध चत ये किससे मिलाने ले आए हैं आप मुझे अथरा मैं तुम्हें यहां लंकापति रावण से मिलवाने लाया हं का पति रावा [संगीत] प्रणाम लंकेश जय लं लंकेश क्या हुआ मंथरा हमें देख कर य हूं आश्चर्य चकित क्यों हो रही हो या मैं तुम्हें दैत्य राज बली की बहन [प्रशंसा] कहूं महाराज आपने तो मेरी अभिलाषा पूर्ण कर दी आपको शत शत [संगीत] नमन सार इस प्रसन्नता के अवसर पर मैं तुम दोनों को अपने हाथ से लड्डू [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] खिलाऊंगी [संगीत] अनुमान आओ [संगीत] [संगीत] जी रकेश आप ये क्या कह रहे हैं मंथरा दराज बली की बहन थी हां मधरा तुम्हारा भाई राजा बली जिससे दान में मांग लिया था सर्वस्व उस छलिया नारायण ने वामन अवतार धारण करके मरण तो है ना तुम्हारे भाई से तीनों लोग का वैभव छीनकर उसे पाताल लोक में बसने के लिए विवश कर दिया था उस नारायण [संगीत] ने उसका न्याय का प्रतिशोध लेने के लिए तुमने मंथरा के रूप में जन्म लिया है उस नारायण के नर अवतार का राजपाट छीनने के लिए तुमने ये जन्म लिया है किंतु मेरे पूर्व जन का स्मरण करा के आप मुझसे क्या चाहते हैं लंकेश मित्रता शत्रु का शत्रु भी मित्र होता है और वो वो नारायण मेरा वैरी [प्रशंसा] है आपका पराक्रम और वीरता की गाथाएं प्रसिद्ध है लंकेश किंतु जहां बल और छल नहीं चलता वहां चलती है हम जैसों की चतुराई क्या चाहते हैं आप मुझसे एक कुछ सा कार्य करना है तुम्हें जेष्ठ दशरथ पुत्र के हाथ का रक्षा कवच तोड़ना होगा तुम्हें शेष कार्य तो फिर मेरे सेवक पिशाच कर ही लेंगे और इस कार्य के लिए रावण तुम्हें इतना सोना देगा जिसकी तुमने कल्पना भी ना [संगीत] की यह भी हो सकता है कि युद्ध जीत को मैं अयोध्या का राज पाठ दे दूं परंतु व केवल कार्य सफल होने के [संगीत] [संगीत] पश्चात माता यह तो बड़े ही मधुर लड्डू है जैसे मेरी मां बनाती है ना लड्डू बिल्कुल वैसे [संगीत] ही बड़े ही बद इष्ट [संगीत] [संगीत] है उद्देश जहां बड़ा होता है वहां सोना तुच्छ होता है लंकेश यह मिट्टी के ढेले हैं मेरे लिए आपका लक्ष्य मेरा लक्ष्य आपका शत्रु मेरा शत्रु अत पिशाची मित्र हो गए हैं तो यह रक्षा [संगीत] सूत्र आपका कार्य हो जाएगा लंकेश आज रात्रि में ही मैं दशरथ पुत्र राम का रक्षा सूत्र तोड़ दूंगी और उसके कक्ष के बाहर जलती हुई मशाल संकेत होगा आपके पिशाच के लिए ले जाइए रा
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[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...
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