Tuesday, 6 January 2026

हनुमान जी को सूर्यकांत मणि क्यों चाहिए था Nirbhay Wadhwa Mahabali Hanuman Episode Pen Bhakti

[संगीत] [संगीत] स्मरण रखना हनुमान इस प्रकाश केंद्र में प्रवेश कर ने के पश्चात तुम मणि नहीं ढूंढ पाए तो इस प्रकाश की परिधि में ही भटकते रह जाओगे प्रकाश केंद्र से बाहर आने का मार्ग मणि ही प्रशस्त कर सकती है [संगीत] यह क्या इतना तीव्र प्रकाश मण तो कहीं दिखाई नहीं दे रही है पुत्र हनुमान मैं तुम्हें दिव्य चक्षु प्रदान करती हूं कितना भी प्रकाश हो या गहन अंधकार तुम्ह दिव्य चक्षु के प्रयोग से सच स्पष्ट दिखाई [संगीत] देगा मुझे देवी जी ने वरदान दिया था कि मन को केंद्रित करके पूर्ण एकाग्रता से प्रकाश के पार भी देखा जा सकता [संगीत] है यह क्या इतनी सारी मणियार ने तो बताया था कि सूर्यकांत मणि एक ही [संगीत] है यह हो सकता है कि इतनी मणियों में मात्र एक ही वास्तविक मणि हो अन्य सब उसका प्रतिरूप हो मुझे इनमें से ही उस वास्तविक मणि को ढूंढना [संगीत] होगा [संगीत] सावधान बालक यदि तुमने किसी प्रतिरूप मणि को छुआ तो प्रतिरूप मणियों की संख्या और बढ़ [संगीत] [संगीत] जाएगी [संगीत] इनकी संख्या तो और बढ़ गई इस प्रकार तो विलंब होता जाएगा मुझे शीघ्र कुछ करना होगा किंतु क्या करूं मैं [संगीत] सूर्यदेव आप तो स्वयं ही देख रहे हैं कि कैसे हनुमान की शिक्षा का समय सबकी सहायता करने और जगत को संकट से बचाने में चला गया इसलिए मेरी आपसे विनती है कि हनुमान को अपनी शिक्षा पूर्ण करने के लिए अतिरिक्त समय दिया [संगीत] जाए मात्र आज के दिवस में ही कैसे हनुमान अपनी माता को दृष्टि प्रदान करके यहां आकर अपनी शिक्षा पूर्ण कर पाएगा मेरी भी यही चिंता है [संगीत] वायदे किंतु मैं सृष्टि के नियम और समय की सीमा से बंधा हुआ ह हनुमान को मात्र आज के दिन में ही लौटकर अपनी शिक्षा को पूर्ण करना होगा इससे बड़ी चिंता तो यह है कि इतने सीमित समय में हनुमान को त्रिदेव का ज्ञान देकर हनुमान को महावीर रूप कैसे प्रदान कर पाऊंगा जिससे वह अपने जीवन के उद्देश्य में सफलता पा सके किंतु सूर्यदेव मस्तिष्क की क्षमता की भी एक सीमा होती है और हनुमान तो अभी बालक ही है इतने कम समय में त्रिदेव के संपूर्ण ज्ञान को एक साथ दे देने से हनुमान को क्षति भी पहुंच सकती है यही तो दुविधा है ज्ञान एक साथ देने से महावीर रूप में आने से पूर्वी गई हनुमान के मस्तिष्क या दे में विस्फोट ना हो जाए मैं स्वयं नहीं समझ पा रहा हूं कि इस समस्या का क्या निदान हो सकता है इसका निदान तो मात्र त्रिदेव के पास ही हो सकता है वही कोई मार्ग दिखा सकते हैं जिससे हनुमान की शिक्षा पूर्ण हो पाए सूर्यकांत मणि को साधारण मणि समझने की भूल मत करो हनुमान इसके गुणधर्म भारत के समान है इसका स्पर्श तुम्हें जला भी सकता [संगीत] है हम पर्वत देव ने कहा था कि मणि का स्पर्श मुझे जला सकता है अर्थात वास्तविक सूर्यकांत मणि का ताप सबसे अधिक होगा हां [संगीत] यह शीतल [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] है यह भी शीतल [संगीत] है इसमें कुछ ताप है किंतु यह चला नहीं [संगीत] सकती इस मणि का ताप तो इतना अधिक है कि इसके समीप जाना भी कठिन है यह हो सकती है वास्तविक सूर्यकांत [संगीत] मणि त्रिविक्रम पर्वत देव ने सत्य ही कहा था इस सूर्यकांत मणि का इतना तीव्र ताप है कि मेरी वरदानी शक्तियां भी काम नहीं आएंगी किंतु अब क्या करूं ले तो जाना ही होगा ना सूर्य कान मण तो पहचान ली तुमने हनुमान किंतु तुम्हें यह ज्ञात नहीं है पुत्र कि मण में सूर्यदेव का संपूर्ण सत्व समाहित है जैसे सूर्यदेव को एक छोटी सी डिबिया में बंद कर दिया गया हो इसलिए वरदानी शक्तिया भी इसके ताप से होने वाले कष्ट को न्यता नहीं हर पाएंगे हनुमान हे प्रभु नारायण रक्षा करना हनुमान [संगीत] की [संगीत] [संगीत] तो यह है वास्तविक मणि इसीलिए अन्य मनिया भी लुप्त हो गई [संगीत] इतना तीव्र ताप किंतु मैं मेरी मां के नेत्रों के लिए कोई भी किसी भी प्रकार सेरी मा के नेस ल मुझे आभास हो रहा है कि हनुमान कष्ट में है हे प्रभु मेरे पुत्र की पीड़ा को हरी उसकी शिक्षा का समय व्यतीत ना हो जाए प्रभु देवी अंजना मुझे पूर्ण विश्वास है हनुमान सूर्यास्त से पूर्व ही सूर्यदेव के पास पहुंचकर अपनी शिक्षा अवश्य पूर्ण कर [संगीत] लेगा तुम्हारी अद्वितीय सहन शक्ति दर्शा रही है कि तुम मणि प्राप्त करने के लिए योग्य पात्र हो किंतु अब तुम्हें हर क्षण सतर्कता के साथ आगे बढ़ना होगा [संगीत] हनुमान नहीं सह पाओगे बालक इस किताब को उचित है किंतु अब तुम ध्यान रखना हनुमान सूर्यकांत मणि से दृष्टि हटते ही तुम्हारे हाथ से कब लुप्त हो जाएगी तुम्हें ज्ञात ही नहीं होगा मेरी दृष्टि मनी पर से नहीं हटेगी पर्वत देव मैं इसे अवश्य मां तक पहुंचा दूंगा प्रणाम पर्वत [संगीत] [संगीत] देव [संगीत] इस जल से भरे पात्र को लेकर तुम्हें संपूर्ण सृष्टि की परिक्रमा करनी और यह स्मरण रहे कि परिक्रमा लगाते हुए तुम्हे मार्ग में जितने भी उल्का पिंड मिले तुम्हे उनकी गणना करनी है किंतु तुम्हें यह ध्यान रखना होगा हनुमान कि इस जल के पात्र से एक भी बूंद बाहर नहीं गिरनी चाहिए गुरुदेव ने जो जल पात्र पर दृष्टि रखते हुए उल्का पिंडों की गणना करने की शिक्षा दी [संगीत] थी वही आज काम आएगी धन्यवाद [संगीत] गुरुदेव [संगीत] [संगीत] तो यहां से है जाने का मार्ग बालक लौट आओ नहीं तो यह चलित पर्वत तुम्हें इसी प्रकार चकनाचूर कर देंगे क्षमा करें पर्वत मेरे लिए यह कार्य जीवन से भी महत्त्वपूर्ण है [संगीत] इस प्रकार तो विलंब हो जाएगा मुझे मुझे तीव्रता से यह कार्य करना [संगीत] [प्रशंसा] होगा अब आप ही कोई मार्ग सुझाए त्रिदेव कि इतने अल्प समय में हनुमान की शिक्षा पूर्ण कैसे हो सकती है आप सत्य कह रहे हैं सूर्यदेव मात्र एक दिवस में संपूर्ण ज्ञान देने से हनुमान के मस्तिष्क को क्षति पहुंच सकती [संगीत] है जिस संपूर्ण ज्ञान को आत्मसात करके आप अपने सूर्य तत्व रूप से इस संसार को आलोकित करते वही महा ज्ञान यदि हनुमान ने आत्मसात कर लिया तो हो सकता है कि एक और सूर्य में परिवर्तित हो जाए अनंत काल तक प्रज्वलित रहने वाला अग्नि का गोला बन [संगीत] जाएगा एक ब्रह्मांड में दो सूर्य अर्थात ऊर्जा के दो स्रोत परमपिता इससे तो सृष्टि का विनाश हो जाएगा होनी को कोई नहीं टाल सकता सूर्यदेव परिणाम कुछ भी हो हनुमान के जन्म के उद्देश्य को पूर्ण करने के लिए हनुमान को संपूर्ण ज्ञान प्रदान करना ही [संगीत] होगा सूर्यदेव हनुमान को शिक्षा प्रदान करके उसे संपूर्ण बनाइए और उसे उसका महावीर स्वरूप प्रदान [संगीत] कीजिए साहस श्रम लगन और दण निश्चय ही लक्ष्य प्राप्ति के साधन है हनुमान तुम्हारी मातृ भक्ति को प्रणाम है मेरा शीघ्र जाओ और अपने मां के नेत्रों की ज्योति धन्यवाद त्री विक्रम पर्वत देव आपको मेरा [संगीत] [संगीत] प्रणाम हनुमान मेरा हनुमान आ [संगीत] गया हनुमान हनुमान हनुमान हनुमान हनुमान हनुमान हनुमान हनुमान [संगीत] प्रणाम वरुण देव प्रणाम मां मां आपके आशीर्वाद से मैं इस कार्य में सफल रहा ये रही सूर्यकांत [संगीत] [प्रशंसा] मणि हनुमान अब शीघ्र अपनी मां की दृष्टि हीनता समाप्त करो पुत्र और अभिलंब सूर्य लोक लौटकर अपनी शिक्षा पूर्ण करो बहुत अच्छे हनुमान मध्यान वेला हो रही है अब शीघ्र इस मणि को अपने मां के नेत्रों के समक्ष लाओ जैसे आपकी आख्या वरुण [संगीत] देव हे दिव्य सूर्यकांत मणि मेरी मां के नेत्रों की ज्योति पुन प्रदान करें [संगीत] [संगीत] आ [संगीत] [संगीत] मा [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] हनुमान मां हनुमान मेरे [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] लाल आ

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