[संगीत] अत्यधिक देर तक बच नहीं पाओगे बानर [संगीत] कहां गया [प्रशंसा] [संगीत] वार इस बार आपका प्रहार रिक्त नहीं जाने देगा [संगीत] हनुमान तो [संगीत] [प्रशंसा] य [संगीत] [संगीत] धूर्त वानर बहुत कूद लिए तुम अब मैं तुम्हारे शरीर के छोटे छो टुकड़ी कर दूगी ऐसे तो भोर हो जाएगी हनुमान इस राक्षसी को छका करर अपना बचाव करने में समय व्यर्थ नहीं कर सकता प्रतीत होता है मुझे इसको अपना वास्तविक रूप दिखाना [संगीत] होगा [संगीत] मायावी वानर अब यह लकनी तुझे नहीं छोड़ेगी [संगीत] क्षमा कीजिएगा हनुमान के पास आपसे युद्ध करने का समय नहीं है हनुमान एक नारी पर वार कर युद्ध की मर्यादा भंग नहीं करना चाहता था इसीलिए मात्र अपना बचाव करता रहा परंतु अब आपके प्रहार का प्रतिउत्तर देना आवश्यक हो गया है [संगीत] [संगीत] आ अब हनुमान को अविलंब लंका नगरी में प्रवेश कर माता सीता को ढूंढना चाहिए जय श्री [संगीत] राम [संगीत] मुझे क्षमा कर दे महाबली हनुमान हनुमान को बल से नहीं रोक पाए तो प्रतीत होता है मुझे छल से रोकने का प्रयत्न करेंगे आप नहीं कभी श्रेष्ठ जिसको आपने अपने एक ही प्रहार से मूर्छित कर दिया हो वो आपसे छल कैसे करेगी कपी व आपने तो मुझे दर्शन देकर मुझ पर दया की है कबी व मुझे तो सदियों से आपकी प्रतीक्षा थी मेरी प्रतीक्षा हां कपी श्रेष्ठ हनुमान ताकि आप मुझे इस पाप की नगरी की सुरक्षा के दायित्व से मुक्त करें हनुमान कुछ समझा नहीं माता मैं समझाती हूं कपी श्रेष्ठ जब देव शिल्पी विश्वकर्मा जी ने इस स्वर्ण नगरी लंका का निर्माण किया था तभी मैं इसकी रक्षिका नियुक्त की की गई थी तब धनेश कुबेर इस भव्य स्वर्ण नगरी लंका के स्वामी थे परंतु इसके निर्माण के कुछ ही समय पश्चात उनके सौतेले भ्राता रावण ने कुबेर जी को युद्ध में परास्त कर उनसे लंका छीन ली नीचे उतारिए ता कुबैर उतर आपकी स्वर्ण नगरी लंका हमारी आपके अद्भुत पुष्पक विमान यहां तक के आपका [संगीत] यह सिंहासन सब कुछ मेरा हुआ लंकेश दशानन रावण [संगीत] का हम चाहते तो आपके प्राण भी ले सकते थे किंतु स तेले ही सही आप हमारे रात्र तो है यदि तुमने मुझे अपना भ्राता मानकर अनुरोध कर मेरे प्राण भी मांगते रावण तो सहर्ष में दे देता परंतु तुमने तो शत्रु बनकर मेरा सब कुछ छीन लिया और छीना हुआ अधिकार छीना हुआ पद छीनी हुई संपत्ति कभी नहीं टिकती कभी नहीं फलती स्म रहे रावण जो कुछ तुमने आज मुझसे छीना है एक दिन वह सब कुछ तुमसे भी छीन जाएगा तुम्हारे साथ तुम्हारा कुल तुम्हारा वंश ऐश्वर्य तुम्हारा सुख जीवन सब ले जाएगा कुछ भी शेष नहीं रहेगा तुम्हारे पास और उस दिन समूचे राक्षस कुल के साथ रा सर्वनाश होगा रावण सर्वनाश [संगीत] होगा हम दशानन लंकेश रावण है लंकेश दशानन रावण को कोई शते नहीं पहुंचा सकता सुन रावण को कोई शती नहीं पहुचा [संगीत] सकता उस दिन कुबेर जी तो लंका त्याग कर चले गए परंतु मैं कहां जाती मेरा तो जन्म ही लंका नगरी की रक्षा के लिए हुआ था इस भव्य और सुंदर नगरी को अपने नेत्रों से पाप और भोग विलास की नगरी बनते देखने के लिए मैं विवश थी समय बीता और दशानन और भी शक्तिशाली हो गया उसने अपने भ्राता हों के साथ अपने तप से ब्रह्मा जी को भी प्रसन्न कर लिया और मनचाहा वरदान भी पाया मेरी मृत्यु किसी भी देव दानव विद्याधर और आदि के हाथों ना हो सके और नर एवं वानर नर एवं वानर वो तो तुट है पर पिता मा उन्हें छोड़ सबसे अन्य अवध होने का वरदान चाहिए मुझे तथास्तु तब मैंने ब्रह्मा जी से य अनुरोध किया जहां दिन प्रतिदिन पाप कर्म बढ़ते जा रहे हैं उस लंका नगरी की रक्षा के दायित्व से मुझे मुक्त करें तो उन्होंने मुझे यह कहकर आश्वस्त किया पुत्री जिस दिन एक वानर लंका में गुप्त रूप से प्रवेश होगा वही दिन तुम्हारी मुक्ति का दिन हो परंतु प्रभु मैं उस वानर को पहचानू कीी कैसे उस महाबली वानर के एक ही मुश्ती प्रहार से तुम उचित हो जाओग तब समझ जाना कि तुम लंका के सुरक्षा के दायित्व से मुक्त हुई और यह भी रावण उसकी आसुरी सेना एवं लंका के अंत का समय निकट आ गया मुझे उस विशिष्ट और परम बलशाली वानर की प्रतीक्षा रहेगी प्रभु आपका आशीर्वाद पाकर मैं धन्य हुई प्रणाम ब्रह्मदेव हे वान श्रेष्ठ उसी दिन से यह लकनी आपकी प्रतीक्षा कर रही है और आज आपके दर्शन पाकर मैं कृतार्थ हुई आपकी मुक्ति का माध्यम बनकर हनुमान अति प्रसन्नता का अनुभव कर रहा है देवी परंतु हनुमान तो यहां माता सीता को उनके कष्ट से मुक्त कराने आया है मुझे अति शीघ्र ज्ञात करना है कि वह लंका में कहां स्थित है हे वानर श्रेष्ठ यह तो मुझे भी ज्ञात नहीं कि उस दुष्ट रावण ने मायावी नगरी के किस मायावी कोने में उन्हें छुपा कर रखा है परंतु मुझे विश्वास है कि आप उन्हें ढूंढने में अवश्य सफल होंगे आपका यहां आगमन इस बात का संकेत है कि अब लंका और लंका नरेश का अंत अत्यंत निकट है [संगीत] हे चामुंडा देवी जब तक आप यहां उपस्थित है मैं अश्वस्त हूं कि लंका नगरी और लंका नरेश को कोई हानि नहीं पहुंच सकती तो हनुमान को भीतर जाने की आज्ञा है ना माता अब मेरे पास आपको रोकने का अधिकार कहां शेष रहा आपने तो मुझे इस कार्य से मुक्त कर दिया है हनुमान आपने संकोच लंका नगरी में प्रवेश कर अपना कार्य पूर्ण कीजिए कपी श्रेष्ठ हनुमान मैं भी प्रभु ब्रह्मदेव के धाम जाकर उनकी सेवा में प्रस्तुत हो जाऊंगी ओम ब्रह्म देवाय नमः ओम ब्रह्म देवाय नमः ओ ब्रह्म देवाय नमः जय श्री राम ओम ब्रह्म देवाय [संगीत] नमः [संगीत] हे देव मुझे विश्वास है आप अवश्य हमारी रक्षा करें आपकी कृपा से कोई भी ऐसा व्यक्ति या जीव लंका में प्रवेश नहीं कर सकेगा जो लंका या लंका नरेश मेरे स्वामी के लिए संकट उत्पन्न कर पाए [संगीत] [संगीत] हनुमान की दृष्टि को बाधित करने वाला ये कैसा अदभुत प्रकाश [संगीत] है प्रतीत होता है आगे बढ़ने पर ही इसका रहस्य ज्ञात [संगीत] होगा [संगीत] [प्रशंसा] ये क्या हो रहा है इस प्रकार प्रकाश का प्रसार कर ये क्या संकेत देर है चामुल दई देवी सच क्या सच में कोई बिना अनुमति लिए लंका में प्रवेश करने का प्रयास कर रहा [संगीत] है यह कैसा विचित्र प्रभाव है ज्वाला [संगीत] का [संगीत] [संगीत] व [संगीत] मेरे यहां रहते लंका नगरी में प्रवेश कर तुमने मेरा मान खंडित करने का दुस्साहस कैसे किया [संगीत] यह संकेत अर्थात लंका की रक्षिका देवी चामुंडा अवश्य क्रोधित है अवश्य ही किसी ऐसे व्यक्ति ने लंका में प्रवेश करने का प्रयास किया जिससे लंका या रंगेश पर संकट आ सकता है मुझे शीघ्र ही जाकर स्वामी को सूचना देनी होगी बोलो वानर कौन हो तुम और क्या उद्देश्य है तुम्हारा यहां आने का राम राम ओ [संगीत] ओम [संगीत] हनुमान ओम नमो देव्य महा देव शिवाय सततम नमः नमः प्रकृत्य भद्राय निता प्रणता स्मता ओम नमो देव्य महादेव शिवाय सततम नमः नमः प्रकृत्य भद्राय यता प्रणता स्मता ओ रुद्राय नमो नित्या गौर्य धात्री कल्याण प्रणता वृद्ध सिद्ध कुर्मो नमो नमः ओ रुद्राय नमो नित्या गौर्य धात नमो नमः जयो सनाय चेंदु रूपण सुखाय सततम नमः ओम कल्याण प्रणता वृद्ध सिद्ध कुर्मो नमो नमः नरत भूता लक्ष्मे सर्वाते नमो नमः [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] ईश्वर हर पल धैर की परीक्षा लेते हैं व्यक्ति को संयम रखना चाहिए
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