Tuesday, 6 January 2026

हनुमान को माता सीता का प्रथम दर्शन हुआ Nirbhay Sankat Mochan Mahabali Hanuman 389 Pen Bhakti

[संगीत] प्रतीत होता है रावण की बातों से माता सीता व्याकुल हो उठी है अपना राज पाठ और भाग्य गवाकर वन वन भटकता है धरती पर सोता है तो का हो रही है कि वो कहीं जीवित भी है कि नहीं जाए हे प्रभु स्व मृग की तृष्णा इतनी भयंकर हो सकती है इसकी कल्पना तक नहीं की थी मैंने एक निर पशु की माया में आकर दूसरे हिंसक पशु के माया जाल में फस गई मैं इस मृग तृष्णा का ही परिणाम है यह जो बारबार मुझे अपने पति का अपमान सहना पड़ रहा है री बई इसी में है भल जाओ पति को स्वीकार करलो महाराज रावण को रावण ही नहीं वो तुझ राक्षस भी मेरे स्वामी के प्रति अपमान जनक भाषा का प्रयोग कर रही है जो स्वामी का नाम लेने योग्य भी नहीं है रघुकुल की प्रतिष्ठा को धूल दसरत कर दिया है मैंने उस दिन उनकी बात ना मानकर उनका अपमान क्या किया आज औरों के मुख से उनके प्रति अपमानजनक बातें सुननी पड़ रही है मुझे समस्त कुकुल अपमानित हो रहा है आज मेरे कारण कदाचित इसीलिए अब तक वो मुझे लेने नहीं आए उनकी बात ना मानने का ही दंड है [संगीत] ये सहस्त्र राक्षसों का वध करने वाले महायोद्धा रे स्वामी रावण का अंत करने अब तक क्यों नहीं आए क्या उन्हें ज्ञात नहीं कि मैं लंका में हूं मैं चाहे तो तीनों लो में ढूंढकर शीघ्र ही मुझ तक पहुंच सकते हैं फिर इतना विलंब क्यों क्या उन्होंने वैराग्य अपना लिया या मेरे वियोग में क्षत्रिय धर्म त्याग कर सन्यासी बन गए वे या क ऐसा तो नहीं कि माया रावण ने जल से मेरे स्वामी के प्राण हर लिए हो कुछ तो हुआ है जो 10 माह व्यतीत होने तक भी वे मुझे मुक्त कराने यहां नहीं आए ऐसी स्थिति में मैं स्वयं में जीवित रहकर क्या करूंगी मैं जीवित नहीं रहूंगी राम श्री राम माता सीता को ऐसा करने से रोकना होगा माता को आश्वस्त करना ही होगा किंतु किंतु किंतु कैसे कोई कोई तो युक्ति निकालनी ही होगी जिससे माता भयभीत भी ना हो और उन्हे मेरी बात पर विश्वास भी आ जाए अब तो अब तो मात्र एक ही विकल्प है मेरे पास [संगीत] रा श्री राम के बिना मेरे जीवन का कोई अर्थ नहीं अब तो यमलोक ही मेरे लिए एक मात्र स्थान बचा है जहां मैं स्वतः पहुंच सकती [प्रशंसा] [संगीत] हूं नहीं माता सीता ऐसा नहीं कर सकती ना राम राम सीते जय श्री राम राम श्री राम श्री राम जय जय राम राम श्री राम श्री राम जय जय राम रघुकुल में दशरथ आंगन में चंद्र मुखी श्री राम थे जन्म हर्षित उल्लास थी दिशाए दीप अवध प्रज्वल घर घर में राम श्री राम श्री राम जय जय राम राम श्री राम श्री राम जय जय राम स्वामी के नाम की ध्वनि यह लंका में यह कोई माया है या मेरा दिवा स्वपना या मेरा ब्रम कुछ तो अच्छा होने का आभास हो रहा है मुझे शिव धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाई जीता स्वयंवर जान की पाई वित्र वचन हेतु चले वन को प्राण जाए पर वचन ना जाए श्री राम श्री राम जय जय राम राम श्री राम श्री राम जय जय राम ये मधुर स्वर लहरी कहां से आ रही है कोई मधुर स्वर में मनोहर सा गीत गा रहा हो जैसे बहुत ही पवित्र और मन को शांत करने वाली ध्वनि है ये ऐसा प्रतीत होता है जैसे कोई मध्यम स्वर में लोरी गा रहा हो यज्ञ में करते असुर अनिष्ठा राम विनाश किए सब भ टा पंचवटी बसे वध कर डाले खर दूषण और ताट का दुष्टा श्री राम श्री राम जय जय राम राम श्री राम श्री राम जय जय [संगीत] राम [प्रशंसा] शोक राम को विधी ने लेखी रावण ने हरली बैदेही किष्किंधा सुग्रीव मिले तब राम किए वध वाली अधर्मी राम श्री राम श्री राम जय जय राम राम श्री राम श्री राम जय जय राम रामदूत बनकर एक वानर लंका पहुंचा लांघ के सागर चह दिशा मा जान की खोजी दरस दिए माता बजकर राम श्री राम श्री राम जय जय राम राम श्री राम श्री राम जय जय राम राम श्री राम श्रीम राम जय जय राम राम श्री राम श्री राम जय जय [संगीत] राम प्रणाम माता देखा स्वामी कैसा अलौकिक अद्भुत और पवित्रता से भरपूर ड़ है य आ देवेश्वरी रामदूत हनुमान की ओर देवी सीता का प्रथम बार देखना हनुमान का भी अपनी श्रद्धेय माता सीता का यह प्रथम दर्शन इन दोनों के दर्शनों का यह प्रथम क्षण श्री राम की कथा में सिद्धि र्ग के रूप में जग प्रसिद्ध होगा जो मनुष्य इस दृश्य का मन में भी अवलोकन करेगा या इसके बारे में पढ़ेगा या सुनेगा उस पर श्री राम देवी सीता और रामदूत हनुमान तीनों की अपार कृपा होगी उन्हें सिद्धि एवं बुद्धि की प्राप्ति होगी यह सत्य है या स्वप्न व गीत वाला वानर साक्षात मेरे समक्ष है यह मेरे मन की कल्पना नहीं सत्य है य प्रभु श्री राम के नाम मात्र से माता का मुखड़ा प्रफुल्लित हो उठा है जैसे घने मेघ छट जाने से सूर्यदेव चमक उठते हैं विरह के अंधकार में आशा का सूर्य आलोकित करने वाले यह वानर श्रेष्ट जो भी हो हे प्रभु बृहस्पति मेरी प्रार्थना है कि इनका कथन सर्वथा सत्य हो हे परम पिता ब्रह्मा जी इनकी कोई भी बात मिथ्या ना हो अब बस माता मेरे कथन पर विश्वास करके मेरी बात सत्य मान ले जिससे मैं को प्रभु श्री राम का संदेश देकर इनके संतप्त हृदय को सांत्वना प्रदान कर सकू इनका दुख दूर हो [प्रशंसा] जाए कौन हो तुम मेरे समक्ष आओ और अपना परिचय दो स्मरण रहे यदि मेरे साथ कोई माया या छल करने का प्रयास भी किया तो तुम्हारे लिए अहित करर [प्रशंसा] होगा [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] प्रणाम [संगीत] माता भक्त कभी अपने आराध्य से छल नहीं कर सकते माता माता जिन प्रभु श्री राम की प्राण है मैं उन श्री राम का एक तुच्छ सा दूत हूं जिसे स्वयं प्रभु श्री राम ने आपको ढूंढने के लिए भेजा [संगीत] है लंकेश दशानन रा बस बंद करो अपना यह छल पहले स्वर्ण म बनकर मुझे मोहित किया फिर सन्यासी बनकर मेरा हरण किया अभ एक कपी का वेश बनाकर मुझे चलने आए हो नहीं माता नहीं मैं तुम्हें भली भाति पहचान गई हूं मायावी वेश बदलने में तुम पूर्ण तया निपुण हो रावण अब तुम्हारी कोई भी माया मुझे नहीं छल पाएगी माता प्रभु श्री राम के भक्त को उनके शत्रु उस दुष्ट रावण के नाम से संबोधित मत करिए मेरी बात का विश्वास कीजिए माता मैं कोई अन्य नहीं प्रभु श्री राम का संदेश वाहक हूं प्रभु श्री राम का दूत हूं मैं [संगीत] माता प्रभु का कैसा अधम सेवक हूं मैं माता सीता का विश्वास भी नहीं पा सका दुष्ट रावण समझकर उन्होंने मुझसे अपना मुख फेर [संगीत] लिया कैसी दुविधा है मेरा हृदय कहता है यह वानर अवश्य रामदूत है मेरे स्वामी ने ही इसे मेरे पास भेजा है परंतु मन कहता है कि यह भी उस दुष्ट छद्म रावण का कोई छल है किस पर विश्वास करू माता विश्वास कीजिए मेरा मैं सत्य कहता हूं मैं रामदूत ही हूं मैं वानर हनुमान प्रभु श्री राम का अनन्य भक्त हूं और उनके आदेश पर मैं आपको यहां ढूंढने प्रस्तुत हुआ हूं माता एक वानर प्रभु श्री राम का दूत यह कैसे संभव है माता मैं आपको विस्तार से बताता हूं जब आपको ढूंढते हुए वलकल वस्त्र धारी नरसिंह के समान आ क्रमी दो शूरवीर धनुर्धारी प्रभु श्री राम और उनके अनुज भ्राता लक्ष्मण ने ऋषिमुख पर्वत की सीमा में प्रवेश किया तो उन्हें अपने भ्राता वाली के सहयोगी जानकर वानर राज सुग्रीव अपने जीवन को लेकर भया क्रांत हुए तब उनके निकट जाकर मुझे उन वनवासी राज पुरुषों की दिव्यता और महानता का बोध हुआ तुम्हारे दिव्य कर्ण कुंडल और कंठ हार तुम्हारी पहचान है हनुमान और मैं उन्हें अपने कांधे पर बैठाकर महाराज सुग्रीव के समीप ले गया उसी दिवस प्रभु श्री राम और महाराज सुग्रीव के मध्य एक अक्षुण मैत्री स्थापित हुई दोनों ही अपनी भारिया के वियोग से त्रस्त थे और उन्होंने एक दूसरे की सहायता करने का प्रण लिया तत्पश्चात प्रभु श्री राम ने महाराज सुग्रीव के अग्रज वाली का वध कर अपना वचन निभाया तो महाराज सुग्रीव ने आपका समाचार प्राप्त करने दसों दिशाओं में अनेक योग्य वानर योद्धाओं को भेजा मैं उन्हीं में से एक हूं माता और यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे आपके दर्शन प्राप्त हुए हे माता अब तो आपको विश्वास हो गया होगा माता कि मैं प्रभु श्री राम का ही दूत [संगीत] हूं हे कपी यदि आप सत्य कहते हैं और आप मेरे प्रभु श्री राम के दूत बनकर यहां उपस्थित हुए हैं तो आपका मंगल हो परंतु मेरा मन अभी भी अनेक शंकाओं से विचलित है उनका निवारण करने हेतु आप मेरे प्रभु श्री राम की महिमा का विस्तार से वर्णन कीजिए क्योंकि यदि आप रामदूत है तो आपको मेरे स्वामी श्री राम के सामी प्य का सुख लाभ प्राप्त हुआ होगा हां मां हां हुआ है मां और आप उनके सभी उत्तम गुणों से भली भाति परिचित हुए [संगीत] [संगीत] होंगे माता आपके इन वचनों का श्रवण हनुमान के लिए अत्यंत सुकर हैने आरा प्रभु श्री राम का गुणगान करना तो मेरा परम सौभाग्य है प्रभु श्री राम का स्मरण और उनका नाम लेने के लिए तो यह भक्त सदैव आतुर है सुनिए माता सूर्य के समान तेजस्वी है वह और चंद्रमा के समान संपूर्ण जगत को शीतलता प्रदान करने वाले भी हैं ऐसे हैं मेरे प्रभु श्री राम [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] आ रामचंद्र ज्ञानवान नम्र भाष शीलवान चंद्र जैसे मुख पे सूर्य के सन धूप [संगीत] है शंख जैसी है ग्रवा भव्य लंब है भुजा कामदेव से मनोहरी प्रभु का रूप [संगीत] है भूखे रक्षा शल वो विनय है सहनशील वो बृहस्पति के तुल्य रघुवीर ज्ञानवान है भक्त के कृपाल वो शत्रुओं के काल वो धर्मराज के समान राम न्यायवादी राम नी दीवान है वो सर्व शक्तिमान है कैसे मैं विशेषता सुनाऊं प्रभु राम की मन में लाख भाव है शब्दों का अभाव है मेरे हिय में रचे बसे है राम ही राम मेरे ही अ रचे बसे है राम ही राम है मेरे ही अ रचे बसे है राम ही राम [संगीत] है माता मैंने अपने सामर्थ्य के अनुसार प्रभु श्री राम के वर्णा चत गुणों का बखान किया अपने प्रत्येक कथन से आपको अपना विश्वास दिलाने का यथासंभव प्रयास भी किया परंतु मुझे ज्ञात है शंका की छाया जो आपके हृदय पर छाई है उसे हटाना कठिन है परंतु माता जब प्रभु श्री राम ने मुझे आपको ढूंढने भेजा था तब भी मुझे इस नाई का अनुमान था इसीलिए प्रभु श्रीराम ने मुझे एक ऐसी असाधारण अमूल्य और विशिष्ट निधि देकर भेजा है जो आपको भी प्रिय है और जिसे देखकर आप मुझ पर अवश्य विश्वास करेंगी जय श्री राम जय श्री राम यह देखिए [संगीत] माता मेरे प्रभु मेरे स्वामी श राम की मत्री [संगीत] [संगीत] को यदि आप सच्चे मन से सार्थक प्रयास करेंगे तभी आप किसी का भरोसा जीत सकते हैं

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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...