Saturday, 3 January 2026

वीरभद्र ने शंखचूड़ को चेतावनी दी MalkhanSingh Nishkarsh Vighnaharta Ganesh Episode 725 PenBhakti

नहीं यह संभव नहीं आहत नहीं हो सकता मेरा पुत्र ओम नमो भगवते वासुदेवाय कृष्णाय नमो [संगीत] [संगीत] नमः [संगीत] ये अ भी कैसे सुरक्षित है देखा प्रभु अजय हूं मैं जो मैंने कहा था वह सत्य हुआ आपके अस्त्र मुझे आहत नहीं कर सके किंतु अब जो आपने स्वीकार किया था उसके अनुसार आपके युद्ध से पीछे हटने का समय आ गया है कि आपके आठ अस्त्र का प्रयोग करने पर भी यदि मैं जीवित रहा स्वेच्छा से यह युद्ध छोड़ देंगे कुछ तो होगा कोई ऐसा सूत्र जिससे बार-बार इसकी सुरक्षा का युद्ध भूमि में गिरकर फिर उठने और पुनः शक्ति प्राप्त करने के पीछे का रहस्य ज्ञात [संगीत] होगा ऐसा वरदानी कवच है जिसके कारण मैं देवताओं के सामने अजय हू और ऐसा शक्ति कवच है मेरे पास जिसने मुझे त्रि देवों से भी सुरक्षित कर दिया है यदि इसका यह दिव्य कवच इन अस्त्रों से इसकी रक्षा कर रहा है तो वह शक्ति कवच जिसकी बात इसने की थी वही इसे फिर से खड़े होने की शक्ति दे रहा है अर्थात पिता श्री महादेव से इसका सामना हो उसके पहले हमें यह दोनों गुटिया एक साथ सुलझा होंगी [संगीत] अब समय आ गया है कि मेरे य अस्त्र इस दुष्ट के रक्त से तृप्त हो जाए प्रभु अब हमें अवसर दीजिए हम उसे अपनी वास्तविक शक्ति का परिचय देंगे पिताजी इस बार मुझे अनुमति दीजिए मैं इस दुष्ट को पुन उठने का कोई असर ही नहीं दूंगा क्या हुआ देव सेनापति निर्णय लेना कठिन हो रहा है आपके लिए कोई बात नहीं मैं आपका निर्णय सरल कर देता हूं मैं मेरी दानव और दत्य सेना आप तीनों को हमसे एक साथ युद्ध की चुनौती देते हैं आक्रमण [प्रशंसा] [प्रशंसा] दानव सेना तुम्हारा काल तुम्हारी प्रतीक्षा कर रहा है दत्य सेना री ला को र से रिक करूंगी [प्रशंसा] मैं शंख चोड़ सावधान हो जाओ क्योंकि मेरे बाण तुम्ह ऐसा आघात देंगे कि तुम पुनः उठ नहीं पाओगे [संगीत] शंख चोड़ अब तो रथ विहीन भी हो चुके हो तुम मैं कहता हूं समय है अभी भी समय है समर्पण कर दो देखो एक भी दानव सैनिक शेष नहीं [प्रशंसा] रहा तो क्या हुआ शंख चूर तो अभी शेष है और जब तक मैं जीवित हूं इस युद्ध का अंत नहीं हो सकता गुस्सा स शंख चूट अब अपने काल से भेंट करने के लिए तैयार हो जाओ शंखचूर शब्दों के नहीं शस्त्रों के वार कीजिए आपके अनेकों प्रहार के बाद भी मैं यही रहूंगा जीवित और सुरक्षित तुम्हारा यह विश्वास ही तुम्हारी सबसे बड़ी भूल है शंक चोड़ पापों की अपराधों की सभी सीमाएं लाने के पश्चात एक ही परिणाम शेष रहता है मृत्यु रब तुमने अपनी मृत्यु को आमंत्रित कर दिया है तो प्रतीक्षा किस बात की आइए आप तीनों आगे बढ़ मैं आपके सामने हूं आप तीनों के सभी अस्त्रों का एक साथ सामना करने के [प्रशंसा] लिए कहीं तीनों को एक साथ चुनौती देकर मैंने भूल तो नहीं की [संगीत] ओम नमो भगवते वासुदेवाय कृष्णाय नमो नमः उचित कहा था पुत्र शंख चूरने अजय है वो उस पर कोई जय नहीं पा सकता ये क्या कवच है इसका जो शिवजी की सेना से युद्ध करने पर भी ये सुरक्षित खड़ा है आप सबने नारायण के श्री कृष्ण रूप के एक अनन्य भक्त और उसकी सेना पर कुदृष्टि डालने का विचार भी कैसे किया प्रभु नारायण का नाम लेकर उसने सभी को अपने कवच में स्थित किया है और वीरभद्र जी के शिव शक्ति वाले अस्त्रों के प्रहार सहने का सामर्थ्य भी एकमात्र श्री हरि नारायण में ही है अर्थात हां देवर जी आपका संकेत क्या है बस इतना ही भाभी मां कि इसकी सुरक्षा करने वाला कवच कृष्ण कवच है जो मात्र एक महान कृष्ण भक्त ही धारण कर सकता है अंत करना तो दूर कोई मुझे तक भी क्षति नहीं पहुंचा सकता अमृत्व नहीं दिया तो क्या हुआ ब्रह्मदेव ने दो कवच लेकर अमर ही तो कर दिया है मुझे कवच एक तो कृष्णा कवच है किंतु दूसरा कौन सा कवच है इसके [संगीत] पास दूसरे कवच का रहस्य भी इसने जो कहा उसी में छिपा है यदि यह युद्ध इसी प्रकार चलता रहा और इसका कोई परिणाम नहीं हुआ तो मेरी तुलसी भी अनंत काल तक अन जल त्याग कर अपनी पूजा करती रहे जो मुझे स्वीकार वो दूसरा कवच निसंदेह ही शक्ति कवच है और एक पति की शक्ति का आधार उसकी पत्नी होती है और एक पति के लिए उसका सुरक्षा कवच उसकी पत्नी का पाति वृत्य होता है नारायण नारायण अंतता गणेश जी उसके दोनों वरदान का रहस्य समझ ही गए तब तो यह भी समझ गए होंगे इन दोनों कवच का कोई तोड़ [संगीत] नहीं इसके दोनों वरदान को दोनों कवच को भेदना असंभव है ये ये आप क्या कह रहे हैं देव जी उचित ही कह रहा हूं भाभी मां कृष्ण कवच का धारक जब तक स्वयं उसे ना त्यागे कोई उसे हानि नहीं पहुंचा सकता और एक पतिव्रता जो कवच अपने पति को देती है उसमें अपार शक्ति निहित होती है इसका अर्थ है वह असुर उचित ही कह रहा है अमर ना होकर भी वह अमर ही [संगीत] है महादेव अब तक तो आपको भी ज्ञात हो गया होगा कि अमर शंख चूड़ का वध तो स्वयं आप भी नहीं कर सकते यही कारण है ना कि आपने अपनी सेना को भेजा 33 कोटि देवताओं को अपने पुत्र को यहां तक कि अपनी पत्नी को भी भेजा किंतु स्वयं मुझसे युद्ध करने नहीं आए कहीं आपकी विफलता से आपका मान भंग ना हो जाए संसार में आपका महत्व बस शंखचूड़ बस इतना भी दु साहस मत करो कि मैं आप मेरा संवाद आप से नहीं स्वयं महादेव से है क्यों महादेव उचित कहा ना मैंने आपको भी शंका है ना कि आप मुझे कोई हानि नहीं पहुंचा सकेंगे कि आप मुझे कोई हानि नहीं पहुंचा सकेंगे यही सत्य भी है तो समय व्यर्थ किए बिना इस सत्य को स्वीकार कीजिए अपनी पराजय मानकर कैलाश लौट जाइए या युद्ध कीजिए मुझसे कैलाश ल जा या यु की मुझ मैं वचन देता हूं यदि आप पीछे मुड़ गए तो मैं कैलाश पर आक्रमण नहीं करूंगा कैलाशपति बने रहिए क्योंकि ख चूड़ को कैलाशपति बनने में कोई रुचि नहीं है शेष सभी मुझ पर छोड़ दीजिए मेरे राज्य में मेरे शासन में हस्तक्षेप मत कीजिए [संगीत] [संगीत] [संगीत] हो [संगीत] [संगीत] यदि पिता श्री प्रभु महादेव इस प्रकार शंखचूड़ से युद्ध करने चले गए तो इस युद्ध का कभी कोई परिणाम ही नहीं निकलेगा इसलिए इसके पूर्व कि यह युद्ध आरंभ हो मुझे जाकर शंख चूड़ के वरदान का पूरा रहस्य और उनके तोड़ का उपाय ज्ञात करना [संगीत] होगा गणेश जी य किंतु स्वयं कृष्ण अंश होने के कारण वो मुझसे युद्ध नहीं करेंगे फिर वह बीच युद्ध भूमि में क्यों आ रहे [संगीत] हैं प्रभु इन दोनों वरदान का यदि कोई तोड़ है ही नहीं तो प्रथम पूज्य श्री गणेश भला इसका क्या उपाय करेंगे और इस युद्ध का अंत कैसे होगा विघ्न हरता है श्री गणेश उनके चरण जहां भी पड़ते हैं वहां से स्वयं दूर हो जाते इसलिए आप निश्चिंत रहिए वो इस विघ्न का भी कोई उपाय अवश्य ढूंढ लेंगे और परिस्थिति के अनुसार विघ्न हरता को विघ्न कर्ता बनने में कोई विलंब नहीं होता अब विघ्नहर्ता जो भी समाधान ढूंढेंगे वही देवी तुलसी के दिव्य तुलसी पौधा बनने का अंतिम चरण होगा गणेश जी आप मेरे विघ्न कर्ता बनकर आए अवश्य है किंतु मैं अपने मार्ग पर आपको कोई विघ्न उत्पन्न नहीं करने [संगीत] [संगीत] दूंगा [संगीत] महादेव को चुनौती देना अर्थात अपने अंत को निमंत्रण देना है जिन देवी शक्तियों के बल पर य इतना आकड़ रहा है इतना अहंकार कर रहा है वही दवी शक्तिया इससे दूर हो [संगीत] जाएंगी [संगीत] [संगीत] मेरे वरदान में विघ्न डालने वाले एक मात्र विघ्न कर्ता गणेश ही हो सकते हैं और वह महादेव की ओर बढ़ते ही जा रहे हैं अर्थात उन्हें अवश्य मेरे वरदान का रहस्य ज्ञात हो गया है मुझे उन्हें महादेव तक पहुंचने से रोकना ही होगा मर के विरु आप इस यु में आपका सहायक बन अपने पिता के व का प्रतिशोध लेना चाहता हूं भस्मासुर पुत्र दुरा सत समय आ गया है ले लो अपना प्रतिशोध मैं तुम्हें अवसर दे रहा हूं जाओ और जाकर विघ्न हर्ता गणेश के मार्ग का ही विघ्न बन जाओ वो महादेव तक ना पहुंच सके मेरे वरदान का रहस्य उजागर ना होने पाए [संगीत] आश्चर्य श चूर्ण के चारों ओर य वास्प कैसा इसने फिर अपनी किसी माया का प्रयोग किया है महादेव अंततः आप युद्ध भूमि में आ ही गए युद्ध से पहले शंख चूड़ का स्वागत स्वीकार कीजिए इतिहास बदलने जा रहा हूं मैं पहला असुर हूं मैं जो महादेव को भी चुनौती देकर सुरक्षित रहेगा तो आइए महादेव युद्ध कीजिए मुझसे युद्ध कीजिए मुझसे [संगीत] य शंख चूड़ कृष्ण कवच से सुरक्षित है बिना यह ज्ञात हुए यदि प्रभु महादेव ने उस पर वार किया तो कृष्ण कवच की नारायण शक्ति का टकराव प्रभु महादेव की शक्ति से होगा यदि ऐसा हुआ तो प्रभु दोनों शक्तियों के विस्फोट का भयंकर परिणाम होगा सर्वनाश हो जाएगा सर्वनाश हो जाएगा [संगीत] इस भीषण घटना को रोकने के लिए विघ्नहर्ता गनेश जी का प्रभु महादेव को सावधान करना आवश्यक है किंतु वह है कहां [संगीत] प्रभु यह कैसा माया जाल है जो विघ्न हता का ही विघ्न बन गया प्रभु महादेव और शंख चूड़ का युद्ध आरंभ हो गया तो घोर अनिष्ट होगा इसलिए हे विघ्नहर्ता शीघ्र इस विघ्न के माया जाल को दूर [संगीत] कीजिए नहीं मात्र माया जाल नहीं है ये कोई आसुरी शक्ति है उचित समझे गणेश जी यह माया जाल नहीं मैं हूं भस्मासुर पुत्र रासत वही भस्मासुर जिसके डर से महादेव को भी छिपना पड़ा था हम हो धरातल हो या हो भूतल ये स्तंभ ये द्वार सब में मैं ही मैं हूं एकमात्र मैंसर पुत्र [संगीत] र इसका स्वर भले ही सभी स्थानों से गूंज रहा हो किंतु मुझे इसके हृदय के स्पंदन को सुनकर उस स्थान पर प्रहार करना होगा प्रभु यहां वहां जहां देखो वहां दुराद ही है अर्थात हमें ससुर के शरीर में ही बंदी बन गए हैं हां लाचार मूष तुम और तुम्हारे आराध्य श्री गणेश यहां से तब तक मुक्त नहीं होंगे जब तक यहां से बाहर त्रिलोका अधिपति शंखचूर और महादेव का युद्ध समाप्त नहीं हो जाता तुम श्री परम कृष्ण भक्त हो शमूर इसलिए मैं तुम्हे एक अवसर और देता हूं तुम इसी पर अपना हट अपनी कुबुद्धि त्याग करर धर्म के मार्ग पर आ जाओ और देवताओं का दास बन जाओ एक पराक्रमी बलवान बुद्धिमान को यह क्या सीख दे रहे हैं आप महादेव इन तुच्छ देवताओं के समक्ष उनसे कहीं अधिक श्रेष्ठ शंखचूड़ घुटने टेक दे नहीं महादेव नहीं ऐसा कदापि नहीं हो सकता यह उत्तर तो पूर्व में मैं आपके दूध को दे चुका हूं इसलिए अब समय वार्तालाप का नहीं महादेव युद्ध का है उचित है तो अपने सामर्थ्य और अपने पराक्रम का परिचय दो और मुझसे युद्ध करो शं चोड़ आरंभ में मैं तुम्हें आक्रमण करने की अनुमति देता हूं किंतु एक बार मेरे तीन पद तुम्हारी और बढ़ गए तब तक भी तुम्हारी सुबुद्धि जागृत नहीं हुई और तब भी तुम मेरा सामना करने के लिए खड़े रहे तो मेरी क्रोधाग्नि से तुम्ह भस्म होने से कोई नहीं बचा सकेगा कोई नहीं बचा सकेगा युद्ध तो आरंभ होने ही वाला है मुझे शीघ्र यहां से निकलकर पिता श्री प्रभु महादेव के निकट पहुंचना होगा दुराद मूर्खता मत करो मुक्त करो हमें अन्यथा अन्यथा आप क्या करेंगे गणेश जी मुझे आप कोई हानि नहीं पहुंचा सकेंगे अजय हूं [संगीत] मैं क्या हुआ विफल हो गए मुझे आप आहत नहीं कर [संगीत] सकेंगे क्योंकि मैं रासत इच्छा अनुसार अपना रूप बदलकर कभी वायु कभी द्रव्य और कभी ठोस आकृति में ढल सकता हूं यही वरदान प्राप्त है मुझे प्रभु इसे द्रव्य या वायु की आकृति में आने दीजिए मैं छलांग लगाकर इससे बाहर निकल जाऊ जागा और महादेव को सूचित कर दूंगा तो मैं चलो [संगीत] प्रभु मशक जी प्रभु इसने तो मुझे वापस भेक दिया मूर्खता भरे प्रयास करो तो ऐसे ही आहत होते रहोगे मक मुझसे मुक्ति पाना इतना सरल नहीं इस माया से तो शीघ्र निकलना होगा और व भी अति शीघ्र किंतु यह कैसे संभव होगा आज वो होगा जिसकी कभी किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी इतिहास रचने जा रहा है मेरा पुत्र गुदव को पराजित करना असंभव ही नहीं अकल्पनीय है तो आज मेरा पुत्र लोक अधिपति शंक चूर इसे साकार करेगा महादेव पर विजय प्राप्त करेगा महा दानव वस्त्र लीजिए महादेव संभालिए मेरे वार को यह क्या हुआ इनके त्रिनेत्र की दृष्टि मात्र से मेरे महा अस्त्र भस्म हो [संगीत] गए तुम्हारी मृत्यु अब एक पग और निकट आ गई है शंख जूर ओम नमो भगवते वासुदेवाय कृष्णाय नमो नम ओम नमो भगवते वासुदेवाय कृष्णाय नमो नमः इससे पहले की पिता श्री अगले दो पग आगे बढ़ाए मुझे इसके हृदय के स्पंदन की ओर अपना पग बढ़ाना होगा इस दुष्ट का कुछ उपाय तो करना ही होगा कितना भी बुद्धि का प्रयोग करले बुद्धि की देवता फिर भी ये बुद्धि नहीं सुलझा पाएंगे मेरी बुद्धि के सामने आपकी बुद्धि दुर्बल पड़ जाएगी क्योंकि मुझसे मुक्ति पाना असंभव [संगीत] है बड़ बोला बोले बड़ा बड़ा बकबक बारंबार सच्चाई का दम भरे झूठ का पहरेदार किंतु तुम्हें यह समझ जाना चाहिए कि झूठ की गरी खुल जाती है मेरे प्रभु के सामने तुम्हारा झूठ एक झूठ बनकर ही रह [संगीत] जाएगा प्रभु महादेव की जय प्रभु महादेव की जय प्रभु महादेव की जय प्रभु महादेव की जय प्रभु महादेव की [संगीत] जय विषत अस्त्र तुम्हारा आहवान करता [संगीत] हूं महादेव कदाचित आप इस अस्त्र को नष्ट कर सकते हैं किंतु इसके विष को [संगीत] नहीं नष्ट तो तुम्हें होना ही होगा दुराद तभी मैं प्रभु महादेव तक पहुंच सकूंगा कहा था ना मैंने आप मुझसे पार नहीं पा सकेंगे ना ही आप महादेव तक पहुच सकेंगे और ना ही लो िति शं चू का प्रहार [संगीत] रुकेगा मूर्ख असुर हलाहल जैसे भयंकर विष का पान कर सपूर्ण सृष्टि की रक्षा करने वाले नीलकंड सदाशिव को वि आहत करने की कल्पना कर रहा [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] था शम शूर अपनी मृत्यु को क्यों नहीं कटाने दे रहे हो महादेव का एक पग और बढ़ा तो तुम्हारा अंत होगा तो तुम्हारा अंत होगा तुम्हारा अंत होगा रा अं होगा जब दो महा शक्तियां परस्पर टकराती हैं तो महाविनाश का कारण बनती हैं अतः ऐसी स्थिति को उत्पन्न नहीं होने देना ही बुद्धिमत्ता है

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